नज़ारा
सुबह से लेकर रात हो गई याद करते करते l
बेहोश हो गये दर्द भरे नग़में सुनते सुनते ll
जग में परिवर्तन ही संसार का नियम है कि l
नजरिया और नज़ारा बदला चलते चलते ll
मौसम की रवानी ने कुछ इस तरह बहकाया l
चांद सितारे सो गये मेरे साथ थकते थकते ll
किसीके इन्तजार की एक उम्र होती है तो l
हौसलों ने भी जवाब दे दिया सहते सहते ll
आशिकी की हिना का रंग निखरा है कि l
सखी मोहब्बत रंग लाई है सजते सजते ll
१६-३-२०२६
बंजर भूमि
बाग की बंजर भूमि पर गुल खिला ने चला हूँ l गुलशन की दुनिया में प्यार पिला ने चला हूँ ll
खूबसूरती हुस्न की आशिकों बहका रही है l तिराडो की कायनात को हिला ने चला हूँ ll
प्यार की नदियों की जल धारा को बहाकर l
प्यासी भूमि की प्यास को बुझा ने चला हूँ ll
सुनी कोख में कलियों को खिला कर आज l
ईश का आशीर्वाद भूमि को दिला ने चला हूँ ll
चारो तरफ से बादलों से मीठी बूंदे बरसा के l
उजाड़ को पीली हरियाली से मिला ने चला हूँ ll
१७-३-२०२६
रूह का रिश्ता
हसीन निगाहों में नज़र दे के जाऊँगा l
नज़र मिलाने का हुनर दे के जाऊँगा ll
नासमझ बन रहे हो या अनजान हो l
रूह के रिश्ते की खबर दे के जाऊँगा ll
दिल से कभी भी भूला न सकोगे ऐसी l
एक नशीली प्यारी प्रहर दे के जाऊँगा ll
अपनी सोच समझ को तैयार रखना l
एक मिलन में फ़लक दे के जाऊँगा ll
शिद्दत से मोहब्बत की कशिश में जकड़ l
न मिटने वाली कसक दे के जाऊँगा ll
हर मुश्किल का सामना कर सको एसा l
हौसलों से भरा असद दे के जाऊँगा ll
मुकम्मल इश्क की लौ को जलाकर सखी l
दिल औ दिमाग पे असर दे के जाऊँगा ll
गले लगाकर ख़ुदा हाफिज कहते हुए l
फ़िर मुलाकात की तरस दे के जाऊँगा ll
ना हमसफर बने ना हमनवाज बने तो l
ना ख़त्म होनेवाला सफ़र दे के जाऊँगा ll
एतमाम रखना वादा हैं दो पल के लिए l
दूर जाते हुए समय दरस दे के जाऊँगा ll
यादें चैन और सुकून के पल छीनेगी l
टिस उठने वाला दरद दे के जाऊँगा ll
आदत बनकर सदा ही साथ रहूँगा और l
सुबहशाम की शिद्दत तड़प दे के जाऊँगा ll
१८-३-२०२६
सुकून के पल
यादें सुकून के पल में आकर सता जाती हैं l
इस तरह से यादें कौन सा सुकून पाती हैं ll
ना सुबह देखती है ना रात देखती है बस l
वो बिना इत्तला किये कभी भी आती हैं ll
सुहाने और नशीले लम्हें को दोहराकर l
निगाहों में अश्क़ों की बरसात लाती हैं ll
चैन से सोते है तब दिल का सुकून हरने l
मोहब्बत से भरे रसीले गीत गाती हैं ll
आख़री साँस तक नहीं भूलने देगी सखी l
दोस्ती भी दुश्मनी के साथ निभाती हैं ll
सुकून के पल
सुकून के पल छीन लिये यादों ने l
बहुत इंतजार करवाया है वादों ने ll
मुस्किल से आँख बंध की थी ओ l
नीद उड़ा दी ख्वाबों के जालों ने ll
हुस्न की मल्लिका को देखकर ही l
नशीली महफ़िल सज़ाई साजो ने ll
पहली मुलाकात को यादगार करने l
दिल के तार छेड़ दिये है रागों नें ll
महकती फिजाओ में गुनगुनाए हुए l
पुरानी यादें ताजा की प्यारे गानों ने ll
१९-३-२०२६
भूमिजा
भूमिजा ने राजा जनक का नाम रोशन किया l
अच्छी बेटी, पत्नि और माँ का उदाहरण दिया ll
रामजी के साथ चौदाह साल बनवास काटकर l
सही माइने में सहधर्मिणी का फर्ज अदा किया ll
एक बार भी नहीं पूछा क्यूँ सब छोड़ना होगा l
उसने बिना वाद विवाद के आशीर्वाद लिया ll
विधाता और कर्म की गति स्वीकार करके l
जो भी मिला चुपचाप से खाया और पिया ll
काँटों भरे जंगल हो या हो वन, उपवन सभी l
कठिन से कठिन रास्तों में भी साथ दिया ll
२०-३-२०२६
शैलपुत्री
हिमालय की पुत्री शैलपुत्री की अद्भुत कहानी हैं l
खूबसूरती की मल्लिका की बात ही निराली हैं ll
कई युगों की तपस्या की मनचाहा वर पाया l
भक्ति, शक्ति ओ सुंदरता से भरपूर माँ शिवांगी हैं ll
माँ दुर्गा का रूप, शिव का अंश, उमा देवी तो l
जन्मों जन्म से भगवान शिव की दिवानी हैं ll
कल्याणकारी और सदा ही आशिर्वाद बरसाती l
शिव पार्वती की युगल जोड़ी दुनिया को प्यारी हैं ll
आध्यात्मिक और सकारात्मक जुड़ाव रखती l
शिव समर्पित शैलपुत्री की सभी अदा न्यारी हैं ll
२१-३-२०२६
ठिकाना
गर दिल में ठहरने का ठिकाना बन जाए l
दो पल जिंदगी जीने का बहाना बन जाए ll
यू बारहा मुस्कुराया न करो खुले आम l
हस्ते ही दिल्लगी का निशाना बन जाए ll
जरा तमीज में रहकर बात किया करो l
बैठे बिठाएं दुश्मन ज़माना बन जाए ll
काश जीवन में ऐसे भी बात हो जाए कि l
पहली नजर में दिल दिवाना बन जाए ll
गर शिद्दत से निभाना ने का जुनून हो l
कहीं मोहब्बत ही फ़साना बन जाए ll
२२-३-२०२६
नववर्ष में लेते है प्रतिज्ञा
नववर्ष में लेते है प्रतिज्ञा की कभी हार नहीं मानेंगे l
दूसरों की खुशी में खुद की खुशी मुकम्मल जानेंगे ll
परस्पर भाईचारा, एकता और अखंडता को
कायम कर l
शांति को प्रस्थापित कर चैन सुकून की नीद
पायेगे ll
दीनोंदुखियों की सेवा ओ मानवता का करे कल्याण ,
नूतन निर्माण करेंगे तो गैरों और अपनों को
भायेंगे ll
२३-३-२०२६
गाँव और शहर
गाँव और शहर के बीच में पीस कर रह गया आदमी l
आज़के जग के पीछे मत भागों ये कह गया
आदमी ll
दुनिया की चकाचौंध देखकर सब पाने की
ख्वाईश ओ l
सुख की चाहत में बहुत से ग़म भी सह गया
आदमी ll
गैरों और अपनों को ख़ुश करने की दौड़ में
उसको l
जिसने जो कुछ दिया हसते हुए पह गया
आदमी ll
खुशियो की तलाश में ताउम्र फिरता इधर
उधर l
जिस तरफ भी ध्यान गया वहां तह गया
आदमी ll
सदा ही मुस्कुराने हुए अपनों लोगों की
ख़ातिर l
दिल से लाचार हो भावनाओ में बह गया
आदमी ll
२४-३-२०२६
सखी
डॉ दर्शिता बाबूभाई शाह
मैं भारत की नारी हूँ
मेरी अलग ही प्रतिभा है क्यूँकी
मैं भारत की नारी हूँ ll
कभी आसमान में उड़ती हूँ l
कभी खेतों में हल चलाती हूँ l
कभी मोर बनके वन में नाचती हूँ ll
मैं भारत की नारी हूँ ll
बादलों संग तैरती हूँ l
फिझाओ संग झूमती हूँ l
दरिया संग बहती हूँ ll
मैं भारत की नारी हूँ ll
लक्ष्मी बाई जैसे लड़ना जानती हूँ l
इंदिरा गांधी जैसे घर चलाती हूँ l
सुनीता विलियम्स जैसा जिगर रखती हूँ ll
मैं भारत की नारी हूँ ll
दुश्मनों से डरती नहीं देश की सुरक्षा की
ख़ातिर सोफिया कुरेशी और व्योमिका सिंग
जैसे जान ले सकती हूँ ओ जान दे सकती हूँ l
क्यूँकी
मैं भारत की नारी हूँ ll
२५-३-२०२६
मैं तेरा अभिमान हूँ
मेरे माता पिता का मान हूँ l
ख़ुदा तेरी ही संतान हूँ l
मैं तेरा अभिमान हूँ ll
कभी किसीका सिर ना झुकने दूँगा l
कभी कोई आपदा होगी आगे आऊँगा l
मैं तेरा अभिमान हूँ ll
कभी तुझे शिकायत का मौका ना दूँगा l
तेरा हर अरमान पूरा करूँगा l
मैं तेरा अभिमान हूँ ll
माथे पर कोई सिकन ना आने दूँगा l
तुम्हारें होंठों पर मुस्कान सजाऊंगा l
मैं तेरा अभिमान हूँ ll
२६-३-२०२६
तुमसा नहीं देखा
दूर जरूर है पर ये ना समझना तुम पर नज़र नहीं l
तुम्हारी किसी भी हरकतों से बिल्कुल बेखबर नहीं ll
ज़माने भर में घूमकर देखा कोई तुमसा नहीं देखा l
दिलों जान लुटाई फ़िर भी तुम्हें कोई क़दर
नहीं ll
कौन से समय का इंतजार कर रहे हों
नादान l
कोई कायनात में आकर ठहरता उम्रभर
नहीं ll
तुम तक पहुँचने के रास्तें आज़मा लिये है
हमने l
नजर में दूर तक कोई भी मुकम्मल रहगुजर
नहीं ll
मंजिल की तलाश में हो पर ऐसे दीवानो की
तरह l
मत ढूंढा करो बेबाक होकर तुम आगे डगर
नहीं ll
२७-३-२०२६
माँ
माँ की बराबरी ईश्वर भी नहीं कर सकता हैं l
माँ की जगह कोई भी नहीं भर सकता हैं ll
माँ की ममता और छत्रछाया के बगैर यहां l
संसार समन्दर कोई भी नहीं तर सकता हैं ll
माँ के आँचल की छांव में पनाह हो तो कभी l
चैन ओ सुकून कोई भी नहीं हर सकता हैं ll
स्वर्ग से भी ज्यादा सुन्दर ओ प्यार भरी l
माँ की गोद में कोई भी नहीं डर सकता हैं ll
घर माँ के होने से ही घर होता है मान लो l
बिना उसके घर कभी भी खर सकता हैं ll
२८-३-२०२६
माँ
माँ के प्यार पर बच्चों का इख़्तियार होता हैं l
बिना थकान के ताउम्र का कारोबार होता हैं ll
घर का हर कोना माँ से ही साफ सुथरा है l
माँ की अनुपस्थिति में घर ग़ुबार होता हैं ll
माँ की आँचल में कायनात की खुशियाँ तो l
माँ के बिना जीवन ही एक बेजार होता हैं ll
साक्षात ईश्वरः की उपस्थिति का सहारा l
माँ की ममता से जीवन में दुलार होता हैं ll
बच्चों के साथ उसका साया रहता है कि l
माँ के आर्शी से सफ़लता आसार होता हैं ll
२९-३-२०२६
आहिस्ता आहिस्ता
बेबफाओ के लिए अश्क बहाने से क्या मिला l
आहिस्ता आहिस्ता दिल जलाने से क्या मिला ll
वापिस आने के लिए नहीं जा रहा था तो l
जानेवाले के पीछे पीछे जाने से क्या मिला ll
दिल से माफ़ करने के बाद भी ना लौटा तो l
सारे गिले शिकवे को भुलाने से क्या मिला ll
दिलों दिमाग से निकाल दिया गया था कि l
खालीपीली यू शोर मचाने से क्या मिला ll
जिसे किसी तयख़ाने बंध कर दिया था उसी l
पुरानी यादों का बोझ उठाने से क्या मिला ll
जिस्म जिसका चट्टानों से बना हो उसी l
पत्थर को हाल ए दिल सुनाने से क्या मिला ll
जिसमे हर एक हर्फ़ दिल की सियाही लिखा l
उस प्यार भरे खतों को जलाने से क्या मिला ll
ज़माने में आकर कोई किसीसे कुछ नहीं पाता l
तो यू ना सोचा करो की ज़माने से क्या मिला ll
३० -३-२०२६
और क्या
और क्या राज छुपा मिस्त्रा ए सानी में ll
मुकम्मल मटरगश्ती ही की है जवानी में ll
पढ़ लिख लिया है जिंदगी को कहानी में l
देखो उम्रभर की मेहनत से हुई पानी में ll
लगता है जरा जरा बेमिजाज हुए है कि l
कुछ अजब ही बात कर रहे बयानी में ll
जिन्हों ने अंधेरों में छोड़ है उजालों ने l
कोई अजीब ही हरकत की दिवानी में ll
दिल को बहलाने के लिए नई राह l
बहते जा हैं अनजानी से रवानी में ll
३१-३-२०२६
सखी
डॉ दर्शिता बाबूभाई शाह