बात
बात दिल की बताने में देर कर देती हूँ में l
मोहब्बत को जताने में देर कर देती हूँ में ll
सजने सँवरने में वक हाथ से निकल जाता l
आईने को सजाने में देर कर देती हूँ में ll
है उजाला बहार भीतर तो अंधेरा इस लिए l
रोशनी को जलाने में देर कर देती हूँ में ll
दिलचस्प है नजारे चारो तरफ ही तो सखी l
मन में ताला लगाने में देर कर देती हूँ में ll
प्यार में कुछ एसा उलझ गई हूँ की होश खो ही गया है l
खुद को खुद से चुराने में देर कर देती हूँ में ll
१-३-२०२६
रंग
प्यार का रंग उतरने में वक्त तो लगता हैं ll
खुदा हाफिस कहने में वक्त तो लगता हैं ll
लौटकर कोई वापिस नहीं आता जानकर l
समय के साथ बहने में वक्त तो लगता हैं ll
दिल टूटे और आवाज़ भी ना हो तो सखी l
खामोशी से दर्द सहने में वक्त तो लगता हैं ll
कोई किसी के लिए ना जीता ना मरता है l
बात गहरी समझने में वक्त तो लगता हैं ll
दर्दो गम के महा सागर में डूबे हुए को l
उलझनों से सुलझने में वक्त तो लगता हैं ll
उम्रभर साथ साथ चलने के बदले छोड़ गये l
बीच रास्तों से पलटने में वक्त तो लगता हैं ll
जानते थे कड़ी धूप में बादल नहीं आयेंगे l
बिना बारिस गरज़ने में वक्त तो लगता हैं ll
२-३-२०२६
ऋतुराज
होली के रंगों से रंग दे पिया मोहे
होली के रंगों से रंग दे पिया मोहे
म्हारी चुनरिया कोरी ना रह जाये
ऐसे ही म्हारी होली ना बह जाये
प्यार के रंगों से रंग दे पिया मोहे
सखी साहियर के रंगो से नहीं रंगना
तेरी ही राह तकता म्हारा ही अंगना
साथ के रंगों से रंग दे पिया मोहे
ऋतुराज की महेर हुई है चारो ओर
खुशीयों के मारे नाचे है वन मोर
सात रंगों से रंग दे पिया मोहे
होली का एक साल इंतजार है किया
तुम्हारे वास्ते खुदको बदनाम है किया
साच के रंगों से रंग दे पिया मोहे
अब के ना आया तो रो दूँगी में
आज इंतजार में जान खो दूँगी में
बात के रंगों से रंग दे पिया मोहे
कान्हा तू ना रंगेगा तो कौन रंग लगायेगा
सिवा तेरे राधारानी को कौन अंग लगायेगा
पलाश के रंगों से रंग दे पिया मोहे
३-३-२०२६
सच को सच
खून के आंसूं भी रोया सच को सच कहते हुए l
अपने अपनों को खोया सच को सच कहते हुए ll
कभी भी कोई सच को स्वीकार नहीं कर सकता l
जीवन में कंटक बोया सच को सच कहते हुए ll
कायनात में जूठ का चलन इस तरह बढ़ा है कि l
सच से हाथों को धोया सच को सच कहते हुए ll
कब से मन में इतनी हड़बड़ी मची के बेचेन रहा l
ओ चैन की नींद सोया सच को सच कहते हुए ll
कई दिनों तक हौसला को जुटा देने के बाद l
आज जूठ को भिगोया सच को सच कहते हुए ll
४-३-२०२६
दाग
दिल पर लगे दाग मिटाये नहीं मिटते हैं l
जुदाई वाले दिनरात काटे नहीं कटते हैं ll
एक टीस चौबीसों घंटे चुभती रहती हैं l
रंजो गम का आलम बाटे नहीं बटते हैं ll
दिल बहलाने आये थे दोस्तों के साथ l
महफ़िल में लम्हें घटते नहीं घटते हैं ll
फ़िर नई सुबह नई शुरुआत लायेगी l
ख्वाईश अरमान पटाये नहीं पटते हैं ll
सखी मोहब्बत में पूरी शिद्दत के साथ l
हौसला ही नहीं, लुटाये नहीं लुटते हैं ll
५-३-२०२६
कहाँ जा रहे हैं हम?
कहाँ जा रहे है हम मंज़िल का पता ही नहीं l
निकल तो पड़े है रास्तों का पता भी नहीं ll
सारी उम्र रिश्ता बनाने को भागते रहे हैं कि l
अनजानी डगर पर पहचाना सा कही नहीं ll
ना कोई आने वाला है, ना इंतजार भी है l
तमन्नाएं और ख्वाइशे फ़िर से सजी नहीं ll
खूबसूरत सी रोशनी हो जाए तो भी क्या?
सखी फ़िर से छत पर जायेंगे कभी नहीं ll
थोड़ी सी खुशियों से दामन को भरने को l
बहुत बार ऊल्लू बन चुके है अभी नहीं ll
६-३-२०२६
मीठे बोल
आज प्यारे मीठे बोल में एक अफ़साना था l
अपनों को प्यार की भाषा को समझाना था ll
खुदा ने भेजा है तो वक्त जाया नहीं करना था l
कायनात में आए थे कुछ करके जाना था ll
इस जन्म में अच्छे कर्मों को जमा करके सखी l
पिछले जनमों का भी हिसाब निपटाना था ll
कोई किसीके लिए कुछ भी नहीं कर सकता है l
खुद ही खुद के दिलों दिमाग को बहलाना था ll
अपनी तरफ से कोई भी कमी न रहनी चाहिए l
अच्छी और सच्ची बातों को बारहा दुहराना था ll
खाली हाथ आया है खाली हाथ जाना था कि l
खुद के लिए चैन और सुकून को पाना था ll
धन दौलत तो कहाँ सदा रहती है टीक कर तो l
नसीब में शांति और आनंद को गुदवाना था ll
७-३-२०२६
महानगर
महानगर ने चुरा ली है जिंदगी मेरी l
यहाँ किसीने न देखी है बेबसी मेरी ll
नया मिला तो पुराना हुआ है याराना ll
चुराके दिल अब ठुकराई दोस्ती मेरी ll
जला दिया आशियाँ अपने हाथों से हमने l
खुदी को मार दिया देख सादगी मेरी ll
गली गली घुमता हूँ में ढूँढने ईश को ll
उसी को राज न आई है बंदगी मेरी ll
सखी गमों से भरी फ़िर भी जीए जाता हूँ l
है जिंदगी मुझ को प्यारी लाड़ली मेरी ll
८-३-२०२६
वो कैसी औरतें थी
वो कैसी औरतें थी जो चूला फूंकते वक्त अपनी
आँखें जला देती थी l
वो कैसी औरतें थी जो दूसरों को खुश रखने
ख़ुद को सजा देती थी ll
वो कैसी औरतें थी जो बिना कुछ कहे सब कुछ वो सुन लेती थी l
वो कैसी औरतें थी जो कम पढ़ी लिखी थी
पर मन पढ़ लेती थी ll
वो कैसी औरतें थी जो दूसरों का भला ख़ुद
से पहले सोचती थी l
वो कैसी औरतें थी जो दूसरों की खुशी में
ख़ुद ख़ुश रहती थी ll
सँभलते क्यूँ हैं?
लोग बारहा ठोकर खाकर सँभलते क्यूँ हैं?
खड्डे वाले रास्तों फ़िर से निकलते क्यूँ हैं?
एसा क्या होता है अचानक दिल से लाचार हो l
नज़रों के साथ नजरिया भी बदलते क्यूँ हैं?
कभी साथ न छोड़ेगे ताउम्र साथ जियेंगे, ये l
वादा करने के बाद ज़बान से फिसलते क्यूँ हैं?
दुनिया बदले पर फ़ितरत कभी नहीं बदलती l
चार पैसे कमाने से एकदम से उछलते क्यूँ हैं?
दीदार से चार दिन जीने का सहारा मिला कि l
आज खुशी के बदले गमसुदा टहलते क्यूँ हैं?
जिंदगी में बहुत कम खुशी नसीब होती है तो l
लोग दूसरों की खुशी इतना जलते क्यूँ हैं?
क़ायनात खूबसूरती की सराहना करेगी कि l
किसीका सामना नहीं करना तो सजते क्यूँ हैं?
सराहना- तारीफ़
८-३-२०२७
औरत हूँ तो क्या
औरत हूँ तो क्या हुआ मेरे सीने में दिल धड़कता हैं l
दुनिया की चकाचौंध देखकर मेरा दिल
बहकता हैं ll
घर की छत पर बैठकर आसमाँ में तारे नहीं
गिनना कि l
ऊंचे आकाश में बादल पर जाने को मन
मचलता हैं ll
रानी लक्ष्मी बाई की तरह देश के लिए कुछ
करना है l
देश की रक्षा को सरहद पर जाने को दिल
तड़पता हैं ll
माँ, बहन, बेटी और पत्नि के साथ साथ एक
इंसान हूँ तो l
कोलाहल उठा जिगर में कुछ करगुजर ने को
तरसता हैं ll
मन को फ़ौलाद जैसा मजबूत बना दिया है
मैंने आज l
दुनिया की ख़ातिर कुछ करने के वास्ते मन
छलकता हैं ll
९-३-२०२६
औरत हूँ तो क्या
औरत हूँ तो क्या बे - जुबान नहीं हूँ l
एक स्वतंत्र इन्सान हूँ गुलाम नहीं हूँ ll
मेरे भी मुँह में जबान दी है ईश्वर ने l
तेरे हर सवालों का जवाब नहीं हूँ ll
खुद के गुनाह की सज़ा पाना चाहती हूँ l
इंसान हूँ ईश के जैसी महान नहीं हूँ ll
अपनेआप को दुःखी तो न करुँगी कि l
किसी पर भी इतनी कुर्बान नहीं हूँ ll
मुझसे कोई चोट नहीं पाओगे की में l
शांत ठहरे जल सी हूँ उफान नहीं हूँ ll
अपना समझकर रहना दिल में कि l
हर चाहने वालों का निशान नहीं हूँ ll
पास आकार एक बार देख लो जरा l
इतनी भी लम्बी ऊँची उड़ान नहीं हूँ ll
चाहने वाले है आज़मा कर देख ले l
न माँगना दुआ में बिमार नहीं हूँ ll
बयार के साथ बहती पतंग ही हूँ l
न डरो पास आने तूफान नहीं हूँ ll
हो सके अपना समझ गले लगा लो l
छोटी सी दुनिया हूँ जहान नहीं हूँ ll
९-३-२०२६
सहारा न मिल सका
जिंदगी भर प्यारों का सहारा न मिल सका l
कायनात में कोई भी हमारा न मिल सका ll
किसी ना किसी रूप में रिश्ते को बचाने में l
ताउम्र जिम्मेदारी से किनारा न मिल सका ll
जीवन में औरों की राग रागिनी बजती रही l
दिल खोल के गाने को तराना न मिल सका ll
जो भी किया पूरी शिद्दत के साथ किया और l
तनमन लुटाया फ़िर भी सितारा न मिल सका ll
सुना है हर इंसान का अच्छा वक्त आता पर l
मुद्दतों इंतजार के बाद ज़माना न मिल सका ll
इस तरह हालात ने घेर लिया चारो ओर से कि l
कहीं इधर उधर जाने का बहाना न मिल सका ll
उम्रभर सब की राहों से कंटक निकाले उसी के l
नसीब तो देख फूलों का गुलिस्तां न मिल सका ll
१०-३-२०२६
तुम ही मेरे अपने हो
पूरी कायनात में तुम ही मेरे अपने हो ये जान लो l
तेरे सिवा कोई नहीं है मेरा अच्छी तरह मान
लो ll
दिलों दिमाग को आज ही से तैयार कर लेना
कि l
जो भी करना है तुम्हें करना पड़ेगा तो ठान
लो ll
उखड़ा हुआ बर्ताव, जल्दबाज़ी में न आना
कभी l
एक-दूसरे से मुलाकात हो तो प्यार से आन
लो ll
जग से जाते समय कुछ भी साथ नहीं ले
जाते l
मुस्कुराहट का दान दो मुस्कुराहट का दान
लो ll
अपना समझकर शिद्दत से साथ रहना है
तो l
रिस्ता को निभाने का सबक मुझसे ज्ञान
लो ll
११-३-२०२६
बहारों से पूछो
हसीं हुस्न को कैसे छुते है बहारों से पूछो जाकर l
नशे सा अह्सास मिलता है छुने का लुत्फ़
पाकर ll
हजारों मोहब्बत के अरमान हासिल हो
गये l
सुषुप्त जिन्दगी में खुशियाँ छा गई रंगत
लाकर ll
जितने दूर थे उतने ही दिलबर के पास
हो गये l
हौसलों को चैन औ सुकून मिला होगा ना
आकर ll
दिवानगी की हदे पार करके आगे निकल
चुके थे l
सारे ख्वाब एकसाथ मुकम्मल हुए बाहों में
समाकर ll
हसीन वादियों में झूम झूमकर नाचते
ख़ुशी से l
दिल अपना बहला रहे हैं प्यार के नगमें
गाकर ll
१२-३-२०२६
हो कौन बता दो
तुम्हारें आने से दिल झुम उठता है तो हो कौन बता दो l
आ ही गये हों तो कुछ बात करो प्यार से गले
लगा दो ll
मेरी जिन्दगी की उलझनों को सुलझाने आ
जाकर l
दिल की क़ायनात मोहब्बत के हसीं गुलों से
सजा दो ll
बहुत इंतजार के बाद मौका मिला है तरसाओ
ना अब l
ख्वाबों और खयालों की माया हटाके बाहों में
समा दो ll
मेल मिलाप के संजोग बार बार जिन्दगी में
नहीं आते l
चैन मिल जाएगा अपनी प्यार भरी छाया में
पनाह दो ll
माया हो या छाया अनसुलझी पहेली को सुलझा दो l
कब से पूछे जा रहे है हो कौन बता दो तुम
जवाब दो ll
१३-३-२०२६
सखी
डॉ दर्शिता बाबूभाई शाह
हो कौन बता दो
हो कौन बता दो एक बार तो बताना पड़ता हैं l
है ग़र इश्क़ तो बारहा बोलके जताना पड़ता हैं ll
मासूमियत और नजाकत को बरकरार रखके l
अंदर ओ बाहिर से खुद को सजना पड़ता हैं ll
यू खामोशी से इज़हार ए मोहब्बत नहीं होती l
तकाजा ये रश्में मोहब्बत का निभाना पड़ता हैं ll
प्यार का रंग जिन्दगी में चढ़ाना हो तो सखी l
महेंदी में नाम महबूब का लिखाना पड़ता हैं ll
अपना अपना कहते कोई अपना नहीं होता है l
दिल की गहराई से अपना बनाना पड़ता हैं ll
१३-३-२०२६
सखी
डॉ दर्शिता बाबूभाई शाह
टूटे साज़
दर्द को आदत बना लेना आसान नहीं हैं l
ज़ख्मों को गले लगा लेना आसान नहीं हैं ll
आखरी बार ख़ुदा हाफिज कहने के लिए l
रंगीन महफिल सजा लेना आसान नहीं हैं ll
हमेशा के जुदा होते वक्त कहने वाली सभी l
बात को सीने में दबा लेना आसान नहीं हैं ll
अपनों से रिश्ता बनाये रखने के वास्ते ही l
खुद को खुद में समा लेना आसान नहीं हैं ll
टूटे साज़ तो फ़िर भी जोड़ सकते है पर l
रूठे प्यार को मना लेना आसान नहीं हैं ll
१४-३-२०२६
हौसला
आज हौसलों के टूटे साज़ को जोड़ने चला हूँ l
दर्दभरे रास्ते महफिल की और मोड़ने चला हूँ ll
बस कुछ भी हो जाए ये सोचकर आगे बढ़ l
रीति,रस्मो रिवाजों की मटकी फोड़ने चला हूँ ll
चाहत की खुशी की ख़ातिर बिना मर्जी के l
आख़री बार ख़ुदा हाफ़िज़ बोलने चला हूँ ll
वक्त रुकता नहीं किसी के लिए कहीं भी l
नहीं रुकनेवाले को कैसे रोकने चला हूँ ll
खुद को कैसे हालात के साथ ढाल दूँ कि l
दूर दूर खुली फिजाओ में सोचने चला हूँ ll
१५-३-२०२६