पागल - भाग 45 Kamini Trivedi द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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पागल - भाग 45

भाग–४५

अगली सुबह ,,
मिहिर और जीजू उस बताए एड्रेस के लिए होटल से निकलते है । जैसे ही वो लोग उस घर से 500 मीटर के करीब पहुंचे । जीजू को एक अनजाने नंबर से कॉल आया।

"हेलो"
"हेलो ,साहेब , मैं वो चाय वाला , आपने जो मैडम का चित्र हमको दिखाया था ना , ऊ मैडम अभी हमरी छोटी सी लारी पर दुबारा चाय पीने आई है । आप जल्दी से आ जाइए हम उनको किसी तरह अटका कर रखने का कोशिश करेंगे साहेब, मगर जल्दी आइएगा।"
"ओके ओके"
"मिहिर जल्दी चल चाय की टपरी फटाफट"
"क्या हुआ जीजू"
"कीर्ति वही है अभी जल्दी चल"
दोनों तेजी से वहां पहुंचते है मगर चाय वाला गाल पर हाथ रखे मुंह लटकाए बैठा होता है।

"क्या हुआ भाई कहां है कीर्ति?"
"साहेब हमने ऊका रोकने का बहुत प्रयास किया, मैडम बहुत गुस्से वाली है । आपके चक्कर में हमरा गाल लाल हुई गवा।एक चांटा ही मार गई हमे, देखिए कैसा गाल लाल कर दिए। " कहते हुए उसने हाथ हटाया तो उसके गाल पर दो उंगलियों के निशान गहरे दिख रहे थे । जीजू का मुंह बिगड़ गया और उनका अनायास ही हाथ अपने गाल पर चला गया।
"अच्छा कहां गई है पता है?"
"वो गई तो बाजार को है पर कछु पता नहीं है, देखो साहेब एक फ्री की राय दे रहे है , अगर मैडम आपसे नाराज है ना तो ना जाओ मनाने,, बहुत ताकत है मैडम में बड़ा जोर का लगा हमको,, आपको अगर पड़ गया ना तो उठ नही पाएंगे । वो का है हम ने तो गांव का पानी पिया है ना तो आपसे तो ज्यादा ताकत है हम में" वह गर्व से छाती चौड़ी करते हुए बोला ।

"ह,,, हां,, अपनी राय अपने पास रख , वो हमें नहीं मारेगी। उसकी गाड़ी का नंबर देखा था तूने ? कौनसी गाड़ी थी? " हिचकिचाते हुए जीजू ने पूछा ।
"गाड़ी का नाम तो नही पता , लाल रंग की कार थी, नंबर ####"
जीजू ने नंबर नोट किया और वो लोग वहां से बाजार की और निकले ।

"मिहिर घर चलते है यार ये राजीव के चक्कर में मार वार ना पड़ जाए कही। मेरी लाइफ में आज तक मैंने किसी लड़की का चांटा नही खाया यार और मैं अपनी इज्जत नहीं गंवाना चाहता " जीजू बड़े टेंशन में थे।
"अरे कल तो कह रहे थे राजीव से ज्यादा इंपोर्टेंट कुछ नही , अब इज्जत कहां से इंपोर्टेंट हो गई"
"देख राजीव , के लिए मीटिंग छोड़ सकता हूं मैं मगर लड़की की मार नही खाऊंगा " उन्होंने गाल पर हाथ रखते हुए कहा ।
"जीजू , कैसी बातें कर रहे हो आप , शांत हो जाओ। ऐसा कुछ नही होगा " मिहिर ने उन्हे समझाया।

मेरी होटल मार्केट में ही थी । जिसमे कल वो खाना खाने आए थे । वो लोग जैसे ही मार्केट में आए । उन्होंने होटल के बाहर मेरी गाड़ी खड़ी देखी।

"अबे तेरी कल इसी होटल में तो खाया था, ये यहां क्या कर रही होगी?" जीजू बोले ।

"अंदर चल कर पूछते है।"
वो लोग अंदर आए । उन्हे देख कर अंजली उन्हे पहचान गई और मुझे कॉल किया , मैडम वो लोग फिर आ गए।
"अंजली देखो वो लोग क्या कहते है , बस किसी भी तरह उन्हे मेरे बारे में ना पता चले ।"
"ओके मैडम"
जीजू ने रिसेप्शन पर आकर पूछा "मैडम वो बाहर लाल गाड़ी खड़ी है ना हमें उनके ऑनर से मिलना है।"
"सर यहां पर कितने लोग आते जाते है । हमे क्या पता वो लाल गाड़ी किसकी है"
"मैडम इस वक्त कोई खाना खाने तो आया नही होगा । आपकी होटल में क्या रहने की व्यवस्था भी है?"
"नहीं सर ये बस रेस्टोरेंट है । देर इस नो रूम फॉर स्टे"
"ओके"
"तो अब क्या करे जीजू"
"हम यही बाहर कार के आसपास खड़े रहते है , वो आयेगी तो सही ना "
"हां कहते हुए दोनों बाहर निकल गए।"
"मैडम वो दोनों आपकी कार के पास ही खड़े रहने का बोल रहे है ।"
"थोड़ी देर में चले जायेंगे । वो जाए तो मुझे अपडेट करना ।"
"ओके मैम"
क्या करेंगे मिहिर और जीजू कब तक खड़े रहेंगे और क्या कीर्ति से आज मुलाकात होगी उनकी?"
जानेंगे आगे कहानी में ,