कसक Suresh Chaudhary द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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कसक

मकान के ठीक सामने बडा सा टेंट और दावत में शामिल हजारों आदमी,मन भावन भोजन। अचानक घर के अंदर आ गया मैं।
,, बेटे इतना बडा इंतजाम करने की क्या आवश्यकता थी,,। मां ने मेरे पास आते हुए कहा
,, मां, छोटे भाई की शादी रोज रोज नही होती,,।
,, लेकिन बेटे इतना खर्च,,।
,, मां, मैं नही चाहता कि छोटे को यह लगे कि अगर पिता जी जिंदा होते तो,,। कहते कहते पलके भीग गई मेरी
दावत का और शादी का काम ठीक ठाक निपट गया, नई दुल्हन के आने पर मैं और मेरी पत्नी सहित मां भी खुश।
धीरे धीरे समय बीतने लगा, भाई बिजनेस में लग गया।
,, चलो पिता जी के बाद एक जिम्मेदारी तो पूरी हो गई,,।
लेकिन तभी न जाने किसकी नजर लग गई मेरे घर को। मेरी पत्नी और छोटी बहू में अक्सर तना तनी रहने लगीं।
मैने दोनों को बैठा कर कह दिया कि एक टाईम का खाना मेरी पत्नी बनायेगी और एक टाईम का छोटी बहू। लेकिन यह अधिक दिनों तक नहीं चला।
जो टाईम छोटी बहू का होता खाना बनाने के लिए, ठीक उसी टाईम छोटी बहू को दौरा पड़ जाता, और खाना बनने के बाद ठीक। घर में अक्सर लड़ाई झगड़ा। मैने आराम से छोटे भाई को कहा,, अब हमें अलग अलग हो जाना चाहिए,,।
,, जैसी तुम्हारी मर्जी,,। छोटे भाई ने सीमित शब्दों में जवाब दिया। दोनों भाइयों की सहमति से घर की और बाहर की सभी चीजों को दो हिस्सों में बांट लिया गया। मां मेरे हिस्से में आ गई या यूं कहिए कि मां ने मेरे साथ रहने के लिए कहा।
लेकिन घर में फिर भी शांति न हुई। एक दिन तो हद ही हो गई जब छोटी बहु ने मुझ पर इल्जाम लगा दिया कि यह आदमी मुझे गंदी नजरों से देखता है।
,, अब यह घर हमारे रहने लायक नहीं रहा,,। अपनी पत्नी को कहा
मेरी पत्नी ने भी मेरे शब्दों के साथ सहमति जताई। और मैं पत्नी, बच्चों सहित मां को लेकर किराए के मकान में आ गए लेकिन मैं अंदर ही अंदर टूट सा गया।
मकान छोड़ते समय मुझे ऐसा लगा कि जैसे शरीर का एक हिस्सा मेरे शरीर से अलग हो गया, क्योंकि जब पिता जी का स्वर्गवास हुआ था छोटा भाई केवल दस साल का था। छोटे भाई को कभी पिता जी की कमी महसूस नहीं होने दी। दिल के अंदर एक कसक सी उठी, शायद यहीं कसक छोटे भाई के दिल के अंदर उठी और मेरे घर को छोड़ने के साथ ही छोटे भाई ने चारपाई पकड़ ली।
मैं किराए के मकान से अपने नए मकान में शिफ्ट हो गया, लेकिन दिल के अंदर छोटी बहू का व्यवहार कचोटता रहा। मैं चाह कर भी छोटे भाई के पास नही जा सका, जाते ही जली कटी बाते सुनने को मिलती। धीरे धीरे छोटे भाई को बड़ी बीमारी ने जकड़ लिया, चाह कर भी अपने दिल की बात छोटा भाई मुझे न कह सका और एक दिन वह इस दुनियां को छोड़कर हमेशा के लिए चला गया। मैं और मेरी अंतरात्मा चीख चीख कर रोने लगी। इसके लिए मैं किसको दोष दूं, अपने आप को या छोटे भाई की बहु को या फिर वक्त को।