ऑफ्टर लव - 6 Mr Rishi द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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ऑफ्टर लव - 6

श्रद्धा रेड्डी होकर आईने के पास खुदको देखती हुई कहती है"हाय, श्रद्धा तू कितनी हॉट लग रही है,आज तो करण तुझे देखता ही रह जायेगा।".... तभी करण का कॉल आता है, श्रद्धा कॉल जैसे ही उठाती है उधर से करण कहता है"hello my dear love जरा अपनी खिड़की से बाहर तो देखो।




" वैसे क्यों?"श्रद्धा करण से पूछती है, तभी करण कहता है"उम्म्म तुम आओ तो सही"...."ok wait"श्रद्धा ये कहते हुए खिड़की के तरफ जाति है,और पर्दा हटाती है तो देखती है, करण अपनी कार के पास ब्लैक एण्ड व्हाइट फॉर्मल ड्रेस में खड़ा होता है, श्रद्धा मुस्कुराते हुए कहती है,"अरे वाह आज तो कुछ ज्यादा ही हैंडसम लग रहे हो।"
करण हस्ते हुए कहता है," सब तुम्हारे प्यार का ही नतीजा है।"...."ओहो...."श्रद्धा मुस्कुराते हुए कहती है।




"अच्छा अब जल्दी से नीचे आओ,तुम्हे एक बहुत ही खूबसूरत जगह पर ले जाना है।"।।।ये कहते हुए करण फोन रखता है और श्रद्धा को हाथ से इशारा करते हुए जल्दी आने को कहता है।




श्रद्धा बेड पर पड़े अपने पर्स को उठाती है और अपने कमरे से बाहर निकल कर जाते हुए चम्पा से कहती है,"आज मैं डिनर बाहर से ही कर के आऊंगी।"...... करण बाहर कार के पास खड़ा रहता है जैसे ही श्रद्धा वहा आती है, करण कार का दरवाजा खोलते हुए कहता है,"wellcome my dear love......." ohho thankyou"श्रद्धा ये कहते हुए कार में बैठ जाति है।




करण कार स्टार्ट करते हुए कहता है"मुझे ऐसा क्यों लग रहा है,की दुनिया का खुशनसीब आदमी मैं ही हूं?"..... करण श्रद्धा से कहता है,तभी श्रद्धा कहती है,..."वो कैसे ?".....




करण श्रद्धा के आंखों में देखते हुए कहता है हल्की आवाज़ में कहता है"ओ ऐसे क्योंकि तुम मेरे साथ हो!".... श्रद्धा हस्ते हुए कहती है..."अच्छा? मुझे सब पता है मस्का लगाना बंद करो।".... "अरे सच में"करण श्रद्धा से कहता है। तभी श्रद्धा कहती है।"आगे देख कर ड्राइव करो"... तभी करण रोमांटिक अंदाज में कहता है"जब इतनी खूबसूरत लड़की बगल में बैठी हो तो भला आगे कौन देखेगा?"....




श्रद्धा शरमाते हुए कहती है।...."हे भगवान अगर सही सलामत रहेंगे तो बार बार देखना नसीब होगा।".....करण कहता है,"वैसे बात तो तुम्हारी भी सही है,पर क्या करे? ये दिल है की मानता ही भी".. श्रद्धा हस्ते हुए अपने माथे पर हाथ रख कर कहती है।....."अब बस भी करो!"




ऋषि के घर में बुक्स पढ़ रहा होता है तभी बाहर कोई किसी बच्चे पर चिल्ला रहा होता है।"अबे कालू के बेटे आलू कद्दू जैसा हो गया है अगर मुझे और गुस्सा दिलाएगा तो तेरा पेट फॉर कर उसमें भुस्सा भर दुंगा समझा।तभी ओ बच्चा बोलता है"अबे चमगादड़ सी सकल के जा जाके अपने बेटे को भेज"।.. ओ आदमी उस बच्चे से और रे तूकार करने लगता है, ये आवाज ऋषि को जाना पहचाना लगता है, ऋषि जब बाहर आकर देखता है तो वो कोई और नही बल्की साहिल होता है। साहिल ऋषि पर ध्यान नही देता है वो उस बच्चे पर चिल्लाए जा रहा था।तभी ऋषि वहा आता है,और साहिल का हाथ पकड़ कर खींचते हुए कहता है"अरे यार क्या तू भी बच्चो से लड़ाई कर रह है?"..."क्या कहा ये बच्चा है,बच्चे के रूप में कुंभ करण है,जरा इसके शरीर को देखो कितना चर्बी भरा हुआ है"... साहिल चिल्ला चिल्ला कर कहता है।




तभी वो बच्चा उंगली दिखाते हुए कहता है, "अरे अंकल अब कुछ ज्यादा हो रहा है!"... साहिल उस लड़के के तरफ गुस्से से बढ़ता है तभी ऋषि साहिल को अपने बाहों में पकड़ कर उन सब बच्चो को वहा से जाने को कहता है।.. वो बच्चे वहा से चले जाते है। ऋषि साहिल से कहता है"क्या यार तू भी बच्चो के साथ बच्चो जैसी हरकते कर रह था। तभी साहिल कहता है"क्या कहा बच्चा.. वो तुझे बच्चा दिख रह था...उसके अंदर तेरे जैसे तीन समा जायेंगे।"




ऋषि मुस्कुराते हुए कहता है,"अच्छा ये बता इधर क्यों आया हैं?".... साहिल मुंह बनाते हुए कहता है।"यही पास में रूम लिया हूं, तो सोचा शाम हो गई है थोड़ा बाहर घूम आता हू ।बाहर आया तो ये मोटा पूरा मुंड खराब कर दिया।




"अच्छा ये घर मेरा है, तुम चलके बैठो तब तक मैं तैयार हो जाता हूं फिर साथ में चलते है।....."हां ये ठीक रहेगा"साहिल ऋषि से कहता है और फिर दोनो घर के अंदर चले जाते है।




उधर करण एक जगह पर कार अचानक से रोकता है और कारसे उतरते हुए कहता है"अभी तुम कार से नही उतरोगी।" करण कार से उतर कर श्रद्धा के तरफ का दरवाजा खोलता है और अपने हाथों से उसके आंखों को ढंक कर कार से नीचे उतारता है।




श्रद्धा थोड़ा हिचकिचाते हुए कहती है"करण क्या कर रहे हो?".…. "बस थोड़ी देर और फिर तुम्हे सब पता चल जायेगा!"करण ये कहते हुए श्रद्धा को एक जगह पर रोकते हुए उसके आंखों से धीरे धीरे अपने हाथों को हटाते हुए कहता है"सरप्राइज़......"श्रद्धा के आंखो के सामने एक अदभुत नजारा था। चारो तरफ सन्नाटा आसमा लाल रंग से घिरा हुआ, सूरज आधा डूब चुका था जिस वजह से मौसम और भी ज्यादा खूबसूरत लग रह होता है।ये देखते ही श्रद्धा बोल पड़ती है..."waw so beautiful how I m lucky to see this nature Beauty. करण के करीब आती है और कहती है,"thanks करण for your beautiful सरप्राईज.!"....




तभी करण कहता है,"no no सरप्राईज ये नही हैं, ओ तो कुछ और है।" तभी श्रद्धा कहती है"तो मतलब अभी सरप्राइज बाकी है?" करण श्रद्धा के आंखो पे लटके बालों को सवारते हुए एक प्यार भरी अंदाज से हल्की आवाज में कहता है"हा अभी सरप्राईज बाकी है".....




श्रद्धा के करीब जैसे जैसे करण आ रहा होता है। श्रद्धा की दिल की धड़कने तेज हो रही थी। करण श्रद्धा के इतने करीब आ चुका था की वो करण के गर्म सांसों को मेहसूश कर पा रही होती है।श्रद्धा कुछ बोलती की उससे पहले ही करण अपने होंठो को श्रद्धा के होंठों पर रख देता है। श्रद्धा और करण एक दूसरे में पूरी तरह को जाते है । अब सुरज भी पूरी तरह से ढल चुका होता है, चारों तरफ़ अंधेरा ही अंधेरा छा चुका होता है। करण और श्रद्धा वहीं नीचे ज़मीन पर लेटे हुए एक दूसरे के आंखों में देखे जा रहे थे।




करण ऐसा क्या सरप्राइज़ देने वाला है जो ओ इतना wait करवा रहा है?और कुछ ऐसा होगा श्रद्धा और ऋषि के बिच जो शायद श्रद्धा और ऋषि ने भी नही सोचा होगा ,अब ऐसा क्या होगा उन दोनो के बीच?