तुम बिन जिया जाए ना - 4 Gulshan Parween द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

तुम बिन जिया जाए ना - 4

दोस्तों अभी तक आपने पढ़ा निशा विराट के घर से भाग जाती है, विराट उसे ढूंढ लेता है लेकिन निशा के पास पिस्टल होता है जिससे वह विराट को धमकाती है। आखिर में विराट किसी तरह निशा के पास पहुंच जाता है और निशा से पिस्टल लेने की कोशिश करता है। इसी छीना छपटी में गोली चल जाति है अब आगे...….............




गोली चलने के बाद दोनों ही चौक गए, कुछ ही सेकंड में विराट लड़खड़ाते हुए नीचे गिरा और निशा दो कदम पीछे हटी तो वह अपने हाथ पर खून देखकर डर गई और वहां से तेजी से भागने लगी। तूफानी बारिश और तेज हुए जा रही थी। वह जख्मी हालत में आंखे बंद होने तक इसी को देखता रहा, कि शायद वह मदद के लिए मुड़कर आएगी देखते-देखते इसकी आंखें बंद हो गई मदद तो दूर की बात है निशा ने मुड़कर भी नहीं देखा की इसे गोली कहा लगी है वह जिंदा है भी या मर गया।

"चाय मैं भी पियूंगा पार्थ ने किचन में जाते हुए बोला"

"तो बना लो मना किसने किया है" वह चाय का कप उठाए बाहर की तरफ चल दी।

"तुम्हारे हाथ की चाय पियूंगा और यही चाय पियूंगा" वह रास्ता रोककर खड़ा हो गया और उसके हांथ से चाय का कप ले लिया।

"पागल हो क्या यह अंकल के लिए है" इससे कप लेते हुए उसने कहा।

"पापा कब आए???? पार्थ ने रास्ते से हटते हुए कहा।

"अभी कुछ देर पहले, वह भी नानी मां के कमरे में है" मान्या ने उसके हांथ से कही का कप ले लिए और बोलते हुए ऊपर की तरफ चल दी।

"मुझे यह घर ये हवेली खाने को दौड़ती है, मैं खुद को अकेला फील कर रही हूं" मिसेज कौशिक ने अपने बेटे आकाश से कहा।

"मम्मी आप भी बेकार में परेशान हो रही हैं, आप भी पिछली बातों को सोच सोच कर अपने आप को बीमार कर रही है, पुरानी बातों को याद करके सोचे जा रही है" अकाश अपनी मां को समझा रहा था, तभी वह दोनों रूम में आ गए।

"मान्या!! पार्ट्थ!! अब तुम ही समझाओ इनको" आकाश ने मान्या से कप लेते हुए कहा।

"तो ऐसा करते हैं ना दादी आप मेरी शादी करवा दीजिए, इस हवेली में रौनक भी आ जाएगी, और आपकी उदासी भी दूर हो जाएगा" उसने अपनी दादी के पास बैठे हुए मान्य को मुस्कुरा कर देखा मान्या ने शर्माते हुए नजरें झुका ली।

"क्यों नहीं तुम लोगों की खुशियां देखने के लिए तो मैं जिंदा हूं" दादी ने पार्थ के सर पर हाथ रखते हुए बोली।

"सुन रही हो ना रेशमा!!! तुम्हारा बेटा इतना बड़ा हो गया है और शादी करना चाहता है" रेशमा जो कि पार्थ की मां थी। रूम में आ गई और मिसेज कौशिक की तरफ देख कर कहा।

"मम्मी वह तो मैं भी सोच रही हूं, बच्चे अब जवान हो गए हैं आजकल समय बहुत खराब से होता जा रहा है, हालात बिगड़ने में देर नहीं लगती, कब पांव फिसल जाए पता भी नहीं लगता" रेशमा ने बात खत्म करते समय पार्थ और मान्या की तरफ देखा जो एक दूसरे की तरफ देख रहे थे।

तूफानी रात में तन्हा लड़की आधी रात को पागलों की तरह भटक रही थी। वह सड़क पर पैदल तेज कदमों के साथ घर का रास्ता ढूंढ रही थी और डर रही थी अकेली लड़की के साथ कुछ भी हो सकता था, कोई दूसरा हादसा कोई अनहोनी। वह ना जाने कितना डर दिल में लिए सस्ता पार कर रही थी, अचानक उसकी नजर लड़कों के ग्रुप पर पड़ी। वह वही छिप गई।

"यह बहुत हो चुका मोबाइल पर प्यार मोहब्बत अब कोई लड़की लाओ" एक लड़के ने मोबाइल को देखते हुए कहा।

"हां यह फोन बालियां सिर्फ बातें ही करती हैं और कुछ नहीं, जब मिलने का बोलो तो मुकर जाती है" दूसरा लड़का इसके साथ में हां मिलाते हुए कहा।

"यार अभी फोन से काम चला लो ना जब तक कोई मिलने को राजी नहीं होती" तीसरे लड़के ने बोला।

"नहीं यार!!! अब इस दिल की आग ऐसे ठंडी नहीं होने वाली, जब तक कोई माल हाथ नहीं लग जाता" तीसरे लड़के ने दिल पर हांथ रखते हुए बोला।

"वैसे कल फिर से इस लड़की पर ट्राई मार कर देख लेंगे, अगर मानती है तो ठीक है वरना उठाकर ले जाएंगे, और कर लेंगे सारी ख्वाहिश पूरी" वह एक दूसरे के साथ हाथ मिलाते हुए और जोर-जोर से हंसते हुए आगे की तरफ चल दिए।

क्या समझते हैं यह मर्द औरत को बस दिल बहलाने का खिलौना। बिस्तर गर्म करने का समान या अपनी प्रॉपर्टी जब दिल चाहे जिस पर दिल चाहा उठा लििया और मन भरने के बाद उसकी इज्जत की धज्जियां उड़ाकर फेंक दििया, किसने दिया है इससे यह हक???? वह वहीं बैठी फूट-फूटकर रो रही थी और मन ही मन मर्दों की हरकतों पर अफसोस कर रही थी और फिर वहां से उठी और तेज भागती हुई घर की तरफ गई, घर काफी दूर था इतना सारा रास्ता उसने पैदल ही तय किया था।

"वैसे अगर विराट पसंद नहीं है तो और कौन है??? अंजलि ने खाना प्लेट में उठाते हुए पूछा।

"जरूरी तो नहीं" निशा ने चम्मच लेते हुए कहा।

"सोचा तो होगा कि तुम्हें किस तरह का लड़का चाहिए, कौन-कौन से गुण होने चाहिए उसके अंदर" अंजलि ने खाना खाते हुए बातें जारी रखी।

"हां सोचा तो है" निशा ने गहरी सोच में जाते हुए कहा।

"अच्छा कुछ बताओ कैसा लड़का होना चाहिए अपना आइडियल" अंजली ने निशा की तरफ देखा।

"बहुत सारी बातें हैं, हां लेकिन एक जरूरी बात यह है कि वह सब की इज्जत करना जानता हो खासकर औरतों की, इसकी यही खूबी सबसे खास होनी चाहिए" इसने मुस्कुराते हुए अंजलि को देखा।

अंजलि सोफे पर सर रखे निशा की यादों में उदास बैठी थी, कि अचानक उसके दरवाजे पर जोर जोर से दस्ताके देने की आवाज आने लगी।

"इस वक्त कौन हो सकता है" दरवाजे की तरफ जाते हुए बोली।

"कौन है???? दरवाजे की तरफ से पूछा।

"अंजलि.... अंजलि...... मै निशा हूं" निशा आवाज सुनते ही अंजली ने झट से दरवाजा खोल दिया।

नानी मां को रात की दवाई दे दी थी और खुद भी सोने की तैयारी कर रही थी कि इसका मोबाइल विवरेट हुआ।

"आ जाओ किचन में वैट कर रहा हूं" पार्थ का मैसेज पढ़कर वो मुस्कुराई

"नहीं आ सकती नानी मां की तबीयत आज खराब है, वह बार-बार जाग जाती है" मान्या ने मैसेज ने इनकार करते हुए कहा। पार्थ ने कोई रिप्लाई नहीं दिया। वह कुछ देर बैठ कर सोचती रही और वहां से उठी और किचन में आ गई।

"बोलो क्या काम है" मान्य ने किचन में आते हुए कहा।

"दादी की चमची" पार्थ ने उसे घूरते हुए कहा।

"जल्दी बताओ क्या काम है" मान्य ने वही खड़े होकर पूछा।

"काम तो वैसे कुछ भी नहीं है" पार्थ टेबल से उठकर इसकी तरफ बढ़ते हुए बोला।

पार्थ!! तुम भी ना मारबाओगे किसी दिन" वह गर्दन घुमाते हुए वापस जाने के लिए मुड़ी, तभी पार्थ ने एक ही झटके से से अपने बाहों में ले लिया।

"अब आ गई हो तो रुक जाओ ना" इसे और करीब लाते हुए कहा।

"यह गलत बात है पार्थ!!! तुम जानते हो कि घर में और भी बहुत लोग है, अगर किसी ने देख लिया तो.....

"हां तो क्या हो जाएगा, बात बढ़ जाएगी... यार कुछ नहीं होता, ज्यादा से ज्यादा क्या होगा हम दोनों पूरे घर में बदनाम हो जाएंगे सभी लोग कहेंगे, देखो लवबर्ड्स रात को छुप-छुपकर मिलते हैं, फिर खानदान का मुंह बंद करने के लिए दादी ऐलान कर देगी दोनों की शादी कर दी जाएगी और यही तो हम दोनों चाहते हैं" पार्थ शरारती आंखों से देखते हुए बोले जा रहा था और मान्य परेशानी से इधर उधर देख रही थी।

"मतलब तुम खुद से किसी को नहीं बोलोगे, तुम अंकल से हमारे रिश्ते की बात नहीं की, तुम कही बस मेरे साथ टाइम पास तो नही कर रहे हो" मान्या ने नाराज होते हुए कहा और खुद को उससे अलग करने लगी।

"अरे भुलक्कड़ मैं तुम्हारे सामने दादी से बात किया था ना हमारी शादी के लिए" का तुम भूल गई

"लेकिन तुमने मेरा नाम तो नहीं लिया था"

"अरे पागल शादी तो मैं तुमसे ही करूंगा ना, अभी नाम लेने की क्या जरूरत है, जब वह टाइम आएगा तो सबके सामने कह दूंगा" अब मान्या दीवार से टेक लगाए खड़ी और पार्थ उसके बालों को धीरे धीरे सहलाए जा रहा था।

पार्थ!!!!....... पार्थ!!!!..... अचानक अकाश की आवाज सुनकर दोनों एक दूसरे से दूर हो गए। आकाश अपने कमरे से निकलकर सीढ़ियों से उतर रहा था और पार्थ को आवाज दिए जा रहा था। वह बहुत टेंशन में था रेशमा भी उसके पीछे पीछे आ रही थी आवाज सुनकर पार्थ सीडीओ की तरफ भागा।

"जी पापा सब ठीक तो है आप इस टाइम इतना परेशान"

"भाभी(मिसेज कौशिक) का कॉल आया था, विराट के साथ कोई बड़ा हादसा हो गया है वह हॉस्पिटल में है मुझे अभी जाना होगा" आकाश ने घबराते हुए कहा।

"मैं भी चलूंगा आपके साथ" पार्थ ने भी चिन्ता लेते हुए कहा।

"नहीं तुम घर पर रहो और यहां का ध्यान रखना और हां मम्मी को इस बात का पता ना चले इसकी तबीयत पहले से ही खराब है और खराब हो जाएगी"

"यस पापा वैसे आंटी ने कुछ बताया कि क्या हुआ है???

"नहीं अभी तो बस इतना ही बताया है वहां जाकर ही मालूम पड़ेगा"

"ठीक है पापा आप पहुंचते ही कॉल कर दीजिएगा" वह दोनों बातें करते हुए बाहर की तरफ निकल गए रेशमा भी अब वापस मुड़कर अपने कमरे की तरफ जा रही थी तभी किचेन से निकलती हुई मान्या पर इसकी नजर पड़ी।

रुको मान्या....... वह उसके नजदीक आकर खड़ी हो गई

"जी आंटी..... माया ने उसकी तरफ देखते हुए कहा।

"वहां पर क्या कर रही हो??? रेशमा ने से शक की निगाह से देखते हुए पूछा।

"वह मैं पानी लेने आई थी" मान्या नजरें चुराती हुई अपने कमरे में चली गई।

"मेरी शादी की तैयारी कर लीजिए मामा" विराट इस की गोद में लेट हुए बोला।

"तुम सच कह रहे हो विराट!!! समीरा(विराट की मां) की आंखें चमक उठी थी।

"आपको अपनी बहु से मिलवा दूंगा"

"तो तुमने लड़की पसंद कर ली है नाम बताओ भाई मैं खुद पहचान जाऊंगी" बह उसके बालों के ऊपर हाथ फेरते हुए बोली

"अच्छा आप खुद पहचान से जाओगी आप ऐसा लग रहा है जैसे पहले से जानते है आप उसे" बह मुस्कुराते हुए बोला।

"वह सारी रात विराट के पास बैठी रोए जा रही थी। बह इस की कही हुई बात याद कर रही थी। सुबह का समय था विराट को बहुत मुश्किल से होश आया था दर्द की वजह से बहुत ज्यादा बोल भी नहीं पा रहा था।

"भाभी सब ठीक तो है ना विराट बेटे क्या हुआ है किसने की है तुम्हारी यह हालत" अकाश भी वहां पहुंच चुका था।

"पता नहीं भाई साहब इसके दोस्तों को यह जख्मी हालत में सड़क पर मिला था, पता नहीं कौन से जालिम लोग थे, जिसने मेरे बच्चे की यह हालत की है, भगवान इसे कभी खुश नहीं रखेगा" समीरा ने रोते हुए कहा

"आपने पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई" अकाश ने विराट के जख्म की तरफ देखते हुए पूछा

क्या विराट ठीक हो पाएगा जाने के लिए पढ़िए अगले पार्ट में ...........

दोस्तों अगर आपको स्टोरी पसंद आई है तो कमेंट जरुर कीजिए और लाइक भी।

थैंक्यू रीडर्स.................