तुम बिन जिया जाए ना - 10 Gulshan Parween द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तुम बिन जिया जाए ना - 10

"हैलो बेटा कैसे हो और कैसी चल रही है तुम्हारी पढ़ाई" रेशमा अपने दूसरे बेटे समीर से बात कर रही थी जो पढ़ाई के कारण बाहर रह रहा था।

"पढ़ाई भी अच्छी चल रही है हमेशा की तरह बस आपकी बहुत याद आ रही है" समीर ने अपनी मां से कहा।

"याद तो मैं भी कर रही हूं वैसे तुम एक चक्कर लगा क्यों नहीं देते, इतने दिन हो गए हैं यहां से गए हुए बस अपनी फिक्र रहती है तुम सबको मेरी परवाह किसी को नहीं होती कितना याद करती हूं मैं तुम्हें" इसका लहजा दुख भरा था।

"आप दुखी ना हो इस बार पूरी कोशिश करूंगा घर आने की और आप कहे तो अभी क्लास छोड़ कर आ जाता हूं" समीर ने कहा

"अरे नहीं नहीं ऐसा मत करना वरना तुम्हारे पापा मुझसे बहुत सारे सवाल करने लगेंगे" रेशमा ने इसे मना करते हुए कहा।

"देखा बेटा पढ़ाई छोड़ कर आ गया, अब बैठा लो गोद में बच्चे को उन्हें कामयाब होने ना देना बस अपने पल्लू से बांधकर ही रखना" समीर अपने पापा के नकल उतारता और रेशमा हंस रही थी।

"क्या बात है भाई किस से बातें हो रही है?? अकाश ने कमरे में दाखिल होकर रेशमा का खुशगवार मुड देखकर पूछा।

"अपने बेटे से" रेशमा ने रिसीवर रखते हुए बोला।

"अच्छा क्या इरादे हैं लड़के के, वैसे काफी दिन हो गए हैं यहां का चक्कर नहीं लगाया इसने" आकाश ने अपनी फाइल उठाते हुए पूछा।

"इस बेचारे को तो बहुत मन है यहां आने का फिर अब आपके ताने और डांट का सोचकर रुक जाता है"

"अरे मैंने ऐसे कब मना किया है घर आने से वह तो बस मैं केयर करता रहता हूं कि अगर मां के पल्लू से चिपका रहेगा तो कैसे पढ़ेगा लेकिन इसे बोलो कम से कम छुट्टियों में तो आ जाए हमें भी उसकी याद आती है" आकाश ने उससे कहा।

"तो आप खुद क्यों नहीं कहते इसे अब इतना भी क्या काम है मैं लगे रहना है कि अपने बेटों की खबर तक न ली जाए" रेशमा ने शिकायत भरे लहजे ने बोला।

"ठीक है कल बात कर लूंगा" कहते हुएं मिस्टर आकाश आफिस के लिए निकल पड़े

अंजलि से मुलाकात करने के बाद अब समीरा परेशान सी रहने लगी थी उसे हर समय अंजली की कही बाते याद आ रही थी ( निशा के दिल में अली के लिए सिर्फ नफरत है और कुछ भी नहीं यह तो आप अपने बेटे से पूछे किस तरह इसने निशा की जिंदगी जहन्नुम बना दी मेहरबानी करके निशा का पीछा छोड़ दे, वह किसी भी सूरत में आपके बेटे को नहीं अपनाएगी वह सिर्फ और सिर्फ नफरत करती है इससे) अंंजली की कही हुई बातें अब हर वक्त इसके दिमाग में घूमने लगी थी।

"अरे मामा आप वहां क्यों खड़ी है आइए ना" समीरा को दरवाजे पर खड़े देख विराट ने अंदर आने को बोला।

"क्या बात है तबीयत नहीं ठीक है क्या?? वह बेड पर लेटा था जब समीरा उसके बेड पर आकर बैठ गई।

"नहीं मम्मा बस सर दर्द है"

"विराट तुम क्यों कर रहे हो ऐसा क्यों खुद को तकलीफ दे रहे हो।

"तकलीफ कैसी मामा बोला ना खा लूंगा मेडिसिन, अच्छा अभी खा लेता हूं बस" विराट ने मां की तरफ देखा और फॉरेन पेन किलर लेने को दौड़ा।

"मैं इस दर्द की बात नहीं कर रही वो दर्द जो कई दिनों से तुमने पाल रखा है इसका इलाज क्यों नहीं करते" विराट उसकी बात सुनकर हैरान सा हो गया।

"आप किस दर्द की बात कर रही हैं" विराट ने हैरानी से पूछा।

"निशा तुम्हारे नसीब में नहीं है तो फिर क्यों इसकी वजह से खुद को बीमार कर रखा है?? क्यों यह सर दर्द पाल रखा है?? भूल क्यों नहीं जाते निशा तुमसे मोहब्बत नहीं करती फिर भी तुम..... वह सवालिया निगाहों से इसकी तरफ देख रही थी। वह कुछ पल के लिए हैरान हुआ इसकी मां निशा के बारे में जान चुकी थी लेकिन कब और कैसे?? समीरा के इस तरह के सवाल ने उन्हें जैसे इसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया।

"मम्मा मैं इसे नही भुला पा रहा हु। मैं भूल जाता लेकिन इसके मामले में खुद हैरान हूं, मैं मैं बेबस हूं इसकी याद से निकल नहीं पा रहा, जैसे वह मेरी रूह में समा गई हो, मेरे खयालात पर वही छाई हुई है" कुछ देर खामोश रहने के बाद वह बोला।

"यह जानते हुए भी कि वह तुम्हें पसंद नहीं करती फिर भी"

जेडजानता हूं वह मुझसे शदीद नफरत करती है लेकिन, वह जितनी नफरत करती है मैं उससे कई गुना ज्यादा मोहब्बत करता हूं"

"लेकिन बेटा ऐसी एक तरफा मोहब्बत का कोई फायदा नहीं होता और जबरदस्ती से हासिल की हुई मोहब्बत, मुहब्बत नहीं सिर्फ जुल्म होता है, अंजली बता रही थी कि निशा ने तुम्हारी वजह से पढ़ाई छोड़ दी" समीरा भरी निगाहों से उसकी तरफ देखते हुए सवाल किया।

"अंजलि से कब मिली कहां?? पर और आप इससे भी मिली थी?? विराट का अंदाज जैसे बदल गया बदल गया इसे यह लगा था कि निशा के बारे में जरूर साहिल ने बताया होगा लेकिन अंजली का जिक्र सुनकर वह हड़बड़ा गया।

"क्या यह सच में निशा के इनकार करने के बावजूद भी तुमने मोहब्बत करने पर मजबूर किया" विराट ने शर्मिंदा से सर हां में हिलाया।

"क्यों विराट तुम कब से इतने खुदगर्ज बन गए, तुम चलो मानती हु तुम्हें इससे प्यार हो गया, लेकिन वह भी तुम्हें चाहती तो ठीक था, लेकिन बेटा इतना तो ख्याल करते वह एक इंसान है अपनी जिंदगी के हर फैसला करने का हक है हम किसी को जबरदस्ती मोहब्बत नहीं कर सकते तुम तो मेरे समझदार बेटे थे ना फिर भी तुमने यह गलती कैसे कर दी" समीरा अपने बेटे को समझा रही थी।

"आप सही कह रही हैं, ताकत से मोहब्बत हासिल नहीं होती इसके लिए दिल में उतरना पड़ता है ना जाने मेरे सर पर क्या जुनून सवार हो गया था, इसे हासिल करने का लेकिन मैं जान चुका हूं इस तरह जोर और जबरदस्ती से मोहब्बत दिल में नहीं उतरती खुद ही किसी के दिल से उतर जाते हैं" इसने ठंडी आहें भरते हुए बोला।

"अब जो हुआ सो हुआ लड़की को भूल जाओ इसे याद करके या फिर अपने किए पर पछतावा छोड़ दो, और अपनी जिंदगी के बारे में आगे सोचो" समीरा इस के सर पर हाथ फेरते हुए बोली।

"क्या किसी और के बारे में सोचूं वह तो मेरी सोचो पर भी हावी हो चुकी है, भले वह मुझे मिले ना मिले लेकिन मैं इसे अपने दिल और दिमाग से निकालने में नाकाम हो चुका हूं" इसने गहरी सोच में जाते हुए बोला और समीरा उसे देखती हुई हसरत और दर्द के साथ कमरे से निकल गई।

समीरा बेहोश पड़ी थी और सपना इसे उठाने की कोशिश कर रही थी वह फौरन मां को लेकर अस्पताल रवाना हुआ काफी देर अस्पताल में रहा समीरा को होश आ गया लेकिन डॉक्टर ने कंडीशन देखते हुए ने रात को अस्पताल में ठहराया।

"जी आपने बुलाया" विराट ने अंदर आते होते हुए पूछा।

"आइए बैठिए" डॉक्टर ने कुर्सी की तरफ इशारा करते हुए बोला।

"अगर आपने इनका ध्यान नहीं रखा इनको स्ट्रेस फ्री नही रखा तो अटैक हो सकता है, आपकी मामा का दिल पहले ही कमजोर है इनके लिए इस तरह का अटैक जानलेवा बन सकता है" डॉक्टर ने विराट की आंखों में आंखें डाल ते हुए बोला।

विराट एकदम से मायूस हो गया इसके हाथ पैर ठंडे पड़ गए वह अपनी मां से बहुत प्यार करता था इस तरह की बातें सुनकर वह घबरा गया।

"लेकिन मुझे अब क्या करना चाहिए मैं क्या करूं अब??

"देखो फिलहाल इनकी तबीयत खतरे से बाहर है लेकिन आगे से आप को संभालना होगा, इन्हें हर तरह से खुश रखना होगा जो चीज या फिर बातें इन्हें तकलीफ देती है या फिर आपको लगता हो कि किस वजह से परेशानी में पर रही है आपको इन सब बातों से दूर रखना होगा, घर में अगर कोई परेशानी या झगड़ा वगैरह हो तो फिर भी इनके लिए अब हालात नॉर्मल रखे इनके सामने खुशी का माहौल बनाए रखें" डॉक्टर इसे सलाह दिए जा रहा था उसके दिल में यह बात चुभ रही थी कि अपनी मम्मा के हालत का जिम्मेदार कहीं ना कहीं वह खुद है।

आगे जारी है.......