तुम बिन जिया जाए ना - 6 Gulshan Parween द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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तुम बिन जिया जाए ना - 6

दोस्तों अभी तक आपने पढ़ा। निशा घर वापस आने के बाद अपनी मम्मा को कॉल करके बुलाती है। और इधर विराट भी हॉस्पिटल से घर वापस आ जाता है।

अब आगे.......




मिसेज खुराना 3 दिन रुकने के बाद वापस जा रही थी और निशा भी इसके साथ वापस जाने की तैयारी में लगी थी। निशा ने अपनी मम्मा को अपने साथ हुए घटना के बारे में नहीं बताया था, बस इतना ही कहा था कि यहां अब उसका दिल नहीं लग रहा है वह अपनी मामा के बिना नहीं रहना चाहती।

"तुम सच में जा रही हो" अंजलि ने दरवाजे पर खड़े हुए इससे सवाल पूछा।

"हां, वैसे भी अब यहाँ रहने का क्या फायदा है" इसने सामान समेटे हुए कहा।

"और तुम्हारी पढ़ाई???

"बहुत हो चुकी पढ़ाई" इसने किताब एक तरफ रखते हुए कहा।

शाम का समय था आकाश और समीरा गार्डन में बैठे चाय पी रहे थे और अच्छे मूड में बातें कर रहे थे। विराट भी इसके साथ बैठा हुआ था, लेकिन वह किसी भी बात में इंटरेस्ट नहीं ले रहा था तभी आकाश का फोन बजा

"हैलो" इसने कॉल रिसिव करते हुए कहा।

"हेलो अंकल!!! नानी मां आपसे बात करना चाह रही है" दूसरी तरफ मान्या ने फोन नानी मां को देदिया।

"हेलो मम्मी कैसी हैं आप??? आपकी तबीयत कैसी है"

"मैं ठीक हूं तुम कब आ रहे हो घर वापस, या फिर वही अपने भतीजे के साथ बिजनेस सेट करने का इरादा है" इसने टोकते हुए कहा।

"नहीं नहीं मम्मी!! मैं आज ही वापस आ रहा हूं"

"और सुनो विराट है क्या तुम्हारे पास???

"जी जी बिल्कुल विराट यहीं पर मेरे पास बैठा है" अकाश ने विराट को फोन देते हुए कहा।

"दादी कैसी हैं आप???

"अरे मेरी छोड़ो मेरा बच्चा पहले यह बताओ तुम्हें क्या हुआ है??? तुम ठीक तो हो ना"

"मुझे........ विराट चौक गया क्योंकि जितना इसे पता था कि दादी इस के हादसे के बारे में नहीं जानती है फिर भी वह इस तरह का सवाल कर रही थी। वह एक नजर समीरा और आकाश पर डाली और चुप हो गया।

"तुम ही से पूछ रही हूं, इतने दिन हो गए दादी से मिलने नहीं आए और ना ही फोन करते हो, इतने बिजी हो गए हो कि अब यह बूढ़ी दादी तुम्हें याद नहीं रही, आज भी मैंने ही फोन किया है, वरना अब तो तुम परेशान ही हो गए हो मुझसे" वह थोड़ा गुस्से में बोली।

"अरे नहीं दादी कैसी बातें कर रही है आप भला मैं आपके बिना रह सकता हूं, इस बार गलती हो गई अब की बार आपसे बात करने में कभी देर नहीं करूंगा" विराट ने दादी को मना लिया।

"खुश रहो" और उसने फोन रख दिया।

"भाभी मेरे ख्याल से अब मुझे भी हवेली वापस चले जाना चाहिए, भगवान की कृपा से विराट बिल्कुल ठीक हो गया है" आकाश ने विराट के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

"अरे भाई साहब कुछ दिन और रुक जाते"

"नहीं भाभी अब वहां का कामकाज भी संभालना है, पार्थ अकेले हैंडल नहीं कर पाएगा"

"जानती हूं आपको वहां भी जिम्मेदारियां निभानी है, मैं यहां रुकने के लिए जोर नहीं कर सकती लेकिन, क्या है कि मैं सोच रही थी कि विराट जब तक पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाता वह ऑफिस ना जाए"

"इसकी फिकर आप मत कीजिए मैंने कुछ अपने फ्रेंड से बात कर लिया है, वह लोग यहां का काम देख लेंगे और कुछ असिस्टेंट भी ऑफिस में बहाल कर दिए हैं, विराट तुम फिलहाल ऑफ ऑफिस मत जाना बस घर पर बैठकर फाइल जरुर चेक कर लेना, अगर ज्यादा जरूरत पड़ी तो मैं खुद आ जाऊंगा, तुम कुछ दिन और आराम करो" इसने विराट को देखते हुए कहा।

"देखिए ना इस हादसे के बाद इसका क्या हाल हो गया है, एकदम गुमसुम हो गया है, वरना तो सारा कामकाज और घर इसी ने संभाली है, मैं यह सब हैंडल नही कर पाती, मेरा प्यारा बच्चा" समीरा ने विराट के माथे चूमते हुए बोली, तब इसकी आंखों में आंसू आ गए थे।

"इस बात में कोई शक नहीं है, जिस तरह इसने कम उम्र में अपने बिजनेस और फैक्टरी इतनी ऊंचाई से खड़ा किया है, वह हिम्मत तो किसी और में कहां है,और, और क्यों ना हो मेहनती खानदान का बेटा है और ऊपर से सबका चहेता और प्यारा बेटा है" आकाश उसकी तरफ देखते हुए प्राउड से कहा।

विराट सिर्फ इन लोगों की बातें सुन रहा था और जवाब में हल्का सा मुस्कुरा देता था। जैसे वह किसी और ख्यालों में गुम हो।

"पता नहीं किस की नजर लग गई है, मेरे भाई को" सपना ने विराट के पास बैठते हुए बोली।

"वह एक बड़ा हादसा था, जो विराट की अपनी गलती से हुआ वरना भाभी अगर इसमें किसी और का हाथ होता तो, मैं इसे नहीं छोड़ता, लेकिन अब किस्मत में यह चोट खाने थी और वह भी अपने हाथों से तो, हम इसमें क्या कर सकते हैं" आकाश यह कहते हुए अपने रूम की तरफ चला गया।

"निशा अपने घर आ चुकी थी, लेकिन अब वह पहले जैसे बिल्कुल भी नहीं थी। इस हादसे के बाद जैसे बह मुरझा गई थी, ना ही वह ज्यादा बात करती थी और ना ही कहीं आती जाती थी। खाना खा लो वरना बीमार हो जाओगी जिंदा रहने के लिए खाना बहुत जरूरी है, मुझे नहीं पता तुम्हें क्या पसंद है, लेकिन वेज बिरयानी पसंद है, तो मैं वहीं ले आया वैसे तुम्हें क्या पसंद है खाने में..... इसके सामने वेज बिरयानी पड़ी थी लेकिन वह इसे देखकर ही अतीत में खो गई और इसे किडनैप के दिन याद आ गए।मिसेज खुराना बहुत देर से इसे देख रही थी

"निशा कहां गुम हो बेटा, खाना ठंडा हो रहा है" वह दोनों खाने की टेबल पर बैठी थी डिनर के लिए लेकिन निशा को ऐसा लग रहा था कि वह विराट की गिरफ्त में है।

"निशा!!! मैं तुमसे बात कर रही हूं बेटा" मिसेज खुराना ने एक बार फिर से कहा

"कुछ नही मामा बस मन नहीं कर रहा है"

"क्यों मन नहीं कर रहा है, यह तो तुम्हारी फेवरेट डिश है ना, तुमने दोपहर में भी बहुत कम खाना खाया था,अब बिरयानी को हाथ नहीं लगा रही हो, पहले तो मेरी प्लेट से भी उठा कर खा जाती थी, अब मन नहीं कर रहा है" मिसेज खुराना ने हैरत से इसकी तरफ देख रही थी।

"आप खा लीजिए" बोलती हुई वह झट से उठी और अपने रूम की तरफ चली गई।

"क्या बात है निशा!!! तुम अचानक इतना बदल क्यों गई हो??? मुझे लगा कि तुम शायद अंजलि और बाकी फ्रेंड को मिस कर रही हो, तभी उदास रहती हो, लेकिन बेटा, अब तो काफी दिन हो गए हैं तुम्हारा चेहरा दिन प्रतिदिन मुरझाया जा रहा है क्यों???? अचानक से पढ़ाई कैंसिल कर के यहां आ गई हो, कोई तो वजह जरूर होगी, तुम अपने मामा से कुछ छुपा रही हो क्या??? कोई प्रॉब्लम है तो मुझसे शेयर करो ना बेटा, मैं तुम्हारी मामा के साथ-साथ तुम्हारी दोस्त भी तो हूं ना" वह बेड पर लेटी तकिए से मुंह छुपाए रो रही थी और मिसेज खुराना इसके पास बैठी इस से बातें कर रही थी।तभी वह उठी और अपनी मम्मा के गले लग कर जोर जोर से रोने लगी।

"चुप हो जाओ बेटा" मैसेज खुराना इसका माथा चूमती हुई उसे चुप करा रही थी, और साथ-साथ टेंशन लिए जा रहे थे कि कहीं इसकी बेटी के साथ कोई अनहोनी तो नहीं हुई निशा मेरा दिल बहुत घबरा रहा है सच बताओ कि हुआ क्या है।

"कहीं तुम्हारे साथ किसी ने???? मीसेज खुराना इसका चेहरा अपने दोनों हाथों से पकड़े हुए थे और खुद को मुश्किल से संभाले हुई थी। एक आ रहा था। इसे जिस बात का अंदेशा था वह नहीं चाहती थी कि निशा के मुंह से वही बात निकले।

"ऐसा कुछ भी नहीं है, आप बेकार में टेंशन ले रही है" इसने अपनी मां के दोनों हाथ को अपने हाथ में लेते हुए कहा।

"तो फिर इन सब की वजह क्या है क्यों???? आ गई हो तुम यहां???

"मैंने बोला ना बस आपको मिस कर रही थी मैं, आपके बिना मन नहीं लग रहा था"

"यह तो बिल्कुल बच्चों वाली हरकत है, अब तुम बच्ची नहीं रही बड़ी हो गई हो, मैं तुम्हारी मेहनत और लगन देखकर खुश होती थी, कि तुम अपने पापा की तरह एक काबिल और कामयाब बनकर दिखाओगे, लेकिन तुम तो मेरे लिए फिर से वह छोटी वाली निशा बन गई हो, जो स्कूल जाते समय नखरे दिखाती थी, कुछ ही दिन की तो बात है, अपनी पढ़ाई पूरी कर लो फिर तुम यहां आ जाना हमेशा के लिए, अब यह सोना रोना धोना छोड़ो और तैयारी तो लो कल ही तुम अंजली के पास जा रही हो" इसने शख्ती से आर्डर देते हुए कहा और कमरे से चली गई, और वह वहीं बैठी खामोशी से सुनती रही और कुछ बोल भी नहीं पाई। सारी रात इसने बेचैनी में गुजार दी, और वह यही सोचती रही कैसे अपनी मम्मा को अपने साथ हुए घटना के बारे में बताएं, अगर एक पल के लिए अपनी प्रॉब्लम बता भी देती है और अपना बोझ हल्का कर भी लेती है, लेकिन यह रिश्क उठा नहीं सकती थी, क्योंकि मिसेज खुराना बी.पी की पेशेंट थी। इस तरह के सौक देना उसके लिए अच्छा नहीं था........

क्या निशा अपनी बाते अपनी मां को बता पाएगी....जानने के लिए पढ़िए अगले पार्ट में....

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