दो पागल - कहानी सपने और प्यार की - 24 VARUN S. PATEL द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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दो पागल - कहानी सपने और प्यार की - 24

 अंक २४ जीत

   नमस्कार दोस्तों। आशा करता हु की आप सब ठीक ही होंगे। आज मे लेखक वरुण पटेल फिरसे हाजिर हु आप के बिच हमारी बहुत ही मजेदार कहानी दो पागल के एक और अंक के साथ लेकिन मेरी बिनती है आप सब लोगो से कि अगर आपने आगे के २३ अंको को नहीं पढा है तो सबसे पहले उन अंको को पढले ताकी आपको यह अंक अच्छे से  समझ आए।तो आइए शुरु करते है हमारी इस बहेतरीन नवलकथा के इस बहेतरीन अंक को ।

     आगे आपने देखा की केसे स्पर्धा की शुरुआत हो चुकी थी और रवी और महावीर अभी तक टाउनहोल नहीं पहुचे थे और रुहान चिंता मे किसी को फोन करते हुए टाउनहोल के बहार इधर से उधर चक्कर लगा रहा था। थोडा समय और बितने के बाद रुहान अंदर टाउनहोल मे चला आता है और टाउनहोल के थियेटर में जहा पहली टीम का परफोर्मन्स चल रहा था वहा सामने प्रेक्षको के बिच आकर जीज्ञा की पास वाली सीट पर बेठ जाता है और उससे थोडी दुर बेठा संजयसिह उन पर हसते हुए उन्हें साफ साफ दिख रहा था। 

     क्या हुआ यह लोग अभी तक आए क्यु नहीं। तुम जानते हो की मेरा सोचा हुआ कोई भी कार्य पुर्ण नहीं होता है लेकिन तुमने फिर से मुझे इस काम के लिए तैयार कर लिया अब देखो इसका फिर से असफल परिणाम... जीज्ञाने फिर से निराश होते हुए कहा। 

     तु ना इतनी जल्दी हार ना मान लिया कर। वो लोग आते ही होंगे और उन्हें लाने की जिम्मेवारी मेरी है... रुहानने अपनी दोस्त को आश्वासन देते हुए कहा। 

     वेसे भी मुझे मेरा अंत और हद दोनो पता है आज यह नाटक जीते या हारे क्या फर्क पडता है... जीज्ञाने रुहान से भावुक होते हुए कहा। 

     हमे इस नाटक की जीत या हार से कोई फर्क नहीं पड़ता है लेकिन हा तुम्हारी हार जीत से जरुर पडता है... रुहानने अपनी दोस्त को उसके निराशा जनक बर्ताव पर उत्तर देते हुए कहा। 

     दोनो के बिच संवाद चल ही रहा था तभी जीज्ञा के फोन मे उसी लाइन मे थोडी दुर बेठा संजयसिह का फोन आता है। जीज्ञा अंजान नंबर देखकर फोन उठाती है। 

     हेल्लो... जीज्ञाने फोन पे बात की शुरुआत करते हुए कहा। 

     जी पहेचाना हमे... संजयसिहने जीज्ञा को चिडाने की शुरुआत करते हुए कहा। 

     जी कोन बोल रहे हो... संजयसिह से अंजान जीज्ञाने सामने सवाल करते हुए कहा। 

     कोन है जीज्ञा... पास बेठे रुहानने कहा। 

     जी वही जीसने आपकी सगाई करवाने मे बडा योगदान किया था। याद है कुछ... संजयसिहने जीज्ञा की दुखती नस पे हाथ रखते हुए कहा। 

     संजयसिह ? साले हरामी तुन्हे मेरे फोन मे फोन करने की हिम्मत कैसे की और तुझे मेरा नंबर कहा से मिला... गुस्सा होते हुए जीज्ञाने कहा। 

     संजयसिह... नाम बोलते हुए वो जहा पर बेठा था उस तरफ देखते हुए रुहानने कहा। 

     जी सही पहचाना। हम आपके पिताश्री तक पहुच गए तो आपके नंबर तक पहुचना कोनसी बडी बात थी... संजयसिहने जीज्ञा को चिडाने की पुरी कोशीष करते हुए कहा। 

      बे अब यह मार खाएगा यह तय है... अपनी जगह से खडे होते हुए रुहानने कहा। 

     अपने दोस्त को बोलो निचे बेठ जाए क्योकी अगर यहा टाउनहोल मे तमासा हुआ तो मेरा कुछ नहीं जाएगा लेकिन आपका नाटक तो होने से रहा और मेरी भविष्यवाणी सही होगी वो अलग से की आप यह प्रतियोगिता कभी नहीं जीत सकते... संजयसिहने मोके और समय दोनो का फायदा उठाते हुए कहा। 

     संजयसिह की बात सुनकर जीज्ञा रुहान का हाथ पकड लेती है और उसे निचे बेठने के लिए कहती है। रुहान निचे बेठजाता है। 

     मेडमजी गुस्सा छोडो अपने दोस्तों को ढुंडो क्योकी रुहान को तो दोनो मिले नहीं और अगर नहीं मिले तो आपका बचा कुचा सपना गया... इतना बोलकर संजयसिह अपना फोन काट डालता है। संजयसिह जीज्ञा और रुहान को परेशान करने का कोई मोका नहीं छोडता था। 

     रुहान क्या हुआ है रवी और महावीर कहा है और उनसे कोई संपर्क हुआ या नहीं... जीज्ञाने चिंता दिखाते हुए रुहान से कहा। 

     संपर्क तो नहीं हुआ लेकिन आ जाएगे... रुहानने जीज्ञासे कहा। 

     हा पर कब और केसे। मुझे लगता है जरुर इस संजयसिहने कुछ किया है हमे अभी जाना चाहिए और उन्हें ढुंडना चाहिए... जीज्ञाने अपना न सोचते हुए अपने दोस्तों के बारे मे सोचते हुए कहा।

     शांती रख कुछ उलटा सीधा नहीं होनेवाला और हा अब तीसरी टीम का भी परफोर्मन्स शुरु हो चुका है और अब हमारी बारी है... रुहानने जीज्ञासे कहा। 

     रुहान इस परफोर्मन्स से ज्यादा हमारे दोस्त महत्वपूर्ण है। तुम इतने स्वार्थी केसे हो सकते हो... जीज्ञाने रुहान से कहा। 

     संजयसिह अभी भी दोनो की तरफ देखकर हस रहा था। 

     मे स्वार्थी नहीं हो रहा हु अगर संजयसिहने कुछ किया है तो मेने भी अपना दाव खेल लिया है। आज यह स्पर्धा तो हम जीतेंगे ही लेकिन साथ ही साथ संजयसिह को भी मजा सीखाएंगे ... रुहानने जीज्ञा को शांत करते हुए कहा। 

     माहोल एकदम नर्वससा हो गया था। ना तो जीज्ञा के दिमाग मे कुछ सुझ रहा था की ना तो रुहान के दिमाग मे की अब क्या करना चाहिए। समय बितने पर दो टीमे अपना परफोर्मन्स पुर्ण कर लेती है और अभी तक महावीर और रवी के कोई भी समाचार नहीं आए थे ।

     है भगवान अब जीज्ञा की और परीक्षा मत कर और रवी-महावीर को भेज दे वरना जीज्ञा तुट जाएगी... टाउनहोल के चारो टीमो को अपने परफोर्मन्स के लिए तैयार होने के लिए दिए गए रुममे से भगवान को मन ही मन प्राथना करते हुए पुर्वी ने कहा।

     समय बितने पर अब तीसरी टीम भी अपना परफोर्मन्स पुरा कर लेती है और अब बारी थी रुहान और जीज्ञा के टीम के परफोर्मन्स की और महावीर और रवी अभी तक नहीं आए थे। संजयसिह बार-बार जीज्ञा और रुहान के सामने देखकर हस रहा था और अपने अंदर की घमंड नामकी ज्वाला को और तेज करता जा रहा था। 

      तो अब तक हम तीन जाबाज टिमो का पर्दशन देख चुके हैं और उन्होने जिस तरह का परफोर्मन्स दिया है उसे देखकर यह तो बिलकुल तय हो गया है की आगे आनेवाली टिम पे दबाव अवस्य है और इससे यह भी साबित होता है की आनेवाले समय मे फिल्मो का भविष्य कितना उज्जवल है । तो ज्यादा समय बरबाद न करते हुए हमे आगे बढना चाहिए। तो अब मे उस टिम को बुलाने जा रहा हु जिन्होने नाटक के रुपमे एक संदेश दिया था और लोगो के दिल में बस गए थे तो अब आ रही है बरोडा से जीज्ञा और रुहान की टीम अपनी पेशकश लेकर। एकबार जोरदार तालीयो से उनका स्वागत किया जाए...एंकरने जीज्ञा और रुहान की टीम को स्टेज पर आमंत्रित करते हुए कहा। 

      पुरे होल मे तालियो का शोर गुंजने लगता है लेकिन इन तालियो से होल मे लोगो के साथ बेठे हुए जीज्ञा और रुहान के अंदर तालियो से ज्यादा धडकन का शोर गुंजने लगता है। दोनो मे अभी तक किसी को पता नहीं था की महावीर और रवी का क्या हुआ है। वहा बेठी ओडियन्स में से सबसे ज्यादा खुश संजयसिह था और बार बार जीज्ञा और रुहान की तरफ देखकर हस रहा था क्योकी उसको रुहान और जीज्ञा की छोटी से छोटी हार मे भी मजा आ रहा था और आज वो रुहान और जीज्ञा को एक और हार के पास खडे देख रहा था। रुहान और जीज्ञा की नझरे उपर स्टेज पर ही थी जहा पे अभी तक टीम के कोई भी सदस्य नहीं दिख रहे थे। दोनो बेचैन थे की क्या हुआ होगा या आगे क्या होगा। 

      टीम को स्टेज पर आने थोडी देर लग रही थी इस वजह से वहा बेठी ओडियन्स में चर्चा का दोर शुरु होने लगता है। देरी होने से संजयसिह समझ गया था की उसका षडयंत्र अब सफल हो गया है। नाराज होकर जीज्ञा और रुहान संजयसिह की तरफ गुस्से की नजर से देखते हैं और संजयसिह अभी भी उनकी तरफ देखकर हस रहा था और उन्हें बार बार चिडाने की कोशिश कर रहा था। हसते हसते संजयसिह जीज्ञा और रुहान को देखने के बाद स्टेज के सामने देखता है और अचानक की उनकी हसी गायब हो जाती है और जेसे संजयसिह का मुस्कुराता हुआ चहेरा अचानक ही मुर्झा सा जाता है वेसे ही संजयसिह की तरफ देख रहे रुहान और जीज्ञा समझजाते है की वो अभी तक हारे नहीं है और उसी वक्त दोनो उपर स्टेज की तरफ देखते हैं जहा पे उनको उनके दोनो दोस्त यानी रवी और महावीर टीम के साथ परफोर्मन्स देते हुए नझर आ रहे थे और उस वजह से फिरसे जीज्ञा और रुहान के चहरे पे हसी खील जाती है और फिर दोनो संजयसिह की तरफ देखते हैं लेकिन संजयसिह अपनी जगह उठकर बहार जाने के दरवाजे की तरफ भागने लगता है। 

      रुहान यह तो भाग रहा है मतलब इसी ने कुछ गडबड की थी आइथींक हमे उसे पकडना चाहिए... जीज्ञाने रुहान से कहा। 

      पकडने की जरुरत नहीं है वो ज्यादा दुर नहीं भाग पाएगा क्योकी मेने जीसको काम दिया था वो अपना काम कभी आधा नहीं छोडते देखलो दरवाजे की और... रुहानने दरवाजे की तरफ इशारा करके उस तरफ देखने को बोलते हुए जीज्ञाने कहा। 

      जीज्ञा बहार जाने के दरवाजे की तरफ देखती है तो वहा भागते हुए संजयसिह को रुहाने अब्बा पकड लेते हैं और यह देखकर जीज्ञा संजयसिह का सारा खेल समझ जाती और अपने हाथ के इशारे के द्वारा जीज्ञा मुहम्मद भाई को धन्यवाद कहती है और सामने मुहम्मद भाई भी हस कर उसका उत्तर देते हैं। 

      बेटा तुम लोगो के लिए तो कुछ भी ... मुहम्मद भाईने जीज्ञा के सामने स्माईल करते हुए मन ही मन कहा। 

      संजयसिह को पुलिस हवालार द्वारा पुलीसवेन मे अपने दोस्तों के साथ बिठा दिया जाता है और यही सही लडाई की शुरुआत होनेवाली है जब गुंडा बाप और बेटा संजयसिह जेल में बेठकर रुहान और जीज्ञा की जींदगी को बरबाद करने की साजिश रचेगे। आगे के आनेवाले अंको को पढना ना भुले क्योकी अब हमारी इस फिल्मी नवलकथा का क्लाइमैक्स शुरु होने जा रहा है जीसकी एक झलक आपको अगले अंक मे मिलेगी जहा जीज्ञा और उसके दोस्तों को बहुत बडा झटका लगने वाला है तो पढना ना भुले दो पागल के आनेवाले सारे अंको को और इसे अपने दोस्तों के साथ शेर जरुर करे। 

TO BE CONTINUED NEXT PART... 

|| जय श्री कृष्ण ||

|| श्री कष्टभंजन दादा सत्य है ||

A VARUN S PATEL STORY