दो पागल - कहानी सपने और प्यार की - 10 VARUN S. PATEL द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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दो पागल - कहानी सपने और प्यार की - 10

  अंक १० - गाढ़ दोस्ती  

       नमस्कार दोस्तों आज फिर से हाजिर हु आपकी अपनी कहानी यानी के दो पागल को लेकर। मेरी आपसे एक बिनंती है कि अगर आप आगे के ९ अंक नहीं पढे तो सबसे पहले उस अंको को पढले ताकी आपको यह अंक समझ आए।

शुरुआत

        तो आइए शुरु करते है आज की सफर। आगे हमने देखा की केसे सभी दोस्तो ने एक मस्ती भरी रात पसार की जीसमे हमे रुहान जीज्ञा की दोस्ती भरोसे मे बदलती हुई दीखी, पाचो दोस्त अब एक दुसरे पे भरोसा करने लगे थे। ढेर सारी मस्ती के साथ वो रात बितती है और उसके बाद दो दिन और पसार होते हैं। आज रविवार था। आम तौर पे लडको के कॉलेज होस्टेल मे अपने माता - पिता के मिलने के लिए कोई दिन नहीं होता लेकिन कन्या छात्रालय में हर महीने के पहले रविवार को उनके मात पिता मिलने आ सके एसी व्यवस्था की जाती है। आज वही रविवार था। जीज्ञा और पुर्वी रोज से थोडा ज्यादा जल्दी उठकर तैयार हो गए थे ताकी बडे मजे के साथ वो अपने माता-पिता के आने का इन्तजार कर सके और फिर उनसे मिल सके । जीज्ञा को सिर्फ अपनी मम्मी के आने का ही इन्तजार था क्योकी वो अच्छी तरह से जानती थी की अगर उनके पापा उसको मिलने आ भी गए तो भी वो सिर्फ फोर्मालीटी के लिए ही होंगे।

         दोनो करीब एक घंटे से इंतजार कर रहे थे।

         यार पुर्वी तुझे लगता है कि पापा और मम्मा आएगे... होस्टेल के दरवाजे की तरफ देखते हुए जीज्ञा ने कहा।

         क्यो नहीं आएगे। तु ना यह नेगेटिव सोच अपने अंदर से निकाल दे ठीक है... पुर्वीने जीज्ञा को समझाते हुए कहा।

         अरे बात सकारात्मक और नकारात्मक सोच की नहीं पर मे मेरे पापा को जानती हुं... जीज्ञाने कहा।

         दोनो के बिच संवाद चल रहा था और साथ मे दोनो दुसरी कन्याओ के माता-पिता को आते हुए देख भी रहे थे। थोडी देर और इंतजार करने के बाद दोनो को होस्टल के गेट के बहार से पुर्वी के पापा की कार आती हुइ दीखती है। दोनो अपनी जगह से खडी हो जाती है और गेट की तरफ चलने लगती है। इस तरफ दोनो को अपने माता-पिता को देखने का इंतजार बढ गया था और उस तरफ कार सही जगह पार्क कर के पहले कार में से जीज्ञा के मामा यानी के पुर्वी के पिता बहार निकलते है और फिर पुर्वी के मम्मी। अब जीज्ञा को लग रहा था कि उसकी मम्मा भी कार मे से उतरेगी लेकिन एसा नहीं हुआ जेसा जीज्ञा सोच रही थी। पुर्वी के मम्मी पापा के उतरने के बाद जीज्ञा के मामा कार को लोक कर देते हैं और इस तरफ जीज्ञा अपनी मम्मा को ना देखकर बहुत ही नाराज हो जाती है। पुर्वी अपने माता-पिता के सामने देखने के बजाय जीज्ञा की गायब होती हुइ हसी को देख रही थी।

          पुर्वी के मम्मी पापा कुछ सामान के साथ अंदर जीज्ञा और पुर्वी के पास आते हैं। दोनो पुर्वी के मम्मी पापा के पेर छुते है।

          केसी है मेरी दोनो बेटीया... पुर्वी के पापा ने जीज्ञा और पुर्वी दोनो को आशीर्वाद देते हुए कहा।

          पापा फुआ और फै दुसरी कार में आ रहे है... पुर्वीने जीज्ञा के मनमे जो सवाल चल रहा था वो सवाल अपने पापा से पुछते हुए कहा।

          अरे हा सोरी जीज्ञा उनको कुछ काम आ गया था इसीलिए वो नहीं आ सके। तुम्हारी मम्मी ने यह कुछ सामान भीजवाया है अगर अभी अंदर रखने जाना है तो अभी अंदर रखके आजाओ बाद में शांति से बेठते है और बाद में जाना है तो बाद में जा शक्ति हो... पुर्वी के पापा ने जीज्ञा से कहा।

         नहीं मामा मे अभी सामान रखकर आती हु और बाद में बेठते है। ला पुर्वी तेरा भी सामान दे मे रखकर आती हुं... जीज्ञा ने पुर्वी का सामान भी मांगते हुए कहा।

         अरे नहीं जीज्ञा मे भी आती हुं साथ मे... पुर्वीने जीज्ञा से कहा ।

         नहीं तु बेठ पुर्वी मे पाच मिनट में रखकर आती हुंँ... जीज्ञाने पुर्वी से कहा।

         ठीक है जल्दी आना... जीज्ञा के अंदर का दर्द साफ साफ देखते हुए पुर्वीने कहा।

         हा ठीक है... पुर्वी ने जीज्ञा से कहा।

         पुर्वी निचे अपने माता पिता के साथ होस्टेल के गेस्टरुम मे बेठती है और जीज्ञा दोनो का सामान लेकर अपने रुम की तरफ आगे बढती है। अपने रुम की तरफ जा रही जीज्ञा के आखो में आसु आने के लिए जाने बेताब हो और जीज्ञाने ही उसे रोक के रखे हो एसा लग रहा था। जीज्ञा अपने और पुर्वी के रुम मे पहुचती है। पुर्वी का सामान उसके बेड पर और  खुदका सामान खुद के बेड पर रखके अपने सामान के पास थोडी देर जीज्ञा बेठती है। जीज्ञा की एक आख मे आसु और दुसरी आख मे गुस्सा साफ साफ दिखाई दे रहा था। आखिर मे जीज्ञा की आख मे आसु आ ही जाते है और अपनी जगह पर बेठी जीज्ञा रोने लगती है और गुस्से के साथ अपना सामान अपने बेड पर से साईड मे फेक देती है। जेसे ही जीज्ञा के सामान की बेग गीरती है तो उसमे से एक चिठ्ठी और जीज्ञा की वो नोट्स बहार निकलती है जीसमे जीज्ञाने अपनी खुद की कहानी लिखी हुई थी और जो गीरधनभाई ने कचरे के डिब्बे मे फेक दी थी। जीज्ञा की नजरे उस नोट्स पर और उस चिठ्ठी पर जाती है जो उसकी माँ ने उसके लिए लिखके भेजी थी। जीज्ञा निचे पडे हुए अपने सारे सामान को समेटती हैं और वो उस चिठ्ठी को खोल के पढना शुरु करती है।

         जय श्री कृष्ण बेटा। उम्मीद करती हुं की तु ठीक ही होगी क्योकी मे अपनी गब्बर को जानती हुं वो किसी भी परिस्थिति मे अच्छी ही होगी और हा बेटा मुझे वहा न आने पर माफ कर देना। तेरे पापा का आज हमारे संगठन सभ्यो के द्वारा सम्मानित किया जा रहा है तो हमे इसलिए वहा जाना पडा लेकिन तु फ़िक्र ना कर मेने तेरे पापा से बोल दिया है कि अगले महीने तु दो दिन की छुट्टी लेकर घर आ रही है और हा तेरी सारी किताबे भीजवा रही हुं अपने सपने को खुल के जीना और आने के बाद मुझे कोई अच्छे समाचार देना और हा मेरे गब्बरया रोना मत यह चिठ्ठी पढके ।( इस लाइन को पढते हुए रडती हुई जीज्ञा के चहरे में मुस्कुराहट आ जाती है।) बेटा तेरा फेवरेट हलवा भीजवाया है तो तु और पुर्वी अच्छे से खा लेना। जय श्री कृष्ण खुश रहना और यहा की कोई चिंता ना करना और तु जब तीन साल पढ के आ जाएगी तब तक तो मे तेरे पापा को सुधार लुंगी ... चिठ्ठी के द्वारा जीज्ञा की मम्मीने कहा।

         इसमे भी झुठ बोलना नहीं भुली मम्मा... अपनी माता की प्यार भरी चिठ्ठी पढने के बाद जीज्ञाने अपने आप को कहा।

         इस तरफ जीज्ञा और उसकी मां का चिठ्ठी के द्वारा संवाद चल रहा था तो इस तरफ निचे बेठे हुए पुर्वी और उसके मम्मी पापा भी जीज्ञा के बारे में ही चर्चा कर रहे थे।

         गीरधनलाल भी हंमेशा अपने कुरिवाज अपनी फुल जेसी बेटी पे थोप देते है । आखीर उसकी भी कोई जींदगी होती है... पुर्वी की मम्मीने जीज्ञा के लिए कहा।

         जब तक बहना कुछ नहीं बोलती तब तक हम भी कुछ नहीं कर सकते... पुर्वी के पापा ने कहा।

         पर हमने कोशिश करना अभी तक नहीं छोडा है। हमारा यहा पे एक भरोसेमंद दोस्त जो हमको उसके पहचान वाले डिरेक्टर साहब से मिलाने वाला है फिर देखते हैं कि जीज्ञा का सपना हम केसे पुरा कर सकते है... पुर्वीने अपने पापा मम्मी से कहा।

        जरा ध्यान से बेटा आज कल सभी लोगो पे भरोसा करना सही नहीं है... पुर्वी के पापा ने सावधानी से कहा।

        आप चिंता मत करो पापा वो एकदम भरोसेलायक दोस्त है और कुछ भी अजीब लगेगा तो मे आपको बताउंगी आप बस वहा पे फुआ को कुछ पता ना चले इसका ध्यान रखना... पुर्वीने अपने पापा से कहा।

        तीनो के बिच बाते चल ही रही थी तभी जीज्ञा वहा पे आती है और अपने मामा मामी के साथ बेठती है। थोडी देर सभी के बिच संवाद चलता है और फिर पुर्वी के मम्मी पापा समय होने के बाद वापस अहमदाबाद चले जाते है।

        दुपहर के बाद। रवी के फ्लेट पर तीनो दोस्त इकठ्ठा हुए थे और सभी के बिच मजाक मस्ती चल रही थी। रवी और रुहान दोनो अपने अपने मोबाइल मे व्यस्त थे और महावीर अपने मोबाइल मे टीक टोक पे तेरी प्यारी प्यारी दो अखीया के गाने पर अपना विडियो बना रहा था। कभी अपना मु इधर लाता तो कभी अपना मु उधर ले जाता।

        बे यह क्या कर रहा है कोई मख्खी एसे मारता है... रवीने महावीर की मजाक बनाते हुए कहा।

        ओ भाई तु मजाक ना कर मेरी हम कलाकार लोग हैं क्या टिक टोक पे धुम मचाते है... महावीरने बडे रुआब के साथ रवी से कहा।

        बे तु कब से कलाकार बन गया। अभी तक एक भी विडियो तो अपलोड की नहीं है और बडा बन गया कलाकार ... रवीने कहा।

        बेटा महावीर टिक टोक पे अगर बिना टेलेन्ट कुछ करना है ना तो अच्छा थोबडा चाहिए तुने कभी अपना थोबडा देखा है। हिटलर की फट्टी चड्डी के छेद जेसा लगता है... रुहानने भी महावीर की मजाक बनाते हुए कहा।

        हा तुने हि तो उसकी चड्डीया धोई है ना इसलिए तो तुझे पता है ना... महावीरने रुहान को जवाब देते हुए कहा ।

        हा हमने धोई है पर पता है क्यु क्योकी उसमे तेरा थोबडा दिख रहा था तो हमे लगा अगर धोने से सायद अच्छा हो जाए पर सोरी अच्छा नहीं हुआ... रवीने महावीर के पंच पे दुसरा पंच मारते हुए कहा।

       रवी के इस पंच से रुहान और रवी दोनो हसने लगते हैं।

       हा हा मारो पंच सालो कभी कभी तो एसा ही लगता है कि तुम लोगो ने मेरा मजाक बनाने के लिए ही मुझे इस ग्रुप मे रखा हैं... महावीरने कहा।

       अब मजाक जेसे चहरे वाले का मे क्या मजाक बनाउ... रुहानने फिर से महावीर की खीचाई करते हुए कहा।

       अब यह ज्यादा हो रहा है मुझे अब तुम लोगो के साथ दोस्ती ही नहीं रखनी है ...बहार के दरवाजे की तरफ जाते हुए महावीरने कहा ।

       अरे यह तो लगता है कुछ ज्यादा ही हो गया ... रुहानने जाते हुए महावीर से कहा।

       अरे हा रोक इसे... रवीने कहा।

        ओह मेरे भाई रुक कहा जा रहा है तु। तु तो मेरा अनमोल हिरा है... जाते हुए महावीर को रोकते हुए रुहानने कहा।

        हा रुक जा मेरी आशिकी... पीछे से महावीर को गले लगते हुए रवीने कहा।

        नहीं यार अब तुम लोग मुझे वेफर्स के पेकेट की तरह युझ करने लगे हो। खाया और फेक दिया... महावीरने कहा।

        बे यार तेरे को जाना है ना तो तु जा पर हर बात पे एसे सडे हुए उदाहरण देना जरुरी है... रुहानने महावीर से कहा।

        मान जा यार हम लोग दोस्त है... रवीने कहा।

        मान तो मे तभी गया था जब तुम लोग मुझे मनाने के लिए आए थे क्योकी तुम हरामीओ पर मुझे भरोसा नहीं था की तुम लोग मुझे मनाने आओगे... महावीरने अपने दोनो दोस्तो से कहा।

        महावीर की इस बात को सुनकर दोनो दोस्त महावीर पे हसने लगते हैं।

        बे हस क्यो रहे हो... महावीरने अपने दोनो दोस्तो से कहा ।

        साले हम तो मजाक कर रहे हैं हमे क्या पता तु इतना जल्दी मान जाएगा। चल उस तरफ दरवाजा है... रवीने महावीर से कहा।

        मतलब... वापस बेड की तरफ बेठने के लिए जाते हुए रवी और रुहान को देखते हुए महावीरने कहा।

        जाना है तो जाना क्यु खडे खडे समय बर्बाद कर रहा है... भारी मात्रामे महावीर की खीचाई करते हुए रवीने कहा।

        ओके जा रहा हु मुझे लगा तुम दोनो मुझे रोक लोगे पर... महावीरने कहा ।

        अबे तु कोनसी सीमरन है की हम लोग तुझे जाते हुए रोक ले...रुहानने बेड की तरफ जाते हुए कहा।

        साले सीमरन का बाप लग रहा है... रवीने भी जाते हुए महावीर की खीचाई करते हुए कहा।

        रवी PUBGI कर चल हम लोग खेलते है... रुहानने अपना मोबाइल निकालते हुए कहा। PUBGI वाला वाक्य बोलने के बाद रुहान सामने देखता है कि महावीर गया की नहीं लेकिन सामने उसे कोई भी नहीं दिखता है। थोडी देर के लिए तो रुहान को लगता है कि महावीर चला गया लेकिन...

        यार इस बार पोचींकी मे मत उतारना कोई अच्छा जंगल ढुंडना... रुहान के बाजु में अपने मोबाइल मे PUBGI चालु करके बेठे हुए महावीरने कहा।

        अचानक ही अपने पास महावीर को देखकर रुहान भडक जाता है । 

          बे तु इतना मोटा होके इतना फास्ट... दो मिनट में यहा और तु तो जा रहा था ना... रुहानने कहा।

        मे गेम्स और अपने रिश्तो को मिक्स नहीं करता। गेम अपनी जगह और रिश्ता अपनी जगह। और वेसे भी बहार तो मे तुम दोनो को मार नहीं सकता तो क्यु ना मे पब्जी मे ही तुम दोनो को मार कर अपना गुस्सा शांत कर लु... महावीरने अपने दोस्तों से कहा।

       तीनो दोस्तो के बिच मजाक और खिचाइ चल ही रही थी  तभी रुहान के फोन पर जीज्ञा का फोन आता है। जीज्ञा के फोन के आते ही रवी और महावीर थोडे निराश होते हैं।

        अबे यार रुहान एसा नहीं चलेगा। अगर तुने फोन उठाया ना तो सचमे मे चला जाउंगा... महावीरने रुहान से कहा।

        बे पांच मिनट की तो बात है। बिचारी यहा पे अकेली है अगर कुछ काम हुआ तो... रुहानने कहा।

        हम भी अकेले ही है हमारे यहा कोइ 100 कौरव भाइ नही है जीनके साथ हम रहते हो... रवीने कहा।

        मे तुम दोनो को बाद में समझाता हु प्लीज अभी मुझे फोन उठाकर बात करने दो... इतना बोलकर शांती से बात करने के लिए रुहान बाल्कनी मे चला जाता है ।

        सच ही कहा है किसीने की यह आशीक किसी के नहीं होते... जाते हुए रुहान को देखकर महावीरने कहा।

        किस महापुरुषने कहा है एसा... रवीने महावीर से पुछा।

        बाबा टिक टोक ने कहा एसा... महावीरने कहा।

        बे एसे सडे हुए जोक मारना तु कब बंद करेगा। चल सबकुछ छोड और पोचींकी में उतार रहा हुं किसीको मारना पिछली बार की तरह किसी घर में जाकर छिप मत जाना... रवीने अपनी गेम स्टार्ट करते हुए कहा।

       इस तरफ बाल्कनी मे ।

       बोलिए महोतरमा हम को केसे याद किया... जीज्ञा का फोन उठाकर रुहानने फोन पर कहा।

       बस एसे ही हमे लगा कि लाव जरा चेक कर ले की जनाब क्या कर रहे हैं... जीज्ञाने फोन पर कहा।

       वेसे हम तो समय पसार कर रहे थे लेकिन जब तक तुम अमदाबादीओ को जानते हैं आप लोग एसे ही तो किसी को फोन नहीं करोगे... रुहानने जीज्ञा के इरादे को जानने के लिए कहा।

       कुछ नहीं वो मनीषभाई वाली बात जानने के लिए फोन किया था कि तुमने उनसे बात की... जीज्ञाने कहा।

        अच्छा तो एसी बात है। हा वो मेने बात की थी उन्होने अभी मिलने का तो नहीं बताया बस इतना कहा कि तुम्हारे पास सबसे अच्छी जो कहानी है उसके नोट्स तुम मुझे दे दो मे समय रहते पढ लुंगा । अगर मुझे कहानी अच्छी लगी तो फिर बाद में कुछ मिलनेका प्रोग्राम करते हैं । इसलिए तुम अपनी वो नोट्स मंगवा लो मे फिर मनीषभाई के पास भीजवा दुंगा ...रुहानने जीज्ञा से कहा।

         वो नोट्स आज ही अहमदाबाद से आ गए हैं । बस अब तुम बता दो की मे तुम्हें अभी कहा मिलकर यह नोट्स दे दुं... जीज्ञाने रुहान से कहा।

        अबे तु तो बडी फास्ट निकली... रुहानने कहा।

        फास्ट नहीं मेरे पास समय बहुत कम है तो थोडा फास्ट तो होना पडेगा ना... जीज्ञाने धीमी आवाज मे कहा।

        अरे चल इमोशनल ना हो मे फटाफट मनीषसर से बात करता हुं तब तक तुम लोग एसा करो रवी के रुम पर आजाव मे तुम्हें पता वोट्स एप पे भेजता हुं ... रुहानने कहा।

         सुखरीया रुहान। i am very lucky की मुझे तेरे जेसा दोस्त मिला... जीज्ञाने रुहान से कहा।

         हा पर मे लकी नही हु ना मुझे तेरे जेसी सिर्फ दोस्त ही मिली है काश प्रेमिका मीली होती... रुहानने मजाक मजाक मे अपने दिल की बात करते हुए कहा।

         देख तु मेरे साथ एसा मजाक ना कर यार। मुझे यह प्यार व्यार मे नहीं पडना हम सिर्फ दोस्त ही अच्छे हैं... जीज्ञाने रुहान से कहा।

         तुझे पता है की मे मजाक कर रहा हु तो चिंता क्यु कर रही है। तु यह सब चींता छोड क्योकि जब तक रुहान तेरा दोस्त है तब तक तेरी मरजी के बिना तेरे जीवन में मे कुछ नही होने दुंगा।

         थेन्कस यार तु मेरा इतना ख्याल रखता है इसलिए... जीज्ञाने थोडे से भावुक होकर कहा।

         अच्छा चल तु एसे भावुक ना हो और जल्दी से पुर्वी के साथ रवी के रुम पर आजाओ... रुहानने कहा।

         हा आती हु... जीज्ञाने फोन रखते हुए कहा।

         जेसे रुहान अपनी बात कर के पीछे रुम की और मुडता है तो वहा उसे उसके दोनो कमीने दोस्त दिखाई पडते है।

         बे कमीनो तुम लोग मेरी बातें सुन रहे थे... रुहानने कहा।

         रवी तुझे क्या लग रहा है भाई का हो जाएगा या रेकॉर्ड मे एक और लडकी जुड जाएगी... महावीरने रवी से कहा।

         संभावना कुछ कम है महावीर कुछ कह नहीं सकते... रवीने कहा।

          जो भी हो लेकिन एसी बिंदास और दिल से एकदम मस्त और इतनी खुबसुरत लडकी के साथ तुम रहो और तुम्हें प्यार ना हो एसा कैसा हो सकता है। और हा वो ग्यारह मजाक के लिए थी और जीज्ञा स्पेशयल है... रुहानने अपने दोनो दोस्तो से कहा।

          वो जो भी हो अगर इतनी ही स्पेशियल है तो बेटा जल्दी अपने प्यार का इजहार कर दे वरना आज कल स्पेशियल चिजे ज्यादा जल्दी छीन जाती है... रवीने रुहान के पास आके उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।

          हा लेकिन वो सिर्फ दोस्ती पर ही रहना चाहती है । उसका प्यार व्यार से कुछ लेना देना नहीं है... रुहानने कहा।

          वो उसका प्रश्न हैं वो जाने तु बस अपनी तरफ से प्यार का इजहार कर दे और बाकी जीज्ञा और खुदा पे छोड दे... रवीने समझाते हुए रुहान से कहा।

         हम बात तो सही। चलो देखता हु अगर सही समय मिलता है तो देखकर प्रपोझल दे दुंगा फिर देखेंगे... रुहानने मन में जीज्ञा को प्रपोझ करने का इरादा करते हुए कहा।

         यह हुइ ना शेरो वाली बात मेरे यार... महावीरने रुहान के कंधे पर शाबाशी का थप्पड़ मारते हुए कहा ।

         तीनो दोस्तो का संवाद पुरा होने के कुछ देर बाद जीज्ञा और पुर्वी रिक्षा के द्वारा रवी के रुमवाली सोसायटी पहुचते है। रीक्षा का भाडा देकर दोनो सोसायटी के अंदर रवी के रुम की तरफ आगे बढते है।

        उस रात को जो अंजान आदमी रुहान और उसके दोस्तो का होस्टेल मे घुसने के फोटो खीच रहा था आज वही आदमी जीज्ञा और पुर्वी के रवी के रुम की तरफ जाते हुए और बाद में रुम के अंदर जाते हुए तक के सभी फोटो वो आदमी अपने केमरे में केद कर लेता है। अब इसके पीछे क्या मक़सद है वो तो सिर्फ वो आदमी ही जानता है लेकिन हा मे आपको इतना जरुर बता सकता हुं की इस आदमी के कारण जीज्ञा और जीज्ञा के जीवन में बहुत बडा भुचाल आने वाला है तो आगे देखना मत भुलना आगे के सारे अंको को।

       तो आज के अंक मे बस इतना ही लेकिन आगे के अंक मे हम कहानी के एक महत्वपूर्ण हिस्से को देखेंगे जीसमे रुहान जीज्ञा से प्रपोझ करेगा लेकिन क्या आपको लगता है कि इतनी आसानी से पहले से बहुत ज्यादा समस्याओं मे घिरी हुइ जीज्ञा मानेगी ? अगर जीज्ञाने मना कर दिया तो क्या इसका उन दोनो की दोस्ती मे फर्क पडेगा ? अगर फर्क पडेगा तो क्या इसका फर्क जीज्ञा के सपने पर भी पडेगा ? अगर नहीं पडेगा तो क्या इतनी आसानी से जीज्ञा का सपना पुरा हो जाएगा बिना किसी भुचाल के ? कोन है वो अंजान आदमी जो इन पाचो दोस्तो की हर हरकतो को अपने केमरे में केद कर रहा है ?  संजयसिह अपना बदला पाचो दोस्तों से केसे लेगा। इन सभी रहस्यमय और रसप्रद सवालो के जवाबो के लिए पढते रहे दो पागल के आगे आने वाले सारे अंको को। अगर आपको मेरी कहानी पसंद आ रही है तो प्लीज़ इसे अपने दोस्तों के साथ शेर करना ना भुले। 

TO BE CONTINUED NEXT PART ...

|| जय श्री कृष्णा ||

|| जय कष्टभंजन दादा ||

A VARUN S PATEL STORY