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दो पागल - कहानी सपने और प्यार की - 7

प्रेसिडेन्ट - दो पागल - कहानी सपने और प्यार की अंक ७

   हेल्लो दोस्तो तो कैसे हो आप लोग। मे फिर से हाजिर हु आप सब के बिच आपकी अपनी सबसे मजेदार कहानी को लेकर जीसमे प्यार, ड्रामा सबकुछ है लेकिन इसको पढने से पहले मेरी आपसे एक अपील है कि आप पहले आगे के छे अंक को अगर आपने अभी तक नहीं पढे हैं तो उन अंको को पढ ले और फिर इस अंक को पढना शुरु करे ।

शुरुआत 

       तो आइये शुरु करते है आगे की कहानी । आगे हमने देखा की केसे कॉलेज के प्रेसीडेन्ट के चुनाव को लेकर जीज्ञा, रुहान और संजयसिह के बिच घमासान होती है और केसे रुहान को चुनाव के लिए तैयार किया जाता है। अब आगे।

        समय बितने के साथ कॉलेज के प्रेसीडेन्ट के चुनाव खत्म होते हैं और आज प्रेसीडेन्ट के चुनाव का परिणाम था और परिणाम तो आप जानते ही है कि क्या होने वाला है। रुहान कॉलेज के प्रेसीडेन्ट का चुनाव जीत जाता है और वो प्रेसीडेन्ट बन जाता है। सारे कॉलेज में आज ढोल नगाड़ा बजाकर जश्न मनाया जा रहा था और रुहान को कॉलेज के सभी छात्र अपने कंधो पर बिठाकर नाच रहे थे। उस भीड में छात्रों के कंधे पर बेठा रुहान अपने सभी दोस्तो को देख रहा था जहा पे महावीर, रवी और पुर्वी ही दीख रहे थे जीज्ञा कही भी नहीं दीख रही थी। रुहान सबकुछ छोडकर भीड में जीज्ञा को ढुंड रहा था लेकिन जीज्ञा कही भी नहीं दीख रही थी।

        तीन घंटे बाद । रुहान और उसके दोनो दोस्तो पुर्वी और जीज्ञा को ढुंडते ढुडते केन्टिंग पर पहुचते हैं। चारो तरफ देखते हैं लेकिन जीज्ञा कही भी नहीं दीखती। महावीर को एक कोने में नास्ता कर रही पुर्वी दीख जाती है।

        गाईस वो रही पुर्वी उस कोने में अकेली अकेली नास्ता कर रही हैं... महावीरने कहा।

        हा तो क्या उसकी शादी है कि वो पुरे गाव के साथ नास्ता करने बेठेगी ... रवीने महावीर से कहा।

        तीनो दोस्त पुर्वी के पास जाते हैं।

       ओह हेल्लो पुर्वी...  रुहानने पुर्वी के पास बेठते हुए कहा।

       ओह हेल्लो रुहान खुब खुब अभिनंदन प्रेसीडेन्ट बनने के लिए... पुर्वीने रुहान को शुभेच्छाओ देते हुए कहा।

       थेन्क यु... रुहानने कहा।

       अरे यार पुर्वी अकेले अकेले नास्ता?... महावीरने जो सवाल रवी को किया था वही सवाल करते हुए पुर्वी से कहा।

        हा तो क्या मेरी शादी है कि मे पुरे गाव को खीलाती बेठु ... रवी के जेसा ही उत्तर देते हुए पुर्वीने कहा।

        रवी के जेसा उत्तर देते ही महावीर पुर्वी के चहेरे से अपना मु हटाकर रवी की तरफ देखता है। रवी भी मोटु के  सामने देखकर अपना मु बिगाडता है।

        अरे वो सब छोड पुर्वी जीज्ञा कहा है... रुहानने पुर्वी को सवाल करते हुए कहा।

        ओह हो क्या बात है रुहान साहब आज आपको जीज्ञा की इतनी याद क्यो आ रही है कही इतनी जल्दी आपको उन से प्यार तो नहीं हो गया ना... पुर्वीने रुहान को सवाल करते हुए कहा।

        बे यार तुम लोग अब मुझे ज्यादा ही गलत समझ रहे हो। अगर एसा ही था तो हमको कोई शोख नहीं है आप दोनो के साथ दोस्ती करने का... रुहानने पुर्वीसे कहा।

        अरे यार तु तो बुरा मान गया वो आज नहीं आई है... पुर्वीने कहा।

        हा पर क्यो... रुहानने कहा।

        अरे यार मुझे नहीं पता है तु होस्टेल जा के उसे ही पुछ लेना... पुर्वीने कहा।

        ओके चलो पुर्वी चलते हैं होस्टेल... रुहानने अपनी जगह पे खडे होते हुए कहा ।

        ओह भाई तुझे जाना है तो जा मुझे लेक्चर अटेन्ट करना है... पुर्वीने कहा।

        बे यार पुर्वी चलना लेक्चर तो पुरी जिंदगी चलने वाले हैं... रुहानने कहा।

        हा पुर्वी चलना वेसे भी हम जानते ही है कि हम लोगोने पढके कुछ उखाडना तो है नहीं सीर्फ और सिर्फ नोकरी ही तो करनी है इससे अच्छा ना पढके चाई का ढेला लगाना कम से कम मालिक तो बनेगें... महावीरने पुर्वी की खिंचाई करते हुए कहा।

        ओ चाई वाले अपनी सोच ना तु अपने पास ही रख मुझे पढना है तो तु मुझे पढने दे... जीज्ञाने महावीर से कहा।

         बे तु चिड़ी हुई क्यो रहती है एसे ही रहेगीना तो तेरा तीन साल मे एक भी बोय फ्रेन्ड नहीं होने वाला... रवीने भी पुर्वी को चीडाते हुए कहा।

        देख रुहान इन दोनो को समझा हा यह दोनो कुछ ज्यादा ही बोल रहे हैं... पुर्वीने कहा।

        बे तुम दोनो चुप रहो और हा पुर्वी एक दिन में तेरी कितनी पढाई बिगडेगी। चलना यार जीज्ञा को बुलाते है और कही बहार होटेल मे खाने के लिए चलते हैं और हा तु कुछ ज्यादा सोच ले इससे पहले यह कोई डेट नहीं एसे ही एस अ फ्रेन्ड जाने कि बात कर रहा हुं... रुहानने पुर्वी से कहा।

        पर यार मेरी पढाई...  पुर्वीने अपनी पढाई के बारे मे सोचते हुए कहा।

        बे यार छोडना पुर्वी वो अपने क्लास की सबसे होशियार बन्सी है ना वो मेरी पडौसी है वो तुझे आज के पढाई नोट्स दे देगी... महावीरने अपना मु बिगाडते हुए कहा।

        अच्छा तो वो 200 kg का हाथी तेरा दोस्त है...  पुर्वीने कहा।

        अरे पुर्वी सिर्फ दोस्त नहीं और कुछ भी है... हेना महावीर... रवीने महावीर को अपनी कोनी मारते हुए कहा।

        बे तु मुझे चीडाना बंद कर और हा पुर्वी वो हाथी कोई मेरा दोस्त नहीं है वो सिर्फ और सिर्फ मेरी पडोशन है बस... महावीरने अपना मु बिगाडते हुए कहा।

         वो सब छोडो और पुर्वी अब ज्यादा भाव ना खाते हुए चल ना यार... रुहानने पुर्वी से कहा।

         ओके चलो यार पर हा महावीर वो नोट्स लाने की जिम्मेदारी तेरी हा... पुर्वीने महावीर से कहा।

         सभी दोस्त दो अलग अलग एक्टिवा पर बेठकर जीज्ञा की होस्टेल पे पहुचते है।( एक एक्टिवा तीनो दोस्त और एक एक्टिवा पुर्वी लेकर आती है।)

         तुम लोग यही पे रुको मे जीज्ञा को उस कोने वाली खीडकी पे लेकर आती हु फिर रुहान तु जान और जीज्ञा जाने... इतना बोलकर पुर्वी अंदर होस्टेल में चली जाती है।

         हा ठीक है...  वोचमेन देख ना ले इसलिए पुर्वी को बोलने के बाद रुहान और उसके दोनो दोस्तो उस खीडकी के ठीक सामने जाकर खडे रहते हैं और जीज्ञा का इंतजार करते है। थोडी देर के बाद जीज्ञा और पुर्वी दोनो होस्टेल के कोने वाली खीडकी पे आते हैं और रुहान और जीज्ञा दोनो एक दुसरे को देखकर बहुत खुश होते है ।

         हाय... अपना हाथ जीज्ञा की तरफ हिलाते हुए रुहानने कहा ।

        हाय एन्ड खुब खुब अभिनंदन... अपना हाथ रुहान की तरफ करके और बिना आवाज अपने होठ को हिलाते हुए जीज्ञाने कहा ताकी कोई और सुन ना ले ।

       क्या कुछ सुनाई नहीं दिया... रुहानने न सुनाई देने का इशारा करते हुए जीज्ञा से कहा।

       थोडी देर दोनो के बिच एसे बात-चित चली लेकिन दोनो मे से किसी को भी एक दुसरे की बातें समझ नहीं आ रही थी। फिर जीज्ञा पुर्वी के बेग से एक कागज और पेन निकालती है और उसमे लीखती है और उस कागज का छोटा सा विमान बनाके रुहान की तरफ फेकती है। वो कागज उडते हुए सीधा  रुहान से थोडी दुरी पे गीरता है। रुहान जा के कागज उठाता हैं और उसे पढना शुरु करता है।

        खुब खुब अभिनंदन प्रेसीडेन्ट बनने के लिए और हा मेरा आज मुड ठीक नहीं है जल्दी इस कागज मे लिखकर भेजो जो भी काम हो वो... जीज्ञाने कागज मे लिखकर रुहान को कहा।

       अब रुहान फटाफट वो कागज पढने के बाद महावीर के पास आता है और पेन मांगता है।

       जाडिया पेन देना... रवीने कहा।

       हा मुझे भी अमेरिका जाना है जरा विझा दोना... महावीरने कुछ उलटे तरीके से जवाब देते हुए कहा।

       अबे मे क्या तुझे विझा अम्बेसी वाला लगता हुं... रुहानने कहा।

       हा तो मे क्या तेरे को पढने वाला लगता हुं... महावीरने कहा ।

       बे तु भी गधे के पास घुड सवारी मांगेगा तो थोडी मिलेगी। यह ले... रवीने अपनी बेग में से पेन निकालकर रुहान को देते हुए कहा।

       थेन्कस यार...  कागज में अपनी सारी बाते लिखते हुए रुहानने रवी से कहा।

       कागज मे रुहान अपनी बात लिखकर जीज्ञा और पुर्वी जीस खीडकी पर खडे है उस खीडकी पे रुहान कागज को पथ्थर के साथ लीपटाकर फेकता है।

       जीज्ञा फिर वो कागज उस पथ्थर के उपर से निकालकर पढती है।

        अभिनंदन मे तभी स्वीकार करुंगा जब तुम और पुर्वी हमारे साथ होटेल मे खाने के लिए चलो। और हा मुड की तुम चिंता ना करो। लोगो के मुड को हमे अच्छी तरह से सुधारना आता है... रुहानने कागज मे लिखकर जीज्ञा को कहा।

        रुहान की बातें पढने के बाद जीज्ञा फिरसे उसमे कुछ लिखने लगती है... थोड़ी देर बाद सबकुछ लिखकर उसी पथ्थर के साथ जीज्ञा कागज को वापस रुहान के पास फेकती है। रुहान उस कागज को पथ्थर के साथ पकड लेता है और कागज खोलकर पढने लगता है।

        साला यहा पे एसा लगता है की कोई कोच किसी क्रिकेटर को केच करने की ट्रेनिंग दे रहा हो... महावीरने रुहान और जीज्ञा की हरकते देखते हुए कहा।

       सोरी रुहान पर आज नहीं फिर कभी अभी मेरा मुड ठीक नहीं है समझो यार... जीज्ञाने काजक के द्वारा रुहान को कहा ।

       फिर से रुहान उस कागज मे कुछ लिखता है और फिर से उसे जीज्ञा के पास फेकता है और जीज्ञा उस कागज को पकडकर पढना शुरु करती है।

       यार एसे थोडी चलता है मे तुम्हारे कहने से प्रेसीडेन्ट बन गया और तुम हमारे कहने से साथ मे खाना खाने भी नहीं आ शक्ति। बस ईतनी ही है तुम अमदाबादीओ की मर्दानगी... रुहानने जान बुझकर जीज्ञा को चीडाते हुए कागज के द्वारा कहा।

        जीज्ञा भी फिर से लिखकर वो कागज रुहान की तरफ फेकती है। रुहान वो कागज पकडकर पढता है ।

        ओके बाबा यह सब पैतरे अपनाने की कोई जरुरत नहीं है मे और पुर्वी आ रहे हैं...जीज्ञाने कागज के द्वारा कहा।

         तो एसे जीज्ञा रुहान के साथ खाना खाने के लिए जाने को तैयार हो जाती हैं। जीज्ञा और पुर्वी थोडी देर बाद तैयार हो कर निचे आते हैं और महावीर की एक्टिवा में जीज्ञा और पुर्वी बेठते है और रुहान की एक्टिवा में तीनो दोस्त बेठकर पाचो बरोडा के बहुत ही अच्छे होटेल पर पहुचते है।

         पाचो होटेल के कोनेवाले टेबल पर बेठे थे और उनके बिच दोस्ती वाला संवाद चल रहा था।

         क्या बात है अब तो आप प्रेसीडेन्ट बन गए हो और वो भी बिना प्रचार के... पुर्वीने कहा।

         बिना प्रचार के कहा बरोडा के सबसे बडे गुडे के बेटे के साथ पंगा लेने के बाद मे बना हुं प्रेसीडेन्ट और सभी स्टुडन्टस ने भी मुझे जीतवाने के लिए नहीं परंतु अपनी सुरक्षा के लिए मुझे वोट दिया है ताकी मे जीत जाउ और सजंयसिह हार जाए जीस से किसी को भी सजंयसिह के पन्टर हेरान ना करे... रुहानने कहा।

         जो भी हुआ| हो तो तुम बिना प्रचार वाले प्रेसीडेन्ट ही ना की जीनसे हमारे छात्रो को बहुत उम्मीद है तो क्या मिस्टर रुहान आप बता शक्ते है कि आप उनके लिए क्या क्या करने वाले है अपने कार्यकाल के समय में... जीज्ञाने माईक की जगह पर टेबल पर पडी चमच उठाकर रुहान के मु के पास रखकर रिपोर्टर की तरह सवाल करते हुए कहा।

         जी जरुर मे अपने छात्रो के हर एक हको के लिए लडुंगा और उनकी सभी तरह की सुरक्षा अब मेरी जिम्मेवारी है जेसे की उनकी जातीय सुरक्षा, पढाई की सुरक्षा सभी तरह की सुरक्षा मे अपने छात्रो को दिलाउंगा। अब लडकीओ की सुरक्षा के लिए तो मुझे कुछ करने की जरुरत है नहीं क्योकी आपने जीस तरह से संजयसिह और उनके लोगो को मारा हैं आप सभी अपनी सुरक्षा के लिए काफी है। बस अब मुझे एसे छात्रो की चिंता हैं जो मुझे अपनी समस्या बताने नहीं है तो मुझे यह चिंता हैं कि मे उनकी समस्या जानु कैसे क्या आप मुझे बता सकते है ...रुहानने सामने जीज्ञा को सवाल करते हुए कहा।

         जी जरुर आप सीधा सीधा उनसे जाकर पुछ लो की आपको क्या तकलीफ हैं। आप को पता चल जाएगा... जीज्ञाने रुहान के सवाल का जवाब देते हुए कहा।

         ठीक है तो पुछ लेता हुं । जीज्ञा आपको क्या तकलीफ है... रुहानने यह सवाल जीज्ञा को ही पुछते हुए कहा।

         मतलब। तुम मुझे यह सवाल क्यो कर रहे हो... जीज्ञाने रुहान से कहा।

         क्योकी जीज्ञा तुम्हारी इस हसी के पीछे छुपी हुई सारी तकलीफे मुझे साफ साफ नझर आ रही है... रुहानने कहा।

        आई थींक हमे खाना खाकर चलना चाहिए... जीज्ञाने अपनी बात को पलटते हुए कहा।

        देख जीज्ञा अगर तुझे नहीं बताना है तो मत बता। मुझे लगा कि अब हमारे बीच अच्छी दोस्ती हो चुकी है तो एक दुसरे की तकलीफे समझकर दुर कर सकते है लेकिन सोरी मे इस दोस्ती को कुछ ज्यादा ही सीरीयस समझ बेठा था... रुहानने कहा ।

        रुहान की इस बात के बाद सभी दोस्तो के चहेरे की हसी कुछ देर के लिए ठहर गई थी। जीज्ञा की मायुसी और तकलीफ उसके चहरे पे साफ साफ दिखाई दे रही थी।

       देख जीज्ञा रुहान पर भरोसा कर। रुहान का यह नेचर है वो अपने दोस्तों को कभी दुखी नहीं देख सक्ता। वो हमारी भी तकलीफे समझ लेता है और उसे दुर करने के लिए अपना सबकुछ दाव पे लगा देता है इसलिए अगर कुछ तकलीफ या काम है तो बता दे जीज्ञा हम सब मिलके उसे दुर करने की कोशिश करेंगे... रवीने बडे आराम से जीज्ञा को समझाते हुए कहा।

        जीज्ञा बात तो सही है इन लोगो की। अगर तेरा सपना पुरा करने मे तेरी कोई मदद कर सकता है तो वो यही लोग हैं। हमे इन लोगो पर भरोसा करना चाहिए... पुर्वीने भी जीज्ञा को समझाते हुए कहा ।

         देखो तुम लोग मुझे गलत मत समझो लेकिन मे अपने सपने या अपनी तकलीफे तुम लोगो पर क्यो थोपुं... जीज्ञाने कहा।

        वो इसीलिए कि हम लोग अच्छे दोस्त है और एक दुसरे की तकलीफे दुर करना हमारा फर्ज हैं... महावीरने जीज्ञासे कहा।

        देख जीज्ञा यक़ीन कर हम पर। हम तुम्हारी प्राइवीसी मे कभी नहीं घुसेंगे लेकिन तु अपनी तकलीफ तो बता क्या पता हम ही वो तकलीफ दुर सकते हो... रुहानने जीज्ञा से कहा।

        सभी के समझाने के बाद जींज्ञा अपने सपने और पापा दोनो के बारे मे सबकुछ अपने दोस्तों के साथ शेर करती है। सबकुछ बताने के बाद।

        यार जीज्ञा तेरी लाइफ मे तो बडे झोल है... महावीरने जीज्ञा और उसके पापा के बीच के रिश्ते की बात सुनकर कहा।

         देख जीज्ञा तेरे पापा और तेरे बिच जो भी रिश्ता है उस पे मे तेरी मंजुरी के बिना मे कुछ भी नहीं कहुंगा लेकिन तेरी कहानी को मे डायरेक्टर के पास बडी आसानी से पहुचा सकता हुं अगर तु चाहे तो... रुहानने जीज्ञा से कहा।

        क्या मतलब मे कुछ समझी नहीं ... जीज्ञाने अपनी धीमी सी स्माइल के साथ कहा।

       वही जो तुने सुना मे तुम्हारी लीखी हुइ कहानी को एक प्रसिध्द डायरेक्टर के पास बडी आसानी के साथ पहुचा सकता हुं... रुहानने जीज्ञा से कहा।

       पर कैसे ...24 केरेट वाली स्माइल अपने मु पर लाते हुइ जीज्ञाने कहा।

       वो एसे की मेरा सपना और तुम्हारा सपना एक दुसरे के साथ जुडा हुआ हैं। मे भी एक बडा डायरेक्टर बनना चाहता हुं और अगले साल मे मेरे पापा के दोस्त और प्रसिध्द डिरेक्टर मनीषभाई के साथ असीसटन्ट डायरेक्टर का काम कर के डायरेक्टर का काम सीखने वाला हुं...रुहानने कहा।

       हा पर इस मे मेरा सपना केसे साकार होगा... जीज्ञाने सवाल करते हुए रुहान से कहा।

       वो एसे की तेरा सपना है कि या तो तेरी कहानी पर बुक छपे या तो फिल्म बने और मनीष सर को अभी एक अच्छी कहानी और स्क्रिप्ट की जरुरत है और मे तुम दोनो को मिला दुंगा अगर तुम्हारी कहानी उन्हें अच्छी लगी तो फिर काम बिना संघर्ष के बन सकता है... रुहानने जीज्ञा को संक्षेप रुप से समझाते हुए कहा।

       हा पर वो मुझसे क्यो मिलेंगे और मेरी कहानी क्यो पढेंगे... जीज्ञाने रुहान से फिरसे सवाल करते हुए कहा।

       वो इसीलिए कि वो मेरे पापा के बहुत अच्छे दोस्त है और वो मेरे खास कहने पर तुम्हारी कहानी जरुर पढेंगे भी और अगर कहानी जबरदस्त लगी तो फिल्म भी बनाएगे... रुहानने फिरसे जीज्ञा को समझाते हुए कहा।

       जीज्ञा रुहान के इस प्रपोझल को सुनकर बहुत खुश हो जाती है। इस तरफ जीज्ञा अपने सपने की और बढते हुए कदमो को देखकर बहुत खुश थी तो एक तरफ उन कदमो को खीचने की भी तैयारीया चल रही थी।

       इस तरफ अपनी हार के कारण नशे में धुत अपने घर बेठा संजयसिह अपने बापु को फोन लगाता है। संजयसिह का बापु फोन उठाता है और दोनो के बिच एक छोटासा संवाद होता है ।

       बापु आप कहा हो मुझे आपकी जरुरत है। मे उन दोनो को नहीं छोडुंगा जींदा जला दुंगा... नशे में धुंत सजंयसिहने लडखडाते हुए कहा।

       तुन्हे शराब पी रखी है... संजयसिह के बापुने कहा।

       शराब नहीं यह मेरा गुस्सा है मे मार दुंगा उन दोनो को उन दोनो ने मुझे मेरी कोलेज से भगाया भी और चुनाव भी हरवा दिये... सजंयसिहने फिरसे कहा।

       देख बेटा शांति रख एसे बोखलाने से कुछ नहीं होगा और तु हि मेरे वापस आने की आखरी उम्मीद है तु एसा कोई भी कदम नहीं उठाएगा। तुझे अगर उनको मारना है राजनैतिक तरीके से मार जीससे अपने केरीयर और अपनी छाप दोनो बनी रहे... सजंयसिह के बापुने कहा।

       हा पर केसे मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा बापु... शराब मे लथ-पथ सजंयसिहने कहा।

       देख मे अपने आदमी को तेरे पास भेज रहा हुं पहले तु अपनी शराब का नशा उतार बाद मे मे तुझे बताता हुं कि उन दोनो के साथ कैसे खेलना है... संजयसिह के बापुने कहा।

       सजंयसिह अपना फोन अपने बेड पर फेक देता है और पागलो की तरह कहता है।

       मे तुम दोनो को कभी माफ नहीं करुंगा जीज्ञा और रुहान। मार दुंगा दोनो को... सजंयसिहने अपनी लडखडाती हुइ जबान से कहा।

       तो कुछ एस शुरु होनेवाली है जीज्ञा और रुहान के सपनो की और सजंयसिह के बदले की सफर। अब देखना बडा रसप्रद होगा की क्या इतनी आसानी से जीज्ञा का सपना पुरा कर पायेगा रुहान या फिर कोई और नया ट्वीस्ट कहानी मे आनेवाला है जो भी होगा लेकिन होगा बडा मजेदार पढना मत भुलना आगे आनेवाले बहुत ही भयानक, रसप्रद और जीज्ञा और रुहान की प्रेमगाथा वाले अंक।

       अगर आपको यह कहानी पसंद आ रही है तो प्लीज़ इसे अपने दोस्तों के साथ शेर जरुर करे।

       आगे देखिए सभी दोस्तो का आगे का संवाद और रात में होनेवाली जीज्ञा, पुर्वी, महावीर, रवी और रुहान की मजाक मस्ती और एक खास ट्वीस्ट की शरुआत जो जीज्ञा और रुहान के जीवन में भुचाल बनकर आनेवाला है ।

TO BE CONTINUED NEXT PART ...

|| जय श्री कृष्णा ||

|| जय कष्टभंजन दादा ||

A VARUN S PATEL STORY

 

 

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