दो पागल - कहानी सपने और प्यार की - 11 VARUN S. PATEL द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

दो पागल - कहानी सपने और प्यार की - 11

 अंक ११ प्रपोझ 

       हेल्लो दोस्तो तो आज फिर हाजीर हु मे आपकी अपनी कहानी दो पागल का एक और अंक के साथ लेकिन आप ने अभी तक आगे के सारे अंको को नहीं पढा है तो अभी पढ़े उन अंको को । अगर आपको कहनी पसंंद आए तो इसे अपने दोस्तों के साथ शेर जरुर करे । आज पढ़े प्रपोझ और इनकार के डर का सफ़र |

शुरुआत 

       आपने आगे देखा की केसे जीज्ञा और पुर्वी रवी के रुम पर पहुचते है और वहा कोइ उन दोनो की फोटो खीच रहा था। अब रविवार का दिन बितता है। रुहान जीज्ञा से जीज्ञा के सारे नोट्स लेकर अपनी पहचान वाले डिरेक्टर मनीषभाई के पास पहुचा देता है और फिर जीज्ञा, रुहान और उनके सारे दोस्तों को मनीषभाई के जवाब का इंतजार था। करीब एक हप्ता बितता है। इस एक हप्ते मे सारे दोस्तों ने मिलकर बहुत धमाल मस्ती की थी। जीज्ञा और पुर्वी को रुहान और उसके दोनो दोस्त बरोडा की सारी खाने कि डिसो का स्वाद चखाते है। कभी मोल मे घुमने के लिए चले जाते तो कभी फनवर्ड मे। एक हप्ता पुरा सभी ने घुमने में लगा दिया था। पुर्वी को ना चाहते हुए भी जीज्ञा के लिए अपनी पढाई छोड के घुमने के लिए जाना पडता। रोज रोज एसा नहीं होता था कभी कभी सुबह कोलेज और दुपहर के बाद घुमना फिरना होता था। इन दिनो की मस्तीया एक दुसरे का साथ यह सबकुछ जीज्ञा और रुहान को ओर नजदीक ला रहा था। रुहान के दोनो दोस्त बार बार रुहान को समझा रहे थे की जल्दी से जीज्ञा को प्रपोझ कर दे वरना कभी नहीं कर पाएगा। रुहान अपने दोस्तों की बात सुनकर कभी कभी जीज्ञा को प्रपोझ करने की कोशिश करता लेकिन जीज्ञा से दोस्ती तुट जाने के डर से वो कभी प्रपोझ नही कर पाता था। अब देखते हैं आगे की रुहान कब जीज्ञा को प्रपोझ कर पाता है।

        पुरा हप्ता बित गया था लेकिन अभी तक मनीषभाई ने जीज्ञा की कहानी पर कोई जवाब अब तक नहीं दिया था। जीज्ञा और पुर्वी दोनो अपनी होस्टेल के टेरीस पर बेठे हुए थे और दोनो के बिच संवाद चल रहा था।

        क्या मनीषसर को मेरी कहानी नही अच्छी लगी होगी। एक हप्ता हो गया। ना तो मनीषभाई ने कुछ उत्तर दिया है और ना तो मनीषभाई रुहान का फोन उठा रहे हैं ... चिंता करते हुए जीज्ञाने कहा।

        देख तु एसा सोचना बंद कर यार बडे डिरेक्टर है। अपने काम मे व्यस्त होंगे तो अभी तक उन्होने तेरी कहानी को नहीं पढा होगा। लेकिन मुझे पुरा भरोसा है कि जब वो तेरी कहानी पढने बेठेंगे तो एक ही बार मे पुरी पढ लेंगे और तुम्हे मिलने के लिए भी जरुर बुलाएगे ... पुर्वीने जीज्ञा को समझाते हुए कहा।

       सायद एसा ही हो... जीज्ञाने कहा ।

       दोनो के बिच संवाद चल ही रहा था तभी जीज्ञा के फोन मे रुहान का फोन आता है। जीज्ञा रुहान का फोन उठाती है।

       हेल्लो बोल रुहान... रुहान के फोन को उठाते ही जीज्ञाने कहा।

       जीज्ञा सोच आज मे कोनसी खुश खबरी देनेवाला हुं... रुहानने फोन मे जीज्ञासे कहा।

       मुझे क्या पता और वेसे भी मेरा मुड थोडा सा डाउन है तो प्लीज़ यह पहली बुझाना बंद कर और बता क्या बात है... जीज्ञाने कहा।

       तो आज इस खुबखबर से तेरा मुड जरुर ठिक हो जाएगा तो सुन मनीषभाईने तेरी कहानी पढ ली है और हम दोनो को उनके घर पे मिलने के लिए अभी बुलाया हैं... रुहानने खुशखबर सुनाते हुए फोन से कहा।

       बे तु ना मेरे साथ मजाक ना किया कर अभी रात को कोन सा डिरेक्टर मिलने के लिए बुलाता है... जीज्ञाने कहा।

       यार तुम लडकीया सीधे तरीके से मानती क्यो नही हो ...रुहानने कहा।

       क्योकी तुम लडको को दिन रात पार्टी करने के अलावा कुछ सुझता तो है नहीं और तुम्हें पता है अब हम रात को पार्टी के लिए तैयार होंगे नही इसलिए आपको आज नया बहाना आझमाना पड रहा है... जीज्ञाने कहा ।

        यार बडी अजीब होती हो तुम लडकीया... रुहानने कहा।

        सबुत दे की यह बात सच है... जीज्ञाने कहा।

        यार अम्मी कसम खा के बोल रहा हुं की आज अभी मनीषभाईने हमे मीलने के लिए बुलाया हैं... रुहानने जीज्ञा को सबुत के तौर पे अपनी अम्मी की कसम खाते हुए कहा।

       अम्मी कसम मतलब तु सच बोल रहा है... जीज्ञा खुश होकर कहती है।

        हा मेरी मा मे एकदम सच बोल रहा हुं और मे तुम्हारी होस्टेल के पीछे वाले पीपल के पेड के निचे अपनी बुलट के साथ खडा हु जल्दी निचे आजा कोई भी बहाना बताए बिना क्योकि आज ही मीलना जरुरी है कल मनीषभाई out of country जा रहे हैं... इतना बोल के रुहान अपना फोन कट कर देता है।

        जीज्ञा को जीस जवाब का इंतजार था अब वो मिलने वाला था। जीज्ञा बहुत खुश थी। अपना फोन निचे रखकर पुर्वी के दोनो हाथ पकडकर बहुत खुश होकर सबकुछ जीज्ञा पुर्वी को बताती हैं ।

         हा लेकिन इतनी रात में तुझे अकेले केसे जाने दुं... पुर्वीने कहा।

         अरे अकेली थोडी हुं रुहान भी तो साथ मे आ रहा है और तु ना ज्यादा चिंता ना कर मे जल्दी जाकर जल्दी आती हु तु बस यहा पे अगर किसीको पता चले या कोई भी गडबड हो तो मुझे फोन कर देना और अब वो पुरा पीपल का पेड उतरना है... जीज्ञाने पुर्वी से कहा।

         अरे पीपल का पेड क्यो उतरेगी सीधा गेट से जाना वेसे भी वो तेरे उन विडियो से डरता है... पुर्वीने कहा।

         सही है लेकिन वहा पे केमेरा लगे हुए इसलिए मुझे इस पेड से होकर ही जाना होगा... जीज्ञाने कहा।

         दोनो उस खीडकी के पास जाती हैं जहा से पीपल के पेड की डाली पर चड के होस्टेल के बहार भी जाया जा सके और अंदर भी आया जा सके। जीज्ञा धीरे से अपने आपको संभालते हुए पीपल के पेड से रुहान की सहायता के साथ निचे उतरती है।

         अरे वाह नई रोयल बुलेट ... जीज्ञाने रुहान की बुलट को देखते हुए कहा।

          हा वो पापा ने अपने लिए बहुत समय से खरीद के रखी थी लेकिन अब वो पुरे दिन काम मे व्यस्त रहते हैं तो इसे मे ही घुमाने ले जाता हु... रुहानने अपनी नई बुलट के बारे मे बताते हुए कहा।

         अच्छा क्या मे इसे चला शक्ति हुं... जीज्ञाने कहा।

         तुम्हें आता है चलाना... रुहानने कहा।

         हा वो मे अपनी दोस्त की बाइक पापा से छुप छुपकर सीखती थी... जीज्ञाने रुहान से कहा।

         तो फिर चलालो मे तुम्हारे पीछे बेठ जाता हु... रुहानने अपनी बुलेट की चाबी देते हुए कहा।

         जीज्ञा बुलेट की चाबी लेकर उस पे बेठकर बुलट चालु करती है और फिर रुहान उसके पीछे बेठता हैं और दोनो मनीषभाई के घर पे जाने के लिए निकलते है।

         आज फिर वो अंजान आदमी दोनो की फोटो खीच रहा था जीसमे जीज्ञा बुलेट चला रही है और रुहान पीछे बेठा हुआ है। अब उस आदमी का इसके पीछे का मक़सद क्या था वो तो वही जाने लेकिन वो आदमी संजयसिह नही था।

         जीज्ञा और रुहान दोनो मनीषभाई के घर की और जा रहे थे। रुहानने बुलेट के पीछेवाली पाइप को अपने दोनो हाथो से पकडकर जीज्ञा और उसके बिच थोडा सी जगह रहे एसे बेठा हुआ था ताकी कोइ भी गढ्ढा आए या जीज्ञा ब्रेक लगाए तो रुहान जीज्ञा को स्पर्श ना कर जाए इसलिए वो बुलेट के पीछे वाली पाइप पकडके बेठा हुआ था। रुहान जीज्ञा की बहुत रीस्पेक्ट करता था।

         अच्छा रुहान यह बता की मनीषभाई का बोलने का टोन तुझे केसा लग रहा था... बुलेट चलाते हुए जीज्ञाने कहा।

         मतलब... रुहानने कहा।

         अरे मतलब यह की वो खुश थे या मुड एसा-वेसा था... जीज्ञाने कहा ।

         अब ठीक ही होंगे फोन पर केसे पता चलेगा की केसे है... पीछे जीज्ञा से थोडा दुर पीछे वाली पाइप पकडकर बेठे हुए रुहानने कहा।

         दोनो मनीषभाई के घर पे पहुचते है। घर की बेल बजाते है और मनीषभाई खुद आकर घर का दरवाज़ा खोलते है ।

         अरे रुहान आजा आजा... अंदर बुलाते हुए मनीषभाईने कहा ।

         जी। केसे हो मनीष अंकल... अंदर जाते हुए मनीषभाई को पुछते हुए रुहानने कहा ।

         एकदम बढिया बस तु यह बता तेरा अब्बा आज कहा खोए हुए है न तो फोन करते है या न तो उठाते है... मनीषभाईने अपने घर के होल में सोफे पर बेठते हुए कहा।

         अंकल आप तो जानते ही हो उनकी आज कल की हालत वो मुझसे भी बिना काम के ज्यादा बात नहीं करते... रुहानने भी सोफे पर बेठते हुए कहा। रुहान और जीज्ञा दोनो सोफे पर बेठते है।

        अरे स्वेता बच्चो के लिए कुछ दुध की आइटम ले के आ... अपनी पत्नी को बोलते हुए मनीषभाई ने कहा ।

        अरे नहीं अंकल रहने दो अभी घर से खाके ही आए है... रुहानने कहा।

         नहीं एसे थोडी चलेगा एक तो दो महिनो मे एकबार आते हो और वो भी काम से और कुछ ठंडा पिने के लिए भी मना कर रहे हो...रुहान से मनीषभाईने कहा।

        अरे हा सर यह जीज्ञा है वो जीसकी कहानी आपको मेने दि थी और आपने मीलने को कहा था वो... रुहानने जीज्ञा का परिचय देते हुए कहा ।

        नमस्ते सर... जीज्ञाने मनीषभाई से कहा।

        अरे हा मेने वो आपकी कहानी पढी "मे और पापा"। क्या कहानी लीखी है मतलब आपने इस मे पापा और बेटी का इतना अच्छा रिश्ता दिखाया है की आदमी इसे अगर पढेगा या तो बडे परदे पर इस फिल्म के स्वरुप मे देखेगा तो वो १००% भावुक हो जाएगा। मतलब ब्रिलीयन्ट... मनीषसरने कहा।

         धन्यवाद सर अपना समय निकालकर मेरी कहानी को पढने के लिए... जीज्ञाने मनीषभाई को कहा।

          अरे धन्यवाद मत कहो आपकी कहानी की लिखावट ही इतनी अच्छी है कि कोई नहीं बता सकता कि इस कहानी की लेखिका अभी उम्र मे इतनी छोटी है और बिनअनुभवी... मनीषभाईने कहा।

         तो मतलब मेने जो आप से बात की थी वो हो सकता है अंकल... रुहानने कहा।

         देखो रुहान वो हो तो सकता है लेकिन इस कहानी से हम या तो एक शोर्ट फिल्म बना सकते हैं या तो हम इसके उपर किताब छाप सकते हैं लेकिन मेरा जीज्ञा से यह कहना है कि इस कहानी को थोडा और विस्तार पुर्वक लिखे और फिर मुझे ठिक एक महीने के बाद दे तो हम उस पर फिल्म बनाने का कुछ सोच सकते हैं अगर जीज्ञाजी आपको मंजुर हो तो... मनीषभाईने जीज्ञा और रुहान दोनो को बताते हुए कहा।

         हा सर मे एक महीने में इसे और विस्तार पुर्वक लिखके आपको दे सकती हु...जीज्ञाने कहा।

         तो ठिक है इसे और विस्तार से लिख लो और फिर मुझे देदो मे पढने के बाद अगर सब सही रहता है और कोइ बदलाव की जरुरत नहीं रहती तो हम इस कहानी को आपके नाम से रजिस्टर करवा देंगे और फिर हम इस कहानी को खरीदकर इस पर एक अच्छी सी फिल्म बनाएंगे। आज कल कहानीओ का मिलना बडा आसान है लेकिन लोगो के दिलो मे बस जाए एसी कहानी बहुत कम मिलती है और यह लोगो के दिल में बस जाने वाली कहानी तुमने लीखी है इसलिए मे इसे यु ही पडे रखना नहीं चाहुंगा। तो रुहान तुम भी तैयार हो जाव अपनी डायरेक्टरी का काम सीखने के लिए... मनीषभाईने जीज्ञा और रुहान से कहा।

        मनीषभाई की इस बात को सुनकर जीज्ञा की आखो में आसु आ जाते हैं। जीज्ञा बहुत ही भावुक हो जाती है।

        सुखरीया सर मुझको एक चान्स देने के लिए और मेरी इस कहानी पर भरोसा करने के लिए... जीज्ञाने मनीषभाई से कहा।

        अरे मेने आपको कोई चान्स नहीं दिया है आपको आपकी कहानी ने चान्स दिया है। हम बहुत दिनो से मुवी के लिए एक अच्छी सी कहानी ढुंड रहे थे पर हमे मिल नही रही थी तो आपके कारण हमे एक अच्छी कहानी मिली है और आज के जमाने में एक अच्छा कन्टेन्ट मिला है... मनीषभाईने अपना बड़प्पन दिखाते हुए कहा।

         फिर भी मेरे जेसे छोटे लेखक के लिए आपने अपना समय निकाला और इस कहानी को पढा यही बडी बात है तो सुखरीया तो बनता है... जीज्ञाने कहा।

         अरे हा उसके लिए अगर सुखरीया करना है तो अपने इस दोस्त रुहान को करो क्योकी यह बडे वक्त से मेरे पीछे पड गया था कि अंकल आपको इस कहानी को पढना ही है। क्योकी बेटा आज कल इस लाइन मे लोगो को डिरेक्टर को अपनी कहानी सुनाने के लिए बडा संघर्ष करना पडता है क्योकि बिनअनुभवी पर कोई आदमी भरोसा नहीं करता लेकिन तुम्हारे इस दोस्त के कारण तुम्हें बडी आसानी से यह मोका मिल गया है तो सुखरीया कहना है तो उसे कहो... मनीषभाईने कहा।

          हा सर वो तो है इसने मेरी बडी मदद की है। थेन्कस रुहान... जीज्ञाने कहा।

          अभी रहने दो अपना थेन्कस जब हम मुवी पुरी कर लेना तो उसके बाद कहना यह थेन्कस... रुहानने कहा।

         यह लो जीज्ञा तुम्हारी नोटबुक। मे आज अमरीका जा रहा हुं जब वापस आजाउ तब मे तुम्हारे पास पुरी कहानी विस्तार मे मांगुगा ठीक है... मनीषभाई ने अपने टेबल पर पडी नोट्स को जीज्ञा की तरफ रखते हुए कहा।

         एकदम ठीक है जरुर मे तब तक बडी अच्छी तरह से इसे विस्तार पुर्वक लिख लुंगी... जीज्ञाने टेबल पर से अपनी बुक लेते हुए कहा।

         तीनो के बिच संवाद चल ही रहा था तभी मनीषभाई की पत्नी तीनो को दुध कोलड्रिन्क लाके देती है।

         केसे हो रुहान... मनीषभाई की पत्नी ने कहा।

        एकदम मजे में आंटी... रुहानने कहा।

         हेल्लो केसी हो बेटा बडी अच्छी कहानी लिखी है तुमने ... दुध कोलड्रिन्क का गिलास देते हुए मनीषभाई की पन्नीने कहा।

         आपने पढी कहानी आन्टी ?... जीज्ञाने अपना गिलास लेते हुए कहा।

         अरे उसीने तो मुझे पढकर सुनाइ थी... मनीषभाईने कहा।

         एक बार फिर धन्यवाद... जीज्ञाने कहा।

         अरे नहीं अभी धन्यवाद के लिए जगह नहीं है वो क्या अभी दो घंटे बाद मेरी फ्लाइट है तो ज्यादा कुछ खाना नही चाहिए इसलिए धन्यवाद का बाद में रखते हैं... मनीषभाईने फिर से जीज्ञा को धन्यवाद न बोलने के लिए कहा।

         ठीक है अंकल तो हम लोग अब चलते हैं... रुहानने कहा।

         ठीक है तो मिलते हैं और हा जीज्ञा कही पे कीसी भी तरह की तकलीफे हो रुहान को बता देना वो मुझे फोन करके बता देगा और उस तकलीफ को हम मिलकर सोल्व कर लेंगे... मनीषभाईने कहा।

         ठिक है अंकल... इतना बोलकर जीज्ञा बहार जाने के दरवाजे की तरफ आगे बढती है।

         रुहान और जीज्ञा दोनो बहार जाने के लिए दरवाजे की तरफ आगे बढते है। जीज्ञा दरवाजे से बहार चली जाती है और जेसे ही रुहान बहार जाने कि कोशीष करता है तभी पीछे से मनीषभाई रुहान को बोलते हैं।

         रुहान... जाते हुए रुहान को पीछे से मनीषभाईने कहा।

         हा अंकल बोलीएना... पीछे मुडकर रुहानने कहा।

         अच्छी लडकी है अगर तुम उसे प्यार करते हो तो इसे कभी छोडना मत क्योकी सभी लेखक को की अच्छी सोच उसकी कहानीओ मे झलकती है और जीज्ञा की सोच को मेने पढा है बहुत ही अच्छी और सच्ची लडकी है यह जीज्ञा... मनीषभाईने कहा।

         वो तो है देखते हैं अंकल क्या होता है आज प्रपोझ मारने की ट्राय करता हुं... जाते हुए रुहानने कहा।

         अब दोनो मनीषभाई के घर से बहार आ गए थे। जीज्ञा आज सायद अपने जीवन में सबसे ज्यादा खुश थी और वो खुशी के मारे उछलने लगी थी। उछलते उछलते जीज्ञा रुहान को गले लगा लेती है और यह तस्वीर उस अंजान आदमी के केमरे में केद हो जाती है।

         बहुत बहुत धन्यवाद यार। आज तेरे कारण मे जीवन में सबसे ज्यादा खुश हुं... जीज्ञाने रुहान से कहा।

         हा लेकिन अभी थोडा कंट्रोल में क्योकी आगे इससे बडी और भी खुशीया तुम्हारे जीवन में आनेवाली है... रुहानने अपने बुलट को स्टार्ट करने की कोशिश करते हुए कहा।

         हा वो तो है... जीज्ञाने कहा।

         अरे इसको क्या हो गया यह स्टार्ट क्यों नही हो रहा... रुहानने बार बार अपनी बुलेट की किक मारते हुए और सेल्फ स्टार्ट करते हुए कहा।

         चलो फिर चल के जाते हैं। आज खुशी का पेट्रोल मेरे अंदर इतना भरा हुआ है कि होस्टेल तो क्या आज तो मे अहमदाबाद चलकर चली जाउ... जीज्ञाने अपनी खुशी के मारे कहा।

         तो फिर ठीक है चलो... रुहानने कहा ।

         दोनो चलकर होस्टल की तरफ जाना शुरु करते है। दोनो के बिच चलते चलते संवाद की शरुआत होती है।

         रुहान आज तुने मुझे जींदगी का सबसे बडा तोफा दिया है अगर हम दोनो के बिच किसी कारणवश लडाइ हो जाए और गलती मेरी ना हो तो भी मे उस गलती को भुलकर हमारी दोस्ती को बढाए रखुंगी... जीज्ञाने रुहान से कहा।

         मे एसा कभी होने ही नहीं दुंगा की गलती मेरी हो और तुम अपने आप को झुकाकर इस दोस्ती वाले संबंध को आगे बढा...रुहानने कहा।

         दोनो बाते करते हुए जीज्ञा की होस्टेल की तरफ जा रहे थे। रुहान बार बार जीज्ञा को प्रपोझ करने की कोशिश कर चुका था लेकिन आज रुहान के पास मोका था कि वो जीज्ञा को प्रपोझ भी कर दे और जीज्ञा को अगर रुहान का यह प्रपोझ वाला बर्ताव अच्छा ना लगे तो जीज्ञा रुहान का बुरा भी न माने क्योकी वो अभी रुहान की एक गलती माफ कर देने की बात कर चुकी थी।

         अच्छा तुने अभी कहा की मेने कभी कोई गलती की तो भी तुम उस गलती की वजह से हमारी इस दोस्ती को टुट ने नहीं दोगी ठीक है... अपना बुलेट पकडकर चलते हुए रुहानने जीज्ञा से कहा।

         हा पर अगर गलती बहुत बडी हुइ तो सिर्फ एक ही बार माफ करुंगी... जीज्ञाने रुहान के सवाल का जवाब देते हुए कहा।

         हा पर एक तो करोगी ना... रुहानने कहा।

         हा जरुर क्यु नही पर तुम गलती की क्यों सोच रहे हो... जीज्ञाने कहा।

         अगर मे वो गलती अभी करना चाहु तो... चलते चलते रुककर रुहानने कहा।

         दोनो चलते चलते रुक जाते हैं।

         क्या मतलब तुम कहना क्या चाहते हो... जीज्ञाने रुहान से कहा।

         अब मे गलती करने जा रहा हुं प्लीज़ मुझे माफ कर देना... अपने बुलेट को स्टेन्ड पे रखते हुए और जीज्ञा को उस बुलेट के आधार पर खडा रखकर रुहान जीज्ञा के बिलकुल सामने घुटने पे बेठता है और आखीरकार रुहान जीज्ञा को प्रपोझ कर ही देता है।

         जीज्ञा मेरी अम्मी के जाने के बाद मेरी जींदगी मोबाइल की उस गेम एप की तरह हो गई है जो एप मोबाइल मे इनस्टोल जरुर है लेकिन उसके डाटा डिलीट हो गए हैं इसलिए वो एप चल नहीं रहा है तो क्या तुम मेरे मोबाइल एपरुपी जीवन में वो डाटा बनकर मुझे फिर से स्टार्ट कर शक्ति हो प्लीज़। आइ लव यु जीज्ञा। जीज्ञा अगर तुझे इस प्रपोझल का जवाब देना है तो ठिक है लेकिन अगर तेरी ना हैं तो प्लीज़ तुन्हे जेसे वादा किया था वेसे मुझसे अपनी दोस्ती ना तोडना और बस इस पाच मिनट को भुल जाना और आगे बढना ... आखीर मे रुहानने जीज्ञा को प्रपोझ करते हुए कहा।

         आखिरकार बहुत दिनो के बाद रुहानने जीज्ञा को प्रपोझ कर ही दिया। अब देखना होगा की क्या जीज्ञा रुहान का प्रपोझल स्वीकार करेगी या फिर रुहान और जीज्ञा को प्यार करने के लिए और भी मुसीबतो से गुजरना होगा। जीज्ञा का जवाब क्या है वो तो आपको आगे के आनेवाले अंक मे जरुर पता लग जाएगा लेकिन उस अंजान आदमी जो लगातार जीज्ञा और रुहान की फोटो ले रहा है उसके पीछे का रहस्य क्या है ? क्या जीज्ञा आगे रुहान के प्रपोझल को स्वीकार लेती है तो क्या उसके पिता और माता इस बात का स्वीकार करेगे ? क्या सच मे आपको लगता है कि इतनी आसानी से जीज्ञा का सपना पुर्ण हो जाएगा तो मे आपको बता दुं कि आगे हमारी कहानी मे जीज्ञा के सपनो को लेकर और जीज्ञा और रुहान के प्यार को लेकर बडा ट्वीस्ट आने वाला है और यह कहानी और भी मनोरंजक होनेवाली है तो पढते रहीएगा हमारी कहानी के आनेवाले सारे अंको को ओर हमारे साथ जुडे रहीएगा ताकी आप ओर मनोरंजक कहानीओ को पढ सके।

         दोस्तों अगर आपको मेरी कहानी अच्छी लगी हो तो प्लीज़ इसे अपने दोस्तों के साथ शेर करना ना भुले।

TO BE CONTINUED NEXT PART ...

|| जय श्री कृष्णा ||

|| जय कष्टभंजन दादा ||

A VARUN S PATEL STORY