कहानी प्यार कि - 33 Dr Mehta Mansi द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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कहानी प्यार कि - 33

अगली सुबह किंजल की आंख देर से खुली.. उठने के बाद वो सीधा सीढ़ियों से नीचे आई तो वो करन को होल में बैठा देखकर हैरान रह गई...

करन किंजल को देखकर तुरंत खड़ा हो गया...

" करन तुम यहां और वो भी इस वक्त ? "

" हा वो तुमसे कुछ बात करनी थी..." करन थोड़ा अटकता हुआ बोला..

" हा बोलो ना..."

" वो आंटी नही है घर पर ? " करन को कुछ समझ नही आ रहा था की वो क्या बोले...

" नही वो मेरी नानी के पास गई है कुछ दिनों के लिए..."

" ओह.. ओके..."
इतना बोलने के बाद करन चुप हो गया... किंजल को कुछ अजीब लग रहा था करन का इस तरह का बर्ताव देखकर..

" करन तुम कुछ कह रहे थे ? "

" हा .. हा वो में यह कह रहा था की.. आई एम सोरी..." करन एक ही सांस में सोरी बोल गया..

" सोरी बट वाय ? "

" वो कल जो हुआ... वो मैने ड्रिंक किया था और मुझे कुछ होश नही था .. तो नशे में मैने तुमसे कुछ कहा हो या कुछ किया हो तो उसके लिए सोरी..." करन ने शर्म से सिर जुकाते हुए कहा..

किंजल यह सुनकर मन में बहुत ही खुश हो गई..

" नही करन तुमने ऐसा कुछ नही किया की तुम्हे उसके लिए माफी मांगनी पड़े... "

" फिर भी आई एम सोरी .." इतना बोलकर करन वहा से चला गया... किंजल तो सिर्फ उसे देखती ही रह गई..

इस तरफ ओब्रॉय कंपनी के मीटिंग हॉल में कंपनी के सभी इंपोर्टेंट लोग मौजूद थे... किसीको पता नही था की अनिरुद्ध ने यह मीटिंग किसलिए बुलाई है...

सभी अपने अपने हिसाब से अंदाजा लगा रहे थे और आपस में बात कर रहे थे..

" भाई साहब ये अनिरूद हम सबको अर्जेंटली यहां बुलाकर खुद कहा रह गया ? " मनीष अंकल ने एक बार और दरवाजे की तरफ देखते हुए कहा..

" कुछ पता नही ... यह लड़का कब क्या करता है कुछ समझ नही आता..."

" जस्ट चील पापा .. अनिरूद्ध बस आ ही रहा है उसके आने के बाद सब पता चल जायेगा.." सौरभ ने वहा आते हुए कहा और फिर आराम से अपनी जगह पर बैठ गया...

तभी अनिरुद्ध होल में दाखिल हुआ... सब उसे देखकर खड़े हो गए...

" थैंक यू आप सब मेरे कहने पर इतने जल्दी यहां पर आ गए.. "

" पर बेटा अनिरुद्ध तुम ने यह मीटिंग रखी किस लिए है? " अखिल अंकल ने पूछा..

" वो एक बहुत बड़ी अनाउंसमेंट करने के लिए मैंने आप सबको यहां बुलाया है..."

" पर कैसी अनाउंसमेंट..? " मनीष चाचू ने आगे आते हुए पूछा..

यह सुनकर अनिरुद्ध मनीष अंकल को देखकर मुस्कुराया और उनके पास आया..

" आप सब तो जानते है की कल जो बहुत बड़ा प्रोजेक्ट हमे मिला है.. उसके लिए चाचू ने कितनी ज्यादा मेहनत की है.. और इतना ही नहीं कंपनी के हर छोटे से बड़े काम में उनका योगदान होता है.. आज हमारी कंपनी जहां पर है उसे वहा तक पहुंचाने में चाचू का बहुत बड़ा हाथ है.. इसीलिए में अनिरुद्ध ओब्रॉय आज यह अनाउंस करना चाहता हु की में इस कंपनी के अपने फोर्टी परसेंट शेयर्स में से ट्वेंटी पर्सेंट शेयर्स मनीष चाचू के नाम करता हु..." और अनिरूद्ध ने कागज मनीष चाचू के हाथ में दिए..

सब यह सुनकर शॉक्ड थे... मनीष चाचू को तो अपने कान पर विश्वास ही नहीं हुआ
तभी सौरभ ने ताली बजानी शुरू की और इसके साथ सब लोग ताली बजाने लगे..

यह देखकर मनीष चाचू की आंखे भर आई .. उन्होंने अनिरुद्ध को गले लगा लिया...
" इसकी क्या जरूरत थी अनिरुद्ध...!"

" नही चाचू यू डिजर्व ईट... "

फिर सबने मनीष चाचू को बधाईयां दी...
अनिरूद्ध भी मनीष चाचू को देखकर खुश था..

तभी वहा मोहित आ गया.. अनिरूद्ध को बिजी देखकर मोहित वही रूक गया.. तभी वहा से सौरभ गुजर रहा था..

" अरे मोहित आप यहां ? "

" हा सौरभ वो कुछ काम था..."

" ओह.. कहिए ना ... क्या काम था ? "

" क्या हम केबिन में जाकर बात कर सकते है ? "

" हा जरूर चलिए...."

सौरभ मोहित को अपनी केबिन में ले गया..

" अब कहिए मोहित ..."

" वो में कुछ इन्फॉर्मेशन जानना चाहता था क्या तुम मुझे बता सकते हो ? "

" हा क्यों नही आप तो घर के ही है.. बताइए आप किसकी इन्फोर्मेशन जानना चाहते है ? "

" जतिन खन्ना की... "

" क्या ? वो तो डेड के दोस्त है.. आप उनके बारे में क्यों जानना चाहते है ? "

" वो में तुम्हे अभी नही बता सकता हु.. तुम सिर्फ ये बताओ की क्या तुम मुझे उनके बारे में बता सकते हो या नही ? "

" हा ठीक है.. जतिन खन्ना मेरे डेड के दोस्त है हमारी कंपनी के कुछ शेयर्स उनके पास भी है.. वो यहां आते रहते है .. "

" उनकी बेटी है कोई ? "

" हा उनकी बेटी है ना पर वो तो लंडन में है..."

" लंडन में ? पर अंजली लंडन में कैसे हो सकती है... शायद ये लड़की कोई और होगी " मोहित मन में ही अंदाजा लगा रहा था..

" क्या हुआ मोहित .. ? "

" नही कुछ नही.. हा ये बताओ उनकी बेटी का नाम क्या है ? "

" अंजली खन्ना... "

" अंजली खन्ना ? पर अंजली की सरनेम तो जोशी थी.. पक्का ये मेरी वाली अंजली नही हैं में भी वो यहां क्यों आएगी...! " मोहित ने उदासी के साथ मन में कहा..

" ठीक है सौरभ थैंक यू... अभी में चलता हु "

" हा.. कुछ काम हो तो मुझे फोन कर देना ... एनी टाइम.." सौरभ ने मुस्कुराते हुए कहा.

" ठीक है " बोलकर मोहित वहा से चला गया...


मोहित बाहर जा ही रहा था की उसे अनिरुद्ध ने रोक लिया

" अरे मोहित आप जा रहे हो और वो भी मुझसे मिले बिना...? "

अनिरूद्ध ने मोहित को रोकते हुए कहा..

" अरे अनिरुद्ध.. नही नही.. में तुमसे मिलने आया था पर तुम बिजी थे तो तुम्हे डिस्टर्ब नहीं किया.."

" आई एम सोरी मुझे पता नही था .."

" इट्स ओके... में जिस काम से आया था वो हो गया है सौरभ ने कर दिया है .."

" ओह ग्रेट... वैसे में आपको फोन करने ही वाला था.. अच्छा हुआ आप यही मिल गए..."

" हा बोलो ना..."

" आज शाम को हमारे घर पे पार्टी है.. सिर्फ फैमिली और कुछ दोस्त होंगे... तो आप मम्मी पापा सब को लेकर आ जाना हा और किंजल को भी लेते आना..."

" जरूर.. वैसे ये तुमने बहुत अच्छा किया.. मनीष अंकल यह डिजर्व करते है.. उनको मेरी और से बहुत सारी बधाईयां... "

" थैंक्स मोहित.. बस इसी वजह से मैंने पार्टी रखी है.. आप सब टाइम पर आ जाना..."

" ठीक है ... बाय..."

मोहित के जाते ही अनिरुद्ध ने जतिन खन्ना को कोल किया...
" हेलो अंकल .. वो आज शाम को पार्टी रखी है तो आप अपनी पूरी फैमिली के साथ आ जाना... "

" ओके अनिरुद्ध बेटा.. "

" हा और अंजली को भी लेते आना..."

" हा हा जरूर " उन्होंने हस्ते हुए कहा और फोन रख दिया...

" सुनो अंजली बेटा यहां आओ..." जतिन खन्ना ने अंजली को आवाज लगाते हुए कहा..

" जी पापा "

" आज शाम को हमे ओब्रॉय मेंशन जाना है पार्टी में .. तो तुम और विनीता तैयार रहना ..."

" क्या ओब्रॉय मेंशन में पार्टी ... ओह नो वहा तो मोहित भी होगा.. अब क्या करू में..." अंजली को अब कुछ समझ नही आ रहा था की वो क्या करे..

" अंजली क्या सोच रही हो बेटा... ? "

" कुछ नही पापा .. सुनिए पापा वो में कह रही थी की आप और मम्मा चले जाइए ना मेरा मन नहीं है आज "

" क्यों मन क्यों नही है तेरा..? और तुझे तो आना ही है अनिरुद्ध ने खास तुम्हे लाने के लिए कहा है.. पिछली बार रिसेप्शन पार्टी में भी तुम नही आई थी.. और में उन्हें कह चुका हु अब तुम्हे आना ही पड़ेगा " जतिन जी ने थोड़ी कड़क आवाज में कहा और फिर वो काम के लिए बाहर चले गए..

" हे भगवान ये कहा फसा दिया आपने.. अब में क्या करूंगी...! पापा तो मानेंगे नही.. और पार्टी में मोहित के सामने में आ नही सकती.. मोहित या पापा को एक दूसरे के बारे में पता चल गया तो क्या होगा..? दोनो तो मुझे कच्चा चबा जायेंगे..." अंजली की परेशानी अब और ज्यादा बढ़ गई थी..

" ये अकडू कही दिखाई क्यों नही दे रहा है ... ! चला गया क्या ? ठीक तो होगा ना .. उस मोनाली को तो में छोडूंगी नही.. पता नही क्यों हमारे बीच में टपक पड़ी.. है" किंजल गुस्से में बोलते हुए बालकनी से करन के घर में झांक रही थी..

तभी करन उसे घर के बाहर जाता हुआ दिखाई दिया..
" करन..." किंजल ने करन को रोकते हुए कहा..

पर करन ने मानो सुना ही नही वो तो गाड़ी में बैठकर निकल गया..

" बेहरा कहिका..जरूर जानबूजकर किया है ..कल के बारे में बात नही करना चाहता होगा .. कोई बात नही में मासी के घर चलती हु.. फिर वही से पार्टी में चली जाऊंगी.. हा ये ठीक रहेगा..चल बेटा किंजल.." बोलकर किंजल जल्दी से तैयार होकर स्कूटी लेकर निकल गई..

दोपहर को सौरभ घर पे खाना खाने आया था..
संजना को देखकर उसे मोहित के बारे में याद आया..

" अरे संजना... मोहित आए थे आज ..."

" क्या सच में ? " संजना ने खुश होते हुए कहा..

" हा.. पर वो कुछ परेशान लग रहे थे और कुछ इन्फॉर्मेशन जानने के लिए आए थे.."

यह सुनकर संजना की खुशी पल में गायब हो गई..
" परेशान लग रहे थे ! और किसकी इन्फोर्मेशन जानना चाहते थे ? "

" जतिन खन्ना की ..."

" व्हाट ? वो तो अंकल के फ्रेंड हैं ना भाई उनके बारे में क्यों जानना चाहते होंगे..? "

" मैने पूछा उनसे पर मुझे कुछ कहा नहीं और हा उनकी बेटी अंजली के बारे में भी पूछ रहे थे.. उनका कोई चक्कर बक्कर तो नही था ना ? " सौरभ ने थोड़ी मस्ती के साथ कहा..

" सौरभ ये क्या बोल रहे हो.. ऐसा कुछ नही है .. " संजना ने थोड़ा गुस्से से कहा .. और वो खड़ी होके जाने लगी..

" सोरी संजना में तो सिर्फ मजाक कर रहा था .. अरे ! चली गई... कोई बात नही सौरभ तुम ये खाना खत्म करो पहले..फिर देखते है ." सौरभ ने अपने आप से ही कहा और फिर खाना खाने लगा..


🥰 क्रमश: 🥰