कहानी प्यार कि - 2 Dr Mehta Mansi द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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कहानी प्यार कि - 2

मीरा के कहने पर संजना नीचे होल मे आ गई ।
रागीनिजी : बेटा तुम दोनो बाजार जा कर कुछ सामान ले आओ.. अब शादी नजदीक है .. तो तैयारियां भी बहुत करनी है..
मीरा : हा आंटी .. हम जा रहे है..
संजना : मीरा प्लीज़ .. मेरा मन नहीं है..
मीरा : इसलिए तो कह रही हूं .. बाहर जाके तुम्हारा मूड ठीक हो जाएगा .. चलो ..
संजना : ठीक है चलो।

दोनो सहेलियां बाजार तरफ जाने लगी। अचानक संजना को लगा कि कोई उसका पीछा कर रहा है। उसने पीछे मूड के देखा तो वहां पर कोई नहीं था। थोड़ी देर बाद फिर उसे ये एहसास हुआ कि पिछे कोई है। वो तुंरत पीछे मुड़ी..

" अनिरूद्ध....! " अनजाने में ही उसके मुंह से ये शब्द निकल गया।
मीरा : क्या हुआ संजू?
संजना : पता नहीं पर एसा लगा कि जैसे अनिरूद्ध हमारा पीछा कर रहा था।
मीरा : वो क्यों आएगा यहां ? और तुम्हारा पीछा क्यों करेगा?
संजना : वो पहले यही तो करता था.. तुम तो अच्छी तरह से जानती हो ना.. मीरा..

संजना को वो सब बात याद आने लगी कि कैसे अनिरूद्ध हर रोज संजना का पीछा करता और उसके पीछे चल के उससे बातें करता। संजना सिर्फ उसे सुनती और मुस्कुराया करती , पर उससे बात नहीं करती। धीरे धीरे संजना को अनिरुद्ध की आदत सी होने लगी थी। कब उसकी ये आदत प्यार में बदल गई उसे पता ही नहीं चला था। एसे ही तो उसके प्यार कि शुरुआत हुई थी बस वो अनिरूद्घ को बोल नहीं पाती थी।

मीरा : ओ ये कहा खो जाती है बार बार तू ? कब से कह रही हूं चलो ..
संजना : ओह.. आई एम सोरी..

चलते चलते संजना मन में बोल रही थी
" तुम्हारी हर जगह इतनी यादे है कि कोई भी जगह जाऊ साथ साथ आ ही जाती है "

थोड़ा सामान खरीद के संजना और मीरा घर आ गई। मीरा को कुछ काम से बाहर जाना था तो वो संजना को घर छोड़ कर निकल गई। संजना को अभी भी कुछ ठीक नहीं लग रहा था इसलिए वो कमरे में जाकर लेट गई।

संजना अनिरुद्ध का फोटो हाथ मे लिए ही उसको याद करते हुए सो गई थी। तभी मोहित उसके कमरे मे आया। उसने अनिरुद्ध की फोटो संजना के हाथ से छुड़ाई और दूसरी और रख दि। संजना की आंखो की कोरो में फंसे हुए आंसू उसे बता रहे थे कि वो रोती हुईं ही सो गई थी। उसने संजना को ब्लेंकेट ओढाया और फिर कमरे से बाहर आ गया। उसकी आंखें लाल हो गई थी.. उसे सब कुछ धुंधला दिखाई देने लगा था.. जैसे अभी उसके आंखो में कैद आंसू छलक जाएंगे ।

" मेरी बहन के एक एक आंसू का बदला लूंगा में तुमसे.. मेरी बहन को बहुत दर्द पहुंचाया है तुम ने .. एक दिन ऐसा नहीं बीता होगा कि वो रोई ना हो... बस कुछ समय और...और फिर मुझे तुम्हे तुम्हारे किए कि सजा देने से कोई नहीं रोक पाएगा , जिस दर्द से में गुजर रहा हूं उस दर्द से में मेरी बहन को कभी नहीं गुजरने दूंगा।" उसने गुस्से में अपनी मुठ्ठी कसली और वहा से चला गया।

एसे ही दो दिन बीत गए । दोनो ही घरों में शादी कि तैयारियां शुरू हो चुकी थी। आज संजना रागिनी जी और उसकी सहेली मीरा के साथ शादी का जोड़ा लेने मोल मे पहुंच चुकी थी।
वो लोग मोल मे एक बड़ी सी शॉप में गए जहां हर तरफ खूबसूरत सी साडीया और लहेंगे नजर आ रहे थे। वो सब ने एक एक करके सब साड़ियां और लहेंगे देखने लगे।

" मैडम आप को कौन से रंग का लहेंगा दिखाऊं ? " स्टाफ गर्ल ने संजना से पूछा.

" वो पिंक कलर का दिखाईए " संजना ने कहा और तभी उसके चहेरे पर मुस्कुराहट आ गई।
उसे सगाई कि शॉपिंग वाला दिन याद आ गया था ।

" देखो ना अनिरुद्ध... इसमें से में कौन सा लहेंगा लू ? " संजना को कुछ समझ नहीं आ रहा था इसलिए उसने अनिरुद्ध को लहंगे दिखाते हुए पूछा

" ये पिंक वाला... बड़ी ही खूबसूरत लगती हो .. इस पिंक कलर मे.. में तो कहता हूं की तुम सगाई के लिए .. हमारी हल्दी , महेंदि और शादी के लिए भी पिंक ही कलर का सब कुछ खरीद लो ... और हा हमारी सुहागरात के लिए भी.. बड़ी ही कातिल लगोगी " अनिरूद्ध ने लास्ट वाली लाइन धीरे से संजना के कानों कहीं थी ।

" तुम भी ना कहीं पे भी शुरू हो जाते हो.. " संजना ने शरमाते हुए अनिरुद्ध को हल्के से हाथ मार दिया था।

" अरे ! इसमें ग़लत क्या है .. अब मुझे मेरी होने वाली दुल्हन को इसी कलर मे देखना है तो उसमे मेरा क्या कुसूर ? "

" अब तुमने हल्दी मे किसी को पिंक कलर मे देखा है कभी ? "

" नहीं "

" तो फिर .. और हर रस्म मे एक ही कलर पहनूंगी तो सारे फोटो तो एक जैसे ही आएंगे ना ! " संजना ने मुंह बनाते हुए कहा।

" अच्छा ठीक है तुम्हे जो पहनना है पहनो पर शादी वाले दिन मुझे तुम सिर्फ पिंक कलर के जोड़े में चाहिए .. नहीं तो मे शादी नहीं करूंगा समझी " अनिरूद्ध की बात पर संजना को हसी आ गई।
" ओके डन ..." संजना ने हसते हुए कहा।

" मैडम कहा खो गई आप ...." उस लड़की ने संजना को मुस्कुराते हुए देखा तो पूछ लिया..

" हा..." संजना ने एकदम चौकते हुए कहा। वो अपने ख़यालो से बाहर आई और उस लड़की से कहा

" मुझे ये वाला लहेंगा पसंद है " संजना ने एक बहुत ही खूबसूरत पिंक कलर का लहेंगा निकाला था। ये देखते ही वो लड़की बोली,

" अरे वाह ! ये तो बहुत ही सुंदर है ..आप पर बहुत अच्छा लगेगा.. मे तो आप को पहले ही कहने वाली थी कि आप पर पिंक कलर ही ज्यादा अच्छा लगेगा.." उसकी बात सुनकर संजना के चहेरे पर भी स्माइल आ गई...

" एसे ही मुस्कुराते रहिए , बहुत ही प्यारी लगती है आप " उस लड़की ने कहा और संजना ने भी उसकी बात सुनकर हा मे अपना सिर हिला दिया।

कुछ देर बाद सब सारी शॉपिंग निपटाकर घर चले गए। संजना अपने कमरे में बैठी हुई अभी अभी शॉपिंग करके लाए हुए कपड़े देख रही थी।

" कितनी अजीब बात है ना अनिरूद्घ .. तुम कितनी जिद कर रहे थे कि में पिंक कलर का शादी का जोड़ा पहनूंगी तभी तुम मुझ से शादी करोगे..देखो तुम्हारी ख्वाइश भी में पूरी कर रही हूं पर तुम .. तुम तो हो ही नहीं मेरे पास " वो अपने नए वाले पिंक लहेंगे को देखते हुए बाते किए जा रही थी।

" उस दिन तुम कितने खुश थे , सगाई वाले दिन मुझे देखने के लिए सबसे छुपकर मुझे मिलने आए थे .. "

( सगाई वाले दिन )

सगाई के कुछ घंटे पहले संजना अपने कमरे में तैयार हो रही थी। उसने लाइट पिंक कलर का बहुत ही खूबसूरत सा आउटफिट पहना हुआ था। अपने लंबे , सिल्की बाल खुले ही छोड़ दिए थे .. चहेरे पर हल्का सा मेकअप .. माथे पर छोटी सी बिंदी , हाथो मे चूड़ियां , पैरो मे पायल .. गले में छोटा सा पेंडेंट .. वो बहुत ही प्यारी लग रही थी।

नीचे होल मे सगाई के लिए बड़ा सा पांडाल लगाया गया था। अनिरुद्ध भी अपने दोस्तो के साथ वहा पहोंच चुका था। उसने भी लाइट पिंक कलर की शेरवानी पहनी हुई थी। वो बहुत ही हेंडसम लग रहा था । उसके मम्मी पापा नहीं थे.. वो बचपन से ही अपने दोस्त सौरभ के साथ बड़ा हुआ था। वो ही उसका परिवार था।

अनिरुद्ध होल में बेचैन सा इधर उधर चक्कर लगा रहा था। उसे कब से संजना को देखना था पर वो उसे कहीं दिख ही नहीं रही थी। सौरभ ने उसे एसे देखा तो कहा..
" अरे मेरे भाई इतना ही बैचेन है तो जाके उससे मिल लेना एक बार "

" नहीं मिल सकता ... मे गया था उसके कमरे के पास पर वो सब लड़कियों ने मुझे जाने ही नहीं दिया " अनिरूद्घ का मुंह उतर गया था। पर उसकी बात सुनकर सौरभ कि हसी छूट गई। वो जोर जोर से हसने लगा।

" अबे साले! तू क्या खी खी कर रहा है.. मे यहां परेशान हूं और तू मेरा ही मजा ले रहा है बे..तेरा भी टाइम आएगा.. " अनिरूद्ध ने आंखे दिखाते हुए सौरभ से कहा।

" अरे पर में क्या करू अब .. तूझे तेरी सालिया अंदर जाने नहीं दे रही है तो.. ! " सौरभ को अनिरूद्ध कि ये हालत देखकर हसी आ रही थी

" तू ना किसी काम का नहीं है .. अब मुझे ही कुछ करना पड़ेगा " अनिरूद्ध ने कहा और वहां से चला गया।
वो टेरेस पर गया और वहा से इधर उधर पैर टिकाते हुए संजना के कमरे कि बालकनी में आ गया। उसने बालकनी का दरवाजा खटखटाया ।

" अरे ! अब यहां से कौन दरवाजा खटखटाया रहा है " संजना दरवाजे कि तरफ जाते हुए बोली..

उसने जैसे ही दरवाजा खोला तो अनिरूद्घ को देखकर चौंक गई...
" तुम ? " वो जोर से चीखी...

" अरे क्या कर रही हो...धीमे बोलो कोई सुन लेगा " अनिरूद्ध ने संजना के मुंह पर हाथ रख दिया

" तुम यहां क्या कर रहे हो? " संजना ने धीमे से पूछा।
" तुम्हे देखने के लिए आया हूं " अनिरूद्ध ने उसके कमर मे हाथ डालते हुए उसे अपने पास खींच लिया था

उसके खींचते ही संजना अनिरुद्ध के बहुत करीब आ गई। दोनो एकदुसरे कि आंखो मे देख रहे थे। जैसे दोनो कि ही आंखे तरस गई थी एक दूसरे को देखने के लिए।
" बहुत ही खूबसूरत लग रही हो" अनिरूद्ध ने संजना की आंखो मे देखते हुए ही कहा।

" खूबसूरत मै नहीं , ये तुम्हारा इश्क़ है ..
जो नुर बनकर मेरी आंखो से छलकता है.."
संजना ने कहा और ये सुनते ही अनिरुद्ध भी मुस्कुरा उठा।

" वैसे तुम भी हैंडसम लग रहे हो " संजना ने अनिरुद्ध की शेरवानी की कोलर ठीक करते हुए कहा। "

पर अनिरुद्ध ने तो कुछ सुना ही नहीं वो तो बस बड़े ही प्यार से उसकी आंखो मे देखे जा रहा था। अनिरुद्ध को एसे खुद को निहारते हुए देखकर उसे बैचेनी होने लगी थी। उसकी दिल की धड़कने तेज होने लगी थी...

" तुम .. एसे क्यों देख रहे हो..." संजना ने थोड़ी घबराहट के साथ अनिरुद्ध से पूछा..

" तुम्हारी वजह से...." अनिरुद्ध ने कहा..

" मे.. में.. समझी नहीं कुछ..." संजना की धड़कने और तेज होने लगी थी। वो अनिरुद्ध को अपनी बड़ी बड़ी आंखो से एकटक देख रही थी। अनिरुद्ध अपना मुंह उसी कि तरफ बढ़ाए जा रहा था।

" अब तुम एसे अपनी ये बड़ी बड़ी मासूम सी आंखो से मुझे देखोगी तो मेरा दिल भी बगावत पे उतर जायेगा ना... " ये सुनते ही संजना ने अपनी नजरें जूका ली।

" किसी ने तुम्हे नजर का टीका लगाया या नहीं ? " अनिरुद्ध ने संजना के चहेरे को अपने हाथो मे भरते हुए पूछा।

संजना ने ना मे अपना सिर हिला दिया।
" लो बताओ .. किसी को ये भी याद नहीं रहा.. सब वहा पहेरा लगाए खड़े है कि कहीं मे अंदर ना आ जाऊं पर जो जरूरी काम है वो तो याद ही नहीं किसीको..कोई बात नहीं ये अधूरा काम मे पूरा कर देता हूं.. मे नहीं चाहता कि मेरी जान को कोई नजर लगाए .."
बोलते हुए
अनिरुद्ध ने धीरे से पास रखी हुई काजल उठाई और उसे अपने हाथो मे लेकर हल्के से संजना के गरदन के पीछे काला टीका लगा दिया।

" बस अब ठीक है.. लगा दिया मैंने नजर का टीका .. अब तुम्हे किसी कि भी नजर नहीं लगेगी "
ये सुनते ही संजना भी मुस्कुरा उठी।

अनिरुद्ध ने संजना को अपने गले से लगा लिया।
थोड़ी देर तक दोनो एसे ही खड़े रहे।

" अनिरुद्ध अब तुम जाओ.. अब सगाई का मुहूर्त होने ही वाला है .. हम तब मिलेंगे ना .. ठीक है.."

संजना ने अनिरुद्ध से थोड़ा दूर होते हुए कहा।

" तुमसे ना मेरी खुशी देखी ही नहीं जाती.. कितना सुकून था अभी अभी.. पर जाने कि बात कहकर फिर से मेरा सुकून छीन लिया क्या पता ये हमारी आखरी मुलाकात हो.. ये जिंदगी का कुछ भरोसा नहीं " अनिरूद्ध ने मुंह बिगाड़ते हुए कहा।

" अनिरूद्घ.... खबरदार एसा फिर कभी कुछ कहा है तो..."

" अच्छा बाबा सोरी गुस्सा मत करो ..पर तुम्हे छोड़ के जाने का मन नहीं कर रहा .." अनिरूद्ध ने उतरा हुआ मुंह बनाते हुए कहा।

" हा पर यहां से जाओगे तभी वहा हम सगाई के मंडप में मिलेंगे ना "

" ठीक है ठीक है जाता हूं " अनिरूद्ध ने कहा और वो दरवाजे कि तरफ जाने लगा।

" अरे रुको ....उधर कहा जा रहे हो .. वहा से जाओ जहां से आए थे " संजना ने अनिरुद्ध को रोकते हुए कहा।

" अगर वहां से जाते हुए मेरी हड्डियां टूट गई तो...तुम्हे मेरी परवाह ही नहीं है क्या .. देख लो भगवान ये शादी से पहले मुझ से क्या क्या करवा रही है..एक अब्ला नार पर ये नारी का अत्याचार तो देखो... आप कि आंखो से पानी नहीं आ रहा क्या भगवान..! " अनिरूद्ध रोती हुई शक्ल बनाते हुए भगवान को हाथ जोड़ते हुए नौटंकी किए जा रहा था

"भगवान तुम्हारी ये नौटंकी देख कर आंसू नहीं बल्कि हस रहे होंगे समझे.. और हा मैने नहीं कहा था तुम्हे टेरेस से बालकनी मे आने को.. .. तुम खुद आए थे .. और तुम दरवाजे से गए तो तो हम दोनों कि तो खेर नहीं.. इसलिए ये नौटंकी बंद करो और चुपचाप जाओ " संजना ने उसे डांटते हुए कहा तो अनिरुद्ध उसे आंखे दिखाते हुए वहा से चला गया।

( वर्तमान मे )

" तुम तो उस दिन कितने खुश थे अनिरुद्ध...पर मुझ से मिलने के बाद एसा क्या हो गया कि तुम मुझे छोड़कर चले गए। मेरे कमरे से जाने के बाद किसी ने तुम्हे नहीं देखा। सगाई के वक्त में में तुम्हारा इंतजार कर रही थी पर तुम वहा आए ही नहीं। तुम्हारे कमरे से मुझे सिर्फ तुम्हारा लिखा हुआ नोट मिला.. इस एक घंटे ने कितना कुछ बदल दिया.. हमने तुम्हे बहुत ढूंढा पर तुम कहीं नहीं मिले.. तुम हो कहां ..? अब तो शादी के कुछ ही दिन बचे है... प्लीज़ वापस आ जाओ ... मे तुमसे बहुत प्यार करती हूं.. मे तुम्हारा इंतजार करूंगी .. जब तक ये सांसे है तब तक करूंगी.. प्लीज आ जाओ नहीं तो मे हमेशा हमेशा के लिए किसी और कि अमानत हो जाऊंगी। " कहते कहते उसका गला भर आया था।

" तेरे लिबास से मोहब्बत कि है ,
तेरे एहसास से मोहब्बत कि है ,
तू मेरे पास नहीं फिर भी ,
मैंने तेरी याद से मोहब्बत कि है ,
जिनमे हो सिर्फ तेरी और मेरी बाते ,
मैंने उन अल्फ़ाज़ से मोहब्बत कि है,
जो महकते है तेरी मोहब्बत से ,
मैंने उन जज़्बात से मोहब्बत कि है ,
तुम से मिलना तो अब एक ख्वाब लगता है,
इसलिए मैंने तेरे इंतजार से मोहब्बत कि है।"


🥰 क्रमशः 🥰