कहानी प्यार कि - 7 Dr Mehta Mansi द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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कहानी प्यार कि - 7

अगले दिन सुबह जैसे अनिरुद्ध ने सोचा था वैसे ही उसकी तबीयत खराब हो गई थी। और वो मन ही मन खुद को कोस रहा था कि उसने क्यों ये चैलेंज लगाई। मेडिसीन लेने के बाद दोपहर तक उसकी तबीयत ठीक हो गई थी।

वो आइने के सामने गया और तैयार होने लगा। उसने एक रबर फेस मास्क निकाला और चेहरे पे पहन लिया । फिर तैयार होके बाहर चला गया।

इस तरफ संजना के घर शादी कि तैयारियां हो रही थी। अब बहुत काम वक्त बचा था। एक दिन बाद शादी कि रस्मे शुरू होने वाली थी। संजना कि मा , मोहित और संजना के पापा होल मे बैठकर महेमानो कि लिस्ट बना रहे थे।

तभी दरवाजे कि घंटी बजी।

" मे देखता हूं .." मोहित ने कहा और वो दरवाजा खोल ने चला गया।

उसने दरवाजा खोला तो सामने खड़े हुए इंसान को देखकर खुश हो गया..
" मि. ओब्रोय आप ? "

" हा मे कुछ काम से आया हूं.." अनिरूद्ध ने कहा।

" आइए ना..." मोहित उनको अंदर लेके आया।

राजेश जी और रागिनी जी अनिरूद्ध को देख रहे थे और सोच रहे थे कि ये कौन है भला?

तभी मोहित बोला..

" पापा .. ये अनिरूद्ध ओब्रॉय है ओब्रॉय फार्मा इंडस्ट्री के ऑनर ..हमारी मीटिंग थी एक हफ्ते पहले इनके साथ...वो.. "

ये सुनकर राजेश जी और रागिनिजी खड़े हो गए..
" आप ख़ुद हमारे घर आए ये तो हमारे लिऐ बहुत ही खुशी कि बात है .. " राजेश जी ने हाथ जोड़ते हुए कहा।

" अरे मि. सिंघानिया ये क्या कर रहें है आप.. आप मुझ से बड़े है.. "

" आइए ना बैठिए..." मोहित ने कहा।

" मोहित मे आपको ये बताने के लिए यहां आया हूं कि हमारी जो मीटिंग हुई थी उसके बाद हमने ये तय किया है कि हमारी नई कंपनी जो दिल्ली मे बनने वाली है उसका कॉन्ट्रैक्ट हम आप कि सिंघानिया कंस्ट्रक्शन कंपनी को देना चाहते हैं.."

अनिरूद्घ के मुंह से ये बात सुनकर मोहित और राजेश जी दोनो ही खुश हो गए।

" थैंक यू मि. ऑब्रोय.. थैंक यू सो मच.. " मोहित ने खुश होते हुए कहा।

" मे अभी कुछ मीठा लेके आती हूं.." रागिनी जी ने कहा और वो भी खुश होती हुईं किचन मे चली गई।

" मि. ऑब्रोय आप का बहुत बहुत शुक्रिया.." राजेशजी ने फिर से हाथ जोड़ते हुए कहा।

" शुक्रिया कि कोई जरूरत नहीं है.. ये सब आप ही लोगो कि महेनत है.. वैसे मे मीटिंग में था तो नहीं पर अखिल अंकल कह रहे थे कि आप ने जो प्रेजेंटेशन दिया था उसे देख कर कोई भी आपको मना नहीं कर सकता था.." अनिरूद्ध कि बात सुनकर मोहित और भी खुश हो गया ।

" वो प्रेजेंटेशन मेरी बहन ने तैयार किया था.. बहुत ही टैलेंटेड है वो.." मोहित को संजना पर बहुत ही प्राउड हो रहा था।

" ओह that's great... तो तो मुझे मिलना पड़ेगा आपकी टैलेंटेड सिस्टर से.."

" हा वो अभी आती ही होगी.." राजेशजी बोले और उपर देखने लगे के संजना अभी तक नीचे क्यों नहीं आई।

" वैसे आपकी ये स्माइल देखने के लिए ही मै खुद यहां आ गया.." अनिरूद्ध ने स्माइल करते हुए कहा।

" ये आपने बहुत अच्छा किया .. इसी वजह से हमें आपकी खातिरदारी करने का मौका मिल गया। " राजेश जी मुस्कुराते हुए बोले।

" सुनिए जरा आइए.. तो " रागिनी जी ने किचन से आवाज़ लगाते हुए कहा।

" मे जरा एक मिनिट मे आया.." राजेश जी ने कहा और वो किचन कि तरफ जाने लगे।

" मोहित सर कोई पार्सल आया है आपकी साइन मांग रहे है .." राजू ने मोहित के पास आते हुए कहा।

" आई एम सॉरी.. मि. ऑब्रोय मे बस पांच मिनिट में आया.. रियली सोरी.. अर्जंट है.. "

" कोई बात नहीं .. मोहित .. इसमें सोरी कहने कि कोई बात नहीं है.. मे यहां ठीक हूं आप आराम से जाके आइए.." अनिरूद्ध ने मुस्कुराते हुए कहा।

मोहित के जाते ही अनिरुद्ध इधर उधर टहलने लगा.. और थोड़ी थोड़ी देर में ऊपर देख रहा था..

तभी संजना सीढ़ियों से नीचे उतरती हुई आ रही थी... उसका ध्यान नीचे कि और था.. अनिरूद्ध सीढ़ियों के पास पीछे मूड के खड़ा हुआ था। संजना को वो दिखाई नहीं दिया और वो उससे टकरा गई... वो जैसे ही गिरने वाली थी अनिरूद्ध ने उसको पकड़ लिया..

दोनो ही एक दूसरे के चहेरे को देख रहे थे। जैसे ही संजना को अहसास हुआ कि अनिरूद्ध ने उसे पकड़ा हुआ है वो थोड़ी दूर हो गई।

" आप यहां...? " संजना को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था।

" हा मे यहा.." अनिरूद्ध ने स्माइल करते हुए कहा।

" वैसे ठीक है आप .. चौट तो नहीं लगी..? एसे कोई सीढ़ियां उतरता है भला? गिर जाती तो..? " अनिरूद्घ को एसे बोलते देख संजना उसे एकटक देख रही थी।

ये देखते ही अनिरूद्ध चुप हो गया।

" मे बिल्कुल ठीक हूं.. आप का बहुत बहुत शुक्रिया.. मुझे गिरने से बचाने के लिए.. " संजना ने स्माइल करते हुए कहा।

" पर आप यहां मेरे घर पर कैसे? " संजना को अब भी कुछ समझ नहीं आ रहा था।

" वो कुछ काम से आया था.. मि. सिंघानिया और मोहित से मिलने.."

" ओह.. अब मे समझी .. वो हमारी आपकी कंपनी के साथ मीटिंग हुई थी.. अब याद आया मुझे .. "

" हा.. और वो कॉन्ट्रैक्ट आपको मिल गया है..congractulations.."

" क्या आप सच कह रहे हो..? " संजना ने खुश होते हुए कहा।

" कोई शक..? "

" थैंक यू.. भाई तो बहुत खुश होंगे... "

" वैसे आपने प्रेजेंटेशन कमाल का बनाया था.."

" आप को कैसे पता ? "

" मोहित बता रहे थे.."

"ओह.."संजना ने कहा।

" वैसे आपने कोई कोर्स किया है इसका? "

" नहीं वो.. अनिरूद्ध ने सिखाया था मुझे ये सब "

" नाइस.."

" अरे ! आप लोग एक दूसरे को पहले से ही जानते हो ? " मोहित ने वहा आते हुए पूछा।

" हा..." दोनो ने एकसाथ कहा..

" हा मंदिर पे मुलाकात हुई थी इनसे.." संजना ने बात संभालते हुए कहा।

" ओह.. ये तो बहुत अच्छी बात है.."

" आइए .. बैठ कर बाते करते है। " मोहित ने कहा और वो तीनो बैठ कर थोड़ी देर बाते करने लगे।

" चलिए अब मे चलता हूं.." अनिरूद्ध ने खड़े होते हुए कहा।

तभी रागिनी जी और राजेश जी वहा पर आ गए..

" अरे एसे कैसे ..? खाना खाए बिना आपको हम जाने नहीं देंगे.." राजेश जी ने अनिरूद्ध के पास आते हुए कहा।

" सोरी मि.सिंघानिया.. आज नहीं.. फिर कभी आऊंगा.."

" हा अनिरूद्ध जी रुक जाइए ना हमे अच्छा लगेगा " इस बार रागिनी जी बोली

" नहीं वो आज कुछ तबीयत ठीक नहीं है इसलिए.." अनिरूद्ध को ये बोलते ही अहेसास हुआ कि ये उसने क्या बोल दिया..

उसने तुरंत संजना कि और देखा जो उसकी बात समझ गई थी और मुंह पे हाथ रखे हस रही थी।
ये देखकर अनिरूद्ध का मुंह शर्म से लाल हो गया।

" हा मम्मी इनकी तबीयत ठीक नहीं है तो उनको ज्यादा इंसिस्ट मत कीजिए.." संजना ने अनिरूद्ध कि तरफ देखते हुए कहा।

" ठीक है.. पर अगली बार आपको स्पेशियली आना होगा" राजेश जी ने कहा।

" पक्का.. अब मे चलता हूं .. "

" बाय " अनिरूद्ध ने संजना कि और देखते हुए कहा।

संजना ने बस स्माइल कि ।

अनिरूद्घ के जाने के बाद संजना जैसे ही जा रही थी तब मोहित बोला..
" पापा मुझे लगता है कि हमें इनको भी संजू कि शादी में इन्वाइट करना चाहिए.."

" हा मे भी यही कहने वाला था " राजेश जी ने कहा।

संजना फिर ये सुनकर वहा से चली गई।

घर पहुंचते ही अनिरूद्ध सीधा किसी के पास गया जो कब से उसका इंतजार कर रहा था।
उसके पास पहोचते ही अनिरूद्ध ने उसे गले लगा लिया।
" अच्छा हुआ तू जल्दी वापस आ गया.. तेरे बिना यहां कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था "

" अबे पहले ये मास्क तो हटा.. मुझे मेरा वाला अनिरूद्ध चाहिए.." उसने कहा।

अनिरूद्घ ने अपना फेस मास्क हटाया।

" अबे साले इतने दिनों से ये मास्क पहनकर तू तो पहले से भी ज्यादा गोरा हो गया है.." उसने हसते हुए कहा।

" तुझे मजाक सूझ रहा है.. मे यहां इस सब से परेशान हो चुका हूं.. " अनिरूद्ध कुछ उदास हो गया था।

" कोई बात नहीं यार बस सिर्फ कुछ दिन कि बात है फिर देखना सब कुछ ठीक हो जाएगा.. " उसने कहा..

" हा मे भी यही चाहता हूं कि मेरी असली पहचान जल्दी से सबके सामने आ जाए.... "

🥰 " क्रमशः" 🥰


( अगर आपको कहानी अच्छी लग रही है तो आप प्लीज मुझे सपोर्ट करना और आपका अमूल्य रिव्यू जरूर दीजियेगा...आप मुझे फोलो भी कर सकते है 🥰)