मोर। रामानुज दरिया द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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मोर।

(मोर)

चिलचिलाती धूप में
आये ढूँढने छाँव
जब देखा मोर को तो
याद आ गया गाँव
मैं तो बस यूं ही बालकनी में खड़ा था लेकिन अचानक से मेरी नजर जब उस तरफ गई तो मैं चौंकन्ना स रह गया ओ अदभुत नजारा जो मैं शायद पहली बार देख रहा था ओ भी इतना करीब से ।ओ मूड बना रहा था या बना रही थी यह तो मैं ठीक से कन्फर्म नहीं हूँ लेकिन एक एक स्टेप जो एक एक करके खोल रहा था और उससे बनने वाली ओ छबि क्या कहना जिसे भगवान ने इतना सारा कुछ दिया हो उसको फिर किस चीज़ की कमी हो सकती है भला।अपनी मस्ती में झूम झूम कर प्रकृत के भविष्य का वर्णन जिस तरह कर रहा था कोई कवि या लेखक क्या खाक ऐसा कर सकता है और जो एक बार घूम जाता तो पूरा मौसम झूम उठता ये कोई कहने वाली बात नही है इसका जीता - जागता उदाहरण है कि शाम को means अभी खूबसूरत रिम - झिम बारिस धरा के बदन को भिगो रही थी। मौसम का यह पूर्वानुमान शायद इससे बेहतर कोई लगा सकता हो अगर हम गूगल और विज्ञान की बात न करें तो।
एक मोर जो जुल्फ रूपी अपने पंख को जिस मस्ती में लहराता और नाच रहा था देख के मेरा ही नहीं बल्कि वहाँ मौजूद सभी लोग मूरीद हो गए। टक - टकी लगा के सब बस उसे ही देख रहे थे जो खुले दिल से मौसम को न्योता दे रहा था।
मोर वैसे तो जंगलों में रहना पसंद करता है, लेकिन भोजन की खोज इसे इंसानी आबादी तक ले आती है। तभी तो आज हमें उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह वही मोर है साहब जिसे भारत सरकार ने भारत का राष्ट्रीय पक्षी घोसित कर रखा है आखिर कुछ तो बात रही होगी शायद यही वजह हो सकती है।
ऐसा नहीं कि भारत सरकार ने ही मोर को इतनी तवज़्ज़ो दी है इससे पहले भी भारत मे मोर को इससे भी ज्यादा ख्याति प्राप्त है जैसे कि भगवान श्री कृष्ण के मुकुट पर लगा मोर का पंख इससे कहीं ज्यादा महत्त्व को दर्शाता है, बांसुरी और मोरपंख के बिना कान्हा का स्वरूप अधूरा है. कृष्ण भगवान को मोरपंख बहुत प्रिय है.यही वजह है कि उनके मुकुट में मोरपंख हमेशा लगा होता है. शास्त्रों के अनुसार विष्णुजी के अवतारों में से सिर्फ कृष्ण ने मोर मुकुट धारण किया है. कान्हा का मोरपंख पहनना केवल प्रेम या उसके प्रति लगाव ही नहीं है बल्कि इसके जरिये भगवान ने कई संदेश भी दिए हैं । महाकवि कालिदास ने मेघदूत में मोर को राष्ट्रीय पक्षी से भी बढ़कर दर्जा प्राप्त है।सदियों से राजा महाराजाओं को सबसे पसंदीदा पक्षी मोर रहा है। प्रसिद्ध सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के राज्य में जो सिक्के चलते थे उसके एक तरफ मोर बना होता था और तो और मुगल बादशाह शाहजहाँ जिस सिंघासन पर बैठते थे उसकी संरचना मोर जैसी ही थी जिसका नाम 'तख्त-ए-ताऊस' था ताऊस एक अरबी शब्द है जिसका मतलब मोर होता है। एक मोर के कुनबे में 4-5 से मोरनियां होती है। इतनी मोरिनयां एक साल में 20-25 अंडे देती हैं। मोरनियों को आकर्षित करने के लिए मोर धीमे-धीमे नृत्य करते हैं। खासकर बरसात के मौसम में मोर सबसे ज्यादा खुश नजर आते हैं। मोर के नृत्य से प्रभावित होकर मादा मोर नर मोर की तरफ खिंची चली आती हैं।
मोर-मोरनी के सहवास का समय जनवरी से • अक्टूबर के बीच में होता है। मोर भी अन्य पक्षियों की तरह की सहवास करता है। मोरनी एक बार में तीन से पांच अंडे देती है। ये अंडे सफेद व पीले होते हैं। मोर सेक्स के दौरान अलग-अलग आवाजों के जरिए मोरनी को आकर्षित करता है। अमेरिकन नेचुरलिस्ट की रिसर्च में छपी रिपोर्ट के मुताबिक बायोलॉजिस्ट ने नर पक्षी की आवाज रिकॉर्ड की है।

कोई उलझी हुई पहेली आज हल हो गई,
मन में नाचा मोर और बादलों में हलचल हो गई,
उसकी एक झलक पाते ही क्या बताऊँ यारों,
मेरी की हुई जन्मों की तपस्या सफल हो गई,,,