हॉंटेल होन्टेड - भाग - 21 Prem Rathod द्वारा डरावनी कहानी में हिंदी पीडीएफ

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हॉंटेल होन्टेड - भाग - 21

गार्ड्न में एक स्टाफ बॉय की लाश मिलने के बाद सभी लोग काफी डर गए थे। अब वहां रुक कर कोई भी अपनी जान खतरे में नहीं डालना चाहता था और कुछ लोग तो उसी रात वहां से चले गए ,तभी एक लड़की रिसेप्शनिस्ट सोहम के पास आकर कहती है 'मुझे एक वीक के लिए रूम बुक करना है।' उस लड़की की बात सुनकर सोहम एक पल के लिए उसे देखता ही रहता है क्योंकि डर की वजह से हम लोग यहां रुकने के लिए तैयार नहीं थे और कुछ लोग तो उसके सामने से ही होटल के बाहर निकल रहे थे, फिर भी यह लड़की होटल में रुकने के लिए तैयार थी जैसे उसे कुछ पता ही ना हो।

सोहम अपने ख्यालों में खोया हुआ था कि तभी वह उसकी ओर देखते हुए कहती है 'हेलो सर क्या हुआ? आप रूम बुक करोगे या नहीं?' उस लड़की के कहने पर वह अपने ख्यालों में से बाहर आता है और ज्यादा ना सोचते हुए उसकी सारी डिटेल फील करने लगता है। सारी डिटेल्स लेने के बाद उस लड़की के signature लेकर वह एक स्टाफ बॉय को अपने पास बुलाकर कहता है 'यह रूम की चाबी है और मैडम का सामान लेकर उन्हें उनके कमरे तक पहुंचा दो।'

सोहम अभी स्टाफ बॉय से बात ही कर रहा था कि तभी वह उसे बीच में रोकते हुए कहती है 'इन्हें तकलीफ देने की जरूरत नहीं है, मुझे रूम की चाबी दे दीजिए मैं खुद ही चली जाऊंगी।' सोहम उसकी और देखते हुए उसके हाथ में चाबी देते हुए कहता है 'यह लीजिए मैडम सेकंड फ्लोर रूम नंबर '389'। वह लड़की थैंक्स कह कर अपना बैग लेकर लिफ्ट की ओर चली जाती है। वह कमरे में पहुंचकर अपना रूम अंदर से लॉक करती है और अपना सामान रखकर फ्रेश होने के लिए चली जाती है।

इस तरफ अंकिता और मनीष अपने रूम में बेड पर बैठ कर बातें कर रहे थे। अंकिता ने मनीष के कंधों पर अपना सिर रखा हुआ था, मनीष अंकिता का हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहता है 'पता नहीं रिया के साथ अचानक यह सब कैसे हो गया? यह सब कुछ इतना जल्दी हुआ मानो जैसे कोई बुरा सपना हो।राज अभी तक उस सदमे से उभर नहीं पाया है और मैं उसकी हालत समझ सकता हूं, आप जिनसे इतना प्यार करते हो वह पल भर में ही दूर हो जाए तो बहुत तकलीफ होती है।'

अंकिता का हाथ पकड़कर उसके चेहरे की ओर देखते हुए कहता है 'आज जो कुछ हुआ उसे देखते हुए मैं यहां रहने का खतरा नहीं उठा सकता क्योंकि मैं तुम्हें किसी भी कीमत पर नहीं खोना चाहता, हम राज के साथ ही यहां से वापस अपने घर चले जाएंगे।'जैसे ही मनीष यह बात कहता है अंकिता उसे घूरते हुए देखने लगती है, तभी मनीष की नजर अंकिता के दाएं हाथ पर जाती है तो वह चौक जाता है।वह अंकिता से सवालियां भरे नजरों से पूछता है 'तुम्हारी इंगेजमेंट रिंग का गई अंकिता?'

अंकिता भी अपना हाथ देखती है तो चौंक जाती है, वह हुए इधर उधर ढूंढते हुए कहती है 'मुझे नहीं पता मनीष कल तक तो मेरे हाथ में ही थी और अचानक पता नहीं कैसे गायब हो गई?' मनीष अंकिता की दोनों कंधों को पकड़ते हुए कहता है 'कोई बात नहीं इन सब प्रॉब्लम्स के चलते कहीं रख दी होगी, कोई बात नहीं मिल जाएगी तुम ज्यादा टेंशन मत लो।'

इस तरफ अपने कमरे में वह लड़की फ्रेश होकर कमरे में आती है, कमरे की खिड़की खुली हुई थी और धीरे-धीरे ठंडी हवाएं कमरे के अंदर आ रही थी। कमरे में इस वक्त पूरी तरह से शांति छाई हुई थी। वह एक नजर पूरे कमरे में घुमाती है और बेंड के पास ड्रेसिंग टेबल पर अपने बाल संवारने के लिए जाती है, पर वहां स्टूल नहीं था।वह टेबल की थोड़ी दूरी पर रखा हुआ था, वह स्टूल को खींचने के लिए ताकत लगाती है पर वह अपनी जगह से हिलता तक नहीं।

वह हैरानीभरी नजरों से उस स्टूल को देखने लगती है कि तभी उसका फोन बजने लगता है। अचानक फोन की आवाज सुनकर वह थोड़ी घबरा जाती है,वह फोन की स्क्रीन देखकर कोल रिसीव करती है,तभी सामने से आवाज आती है 'हेलो कविता तुम कमरे में पहुंच गई।'उसका जवाब में हामी भरते हुए वो कहती है 'हां नीलेश मैं कमरे में पहुंच गई हूं और थोड़ी देर में मैं अपना काम भी शुरू कर दूंगी जैसा हमने प्लान किया था, मेरा कमरा उसी फ्लोर पर है जिस पर रिया का कमरा है।'

उसकी बात सुनकर निलेश खुश होते हुए कहता है 'यह तो ओर भी अच्छी बात है, अगर हमें मिली इंफॉर्मेशन के मुताबिक वह सब बातें सच है और इसके खिलाफ हमें अगर कोई पक्का सबूत मिल जाए तो हमारे न्यूज़ चैनल के लिए यह बहुत बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़ होगी और हम दोनों को प्रमोशन भी मिल जाएगा बस तुम थोड़ा चौक करने रहना।'

वह अभी फोन पर बात ही कर रही थी कि तभी 'टक्क्क्क्....' करके किसी चीज के गिरने की आवाज आती है। वह पीछे मुड़कर देखती है तो पाती है कि वह स्टूल जो ड्रैसींग टेबल के पास रखा था,वो जमीन पर गिरा पड़ा था।वह स्टूल के पास जाकर उसे उठाकर ड्रेसिंग टेबल के पास रख देती है। उसे अजीब लग रहा होता है क्योंकि कुछ देर पहले वह अपनी जगह से हिल भी नहीं रहा था तो फिर अचानक अपने आप कैसे गिर गया, तभी फोन में से निलेश की आवाज आती है 'तुम समझ गई ना तुम्हें क्या करना है?' कविता नीलेश के सवाल का जवाब देते हुए कहती है 'हां तुम चिंता मत करो मैं ध्यान रखूंगी और जैसा हमने प्लान किया है ठीक है ऐसा ही होगा।' इतना कहने के बाद वह फोन कट कर देती है।

फोन के कट होने के बाद वहां अपना बैंक खोलकर उसमें से एक लैपटॉप और कैमरा निकलती है। वह कैमरे को उठाकर कमरे में एक कोने पर रख देती है जहां से वो पूरे कमरे को रिकॉर्ड कर सके।वह चलते हुए अपने रूम का दरवाजा खोल कर कॉरीडोर में नजर घुमाती है, पर रात का टाइम होने की वजह से पूरे कॉरिडोर में सन्नाटा छाया हुआ था। इस तरफ कैमरे के ऊपर कुछ निशान बनने लगते हैं, जैसे कोई उसे अपने नाखून से नोच रहा हो।

To be continued......