कहानी प्यार कि - 14 Dr Mehta Mansi द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

कहानी प्यार कि - 14

एक नई सुबह हो चुकी थी... आंखो मे एक खुशी कि चमक लिए सभी लोग.. तैयारियों में लगे हुए थे.. सिंघानिया मेंशन को फूलों से सजाया जा रहा था.. मोहित और उसके कजिन भाई डेकोरेशन और मंडप मुहूर्त कि तैयारियों मे लगे हुए थे.. दूसरे रिलेटिव्स एस ओलवेज गपशप करने में लगे पड़े थे.. बच्चे इधर उधर भाग कर खेल रहे थे.. लड़कियां... रात के संगीत कि प्रेक्टिस मे मशगूल थी.. संजना , किंजल और मीरा तैयार हो रही थी..

इस तरफ सौरभ और दादी भी अनिरूद्ध के साथ आने के लिए तैयार हो रहे थे..
" दादी आप का वहा आना जरूरी है क्या..? "
अनिरूद्ध बोला जो कब से दादी को तैयार होते हुए देख रहा था और थोड़ा डर भी रहा था उनसे बात करने के लिए..

" हा जरूरी है.. तुम दोनो लंगूर पर मुझे रत्ती भर भी भरोसा नहीं है.. मुझे तो वहा आना ही होगा.."
दादी ने भी अपना निशाना लगा दिया था ..

अनिरूद्ध ने मायूसी से सौरभ कि तरफ देखा.. पर सौरभ ने भी इशारे में कह दिया कि वो तो आज दादी से उलझेगा ही नहीं..

फिर तीनो सिंघानिया मेंशन जाने के लिए निकल गए.. अनिरूद्ध ने अपना मास्क लगा लिया था ताकि कोई उसे पहचान ना ले.. और सौरभ ने भी विक पहन ली थी और साथ में मूछ भी लगा ली थी..

मोहित और राजेश जी उन्हीका इंतजार कर रहे थे.. जैसे ही उनको अनिरूद्ध आता हुआ दिखाई दिया वो दोनो उनके स्वागत के लिए वहा पर आ गए..किंजल भी उनके पीछे पीछे आ गई..

" आइए आइए मि. अनिरूद्ध.. हम आपका ही वेट कर रहे थे ..." राजेश जी अनिरूद्ध के पास आते हुए बोले

" जी.. ये मेरी दादी है..." अनिरूद्ध ने दादी को मिलवाते हुए कहा..

" नमस्ते दादीजी .." राजेश जी और मोहित दोनो ने ही उनके पैर छुए..

" जीते रहो..." दादी ने आशीर्वाद देते हुए कहा..

किंजल उनको पीछे खड़ी खड़ी सुन रही थी.. पहले तो वो पहचान नहीं पाई थी दोनो को पर राजेश जी कि बात सुनकर वो समझ गई..

" भाई ये दोनो मेरे कोलेज के दोस्त है..." किंजल उनके पास आती हुई बोली

" हा .. ये तो बहुत ही अच्छी बात है बेटा.. " राजेश जी मुस्कुराते हुए बोले..

" ये वरुण है... " किंजल को सौरभ के लिए जो नाम दिमाग़ में आया उसने वो बोल दिया..

ये सुनते ही सौरभ उसे घूर घूर कर देखने लगा.. दरअसल वरूण भी उन्हीं के साथ कोलेज मे था और सौरभ का उसके साथ छत्तीस का आंकड़ा था.. अनिरूद्ध को भी थोड़ी हसी आ गई थी ये सुनकर..

" जी नमस्ते..." सौरभ भी मजबूरी में मुस्कुराता हुआ बोला

तभी संजना भी वहा आ गई...

" आप आए बहुत अच्छा लगा..." संजना स्माइल करती हुईं बोली..

" अब आपने बुलाया था तो आना ही था.." अनिरूद्ध भी सामने स्माइल करते हुए बोला..

" आइए बैठिए..." मोहित ने उन सभी को अपनी जगह पर बैठ ने के लिए कहा..

फिर संजना रागिनी जी और राजेश जी ने मिलकर गणेश पूजा कि और फिर मंडप मुहूर्त कि रसम निभाई गई...

थोड़ी देर बाद लंच टाईम था... लंच के बाद संजना हल्दी के लिए तैयार होने के लिए चली गई..

" कुड़ी तो बहुत ही सोनी है... किसी कि नजर ना लगे इसे.. हे भगवान दोनो कि जोड़ी हमेशा बनाए रखना " दादी तो बहुत खुश थी कब से संजना से बात करना चाहती थी पर अनिरूद्ध उन्हे जाने नहीं दे रहा था.. पर दादी ने बिना मिले ही अपने आशीर्वाद देने शुरू कर दिए थे..

" बस बस दादी कितनी रसमलाई खाएगी..!" सौरभ दादी को घूरता हुआ बोला..

" बे छोरे मे जितनी भी खाऊ तेरे को क्या! तूने चार बार गुलाबजामुन खाए.. तो मैंने गिने क्या ! बड़ा आया .मेरे खाने पर नजर मत लगा." दादी ने मुंह फेर लिया और खाने मे लग गई..
सौरभ कि तो बोलती ही बंद हो गई थी.. अनिरूद्ध तो कुछ खा ही नहीं पा रहा था.. बार बार संजना के कमरे कि और देखता रहता ..

" तेरे एसे देखने से वो आ नहीं जाएगी.." किंजल जो कब से पीछे खड़ी उसे ऑब्जर्व कर रही थी वो अनिरूद्ध के पास आती हुई बोली..

" यार तू कुछ कर ना ..मुझे उसे देखना है "

" थोड़ा वेइट कर मैंने कुछ सोचा है.. अच्छा वो हल्दी लाया क्या ? "

" हा वो कैसे भूल सकता हूं.. दादी वो हल्दी वाला डिब्बा दीजिए ना..."

" हा ये रहा.." दादी ने हल्दी वाला डिब्बा अनिरूद्ध को दे दिया और अनिरूद्ध ने किंजल को..

" अब सुन में जब कहूंगी तुम आ जाना समझे.."

" ओके "

और फिर किंजल वहा से चली गई.. उसने जगदीशचंद्र त्रिपाठी के वहा से आई हुई हल्दी कि जगह अनिरूद्ध वाली हल्दी वहा पर रख दी..

संजना तैयार हो चुकी थी.. पीले रंग का लहंगा साथ मे फूलों से बनी ज्वेलरी.. पहन कर संजना जैसे कोई परी सी दिख रही थी..

" हाय...! अनिरूद्ध देखेगा तो पागल ही हो जाएगा " किंजल संजना को देखकर मन में ही बोल पड़ी..

" ओए कैसी लग रही हूं ? " संजना ने किंजल को एसे देखते हुए देखा तो उससे पूछा..

" स्वर्ग से उतरी हुई सुंदर सुकन्या लग रही हो ! " किंजल ने हस्ते हुए उसकी नजर उतारी..

ये सुनकर संजना भी हसने लगी...

" तू ना बड़ी अजीब है .. तेरी बाते भी तेरे ही जैसी.." संजना मुस्कुराती हुई बोली..

" चल संजू.. " किंजल उसे हाथ पकड़ कर ले जाने लगी..

" पर कहा...? "

" चल ना ज्यादा बक बक मत कर.."

" ये देख आपके सैया कि हल्दी..." किंजल संजना को हल्दी वाले बाउल के पास लाती हुई बोली..

" पर तुम मुझे यहां क्यो लाई हो ..? "

" बस तूझे दिखाने.. चल ये लेकर होल मे जाना है "
किंजल ने हल्दी वाला बाउल ले लिया और फिर दोनो होल मे आ गई जहां सब उन्हिकी राह देख रहे थे..

अनिरूद्ध ने जब संजना को देखा तो वो देखता ही रह गया.. और दादी भी अपनी आंखे पलकाना भूल गई ।

संजना को एक के बाद एक सब हल्दी लगाने लगे.. अनिरूद्ध थोड़ा मुंह बिगाड़ कर सब देख रहा था..
" मे भी क्या किंजल कि बात मे आ गया.. कुछ किया भी नहीं उसने .. सब संजना को हल्दी लगा रहे है और में यहां ये कोलड्रिंक पी रहा हूं " अनिरूद्ध मन में ही बोले जा रहा था और मुंह बिगाड़ रहा था..

किंजल भी अनिरूद्ध के बिगड़ते हुए एक्सप्रेशन देख रही थी और मुंह दबाते हुए हस रही थी ..

अनिरूद्ध ने जब किंजल को अपनी तरफ देखकर हस्ते हुए देखा तो वो उसे गुस्से से घूर ने लगा और तुरंत उसे कोल किया..

" हा बोल..." किंजल फोन उठाती हुई बोली..

" बोल क्या ? तुम कर क्या रही हो..? सब हल्दी लगा रहे है मेरी बारी कब आएगी ? "

" आएगी .. पहले ये रस्म तो हो जाने दो.. पहली हल्दी फैमिली वाले ही लगाते है समझे.. ! पर तुम्हारी बारी भी आएगी.. अभी .. देखना.. "

" हा पर जल्दी थोड़ा.. एसा ना हो की सारी हल्दी ही खत्म है जाए "

" एसा नही होगा.." किंजल ने कोल कट कर दिया..

थोड़ी देर बाद जब सब फैमिली मेंबर ने हल्दी लगा ली तो किंजल वहा से बोली..

" अनिरूद्ध.. दादी .. वरूण यहां आइए.."

ये सुनकर तीनो ही आश्चर्य से देखने लगे..
संजना और सब उनकी और देखने लगे..

तीनो उनके पास आए..

" अनिरूद्ध तुम भी लगाओ हल्दी..! " किंजल सब के सामने बोली..

अनिरूद्ध थोड़ा हड़बड़ा गया था उसने एसा एक्सपेक्ट नहीं किया था कि किंजल एसा कुछ करने वाली है..
संजना भी अनिरूद्ध को ही देख रही थी.. जब अनिरूद्ध ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई तो राजेश जी बोले..

" हा बेटा आप भी लगाइए ना .. "

जब अनिरूद्ध ने ये सुना तो उसके चहेरे पर मुस्कुराहट आ गई..
उसने तुरंत संजना कि और देखा .. संजना ने भी स्माइल कि .. और अनिरूद्ध को जैसे संजना कि परमिशन मिल गई हो.. उसने हल्दी ली और संजना के गाल पर लगाई..

ये पल उसके लिए सबसे खूबूरत पल था.. संजना को भी कुछ अलग सा अहसास हुआ जब अनिरूद्ध के हाथ उसके गाल को छुए..
तुरंत उसने अपनी आंखे बंद करली और उसे अनिरूद्ध का चहेरा दिखाई दिया

" आज तुझे हल्दी का रंग लगाया है..
रंग मेरे इश्क का रंग मेरे प्यार का..
बस अब इंतजार सिर्फ तुजसे मिलने का है
तुझे अपने रंग में रंगने का है..
यू तो तेरी खूबसूरती का कोई जवाब नहीं है
पर ये अनिरूद्ध कि लगाई हल्दी ने
तुम्हे और भी ज्यादा निखार के रखा है.."

अनिरूद्ध के बाद सौरभ और दादी ने भी हल्दी लगाई..
फिर किंजल ने अनिरूद्ध के पास आकर धीमे से उसके कान में कहा
" अनिरूद्ध तुम गार्डन में जाओ .."

" पर क्यों .. संजना तो यहां है ना ! "

" हा पर वो यहां तो तुम्हे हल्दी नहीं लगाएगी ना .. तुम्हे जितना कहा है उतना करो .."
अनिरूद्ध किंजल कि बात मानकर गार्डन कि और चला गया..

अब किंजल ने बहुत सारी हल्दी उठाई और संजना के पास आ गई..
" संजू .. तैयार होजा मेरे बदले के लिए.."

" बदला कैसा बदला.? "

" ओहो भूल गई मैडम ..! डाकू सिंग वाला ड्रामा ..? मैंने कहा था ना कि में तुमसे बदला लूंगी तुम्हारी हल्दी वाले दिन "

" अब ये भूल जा ना.. तुम तो मेरी बहन हो ना.. प्लीज़..."

" नहीं नहीं एसे कैसे.. " एसा बोलकर किंजल उसके पीछे भागी..

संजना भी किंजल से बचने के लिए .. भागी.. दोनो पूरे होल मे एक दूसरे के पीछे भाग रहे थे.. किंजल ने उसे पकड़ लिया और उसके गाल पर बहुत सारी हल्दी लगा दी..

" ओह.. अब तू रुक तूझे भी में दिखाती हूं " संजना ने भी अपने हाथ में हल्दी ली और किंजल के पीछे भागी..

" नहीं नहीं... ये तुम गलत कर रही हो संजू .. " किंजल भागते हुए बोल रही थी..

किंजल भागती हुई गार्डन कि तरफ चली गई.. और जाके एक कोने में छिप गई..
अनिरूद्ध पेड़ के पास खड़ा था और अपने फोन मे कुछ देख रहा था..

संजना वहा पर आई तो उसे कोई दिखाई नहीं दे रहा था..

" अरे ये किंजल कहा गई ? यही तो आई थी.. "

संजना को पेड़ के पीछे कुछ हलचल महसूस हुई संजना को लगा कि किंजल ही पेड़ के पीछे छुपी हुई है इसीलिए वो चुपके से बिना आवाज किए वहा पर गई और पेड के पीछे कौन है ये बिना देखे ही एकदम से उसके सामने आकर दोनो हाथो से हल्दी उसके चहेरे पर लगा दी..

" तू कितना भी छुप पर मुझसे बच नहीं सकती थी " संजना हल्दी लगाती हुई ही बोली..

पर जब उसने देखा कि ये किंजल नहीं पर अनिरूद्ध है तो उसके हाथ रुक गए और आंखे फटी कि फटी रह गई..
अनिरूद्ध तो ये जो भी हुआ उसे समजने मे ही लगा था.. संजना ने उसे अपने हाथो से हल्दी लगाई थी उस पर वो विश्वास नहीं कर पा रहा था..



" आई एम सॉरी ... सोरी सोरी मुझे माफ़ कर दीजिए.. मुझे लगा कि किंजल है इसीलिए.. प्लीज़ वेरी वेरी सॉरी अनिरूद्ध जी.." संजना घबराती हुई एक्सप्रेस गाड़ी मे सवार हुए बस बोली जा रही थी .. और अनिरूद्ध सिर्फ उसके मासूम चहेरे को निहारे जा रहा था..

" बस बस संजना .. कितना सोरी बोलोगी..उसमे तुम्हारी कोई गलती नहीं है .. "

" एसे कैसे गलती नहीं है? मेरी गलती है.. आप जो सजा दोंगे उसके लिए में तैयार हूं.. "

" हा हा इसे तो सजा दे ही दो तुम .." किंजल वहा आती हुई बोली..

" कहा थी तू ? ये देख तेरी वजह से क्या हुआ..! अनिरूद्ध जी को मैंने हल्दी लगा दी.. जो तूझे लगानी चाहिए थी.."

" अब मेरी वजह से भला कैसे हुआ ! मैंने थोड़ी ना कहा था कि तुम मुझे हल्दी लगाने आओ .. तुम ही तो भाग रही थी मेरे पीछे "

" तुम ना ..! तुझे बाद में देख लूंगी.. चलिए अनिरूद्ध जी मे आपको हल्दी साफ कर देती हूं "

संजना ने कहा और वो जाने लगी..
अनिरूद्ध भी मुस्कुराता हुआ उसके पीछे जाने लगा .. उसने पीछे मुड़ के देखा तो किंजल ने हस्ते हुए उसकी तरफ आंख मारी..

संजना अनिरूद्ध को गार्डन मे पानी के नल के पास ले गई .. तभी अनिरूद्ध को याद आया कि अगर संजना पानी से उसके गाल को धोएगी तो मास्क निकल जाएगा..

" आइए ना रुक क्यों गए .."

" नहीं नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं है मे साफ कर लूंगा."

" नहीं मे कर देती हूं आइएना " संजना ने बोलते हुए गलती से अनिरूद्ध का हाथ पकड़ लिया..
इस वजह से संजना के हाथ कि हल्दी अनिरूद्ध के हाथ पर लग गई ..

" सोरी सोरी.. फिर से पता नहीं कैसे हो गया.. "

" कोई बात नहीं मे साफ कर लेता हूं .."

अनिरूद्ध ने पानी से हाथ साफ किया और थोड़ा थोड़ा पानी लेकर गाल साफ करने लगा.. ताकि मास्क निकल ना जाए..

" वैसे आप यहां क्या कर रहे थे ? "

" वो वो में एक अर्जेंट कोल आया था इसीलिए .. वहा पर ज्यादा शोर शराबा था तो मे यहां आ गया बात करने के लिए "

" ओह.."

" हाम्म.. अब तो ये साफ हो गया.. है अब मे चलता हूं .. कुछ काम से बाहर जाना है .."

" पर अभी तो रात को संगीत है आप एसे कैसे जा सकते है ! "

" नहीं वो थोड़ी देर के लिए ही जाना है .. संगीत तक आ जाऊंगा .."

" तो फिर ठीक है.. पर प्लीज़ आप टाईम पर आ जाना..."

" हा आ जाऊंगा बाय "

" बाय "

अनिरूद्ध वहा से चला गया.. वो बहुत ही खुश था .. संजना ने जब अनिरूद्ध को हल्दी लगाई वो पल उसके लिए बहुत ही खास था।

🥰 क्रमश: 🥰