में और मेरे अहसास - 58 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

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में और मेरे अहसास - 58

यादों के पन्नों में हिसाब लिखे हैं l
वादों के पन्नों में सैलाब लिखे हैं ll

बहोत निकले मेरे अरमान लेकिन.. l
ग़ालिब ने शेर लाजवाब लिखे थे ll

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खुशी से गुनगुनाता हैं ये हसीन मौसम l
प्यारा गीत सुनाता हैं ये हसीन मौसम ll

बारिस की रिमझिम बूँदों की रागिनी l
राग मल्हार गाता हैं ये हसीन मौसम ll

महफिल में मुसलसल ग़ज़ल चल रहीं हैं l
शमा नशीला बनाता हैं ये हसीन मौसम ll

कभी जो ख्वाबों में देखा करते थे l
चैन-सुकूं लाता हैं ये हसीन मौसम ll

अजीब सी खुमारी छाई है फ़िजा में l
गुलाबी कहलाता हैं ये हसीन मौसम ll
२०-६-२०२२

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बड़े नायाब क़ुदरत के नज़ारे हैं l
हसीं जिंदगी जीने के इशारे हैं ll

खूबसूरत हसीन रात में देखो l
चांद चंदा के दिल को प्यारे हैं ll

अज़ीब एजाज छाया हुआ है l
महफिल में तहनात सितारें हैं ll

जन्नत की हूर परी दिखती हो l
नसीब से गर्दिशों में तारे हैं ll

इश्क में बार बार रूठ जाना l
सखी नाज़ नखरे तुम्हारें हैं ll

जरा दूर ही रहना तुम तो l
खूबसूरत तोहफ़े हमारे हैं ll

जमे इश्क़ में सर झुकाया है l
जिद के सामने हम हारे हैं ll
२१-६-२०२२
एजाज़ – जादू

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क्या कह रहा हैं बहता झरना?
वक्त के साथ बहो कहता झरना ll

मुसलसल खुशियो संजोता l
अपनी मस्ती में रहता झरना ll

ऊंचाई से गिरते गिराते रास्ते में l
चटटानो की मार सहता झरना ll

सदा बेफिक्री के साथ ख़ुद को l
मिट्टी के साथ ढहता झरना ll

दर्द, काटे, फूल,  कीचड और l
जो मिला प्यार से गहता झरना ll
२२-६-२०२२

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आंखे सजल हैं l
कौन अमर हैं ?

किसने छुआ ?
हाथ गरम हैं ll

किस बात पर l
आती शरम हैं ll

गीत गुनगुनाओ l
रूठे सनम हैं ll

मुहब्बत हसीन l
प्यारा सफ़र हैं ll
२३-६-२०२२

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जिंदगी में हार जीत तय है ll
समंदर से घेरा वलय है ll

एक दूसरे से जुड़कर ही l
रिसते नातो का विलय हैं ll

मसर्रतें का खजाना हैं ये l
साथ जीने का समय हैं ll

रियासत हैं सुकून से रहो l
आत्माओ का आलय हैं ll

खूबसूरत ख्वाबों में l
मासूमों का निलय हैं ll
२४-६-२०२२

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आज दिल में उदासियों को ठहरने ना दिया l
खुशी का नकाब पहनके सँवरने ना दिया ll

कैसे भी समझाया बहलाया पर किसी l
दिल फेंक खेलों के हाथों में धरने ना दिया ll

रुख़सत कर दिया बेवफाओ को मुस्कराके l
दिल के दामन को तार तार करने ना दिया ll

बड़ी चालाकी से संजोया कमज़ोर पलो को l
बेचेनीओ  को दिल में उतरने ना दिया ll

दर्द को बिदाई देदी हस्ते हस्ते आज सखी l
आंसूंओ से नशीली आंखको भरने ना दिया ll
२६-६-२०२२

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बेइंतहा दर्द में वक्त गुज़ारा है l
कठीन ही सही पर दुलारा है ll

हद से बढ़ गई है जोहुक्मी l
इसलिए ख़ुदा को पुकारा है ll

सुकून साँस लेने के लिए l
दर्द भरा गाना सुनाया है ll

ख़ुद के भरोसे पे जीकर l
क़ायनात को झुकाया है ll

वफ़ा का दामन पकड़कर l
बेवफाओंको रुलाया है ll
२७-६-२०२२

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आंख बनी हैं आँसुओं का सागर l
आज छलक रहा है ग़मों का सागर ll

महफिल झमाई  हैं यार दोस्तों की l
गले से बह रहा है सुरों का सागर ll

जल्द ही लौट कर आएगे वापस l
वो खाके गये हैं कसमों का सागर ll

छुपा लेना चाहते हैं आँचल के अंदर l
बाहर बह रहा है रश्क़ों का सागर ll

बड़े बेईमान होते हैं चुगलखोर लोग l
बेनक़ाब कर दिया राज़ों का सागर ll
२८-६-२०२२

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