में और मेरे अहसास - 57 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

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में और मेरे अहसास - 57

नहीं भूला पा रहे हैं प्यार भरी वो बातेँ l
रह रह कर याद आती सुहानी वो रातें ll

कई युगों से तलाश रहे थे तस्वीरें जो l
वक्त के तैख़्ने मे छुपी प्यारी वो यादें ll

चाहें तन मन से कितने ही दूर जाओ l
न तोड़ पाएगे खून से बंधे वो धागे ll

खुली फ़िज़ाओं मे साथ गुनगुनाए हुए l
सदियों तलक गूंजते रहेगे वो गाने ll

तानसेन ने गाई और गुनगुनाई हुईं l
आज भी सुनाई देती है वो ताने ll
२-६-२०२२

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आज भी बचपन की यादें आँखों में झूलती l
बाबुल की वो गलियाँ भुलाये नहीं भूलती ll

माँ की प्यारी सी लोरी,पिता का वो गुस्सा l
पुराने ख्वाबों मे टहलते नींद नहीं खुलती ll

बड़े चाव से तैख़्ने मे रखे हुई यादगीरी  l
खिलौने गुड़िया हाथ से से नहीं छूटती ll

दिनभर धींगा मस्ती, हर वक्त का खेलना l
वो दिन फिरसे जीनेकी आश नहीं डूबती ll

कैसी है पहेली जिंदगी भी समज न सके l
साँस रुक जाती है जिंदगी नहीं रूकती ll
३-६-२०२२

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कडी धूप से बचाना चूक गये l
सही रास्ता दिखाना चूक गये ll

नये ज़माने की हवा एसी लगी के l
प्यारे रिसते निभाना चूक गये ll
४-६-२०२२

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ख़्वाबों की चिड़िया बड़ी सयानी थी l
महफिलों की ग़ज़लों में रवानी थी ll

साथ साथ जीने का अंदाज़ निराला l
नदीम हर सुबह शाम उल्लासी थी ll

नन्हें से प्यार भरे दिल की बेइंतहा l
पुरानी ही सही मजेदार कहानी थी ll

जीने की भरपूर कोशिश करते रहे l
दर्द से ग़मगीन आवाज़ सुरीली थी ll

सराब का शुरूर छाया था शहरों में l
रंगीन थी पर कायनात आभासी थी ll

सराब - मृगतृष्णा
नदीम - दोस्त
५-६-२०२२

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आज शाम से भीगी पलकें थी l
गहरे दर्द में डूबी हुईं झलके थी ll

बेइंतहा बेपरवाह मुहब्बत मे l
आँखों से शराब छलके थी ll

बेहद हसीं प्यारे चहेरे के l
गालों पर सेर अलकें थीं ll

हुस्न के नाज़ नखरे देखी l
शर्म से नज़रे ढलकें थी ll

कोहरे का मंजर छाया था l
रोशनी सुबह धुँधलके थी ll
६-६-२०२२

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लाल चुनरिया ओढ़ दुल्हन आई है l
पिया के नाम की मेहंदी सजाई हैं ll

हूबहू अप्सरा दिख रहीं हैं आज l
चहेरे पर गुलाबी खुशी छाई हैं ll

चांद के संग चकोरी देख क्यूँ?
मिलन की रात में शरमाई है ll

महफिल में सिर झुकाकर बैठे l
जिंदादिली इश्क़ ने दिखाई है ll

सजावट में भी सादगी झलके l
सुंदरता देख कयामत ढ़ाई है ll
७-६-२०२२

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घायल खोजता हैं प्याली l
शराबी ढ़ीचता हैं प्याली ll

भरी महफिल में इश्क का l
जाम पिलाता हैं प्याली ll

टकराता है दिल से दिल l
साँसे मिलाता है प्याली ll

शराबियों को जन्नत का l
रास्ता दिखाता है प्याली ll
७-६-२०२२

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मुहब्बत में फ़रेब की आदत हो गई है l
नादिमों से भी अब अदावत हो गई है ll

हसरतें इस तरह बढ़ ने लगी है यू कि l
रकीबो से रोज रोज रफाकत हो गई है ll

सखी बेदर्दी से बेइंतिहा और बेपनाह l
प्यार में गुस्ताखी हिमाकत हो गई है ll

अदा और अदायकी क्या कहें उसकी l
जवान हुश्न को देख शहादत हो गई है ll

इश्क ने तो उफान ही मचा दिया लो l
छोटे से इज़हार से आफ़त हो गई है ll

यार गुपचुप प्यार से हाथ क्या थामा l
दिल की नादानी मे शरारत हो गई है ll

फर्श से अर्श तक का सफ़र कठिन रहा l
दर्शिता को खुदा से बगावत हो गई है ll
९-६-२०२२

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बड़ी खूबसूरत है अनमोल यादें l
जान से प्यारी है अनमोल यादें ll

सखी चांदनी से भीगी रातों में l
दिल बहलाती है अनमोल यादें ll

चाहतों के समंदर में उफान आता तब l
आंख छलकाती है अनमोल यादें ll

खैरियत का क़ासिदा हाथों में आते l
साँसे महकाती है अनमोल यादें ll

मुद्दतों के बाद रात आई वस्ल की l
चैन सुकून पाती है अनमोल यादें ll

बड़ी फुरसद से पढ़ना इसे नदिमों l
सुख़नवर कहानी है अनमोल यादें ll
१०-६-२०२२

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दिल को सुकून करार दे l
सखी जिंदगी सवार दे ll

युगों से जिगर कैद में है l
हमारे हक़ में गवाह दे ll

अंतरमन की सुनाना l
प्रामाणिक सलाह दे ll

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आज मुलाकात है चाँद से l
सब से कहते हैं शान से ll

सज के आया है हुश्न मिलने l
स्वागत है मंगल - गान से ll

पिया को रिझाने के वास्ते l
आँगन सजाया अरमान से ll

दिल को राहत नसीब हुईं जब l
साँसो से साँसे जुड़ी जान से ll

मुहब्बत का दुश्मन है जहां l
सखी ज़ख़्मी हूँ जहान से ll
१२-६-२०२२

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रात ढले तारों की महफिल सजी हैं l
छलावे की बातों ने नींद को छली हैं ll

बेमतलब का शोर शराबा हो रहा है l
सखी मैं और मेरी तन्हाई भली हैं ll

बातों ने दिल रेजा रेजा किया है l
चुपचाप खामोशी भीतर पली हैं ll

बीजली पास से गुज़री बिना छूके l
फिर कयामत की घड़ियां टली हैं ll  

गुलाबो सी नाजुक है मिरी महबूबा l
दूर से देखो उसे कमसिन कली हैं ll

मिलन की रात मे हुश्न को देखकर l
आज चाँदनी बे हिसाब जली हैं ll

१३-६-२०२२

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दिल का ये नगर हसीन हो गया है l
पढ़ लिखकर वो ज़हीन हो गया है ll

क्या कहें मुहब्बत मे कई रंग देखे हैं l
शायर के साथ महीन हो गया है ll

जिसपर भरोसा किया धोखा मिला l
नदीमो को पाकर दीन हो गया हैं ll

यू बदला फ़िजाओ का रंगरूप के l
आसमान आज ज़मीन हो गया हैं ll

हवाओ के झोंके ने हिलाया जरा l
गुलाबों सा कम सीन हो गया हैं ll
१४-६-२०२२

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दूर से किसीने सदा देके बुलाया हैं l
संकेत में हरा दुपट्टा लहराया हैँ ll

रूह से आवाज़ निकल रहीं थीं l
जुदाई की बातों ने हुलसाया हैं ll

मुसलसल सदा दे रहा हैं कबसे l
दिल का सुकुनो चैन उड़ाया हैं ll

तलबगार हो गये हैं देखने को l
दिलबर का दिया दर्द भाया हैं ll

दीदार ए इश्क में सदा जुनून रहा l
सखी मिलने जैसे खुदा आया हैं ll
१५-६-२०२२

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बेहद हसी गुजरा है तन्हाई का आलम l
सबसे छुपाया हैं रहनुमाई का आलम ll

रुख़सत हो रहीं हैं जान से जान सखी l
सुकून ले गया हैं विदाई का आलम ll

बहोत की क़रीब रहा दिल का सफ़र l
नहीं सह सकते हैं जुदाई का आलम ll

शुक्रगुजार हैं नजरे नाज़ है नदीमो की l
जीगर चीर रहा हैं रोशनाई का आलम ll

सिद्दत से कशिश थी प्यारी मुलाकात की l
मुद्दतों बाद मिला है ख़ुदाई का आलम ll
१६-६-२०२२

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हुश्न ने रुख से घूंघट क्या हटाया l
दिल खुशी से खड़खड़ मुस्कुराया ll

वादियों में मिलन का वादा हुआ l
फ़िर प्यारा मधुर गीत गुनगुनाया ll

कदमो की आहट से खुश हुए पर l
जुदाई बातों से दिल डगमगाया ll

एक नज़र प्यार को देखने के लिए l
सखी इंतजार ने ताउम्र सताया ll

निकल पड़े थे दूर बहोत दूर और l
दिल की पुकार से लौट आया ll
१८-६-२०२२

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किसकी याद में दिल खो गया l
जिसको याद में दिल सो गया ll

चैन-सुकूं तब जा के पाया जब l
नफ़स से नफ़स वो पिरो गया ll

महफिल में ग़ुबार छाया था l
प्यार की शराब से धो गया ll

मुहब्बत की सीमा पार करके l
ख़ुद ही खुदाई में समो गया ll

प्यार की लौ में जले ताउम्र l
कृष्णा ही कृष्ण हो गया। ll
नफ़स - साँस
१९-६-२०२२

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