में और मेरे अहसास - 45 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 45

यादों में बसाना है अकेले अकेले l

तुझ से मिलना है अकेले अकेले ll

 

खुले आसमाँ मे आज उड़ना है l

गले से लगाना है अकेले अकेले ll

 

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जो एहसास लिख नहीं पाए l

वो अनकहे लब्ज समज जाए ll

 

काश मिलन की तडप यू बढ़े l

बिना बुलाए पास दौड़ आए ll

 

काफी देरसे कौआ बोल रहा है l

काश कासिद उनका संदेशा लाए ll

 

इसी लम्हे के इंतजार में जीते हैं l

वो राहों मे खड़े हो बाहें फैलाए ll

 

हर दिन खुशगवार बन जाए ग़र l

आज खुद ही आगोश में समाए ll

२४-११-२०२१

 

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शरदी की साँझ बहोत ही सुहानी है l

प्यारे मौसम में खिली हुई जवानी है ll

 

दो रूहों का संगम होने जा रहा है l

अनूठे प्यार की बेहतरीन निशानी है ll

 

तरसती रहती थी निगाहें मिलन को l

दिल की बेचैनियों को आसानी है ll

 

अधूरा ख्वाब मुकम्मल कैसे हुआ है l

सुनो अनकही अनसुनी कहानी है ll

 

दिले बेक़रार को कुछ तो सुकून मिले l

मुहब्बत की रस्मे मुसलसल निभानी है ll

१९-११-२०२१ 

 

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नई कलम नया कलाम लिखूं l

आज नई सुबह नई शाम लिखूं ll

 

प्यार मे तेरे क्या क्या लिखूं l

मुहब्बत का नया नाम लिखूं ll

 

दो आत्मा के मिलन की वो l

बात खास है पर आम लिखूं ll

 

नए शब्द, नया आगाज और अंदाज़ l 

नई जिंदगी की शुरुआत लिख रही हूँ ll 

 

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दिलों मे हसी की खनक है l

मुहब्बत मे दर्द की दहक है ll

 

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आज ख़ुदा से मिरी गुफ़्तगूं करनी है l

फ़िर दीदार-ए-सूरत हर सू करनी है।l

 

काश एक बार दीदार ए यार हो जाए l

लम्हा लम्हा यहीं जुस्तजू करनी है ll

 

 

शरदी की साँझ बहोत ही सुहानी है l

प्यारे मौसम में खिली हुई जवानी है ll

 

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अनूठे प्रेम बंधन में बंध चुके हैं l

नशीले प्यार के सामने झुके है ll

 

अजीब से रिसते ने बाधा है l

जन्मों जन्म से लम्हे रूके है ll

 

दो आत्मा ओ का मिलन है l

युगों बाद दिल से दिल जुड़े हैं ll

 

सदियों के इंतजार के बाद l

अश्रुओ से दरवाजे खुले है ll

 

प्यारी सी आँखों को देखकर l

फिर जाम के नशे में डूबे है ll

 

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तेरे न होने से कोई फर्क़ नहीं पड़ा l

आज भी महेंदी का रंग है चड़ा ll

 

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आई जब इन्तहा की घड़ी l

भाग्य रेखा से फ़िर लडी ll

 

आज ऊंची उड़ान भरेंगे l

तोड़ेंगे ज़माने की हथकड़ी ll

 

ख्वाबों मे उनसे क्या मिले l

झूम ले इस खुशी की लड़ी ll

 

बिन बारिस के आखें बरसीं l

कुछ तो बात हुईं है बड़ी ll

 

दौड़ के लिपट जाओ झट से l

खुशियां बाहें फैलाए है खड़ी ll

 

भर जवानी में आया बुढ़ापा l

हाथ में लिए फिरते हैं छड़ी ll

प्यार का पहले तोहफ़े में l

अंगुठी नीलम से है जड़ी ll

 

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भर लो दिलों में उत्साह और उमंगें l

उठो बिस्तर से आ गई ठंड की सुबह ll

 

शबनम की बूंदे बरस रहीं हैं आसमान से l

निखरी हुईं प्रकृति का नज़ारा देख लो l

जागो नींद से आ गई ठंड की सुबह ll

 

हल्की हल्की ठंड से खिला है दिन l

मदभरी रुतु छलका रहीं हैं जाम l

निकलो बाहर आ गई ठंड की सुबह ll

 

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एक अजनबी चेहरा अपना सा लगता है l

दिन दहाड़े देखा हुआ सपना सा लगता है ll

 

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टिकी हुई है निगाहें रास्तो पे क्यूँ?

भीगी हुई है निगाहें फ़ासलो से क्यूँ?

 

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वादों से वो मुकर गया कोई गिला नहीं l

रास्तें से वो भटक गया कोई गिला नहीं ll

 

शाम ढले यार दोस्तों की महफिल मे l

जाम पी के छलक गया कोई गिला नहीं ll

 

दिल फेंक आशिकाना मिजाज रखता था l

दिल के हाथो मचल गया कोई गिला नहीं ll

 

कभी आया ही नहीं उम्रभर वादा निभाना l 

बातों से वो फिसल गया कोई गिला नहीं ll

 

खुशगवारी ही रहीं साथ निभाने की लो l

ख्वाबों से निकल गया कोई गिला नहीं ll

 

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याद उन्हें भी आई होगी l

आंख उनकी रोई होगी ll

 

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कौन अफवाहें फ़ैला रहा है l

क्यूँ ये शहर जला रहा है ll

 

पास रहने को बुला रहा है ll

दिल हिलाने दहला रहा है ll

 

अपने ही घर के आँगन में l

बारुदी गोद में सुला रहा है ll

 

जहन को तपिश दे दिन दहाड़े l

ख्वाबों मे आके झुला रहा है ll

 

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भरोसा करके पछताते है लोग यहाँ l

दिल लगाके पछताते है लोग यहाँ ll

 

इश्क़ की पथ्थरीली गली गुजरकर l

जान लुटाके पछताते है लोग यहाँ ll

 

अक्ष दिखाके पछताते है लोग यहाँ ll

 

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हिम्मत नहीं हारना चलना है और बाकी l

भूलभुलैया से निकलना है और बाकी ll

 

कुछ देर बाद सवेरा उजाला ले आएगा l

ठेर जा रात संग जलना है और बाकी ll

 

समंदर के ख्वाबों को सहलाया बहोत l

सागर देखते उछालना है और बाकी ll

 

चाँद जैसे मुखड़े को जी भरकर देखकर l

आज चांदनी को खिलना है और बाकी ll

 

कई युगों के बाद पिया मिलन हुआ है l

खुशी के मौके पे मचलना है और बाकी ll

 

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प्यार करते तो हो पर लुटाते नहीं l

तुम सताते हो लेकिन सताते नहीं ll

 

आंखमिचौली के खेल में शाम से l

वो रूठे है फिर भी क्यूँ मनाते नहीं ll

 

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फूल राहो मे बिछाते रहो l

दिन खुशी से सजाते रहो ll

 

जीने की राह दिखा के l

दीप आशा के जगाते रहो ll

 

हसी खुशी से जियो - जीने दो l

लम्हो को खुशी से सजाते रहो ll

 

घना बादल क़ायनात मे छाया है l

तीरगियो मे रोशनी जगाते रहो ll

 

एक शम्स तुम्हारा भी है सखी l

चमक से उसकी जगमगाते रहो ll

 

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नये साल में सब के होठो की मुस्कुराहट बनो l

अपने और अपनों के लिये सुख की आहट बनो ll

 

हर सबा हर शाम खुशगवार बने जिंदगी की l

रसीली खुशियो से जीवन में सरसराहट बनो ll

 

छोटे बड़ो का भेद भूलाकर क़ायनात मे l

मजबूरो के दिन रात की थरथराहट बनो ll

 

मत सोचों क्या पाओगे किसी को देकर कुछ l

आज दुआओं को बटोरकर जगमगाहट बनो ll

 

सब को प्यारी सी मसर्रतें बाँटकर जहां मे l

सखी दिलों की हसी की छलछलाहट बनो ll

 

सबा  - भोर की हवा

मसर्रतें - ख़ुशियाँ

 

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दिल मे उम्मीदे भरकर ज़ी लेते हैं l

लम्हें सीने से लगाकर ज़ी लेते हैं ll

 

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सब का धर्म एक मधुशाला में l

सब है मस्ती मे मधुशाला मे ll

 

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चलो इस दिवाली प्यार के दिये जलाते हैं l

सब के दिलों में प्यार के दिये जलाते है ll

 

दिलों दिमागों की सरहदों को मिटा दे l

आज नफ़रतों को प्यार से जलाते है ll

 

सोए ख्वाबों को आशा के साथ जगाए l

फिर जीने की उम्मीदों को जगाते है ll

 

छोटे बड़ो को खुशियो का तोहफ़ा दे l

मुस्कराहट देके सभी को हसाते है ll

 

आज अपनों परायों से ऊपर उठकर l

खुशी और प्यार से गले लगाते है ll

 

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