में और मेरे अहसास - 41 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 41

आज बारिस के साथ आंखे भी बरसने लगी l
याद आने के साथ आंखे भी छलकने लगी ll

कुछ ज्यादा ही लंबे हो गये हैं जुदाई के साल l
दिलोदिमाग के साथ आंखे भी तरसने लगी ll

डाकिया के हाथ में खत को देख कर l
धड़कनों के साथ आंखे भी धड़कने लगी ll

एक अर्सा गुज़र गया है आहट नहीं सुनी l
दीवारों के साथ आंखे भी तड़पने लगी ll

रिसता रूह से रूह का जुड़ा हुआ है l
आत्मा के साथ आंखे भी मचलने लगी ll

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मेरी हर ख्वाईश हो तुम l
दिल की फर्माइश हो तुम ll

नजरोसे दूर हो जब से l
मेरी आजमाइश हो तुम ll

बेपनाह बेइंतहा मुहब्बत मे l
इश्क की नुमाइश हो तुम ll

मन से मन का मिलन हुआ है l
मेरे आत्मा के ईश हो तुम l

कितने बर्षों से ढूढ़ रहा था l
मेरे रूह की कशिश हो तुम ll

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मेरा हर लम्हा तेरी यादो मे गुजरता है।
दिन रात दिल में इसी लावा सुलगता है ll

बरसो बीत गये हैं सुकून से मिले हुए l
अब भी मिलने की आशा मे तड़पता है ll

सुना है हुस्न पे निखार आया है तो l
एक नज़र देखने को दिल तरसता है ll

देखे नहीं देखी जाती है हालत इश्क़ की l
आज आसमाँ से भी आसूं बरसता है ll

उनके लौट आने के वादे पे भरोसा है l
फिर दिल बार बार क्यूँ मचलता  है ll

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तेरी यादे,तेरी बाते आज भी मुजे याद है।
तेरी जुठी हर कसमे भी मुजे याद है।l

सात जन्मों तक साथ निभाने की वो l
साथ की हुई हर रसमे भी मुजे याद है।

वादा किया था हर रोज खत लिखूँगा l
तुने रखी हुई हर शरते भी मुजे याद है।l

मुहब्बत की कशिश मे वादियों मे गूँजे वो l
तेरे गुनगुनाए हुए नगमे भी मुजे याद है।l

तेरे हिज्र मे बिताए हुए हर पल हर लम्हे l
जुदाई के दिनों के सदमे भी मुजे याद है।l

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पागलों की तरह प्यार किया लगता है l
मजनू  की तरह प्यार किया लगता है ll

दिल की गहराईओ मे झाक कर देखो l
सागरो की तरह प्यार किया लगता है ll

दुनिया से न दुनिया वालो से डरता है l
चातको की तरह प्यार किया लगता है ll

हुश्न के प्यार में दिवाने बनकर घूमते हैं l
आशिकों की तरह प्यार किया लगता है ll

बेपनाह अंधी मुहब्बत मे बेज़ान हो गये हैं l
चाहको की तरह प्यार किया लगता है ll

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सभी को खुदा ने एक मकसद से भेजा है l
वो पूरा कर लो वो अपने आप अपनी
गोद में सुला देगा ll

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कर्म करते रहो l
किनारा मिल जाएगा ll

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रिनजिम बारिस लेके भादों आया l
धन धनाधन याद लेके भादों आया ll

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चंद रोज की मिली है जिंदगी l
मिर्चीके जैसी तीखी है जिंदगी ll

लाख काँटो के बीच भी देख l
गुलाब तरह खिली है जिंदगी ll

खुशी की चाह मे इश्क़ के l
गमों से गिली है जिंदगी ll

बसंत और पतजड़ की तरह l
पीली कभी निली है जिंदगी ll

आराम और एतमात के साथ l
जिगर से लिखीं है जिंदगी ll

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आईना दिखाने से क्या होगा l
हालात छुपाने से क्या होगा ll

तक़दीर का लिखा हुआ है सब l
हीना मिटाने से क्या होगा ll

विधाता ही जब लिखना भूल गया l
हथेली मे लिखाने से क्या होगा ll

जन्मों जन्म का नाता है हमारा l
साथ पल बिताने से क्या होगा ll

नस नस मे बह रहे हैं खून संग l
आँख से गिराने से क्या होगा ll

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जिंदगी से शिकायत मत करना l
खुदा ने जैसी भी दी है l
सोच समझ कर दी है ll

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तन्हाई का आलम मत पूछो l
हाल दिल का जालिम मत पूछो ll

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दिल मे कीसीने दस्तक दी, कही वो तुम तो नही।
फिर से किसीने आवाज़ दी, कही वो तुम तो नही।l

हवा की एक लहर इस तरह आके चली गई के l
लगता है किसीने छू लिया हो, कही वो तुम तो नही।l

बैठें थे तुम्हारी यादो मे शाम ढले
पुकार किसीकी सुनाईं दी, कही वो तुम तो नही।l

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डर लगता है जुदाई की बातों से l
सहम जाते है जुदाई की रातों से ll

कभी तो सामना होगा हक़ीक़त का l
कब तक मुहँ छूपाएंगें वादों से ll

साथ बिताये है प्यारे लम्हे सो l
दिल बहल जाता है यादों से ll

अजीब सा सुकून मिल रहा है l
नहीं दूर जाना चाहते बाहों से ll

फूल से भी ज्यादा संभालेंगे l
लिपटकर रहना है प्यारों से ll
 

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सभलकर पहनना हरे काँच की चूडिय़ां l
कहीं चुभ न जाए  हरे काँच की चूडिय़ां ll

चूडी वाला प्यार से बनाना इसे तुम l
यारको भा जाए हरे काँच की चूडिय़ां ll

देखने वाला बस देखता ही रहे उसे l
कभी भूल न पाए हरे काँच की चूडिय़ां ll

चूडी लेलो रंग बेरंगी चिल्लाता हुआ l
रोज क्यूँ लाए हरे काँच की चूडिय़ां ll

खन खनाती वो प्यारी प्यारी सी l
याद फ़िर आए हरे काँच की चूडिय़ां ll

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गहरी नींदमें मे सो गई l
प्यारे ख्वाबों मे खो गई ll

हुश्न की मुस्कराहट देख l
दिल मे उम्मीदे बो गई ll

पुराने ज़ख्म ताजा करके l
यादे दिल पे ढो गई ll

क्या देखा सपनों मे के l
आंखे बेशुमार रो गई ll

सुहाने पल याद आए l
निंदिया मुसरत हो गई ll

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जिंदगी नूर है l
बंदगी नूर है ll

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Zainab Makda

Zainab Makda 10 महीना पहले

Jignesh Shah

Jignesh Shah मातृभारती सत्यापित 10 महीना पहले

वात्सल्य

वात्सल्य मातृभारती सत्यापित 10 महीना पहले