में और मेरे अहसास - 37 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 37

काग़ज़ पर लहू की सियाही से लिखीं हुईं l
अनोखी भावनाओ को क़हती है कविताएं ll

दिल के ज़ख्मों से बहती है कविताएं l
आँख के अश्रुओ से क़हती है कविताएं ll

काग़ज़ पर लहू की सियाही से लिखीं हुईं l
अनोखी भावनाओ को क़हती है कविताएं ll

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अजनबी कभी अजनबी नहीं रहते हैं l

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हम से दुर जाना है तो चले जाव सनम l
पास आना चाहो तो चले आव सनम lll

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जिंदगी रंगीन होनी चाहिये l
बंदगी संगीन होनी चाहिये ll

डोलती है दुनिया पर है शर्त की l
सुरिली भी बीन होनी चाहिये ll

जिंदगी का लुफ्त लेने के लिये ll
उम्र भी कम सीन होनी चाहिये ll

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आज दिल तन्हा क्युं है, कोई पुछे तो सही।
कहीं दिल जलता है तो, आग लगी है कहीं lll

भीड़ में रहते हुए भी वीरानी सी छाई हुई है l
मन जहां लगा हो,  दुनिया बस्ती हैं वहीं ll

सबसे मीठी और सुरीली होती हैं ये l
सुनो तो जरा , धड़कन क्या कह रही  ll

मेरी हर साँस मे बसा हुआ है तू सजना l
सुन तेरे बिन मे तो,  कुछ भी तो नहीं ll

एसी तो संजीदा बात नहीं की है मैंने l
हस्ते हस्ते एकाएक, आंखे क्यूँ है बहीं ?

१-७-२०२१

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हम से दुर जाना है तो चले जाव सनम l
पास आना चाहो तो चले आव सनम lll

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तुम्हारी आंखे,तुम्हारी बाते हाय रे तौबा तौबा।
तुम्हारी हँसी,, तुम्हारी यादे हाय रे तौबा तौबा ll

आज शरद पूनम के सुहाने प्यारे से मौसम में l
तुम्हारें साथ, प्यारी राते हाय रे तौबा तौबा ll

दिल ढूंढता है फुर्सत के शाम और सवेरे, खुदाया l
तुम्हारे साथ, रिसते नाते हाय रे तौबा तौबा ll

कैसा निर्मोही है मेरे पिया, तू नहीं जाने रे l
तुम्हारी बाहें ,तुम्हारी राहे हाय रे तौबा तौबा ll

तुमसे मिलके दिलों दिमाग पे जादू सा छा गया है l
तुम्हारा साद, तुम्हारे गाने हाय रे तौबा तौबा ll

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कभी मुहब्बत के जाम मे डुबोकर लिखे हुए l
खुशबु भरे खत को दफन कर दीये है मैने
३१-६-२०२१

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बादल बरसा सब ने देखा l
आंखे बरसी किसी ने न देखा ll

काच टूटा सब ने सुना l
दिल टूटा किसी ने न सुना ll

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पगला है इन्सां जो ख़ुदा को नहीं पहचानता l
खुद को तीसमारखाँ समज़ता है और
यहि कैफ में ता-उम्र जीता है ll

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जग में नाम बड़ा करना है l
तो काम बड़ा बड़ा कर तू ll

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बारीश की हर बुंदको मेरे अश्क समजो l
तारीफ़ के हर शब्दों को मेरे अश्क समजो ll

शर्दी की रातोंमे ठंड से प्यार किया है हमने l
माचिस की हर तीली को मेरे अश्क समजो ll

पत्थर को खुदा मानकर तेरी खातिर बांधे हुए l
तावीज के हर धागों को मेरे अश्क समजो ll

तेरी जुदाई न सह पाएगें एक पल भी, एसे मे l
साज़िश के हर पहलू को मेरे अश्क समजो ll

लाखों गम छुपा रखे हैं इस दिल मे तेरे लिए l
नाचीज़ के हर बात को मेरे अश्क समजो ll
२७-६-२०२१

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जीसे अपना समजो,वही बेगाने निकले l
आंखो से जो छलके, वही पैमाने निकले ll

उम्रभर साथ देते रहे गले लगाकर जिन्हें l
दोस्त मानते रहे , वहीं शैताने निकले ll

किसी की परवाह किए वगैर ताउम्र l
जी जान से चाहा, वही बेगाने निकले ll

२६ -६-२०२१

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हर गुनाह की सजा सिफँ माफी नही होती।
ददँ दिल को हो, ये बात काफी नही होती ।l

बादलों से छुपा हुआ चांद बाहर निकला तो l
मुरादों वाली हो, ये रात काफी नही होती ।l

एक नज़र देखने को कितना तड़पे है हम l
देखने पर पाबंदी, ये मात काफी नही होती।l

अर्श पे पहुंचकर कुछ ज्यादा ही उड़ा, और l
खजूर पे अतका, ये पात काफी नही होती।l

जैसे थे वैसे ही जी रहे हैं आज भी उन्हें l
कुदरत ने मारी, ये लात काफी नही होती।l

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सीने मे एक चिता जलती है,मत पुछो कौन था वो।
कहीं से एक आह पलती है मत पूछो कौन था वो ll

सैर किया करते थे कभी आँखों में आंखे डाल के l
कही दूर एक रात ढलती है मत पूछो कौन था वो ll

आज भी उनकी मुहब्बत की दास्तान सुनते सुनाते हैं l
कही फिर एक बात चलती है मत पूछो कौन था वो ll

बारिस के सुहाने मौसम में घटों भिगा करते थे, वो l
दिल को एक याद छलती है मत पूछो कौन था वो ll

याद है उनके साथ हुई थी जो मीठी मीठी बाते l
फिर से एक जान रडती है मत पूछो कौन था वो ll

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हर गम अब सीने मे दफन कर दीये है मैने l
फिर अश्क आंखो मे दफन कर दीये है मैने ll

इश्क मे उम्रभर साथ निभाने के लुभावने l
फिर वादे दिल मे दफन कर दीये है मैने ll

प्यार भरे पल साथ जीने की जुस्तजू मे l
सब रिसते नाते दफन कर दीये है मैने ll

बेरूखी ने रूह तक को हिला दिया है l
जीने के अरमान दफन कर दीये है मैने ll

कभी मुहब्बत के जाम मे डुबोकर लिखे हुए l
खुशबु भरे खत को दफन कर दीये है मैने ll
२८-६-२०२१

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Razz Kumar

Razz Kumar 12 महीना पहले

Jignesh Shah

Jignesh Shah मातृभारती सत्यापित 12 महीना पहले

Durgesh Tiwari

Durgesh Tiwari मातृभारती सत्यापित 12 महीना पहले