में और मेरे अहसास - 36 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 36

बडा संगदिल मुजे मेरा महेबुल मिला l
फ़िर भी किस्मत से नहीं है कोई गिला ll

बेइंतिहा बेपनाह चाहत के बावजूद भी l
आज क्यूँ नीखरा है हीना का रंग पीला?

अभी तो आए हो, और अभी जाना हैं l
तूने दिल की गहराई से दिया हैं हिला ll

सुहानी हसी मिलन की चांदनी रात में l
नशीली आँखों का नूर हो गया है निला ll

बिन बताए चल दिये हाथ छुड़ा कर l
तूने किस अंदाज से लिया है सिला ll
४ -६-२०२१

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मेरी तन्हाईयो की मुजसे वजह ना पुछो l
मेरी बेवफाइयों की मुजसे वजह ना पुछो ll

मुहब्बत मे दिल की गहराईयो मे बसी हुई l
उस परछाईयां की मुजसे वजह ना पुछो ll

युगोंसे प्यार पे एतराज हैं दुनिया वालो को l
मेरी रुसवाईयां की मुजसे वजह ना पुछो ll

मौत पे शौक मनाने का अलग अंदाज है l
आज शहनाइयां की मुजसे वजह ना पुछो ll

दिल टूटने का सिलसिला चलता रहेता है l
फिर बधाइयां की मुजसे वजह ना पुछो ll
५ -६-२०२१

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न पुछो हम से की इश्क मे कयां होता है।
दिन रात बेपनाह इश्क़ मे बेइंतहा रोता है ll

साथ गुजारे हुए प्यारे सुहाने पलों की l
यादमे रातभर आंसू बहा बहा के सोता है ll

डर है किस्मत जुदाई की महोर न लगा दे l
एक पल की दूरी होते ही चैन खोता है ll

एक नज़र देखने की तड़प इतनी बढ़ी के l
मिलन का वादा चाहत के बीज बोता है ll

हद से गुजर रहा है दिवानगी का सफर l
पागलपन मे मेना मेना रटता तोता है ll
६ -६-२०२१

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यादे है, वादे है, किस्से हैं,  किसी के जाने के बाद l
यही वसीयत रह जाती हैं, किसी के जाने के बाद ll
७-६-२०२१

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यहा दिल लगाना दिलवालो का काम नही,
यहा सब बदनाम है शरीफो का काम नही।l

हाथ पे हाथ रखकर कुछ नहीं मिलेगा सुनो l
कड़ी महेनत के आगे नसीबो का काम नहीं ll

बड़े बड़े ख्वाब और ख्याल टुटके बिखरे है l
दिल बहलाना है, ये लतीफो का काम नहीं ll

मौसम बदलते रहते हैं, पतझड के अंदाज में l
पीली जाजम बिछाना बहारो का काम नहीं ll

हरपल हर लम्हा अच्छे और सच्चे बने रहो l
ख़ुदा की रहमत मे, मजारो का काम नहीं ll

किसी का बुरा ना कटों, ना करने का सोचो l
कर्म अच्छे है तो, नमाजो का काम नहीं ll

बड़े बड़े ख्वाब और ख्याल टुटके बिखरे है l
दिल बहलाना है, ये लतीफो का काम नहीं ll

आजकल के दौर में देखो सच्चे दिल से l
प्यार को निभाना फ़रारो का काम नहीं ll
७-६-२०२१

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बरसो बाद हम उन की गली से निकले l
देखा उसका घर आंख के आंसू पिघले ll

पुराने दिनों की यादे ताज़ा हो गईं औऱ l
मुद्दतों से सोये हुए अरमान है मचले ll

मन ही मन बाते करते थे जिसे आज l
जुबां से प्यार के अल्फाज़ फिसले ll

मुरादों वाले लम्हे से गूजर रहे हैं, तो l
फ़िर आशिक के मिजाज क्यूँ है पतले ll

कोई खुशी न दिखीं उनके चहेरे पे l
आज दिखते हैं तेवर हुस्न के बदले ll

८-६-२०२१

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बड़ी मुद्दतों के बाद चैन और सुकूं पाया है l
ये कौन मेरी कब्र पे गुलाब रखने आया है ll

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तुम्हे दिल्लगी की आदत है, और हमे महोब्बत की।
हमे मोहब्बत की चाहत है और तुम्हें दिल्लगी की ll

कई साल गुजारे है तुम्हारे इंतजार मे बैठे बैठे l
हमे मोहब्बत से राहत हैं, और तुम्हें तिश्नगी की ll

दिवानगी मे घूमते रहते हैं ज़माने भर में आवारा l
क्या कहें तुम्हें बात कुछ और ही है फिरंगी की ll
९-६-२०२१

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कोई खता हुई हो तो हमे बता दो l
झूठी ही सही प्यारी सी सजा दो ll

पत्थर से सर टकराने से बेहतर है l
आज अपने दिल पे ताले लगा दो ll

आज तक समझ में नहीं आ रहा l
क्या खता हुईं है? यू ना दगा दो ll

बहोत गहरा ज़ख्म देके जा रहे हो l
दिल बहलाने की कोई दवा दो ll

एक छोटी सी उम्मीद है तुम से l
कभी तो वफ़ा के बदले वफ़ा दो ll

इतनी बड़ी भी खता नहीं हुईं है l
बात दिल की दिल में दबा दो ll

१०-६-२०२१

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जनाजे को कंधा देनें भागते भागते आए l
जीते जी तो कभी मिलने को भी न आए ll

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प्यार दी वा ना होता है l
हर लम्हा सताता रहता है ll

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जरा संभलकर चलीये,ये दुनिया बडी जालीम है l
पैर संभलकर रखिये ,ये दुनिया बडी जालीम है ll

दिल का धड़कना तो जारी ही रहता है, बावरे सुनो l
ख़त संभलकर लिखिये ,ये दुनिया बडी जालीम है,

महबूब की आँखों से हरपल छलकता ही जाता है l
जाम संभलकर पीजिये , ये दुनिया बडी जालीम है ll

इश्क का हमेशा से दुश्मन रहा है जमाना, खुलेआम l
इशक संभलकर कीजिये ,ये दुनिया बडी जालीम है ll

उम्रभर साथ निभाने है,  ये कई खेल नहीं है सनम l
वादा संभलकर दीजिये ,ये दुनिया बडी जालीम है ll

बहोत टेड़े मेढे रास्तो से गुजरना पड़ेगा आगे तुम्हें l
चलना संभलकर सीखिये ,ये दुनिया बडी जालीम है ll

जो बीच रास्ते में ही छोड़कर जाए तो जरा रुक जा l
उससे संभलकर मिलिये,ये दुनिया बडी जालीम है ll

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बरसो बाद मैंने अपना चांद देखा है l
बड़ी मुरादों के बाद मैंने यार देखा है ll

मृगनयनी महबूबा की नटखट सी l
नैन नशीली आँखों मे प्यार देखा है ll

आज मुहब्बत को इंतिहा हो गई l
हाथ में आशिक के नाम देखा है ll

दुल्हन की तरह शर्माते हुए हमनें l 
पहेली बार गालों को लाल देखा है ll

एक अर्से के बाद उनके हाथों में l
कलम की जगह पे जाम देखा है ll

दिल के हाथो मजबूर हो कर l
अच्छे अच्छो को दास देखा है ll

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न दिन को चैन, न रातो मे नीद है l
प्यार करने वालो का हाल देखा है l

खुदा की एक लाठी ने घूमा दिया l
आज दिलों मे बस्ते राम देखा है ll

बरसो बाद मैंने अपने दिल में l
उनकी चाहत का जाल देखा है ll

खूबसूरत नजारा देखने को मिला l
चांद को चांद के पास देखा है ll
१२-६-२०२१

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रातो को अब निंद नही, दिन को ना चैन मिलता है l
तेरा चांद सा चहेरा देख ने बाद ही दिल खिलता है ll

कबसे इंतजार में बैठे हैं, एक ज़ळक देखने को उसे l
आज बड़े सुकूं से करवा चौथ का चांद निकला है ll

बस अभी गये और अभी दो मिनिट मे लौटते हैं l
महबूबा के राह तकतें इश्क़ बे - आराम दिखता है ll

कभी साथ साथ बिताये थे सुनहरे मिलन के पल l
याद करके पुरानी बातों को, उसे खत लिखता है ll

प्यार की लौ बुज़ती ही नहीं लाख कोशिशों के बाद l
मिलन की तड़प मे ज़माने भर मे घुमता फिरता है ll
१३-६-२०२१

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मेरी चाहत अब मेरा गुनाह बन गई है l
मेरी राहत अब तेरा अजाब बन गई है ll

बहोत कमसिन और नादां हो लिए हैं l
मेरी ताकत अब तेरा अजाब बन गई है ll

जी जान से तन मन धन लुटा दिया है l
मेरी हालत अब तेरा अजाब बन गई है ll

थोड़ी सी दुनियादारी सिखाना चाहते हैं l
मेरी दानत अब तेरा अजाब बन गई है ll

महफिल सजाई तेरी खुशी की खातिर l
मेरी दावत अब तेरा अजाब बन गई है ll
१४-६-२०२१

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हर कीसीको अपने दिल मे पनाह मत दो l
बिन मांगे किसीको भी कभी सलाह मत दो ll

प्यार करते हो या नही ये प्रश्न पूछा है l
अजनबी की इस तरह तुम जवाब मत दो l

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ये बारीश नही,.मेरी आंखो से बहेता अश्क है।
ये आतिश नहीं, मेरे दिल से निकला धूँआ है ll

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सुनो जरा खेल खेल मे दिल्लगी हो गई है l
ये साज़िश नहीं, सिर्फ छोटी सी नादानी है ll

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शक का एक तिनका ख़त्म कर देता हे प्यार l
ये माचिस नहीं, सुलगती हुई चिंगारी छुपी है ll

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ज़माने भर मे अपना सिक्का चलाना चाहते हैं l
ये कातिल नहीं, दिखावे के गुंडे दिखते हैं l

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महसूस किया है वहीं जुबां ने बयां किया है l
ये तारीफ़ नहीं, मेने मन की बात कही है ll

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प्रेम एक अह्सास बन कर रह गया है l
दिल ने जो महसूस करना छोड़ दिया है ll

सुहाना मौसम याद तुम्हारी ले आया है l
दिल ने आज अजब सा सुकून पाया है ll

पास नहीं हो, पर हरपल तुम साथ हो l
तुम तो न आए तुम्हारा पैग़ाम लाया है ll

तुम से दूर रहने का फैसला कर के l
हमने खुद पे बड़ा सा जुल्म ढाया है ll

पहचान ने वाले देख ही लेगे तुम्हें  l
हमारी आँखों मे तुम्हारा साया है ll

वादा तो नहीं किया है आपने फिर भी l
मिलन की आश का बादल छाया है ll

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गीत प्यार का गुनगुनाने को मन मचल रहा है l
आँखों से जाम मुहब्बत का छलक रहा है ll

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इश्क गुनाह है तो हमे हर गुनाह कबूल है l
गम की परछाईयो मे हर पनाह कबूल है।l

मेरा प्यार भी तू,  मेरा इश्क़ भी तू है l
तुम्हारी दी हुईं हर सलाह कबूल है।ll

शक के दायरे में घिरा हुए दिल को l
मुतमईन करने वाला हर गवाह कबूल है ll

मोहलत थोड़ी मिल जाए तो अच्छा l
ताकि आने वाले हर तबाह कबूल है ll

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बंद होठो से भी हमने आज बात कर ली l
खुली आँखों से हमने बसर रात कर ली ll

सुहाने मौसम में साथ बिताए लम्हो मे l
हमारे बीच हुईं मीठी बाते याद कर ली ll

दोनों मे से किसी को हार मंजूर नहीं थीं l
तेरी जीत की खातिर खुद मात कर ली ll

कई दिनों से छुपा हुआ था रूठ कर l
बादलों से चांद निकला तो दाद कर ली ll

अहेसास मे आज तलक धड़क रहे हैं l
उनके इंतजार मे आंखे लाल कर ली ll

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साख से बिछड़े है, वजूद खत्म नहीं हुआ है l
पहेले हरे भरे थे, अब हल्दी का रंग चढ़ा है ll

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कभी आंखो से तो कभी बादल से बरसते है आंसु l
कभी यादो मे तो कभी बातो से छलकते है आंसू ll

जन्म-जन्म का साथ निभाने का इरादा किया था l
कभी वादों से तो कभी हाथो से सरकते है आंसु ll

लंबी जुदाई के दिन काटे नहीं कटते है, ऐसे मे l
कभी गानों मे तो, कभी रातों मे धड़कते है आंसु ll

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ये बारीश नही,.मेरी आंखो से बहेता अश्क है।
ये आतिश नहीं, मेरे दिल से निकलता धूँआ है ll

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प्यार है तो एतबार करना भी सीख लो जाना l
ये माचिस नहीं, सुलगती हुई चिंगारी छुपी है ll

हमने तो सिर्फ दिल्लगी की, तुम दिल लगा बैठें ll
ये साज़िश नहीं, सिर्फ छोटी सी नादानी है ll

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