में और मेरे अहसास - 35 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 35

बोल सखी, आज तुम्हे कयां तोहफा दुं?
तुम्हारे लिए मे ही खूबसूरत तोहफ़ा हूं ll

जान से भी ज़्यादा प्यार करते हैं तुझे l
आज तू जो कहें तो जाँ तुझ पे लुटा दुं?

तेरी हर अदा पे जान निसार है सुन l
तेरे सजदे मे चांद तारे भी बुला दुं?

मेरी हर खुशी तुज से ही है जानम l
तुझे सहलाने बाहों का मेरी झूला दुं?

मेरे नन्हें से फरिश्ते,मेरे दुलारे आज l
चांदनी रात मे लोरी सुना के सुला दुं?

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कीतनी फरीयादे है,यादे है,फीर भी मे खामोश हुं।
बाहर से ढीला दिखता हुं, पर अंदर से बाहोश हुंll

होश वालो के साथ दोस्ती कायम रहें उस वास्ते l
महफ़िल में सब को दिखाने के लिए बेहोश हुं ll

प्यार ने तेरे पूरा ही पागल बन गया सजना l
आज तेरी नजरों का जाम पीकर मदहोश हुं ll

ख्वाबो और ख्यालों की दुनिया में घुमा l
न जाने कितने युगों से तेरा मे आगोश हुं ll

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जो राज है उसे राज रहेने दो l
जो पास है उसे पास रहेने दो ll

नजरों से चाहे दूर, पर दिल से l
जो साथ है उसे साथ रहेने दो ll

अपनों मे कोई ही होता है, वो l
जो खास है उसे खास रहेने दो ll

आँखों से दिल में समाए हुए l
जो नाज़ है उसे नाज़ रहेने दो ll

खामोशी चिल्ला के कहती है l
जो साद है उसे साद रहेने दो ll

कही जग मे चर्चा ना हो जाए l
जो बात है उसे बात रहेने दो ll

साथ बिताए हुए वो हसीन पल l
जो याद है उसे याद रहेने दो ll

प्यार मे पूरी तरह डूब चुके हैं l
जो राग है उसे राग रहेने दो ll

अब तक जो दिल में छुपाए रखा l
जो राज़ है उसे राज़ रहेने दो ll

दोस्ती कब प्यार मे बदल गई l
जो प्यार है उसे प्यार रहेने दो ll

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मुहब्बत को खुदा समजा है l
तुम्हें हमे अपना समजा है ll

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मुजे तेरा हर जख्म प्यारा लगता है।
तनहाईयो मे भी कोई अपना लगता है।

बाद मुद्दतों के मुझे याद कर के l
तेरा फोन करना सपना लगता है ll

बर्षों बीत गये जुदा हुए, फ़िर मेरा l
शायरी मे ज़िक्र न्यारा लगता है ll

दिन रात ख्वाबो मे सजा रखा है l
प्यारी आँखों मे सच्चा लगता है ll

हमने खुद की दुनिया बसाई हुईं है l
उस आसमाँ का सितारा लगता है ll


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कौन अपना,कौन पराया यहा कीसको खबर l
हम अपने आप मे रहते है कयुं बेखबर ll

प्यार और बाते प्यार की लगती है मज़ाक l
हम अपने आप मे रहते है कयुं बेफ़िकर ll

धुंधली सी यादें रह गई है सुहाने पलों की l
हम अपने आप मे रहते है कयुं बेनज़र ll

किसी भी बात से कोई फर्क़ नहीं पड़ेगा l
हम अपने आप मे रहते है कयुं बेअसर ll

टूटकर चाहा, पर चाहत की उम्मीद न की l
हम अपने आप मे रहते है कयुं बेशरम ll

कोई फ़र्क ही नहीं कोई आये या जाये l
हम अपने आप मे रहते है कयुं बेजिगर  ll


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तूफ़ान मे कश्तीयां फ़सी है l
घमंड से हस्तियाँ फ़सी है ll

अर्श से लगातार बरसते l
पानी मे बस्तीयां फ़सी है ll

आशिक के प्यार मे खोई हुई l
आंख मे मस्तियाँ फ़सी है ll

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हम अपनो से खफा कयुं है?
यहा हर कोई बेवफा कयुं है?

खामोशीया सदा-ए दे रही है l
यहा हर कोई बेजुबा कयुं है?

चांदनी भी पर्दे मे है आज तो l
यहा हर कोई बेपर्दा कयुं है?

भीगे मौसम मे भीगने की जगह l
यहा हर कोई बेमज़ा कयुं है?

कुछ फ़ैसले ख़ुदा के होते हैं l
यहा हर कोई बेरजा कयुं है?

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इसलिए साथ नहीं के अच्छे दिखते हो l
इसलिए साथ है क्यूँ की सच्चे लगते हो ll

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खेल मुहब्बत के खतरनाक होते हैं l
खेल किस्मत के खतरनाक होते हैं ll

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जो पल मिले जीभर के जी लो यारो l
खेल जिंदगी के खतरनाक होते हैं ll

इश्क की बाजी खेलने वालो सुनो l
खेल दिलों के खतरनाक होते हैं ll

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खामोशी की जुबाँ होती है l
आगोशी की जुबाँ होती है ll

खुद से करते रहते हैं उस l
बातोंनी की जुबाँ होती है ll

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गुस्सा करनेवाले प्यार बहोत करते हैं l
दर्द को सहनेवाले प्यार बहोत करते हैं ll

दिन रात इश्क़ मे डूबे रहते हैं चाहत के l
गम मे रहनेवाले प्यार बहोत करते हैं ll

जुबां से प्यार, जेब मे खंजर होता है l
रकीब कहनेवाले प्यार बहोत करते हैं ll

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बडा बेददँ मुजे बालम मीला है l
खुदा से बस यही इक गीला ह ll

हर पल सुहाने ख्वाबो को देखती l
रंग आखों का क्यूँ आज पीला है ?

हम ने तो नादानी मे दिल लगाया l
रंग ये कैसा मुहब्बत का खीला है ?

एक बार भी नहीं सोचा हाल मेरा l
सब हाथ की लकीरों की लीला है ll

कुछ ज्यादा ही प्यार मे झुक गये l
दिल का रिसता पहले से ढीला है ll

प्यार को मेरे नजरंदाज करते रहे l
तुम पे अंधे विश्वास का सीला है ll

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तन पिंजरे से बाहर निकल आया है l
मन पिंजरे से अभी दिल लगा बैठा है ll

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मेरे हर ख्याल में तेरा ख्याल शामिल हैं क्यूँ l
हया के पर्दे मे छुपी हुई आंखे कातिल हैं क्यूँ ll

दिलों दिमाग मे छाये है, पर किस्मत मे नहीं l
किस तरह से दिल को चैन हासिल हैं क्यूँ ll

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खुशियो को अपनी कर के बलिदान l
सुख दुःख को सहकर जीता है इन्सान ll

जग में दया करुणा का सागर बहाकर l
वो अच्छे कर्मों करके पाता है सन्मान ll

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मेरी खामोशीया की तुम वजह मत पुछो।
मेरी मासूमियत की तुम वज़ह मत पूछो ll

पागलों की तरफ कोई इंतजार कर रहा है l
बेपनाह चाहत की तुम वज़ह मत पूछो ll

खुली किताब की शक्ल में सामने हे वो l
बेइंतहा शराफत की तुम वज़ह मत पूछो ll

बड़े होकर भी बच्चों सी हरक़त करते हो l
नादाँ दिल शरारत की तुम वज़ह मत पूछो ll

कई बार लौट जाते हैं कदम मेरे घर से क्यूँ l
बेवफा से बगावत की तुम वज़ह मत पूछो ll

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दिलमे रहनेवालो ने दिल तोड दीया l
अपना कहनेवालो ने दिल तोड दीया ll

मेरी अदा को टूट के बेइंतिहा- बेपनाह l
प्यार करनेवालो ने दिल तोड दीया ll

सुबह और शाम एक ही काम किया है l
नादानी सहनेवालो ने दिल तोड दीया ll

रूह से रूह का रिसता जुड़ा हुआ है l
रगों मे बहनेवालो ने दिल तोड दीया ll

शर्मा हया के साथ इश्क मे मेरे रंगबेरंगी l
चूडियां पहनेंवालो ने दिल तोड दीया ll

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सुहानी चांदनी रात मे तेरे मिलन के इंतजार मे l
मेरी आँखों के अश्क तेरी आखों से निकल गया ll

एक मुद्दत गुजरी हैं, बड़े लंबे इंतजार के बाद l
तुझे देखते ही सूरमा आखों मे पिघल गया ll

साथ पल दो पल गुजारे थे प्यार मे वो l
हसीन ख्वाब था आखों से फ़िसल गया ll

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हारी हुई बाज़ी हम जीत कर दिखा देगे l
तुम्हें और खुद को मुस्कुराना सिखा देगे ll

सुबह और शाम खुदा से दुआएँ कर के l
तेरी तक़दीर मे खुशियो को लिखा देगे ll

बहोत हों चुकी नादानी सुनो नादाँ जान l
जल्द ही तुझे दुनियादारी सिखा देगे ll

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रेट व् टिपण्णी करें

JIRARA

JIRARA मातृभारती सत्यापित 1 साल पहले

Very good Hindi, very well drafted, and the feelings excellently expressed, only I did not like the use of the word khanjar, but the author might have some justification for it; overall beautiful rendering.

Jignesh Shah

Jignesh Shah मातृभारती सत्यापित 1 साल पहले

Manoj Navadiya

Manoj Navadiya मातृभारती सत्यापित 1 साल पहले