में और मेरे अहसास - 32 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

में और मेरे अहसास - 32

गर ख्यालो पे रोक लगा दोगे l
तो जुबान अपनेआप मौन रहेगी ll

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याद ने तेरी जीने का हौसला दे दिया l
प्यार ने तेरे जीने का हौसला दे दिया ll

रफ्ता रफ्ता यू बढ़ गई हमारी हिम्मत l
तेरी नज़रों से पीने का हौसला दे दिया l

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दिल एक खिलौना बन गया है l
मनचलो का हाथा बन गया है ll

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दिल की महफिल में दिल बहलाने आये हैं l
नज़रों से जाम पीकर झूम जाने आये हैं ll

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अब तेरी तस्वीर से दिल ना बहलेगा l
तुझे जी भर के देखने दिवाने आये हैं ll

कशिश इस तरफ बढ़ रही है दीदार की l
प्यास जन्मोजन्म की आज बुझाने आये हैं ll

दिल मे भूली बिसरी यादें ताजा हो गईं है l
तेरे फ़साने आज फिर हमे हँसाने आये हैं ll

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बाकी जो बची है l
साथ तेरे गुजारेंगे ll

हरपल हर लम्हा l
युही चाहते रहेगे ll

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जो है वो बस आज ही है l
कल बदलने वाला नहीं है l
आने वाला बसमे नहीं है ll

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खामोशी की अलग ही भाषा होती है l
उसे सुनने के लिए बेज़ुबान हो जाओ ll

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दुनिया छोड़ के तुम गये l
रिसता तोड़ के तुम गये ll

चाहते हम तो साथ चलते l
रास्ते मोड़ के तुम गये ll

अहसान फरामोश से दूर l
कब्र में दोड़ के तुम गये ll

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अपने हिस्से की जीकर चल दिये खलील l
शायरी का शोख ऊपर भी जिंदा रखना ll

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अब तक जुबा करती रहीं इजहारे मुहब्बत l
अब आंखो के इशारों को पढ़ना सिखों तुम ll

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बाग में फूल गुलाबी, पीले खिले हैं l
आज दिल से दिल मिलने मिले हैं ll

बसंत के सुहाने प्यारे मौसमी  l
यादो मे प्यार के सिलसिले हैं ll

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तुम संग खेलु होली काना काहें नाहीं सुनत पुकार काना ll
मोहे सुना सुना लागे विरानी छाई जग तुम बिन काना ll

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पत्थर से मुहब्बत हो गई क्या करे?
इश्क़ की इबादत हो गई क्या करे?

फागुनी सुहानी मौसम ने गुस्ताखी की l
बेहोशी मे शरारत हो गई क्या करे?

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आईना भी मुझे देखकर शर्मा गया l
फ़िर बोला पर्दे मे रहा करो जरा ll

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बाँकपन को आजमा के देख लेना चाहिये l
जिंदगी को आजमा के देख लेना चाहिये ll

सुनहरे ख्वाबों को देख ने से पहले ही l
मुहब्बत को आजमा के देख लेना चाहिये ll

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बाग में फूल गुलाबी, पीले खिले हैं l
आज दिल से दिल मिलने मिले हैं ll

बसंत के सुहाने प्यारे मौसमी  l
यादो मे प्यार के सिलसिले हैं ll

तेरे मेरे मिलन पर भी देखो l
दुनिया के डर से अधखिले है ll

ज़मानेभर मे रुस्वाई का दौर l
मेरी पाक मोहब्बत के सिले है ll

प्रेमी युगलों के मिलन आतुर हैं l
प्यार के दुश्मनों के काफिले हैं ll

१३-३-२०२१

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रंग दे मोहे अपने रंग में लाला l
बाकी रंग सब लगते कच्चे है ll

चल खेले सखी सहेली के संग l
तेरे लिए हम अभी भी बच्चें है ll

आशनाई की है तो निभाएंगे l
मुहब्बत के मामले में सच्चे है ll

२-४-२०२१

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भीग दे मोरी चुनरिया l
रंग दे मोहे सावरिया ll

कभी तो लो खबरिया l
मनमोहना बाँवरिया ll

कब आओगे जान मेरे l
नैन ताकतें हैं डगरिया ll

कहा जाके बस गये हों l
सुनी मोरी है नगरीया ll

कब खाओगे मक्खन ?
छलक रही है गगरिया ll

२-४-२०२१

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आतिशो को हवा ना दिया करो l
जाम पे जाम यूँ ना पिया करो ll

भूल जाओ बीती बातो को  सुनो l
खार दिल में रखकर ना जिया करो ll

चोट खाकर मुस्कुराते तुम रहो l
बात दिल पे यूँ ना लिया करो ll

बात कहनी है तो कह भी डालो ना l
खुलते होठ यूँ ना सिया करो ll

आदतों से जो मजबूर है सखी l
तुम जमाने से यूँ ना बिया करो ll

सखी
दर्शिता बाभभाई शाह
७-१-१९

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अपने किरदार पर डालकर पर्दा l
सब कह रहे हैं जमाना खराब है ll

खुल्ले आम घूम रहे हैं बिन पर्दा l
सब कह रहे हैं जमाना खराब है ll

अब बड़े बूढ़ों के नहीं करते पर्दा l
सब कह रहे हैं जमाना खराब है ll

फेशन के नाम फाँट दिया पर्दा l
सब कह रहे हैं जमाना खराब है ll

नया जमाना नये रूप में पर्दा l
सब कह रहे हैं जमाना खराब है ll

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Rakesh Thakkar

Rakesh Thakkar मातृभारती सत्यापित 1 साल पहले