मे और मेरे अह्सास - 12 Darshita Babubhai Shah द्वारा कविता में हिंदी पीडीएफ

मे और मेरे अह्सास - 12

मे और मेरे अह्सास

भाग- १२

उदास मत हो l
जी ले जिंदगी ll

वो लम्हें ना रहे हैं l
ये लम्हें ना रहेगे ll

तू जी रहा था जैसे l
फिरसे जिएगा वैसे ll

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माना विपदा हें बड़ी l
दम घुट रहा है बहोत l

फिजाओ मे सन्नाटा l
वक़्त सहम गया है ll

एक साँस पे दुसरी l
हर साँस है भारी ll

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जो आपकी खुशी
के लिए हर
पल जीता हो l
उसका हाथ
जीवन में
कभी ना छोड़ना ll

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भीगने का अह्सास काफी नहीं l
आज भीगने भिगोने को आये हैं ll

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दुनिया में तू किसी का l
बेटा, भाई, दोस्त, पिता, पति है l
पर मेरी तो पूरी दुनिया ही तू है ll

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तू अपने कर्मों का फल भुगत रहा है l
ये जहा अंदर बाहर से सुलग रहा है ll

बेजुबान की निर्दयी हत्या कर के तू l
अपनी करनी से क्यों मुकर रहा है l|

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दर्द को पीने की आदत हो गई है l
घुट के जीने की आदत हो गई है ll

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जिंदगी मे छोटे मोटे तूफान आते जाते हैं l
दिल में उम्मीदे जगाकर जिये जाते है ll

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बात को तय तक पहोचना है l
होठ को मय तक पहोचना है ll

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तूफ़ानों से निभाई है दोस्ती यारो l
सुनामी से निभाई है दोस्ती यारो l

ये छोटे बवंडर से नहीं डरने वाले l
जिंदगी से निभाएंगे दोस्ती यारो ll

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लोग मेरे शहर के क्यों परेशान हैं l
बात क्या हुई है क्यों हेरान हैं ll

रोग ये कैसा फेंका है हरकही l
देखता ये जहां क्यो वीरान है ll

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दुनिया में सबसे
मुर्ख एक ही इन्सां है l
वो है बच्चे के प्यार
मे पगली "मां" ll

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समय की मांग है l
हौसला और घोंसला l
कभी ना छोड़ना ll

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मुजे आपकी जरूरत है l
आप को मेरी जरूरत है ll

बात मेरी समझ में आई है l
दिल को तेरी जरूरत है ll

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आँखों मे तूफान दिखा है l
दिलों ने भान खोया है ll

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बात अंजाम तक पहुंचाए ये मुमकिन लग रहा है l
रात सुबह तक पहुंचाए ये मुमकिन लग रहा है ll

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बनावटी सजावट से किसीका दिल नहीं जीता जाता l
अंदर से खूबसूरत इन्सां बाहर से सुन्दर दिखता है ll

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जिंदगी को प्यार के रंगों से सजाओ l
बंदगी को प्यार के रंगों से सजाओ ll

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ख्वाइशे खत्म होने का नाम नहीं ले रही है l
मंजिले है कि दूर दूर होती ही जा रही है ll

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बाद मुद्दतों के मुरादों बाली रात आई है l
चांदनी को देख चांद भी शर्मा गया है ll

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बाद मेरे कोई हाल न पूछेगा l
सभल जा अभी भी वक़्त है ll

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मुस्कान होठो की सजावट है l
काजल आँखों की सजावट है l

वैसे ही सबको प्यार करना l
खूबसूरत दिल की सजावट है ll

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आशियाँ क्यों छीन रहा है l
दम है तो घर बनाने के दिखा ll

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एक हद तक सभ्य बनो l
अपना स्थान मत खोना ll
स्वनिर्भर स्वमानी बनो l
अपना मान मत खोना ll

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जिंदगी को शुरू करने की महोलते देनी चाहिए l
ख्वाइशे पूरी करने के लिए साँसे देनी चाहिए ll

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शांति बाहर नहीं मिलेगी l
वो तो अपने अंदर होती है ll

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जान तू बहोत क़ीमती है l
बिना पर्दे क्यों घूमती है ll

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शांतिपूर्ण जीवन जीना है l
तो मन को शांत कर दे ll

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किसी को मुर्ख बनाके जीत हासिल ना करो l
वो खुशी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाएगी ll

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छोड़ना आसान है क्या l
मोड़ना आसान है क्या ll

जिंदगी मे बीते वक़्त को l
रोकना आसान है क्या ll

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दिल लगाने मे जल्द बाजी हो गई l
वादा है, साथ उम्रभर निभाएंगे ll

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जो आपकी खुशी
के लिए हर
पल जीता हो l
उसका हाथ
जीवन में
कभी ना छोड़ना ll

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घोसला तोड़ने की सज़ा मिल रही है l
आशिया तोड़ने की सज़ा मिल रही है ll

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Parul

Parul मातृभारती सत्यापित 2 साल पहले

Hetal Joahi

Hetal Joahi 2 साल पहले

Rani Parag Bajaj

Rani Parag Bajaj 2 साल पहले

Zalak Mehta

Zalak Mehta 2 साल पहले