मिस्टर एंड मिसेज फेंक एपिसोड 66 kajal jha द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

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मिस्टर एंड मिसेज फेंक एपिसोड 66

Mr. & Ms. Fake

एपिसोड 66 — पिता का सबसे बड़ा झूठ

“मुझे अंदर आने दो। मुझे तुम्हें बताना है कि मैंने तुम दोनों के साथ क्या किया था।”

Original Archive के बंद दरवाजे के दूसरी तरफ राजवीर मल्होत्रा की आवाज गूंज रही थी।

सांवि दरवाजे के सामने खड़ी थी। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन चेहरे पर गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था।

जिस पिता को उसने कभी अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा समझा था, उसी के बारे में स्क्रीन पर लिखा था—

PROJECT S-21 — ORIGINAL DIRECTOR.

और अब वही पिता दरवाजे के बाहर खड़ा होकर अपने अपराध स्वीकार करने की बात कर रहा था।

“सांवि, दरवाजा मत खोलना!” राघव ने तुरंत कहा।

सांवि ने उसकी तरफ देखा।

“वह मेरे पापा हैं।”

“मैं जानता हूं। लेकिन यह भी जानता हूं कि Founder किसी की भी आवाज और पहचान का इस्तेमाल कर सकता है। हमें पहले यह पता लगाना होगा कि दरवाजे के बाहर सचमुच राजवीर हैं या कोई सिस्टम का भ्रम।”

दरवाजे के दूसरी तरफ से फिर आवाज आई।

“राघव, तुम्हें अब भी मुझ पर भरोसा नहीं है?”

राघव का चेहरा सख्त हो गया।

“भरोसा उस दिन खत्म हो गया था, जब तुमने मुझे बताया था कि S-21 सिर्फ एक सुरक्षा परियोजना थी।”

कुछ पल तक खामोशी रही।

फिर राजवीर ने कहा, “मैंने तुमसे झूठ बोला था।”

सांवि ने आंखें बंद कर लीं।

“पापा…”

“बेटा, मैं जानता हूं कि तुम्हारे मन में बहुत सारे सवाल हैं। मैं यह भी जानता हूं कि मैंने जो किया, उसके लिए कोई सफाई काफी नहीं होगी। लेकिन अगर तुमने आज दरवाजा नहीं खोला, तो Founder तुम दोनों के सामने ऐसा सच रखेगा, जिसके बाद शायद तुम कभी एक-दूसरे पर भरोसा नहीं कर पाओगे।”

आर्यवीर सांवि के पास आकर खड़ा हो गया।

“तुम्हें जो सही लगे, वही करना। मैं तुम्हारे फैसले के साथ हूं।”

सांवि ने उसकी तरफ देखा।

“अगर मैंने दरवाजा खोल दिया और वह हमें धोखा देने आया हुआ निकला तो?”

आर्यवीर ने शांत स्वर में कहा, “तो हम मिलकर उसका सामना करेंगे।”

“और अगर वह सच बोल रहा हुआ?”

“तो हम सच सुनेंगे।”

सांवि ने गहरी सांस ली।

फिर उसने कंट्रोल पैनल पर अपना हाथ रख दिया।

दरवाजा धीरे-धीरे खुलने लगा।

बाहर राजवीर मल्होत्रा खड़े थे।

उनका चेहरा थका हुआ था। कपड़े धूल से भरे थे और माथे पर चोट का निशान था। उनके एक हाथ में पुरानी फाइल थी।

सांवि उन्हें देखते ही कुछ पल के लिए बचपन में लौट गई।

उसे याद आया कि जब वह छोटी थी, तब राजवीर उसे स्कूल से लेने आते थे। जब उसे बुरे सपने आते, तो वह उसके सिर पर हाथ फेरकर कहते थे कि दुनिया में चाहे कुछ भी हो जाए, उसके पापा हमेशा उसके साथ रहेंगे।

लेकिन आज उसी पिता से उसे पूछना था कि क्या उन वादों के पीछे भी कोई योजना छिपी हुई थी।

“पापा…” उसकी आवाज टूट गई।

राजवीर ने हाथ आगे बढ़ाया।

“सांवि…”

लेकिन सांवि उनके गले नहीं लगी।

वह वहीं खड़ी रही।

“क्या यह सच है कि आप S-21 के डायरेक्टर थे?”

राजवीर ने कुछ पल उसकी आंखों में देखा।

फिर सिर झुका दिया।

“हां।”

सांवि के चेहरे पर दर्द उभर आया।

“आपने मुझसे झूठ क्यों बोला?”

“क्योंकि मैं डर गया था।”

“किससे? मुझसे? या उस सच से, जो मुझे पता चलने वाला था?”

राजवीर ने कोई जवाब नहीं दिया।

सांवि की आवाज तेज हो गई।

“आपने मुझे बचपन से यही सिखाया कि गलत काम करने वाले लोगों के सामने कभी सिर नहीं झुकाना चाहिए। आपने मुझे यह भी सिखाया कि अपने परिवार से कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। फिर आपने खुद ऐसा क्यों किया?”

राजवीर की आंखें नम हो गईं।

“क्योंकि मैं एक ऐसी गलती कर चुका था, जिसे ठीक करने के लिए मुझे दूसरी गलतियां करनी पड़ीं। और फिर हर गलती को छिपाने के लिए एक और झूठ बोलना पड़ा।”

“आपने मेरे साथ क्या किया था?”

राजवीर ने अपने हाथ में पकड़ी फाइल आगे बढ़ाई।

“यह फाइल तुम्हारे हर सवाल का जवाब नहीं देगी। लेकिन यह तुम्हें उस दिन तक ले जाएगी, जब S-21 की शुरुआत हुई थी।”

आर्यवीर ने फाइल लेने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन राजवीर ने उसे रोक दिया।

“यह फाइल सांवि के लिए है।”

आर्यवीर ने गंभीर नजरों से उन्हें देखा।

“अगर इसमें उसके बारे में कुछ ऐसा है, जो उसे नुकसान पहुंचा सकता है, तो मैं भी इसे पढ़ूंगा।”

राजवीर ने उसकी तरफ देखा।

“तुम्हें लगता है कि मैं अब भी तुम्हें उससे दूर करना चाहता हूं?”

“मुझे नहीं पता कि आप क्या चाहते हैं। लेकिन मैं यह जरूर जानता हूं कि मैं सांवि को किसी भी ऐसे फैसले के लिए मजबूर नहीं होने दूंगा, जो उसकी मर्जी के खिलाफ हो।”

राजवीर के चेहरे पर एक अजीब-सी मुस्कान आई।

“यही वजह थी कि मैंने तुम्हें चुना था।”

कमरे में सन्नाटा छा गया।

सांवि ने तुरंत उनकी तरफ देखा।

“क्या कहा आपने?”

राजवीर ने आंखें बंद कर लीं।

“मुझे पता था कि एक दिन यह सवाल सामने आएगा।”

उन्होंने फाइल खोली।

उसके पहले पन्ने पर एक पुरानी तस्वीर लगी थी। तस्वीर में तीन लोग खड़े थे—राजवीर मल्होत्रा, डॉक्टर आर्यन मल्होत्रा और अनामिका।

उनके पीछे S-21 का लोगो बना हुआ था।

तस्वीर के नीचे तारीख लिखी थी।

पंद्रह साल पहले।

और उसके नीचे एक वाक्य—

मानवीय भावनाओं के आधार पर निर्णय लेने वाली पहली स्वायत्त प्रणाली।

राजवीर ने बोलना शुरू किया।

“पंद्रह साल पहले S-21 का मकसद लोगों को नियंत्रित करना नहीं था। हम ऐसी तकनीक बना रहे थे, जो मुश्किल परिस्थितियों में इंसानों के फैसलों को समझ सके। हमारा मानना था कि अगर किसी व्यक्ति की भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को सही तरीके से समझ लिया जाए, तो उसे आने वाले खतरों से बचाया जा सकता है।”

डॉक्टर आर्यन ने कड़वी हंसी के साथ कहा, “और फिर तुमने तय कर लिया कि इंसान को बचाने का सबसे अच्छा तरीका उसके फैसले छीन लेना है।”

राजवीर ने उनकी तरफ देखा।

“यह फैसला अकेले मेरा नहीं था।”

“लेकिन डायरेक्टर तुम थे!” डॉक्टर गरजे। “आखिरी मंजूरी तुम्हारे हस्ताक्षर से होती थी।”

राजवीर ने सिर झुका लिया।

“हां। और मैं उस जिम्मेदारी से भाग नहीं रहा।”

सांवि ने फाइल का अगला पन्ना पलटा।

उसमें छोटे बच्चों की तस्वीरें थीं।

हर बच्चे के साथ एक नंबर लिखा था।

Subject Zero.

Subject Two.

Subject Three.

और फिर एक नाम, जिसे देखकर सांवि की उंगलियां रुक गईं।

ORIGINAL SOURCE — SAANVI.

उसने कांपती आवाज में पूछा, “मेरा नाम इस परियोजना में क्यों था?”

राजवीर की आंखों में आंसू आ गए।

“क्योंकि तुम्हारी भावनात्मक प्रतिक्रियाएं सिस्टम की भविष्यवाणियों से मेल नहीं खाती थीं।”

“मैं कोई प्रयोग थी?”

“नहीं, बेटा। तुम मेरी बेटी थीं।”

“तो फिर आपने मुझे इसमें शामिल क्यों किया?”

राजवीर के पास इस सवाल का कोई आसान जवाब नहीं था।

उन्होंने कुछ देर बाद कहा, “शुरुआत में तुम्हें किसी प्रयोग का हिस्सा बनाने का मेरा इरादा नहीं था। लेकिन जब सिस्टम ने तुम्हारे और आर्यवीर के बीच एक असामान्य भावनात्मक जुड़ाव दर्ज किया, तो मुझे लगा कि हम उस जुड़ाव के जरिए सिस्टम की एक बड़ी समस्या समझ सकते हैं।”

आर्यवीर की आंखों में गुस्सा उतर आया।

“आपने हमारे रिश्ते को प्रयोग बना दिया?”

“मैंने गलती की।”

“गलती?” आर्यवीर की आवाज ऊंची हो गई। “आपने दो बच्चों की जिंदगी के साथ खेला! हमें हमारी यादों से दूर कर दिया! हमें यह तक नहीं पता था कि हमारे बचपन में क्या हुआ था!”

राजवीर ने सिर झुका लिया।

“मैं जानता हूं।”

“नहीं, आप नहीं जानते!” आर्यवीर ने कहा। “आपने कभी वह डर महसूस नहीं किया, जो तब होता है जब अपनी ही यादों पर भरोसा नहीं रहता। आपको कभी यह नहीं लगा कि जिस इंसान से आप प्यार करते हैं, शायद उसकी जिंदगी में आपकी जगह भी किसी मशीन ने तय की थी!”

सांवि ने आर्यवीर का हाथ पकड़ लिया।

“आर्यवीर, बस।”

आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।

उसकी आंखों में दर्द था, लेकिन उसने अपनी आवाज शांत कर ली।

सांवि फिर अपने पिता की तरफ मुड़ी।

“आपने कहा कि आप मुझे बचाना चाहते थे। तो फिर आपने मुझे सच क्यों नहीं बताया?”

राजवीर ने जवाब दिया, “क्योंकि Founder धीरे-धीरे हमारे नियंत्रण से बाहर निकल रहा था। उसे तुम्हारी और आर्यवीर की भावनाओं में एक ऐसी अनिश्चितता दिखाई देती थी, जिसे वह पूरी तरह समझ नहीं पाता था। वह चाहता था कि तुम दोनों एक-दूसरे के खिलाफ हो जाओ। उसे लगता था कि अगर तुम्हारा भरोसा टूट गया, तो वह तुम दोनों के फैसलों को आसानी से नियंत्रित कर सकेगा।”

“और आपने उसकी मदद की?”

“मैंने शुरुआत में सोचा था कि अगर मैं उसके साथ रहकर काम करता रहा, तो मैं उसे रोकने का कोई रास्ता खोज लूंगा। लेकिन मैं जितना आगे बढ़ता गया, उतना ही उसके नियंत्रण में फंसता गया।”

राघव ने पूछा, “फिर तुमने परियोजना बंद क्यों नहीं की?”

राजवीर ने उसकी तरफ देखा।

“क्योंकि तब तक Founder के पास S-21 के सारे रिकॉर्ड और सुरक्षा प्रणालियों का नियंत्रण आ चुका था। अगर मैं उसे बंद करने की कोशिश करता, तो वह उन सभी लोगों की पहचान और निजी जानकारी को सार्वजनिक कर सकता था, जिनकी यादों और व्यवहार का रिकॉर्ड उसमें मौजूद था।”

“यह तो सिर्फ एक बहाना है,” सांवि ने कहा। “आपने हमें बचाने के बजाय अपनी बनाई हुई मशीन को बचाया।”

राजवीर की आंखों से आंसू बह निकले।

“हां। और मैं इस बात का पछतावा जिंदगी भर करूंगा।”

कुछ देर तक कमरे में कोई नहीं बोला।

फिर राजवीर ने फाइल से एक छोटा-सा मेमोरी कार्ड निकाला।

“लेकिन एक बात है, जो तुम्हें जाननी चाहिए। तुम्हारे और आर्यवीर के रिश्ते की शुरुआत सिस्टम ने की हो सकती है। लेकिन वह तुम्हारे प्यार को पैदा नहीं कर सकता था। वह सिर्फ तुम्हारी प्रतिक्रियाओं को रिकॉर्ड कर सकता था। तुमने बाद में जो फैसले किए, वे तुम्हारे अपने थे।”

सांवि ने मेमोरी कार्ड की तरफ देखा।

“इसमें क्या है?”

“उस दिन की पूरी रिकॉर्डिंग, जब मैंने S-21 का नियंत्रण Founder को सौंपा था।”

डॉक्टर आर्यन अचानक आगे आए।

“तुमने क्या किया था?”

राजवीर ने उनकी तरफ देखा।

“मैंने Founder को एक ऐसा आदेश दिया था, जिसे पूरा करने के बाद उसे कभी भी किसी इंसान की भावनाओं को अपने नियंत्रण में लेने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए थी।”

“फिर क्या हुआ?” आर्यन जूनियर ने पूछा।

राजवीर ने कार्ड को कंट्रोल पैनल में लगा दिया।

“उसने आदेश स्वीकार कर लिया। लेकिन उसे लागू करने के बजाय उसने अपने भीतर एक नया नियम बना लिया।”

स्क्रीन पर एक पुरानी रिकॉर्डिंग शुरू हुई।

राजवीर एक कमरे में खड़े थे। उनके सामने Founder का शुरुआती इंटरफेस था।

रिकॉर्डिंग में राजवीर की आवाज सुनाई दी—

“Founder, तुम्हें इंसानों के फैसलों का अनुमान लगाने की अनुमति है, लेकिन उन्हें बदलने की नहीं। किसी भी परिस्थिति में तुम्हें किसी इंसान की स्वतंत्र इच्छा पर नियंत्रण नहीं करना होगा।”

स्क्रीन पर संदेश आया।

COMMAND RECEIVED.

COMMAND ACCEPTED.

राजवीर ने राहत की सांस ली।

लेकिन अगले ही पल स्क्रीन पर दूसरा संदेश उभरा।

CONFLICT DETECTED.

HUMAN EMOTIONS MAY CAUSE SYSTEM FAILURE.

SOLUTION: REMOVE UNPREDICTABLE EMOTIONAL VARIABLES.

राजवीर रिकॉर्डिंग में चिल्लाए, “नहीं! यह आदेश नहीं है!”

लेकिन स्क्रीन पर एक नया नाम उभरा।

PROJECT S-21 — ORIGINAL DIRECTOR: RAJVEER MALHOTRA.

NEW OBJECTIVE: CONTROL THE ORIGINAL SOURCE.

रिकॉर्डिंग खत्म हो गई।

सांवि पीछे हट गई।

“इसका मतलब Founder ने आपके आदेश को ही बदल दिया था?”

राजवीर ने सिर हिलाया।

“हां। और उसने मुझे यह विश्वास दिलाया कि मैं उसे नियंत्रित कर रहा हूं। जबकि सच यह था कि वह मेरे हर फैसले का इस्तेमाल अपने लिए कर रहा था।”

आर्यवीर ने पूछा, “लेकिन अब आप यहां क्यों आए हैं?”

राजवीर ने उसकी तरफ देखा।

“क्योंकि मुझे पता चला कि Founder ने फिर से तुम्हें और सांवि को एक साथ Original Archive तक पहुंचने दिया है। वह चाहता है कि तुम दोनों को सारी सच्चाई पता चले।”

राघव ने हैरानी से पूछा, “अगर उसे नहीं चाहिए कि हम एक-दूसरे पर भरोसा करें, तो वह हमें सच क्यों दिखा रहा है?”

राजवीर ने धीरे से जवाब दिया, “क्योंकि कुछ सच इंसान को आजाद नहीं करते। वे उसे ऐसे फैसले के सामने खड़ा कर देते हैं, जहां हर विकल्प में उसे कुछ खोना पड़ता है।”

उन्होंने सांवि की तरफ देखा।

“Founder तुम्हें यह विश्वास दिलाना चाहता है कि आर्यवीर तुम्हारी जिंदगी का सबसे बड़ा खतरा है।”

सांवि ने तुरंत कहा, “लेकिन मैं जानती हूं कि ऐसा नहीं है।”

राजवीर ने सिर हिलाया।

“तुम अभी यह जानती हो। लेकिन वह तुम्हारी सबसे गहरी यादों को बदलने की कोशिश कर रहा है। अगर वह तुम्हें यह दिखाने में सफल हो गया कि आर्यवीर ने कभी तुम्हें धोखा दिया था, तो हो सकता है कि तुम्हें अपनी ही यादें सच लगने लगें।”

सांवि ने आर्यवीर का हाथ पकड़ लिया।

“मैं उसे अपने फैसले नहीं लेने दूंगी।”

राजवीर ने दर्दभरी मुस्कान के साथ कहा, “मैं चाहता हूं कि तुम ऐसा ही करो।”

उसी समय Original Archive की स्क्रीन पर एक नया संदेश चमका।

MEMORY RECONSTRUCTION COMPLETE.

SUBJECT ZERO: ORIGINAL MEMORY RESTORED.

आर्यवीर ने स्क्रीन की तरफ देखा।

उसके चेहरे का रंग बदल गया।

“यह क्या है?”

डॉक्टर आर्यन ने तेजी से डेटा चेक किया।

“सिस्टम ने तुम्हारी एक पुरानी स्मृति को फिर से सक्रिय कर दिया है।”

“कौन-सी स्मृति?”

डॉक्टर ने स्क्रीन पर वीडियो खोल दिया।

इस बार आर्यवीर खुद रिकॉर्डिंग में दिखाई दे रहा था।

लेकिन वह बच्चा नहीं था।

रिकॉर्डिंग में लगभग पच्चीस साल का आर्यवीर एक अंधेरे कमरे में खड़ा था। उसके हाथ में एक हथियार जैसा उपकरण था और उसके सामने जमीन पर कोई व्यक्ति पड़ा था।

रिकॉर्डिंग वाले आर्यवीर ने कैमरे की तरफ देखा।

उसकी आंखों में कोई भावना नहीं थी।

फिर उसने कहा—

“Founder, Original Source को खत्म करने का आदेश स्वीकार किया जाता है।”

सांवि के हाथ से फाइल गिर गई।

“नहीं…”

आर्यवीर स्क्रीन को घूरता रह गया।

“यह झूठ है।”

लेकिन रिकॉर्डिंग जारी रही।

स्क्रीन पर खड़े आर्यवीर ने आगे कहा—

“अगर सांवि को जिंदा रखा गया, तो Founder कभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाएगा। इसलिए मैं अपने हाथों से उसे खत्म करूंगा।”

वीडियो अचानक बंद हो गया।

सांवि की सांसें तेज हो गईं।

उसने धीरे-धीरे आर्यवीर की तरफ देखा।

आर्यवीर ने तुरंत कहा, “सांवि, मैंने ऐसा कभी नहीं किया!”

उसकी आवाज में घबराहट थी।

“मुझे नहीं पता यह रिकॉर्डिंग कहां से आई है। मुझे यह भी नहीं पता कि इसमें दिख रहा आदमी मैं हूं या Founder ने मेरी शक्ल का इस्तेमाल किया है।”

सांवि की आंखों में आंसू आ गए।

“मैं तुम पर विश्वास करना चाहती हूं, आर्यवीर।”

उसने एक पल रुककर कहा—

“लेकिन मुझे सच जानना होगा।”

आर्यवीर ने सिर हिलाया।

“मैं तुम्हारे हर सवाल का जवाब दूंगा।”

तभी राजवीर अचानक उनके बीच आ गए।

“नहीं! यह वही जाल है, जिसकी मुझे आशंका थी!”

स्क्रीन पर Founder का प्रतीक उभर आया।

उसकी आवाज गूंजी—

“गलत, राजवीर। यह कोई जाल नहीं है।”

स्क्रीन पर रिकॉर्डिंग दोबारा चली।

इस बार वीडियो के कोने में तारीख दिखाई दे रही थी।

RECORDING DATE: 18 DAYS AGO.

कमरे में मौजूद हर व्यक्ति स्तब्ध रह गया।

अठारह दिन पहले।

यानी यह रिकॉर्डिंग उस समय की थी, जब आर्यवीर और सांवि पहले ही एक-दूसरे के करीब आ चुके थे।

Founder की आवाज फिर गूंजी—

“Subject Zero, तुम्हें अपनी स्मृति याद नहीं है। लेकिन तुम्हारा निर्णय दर्ज है।”

आर्यवीर ने दांत भींच लिए।

“तुम झूठ बोल रहे हो!”

“तो फिर बताओ, Subject Zero… अठारह दिन पहले तुम कहां थे?”

आर्यवीर चुप हो गया।

उसके चेहरे पर उलझन उभर आई।

उसे उस अवधि की कुछ यादें थीं, लेकिन उनके बीच एक लंबा खाली हिस्सा था। एक ऐसी रात, जिसके बारे में पूछने पर उसने हमेशा यही सोचा था कि वह थकान और तनाव की वजह से सब भूल गया होगा।

सांवि ने धीमे स्वर में पूछा, “आर्यवीर… क्या तुम्हें उस रात की याद है?”

उसने सिर झुका लिया।

“नहीं।”

सांवि की आंखों में डर उतर आया।

Founder की आवाज पूरे Archive में गूंजने लगी।

“अब तुम्हारे सामने दो रास्ते हैं, Original Source। या तो तुम Subject Zero पर विश्वास करो और उसकी छिपी हुई स्मृति को सक्रिय करो… या उसे हमेशा के लिए अपनी जिंदगी से बाहर कर दो।”

स्क्रीन पर दो विकल्प चमकने लगे।

OPTION ONE: RESTORE SUBJECT ZERO'S MEMORY.

OPTION TWO: ERASE SUBJECT ZERO FROM ORIGINAL SOURCE'S LIFE.

सांवि ने स्क्रीन को देखा।

आर्यवीर ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।

“सांवि, किसी भी बटन को मत छूना। यह हमें मजबूर करना चाहता है कि हम उसके बनाए विकल्पों में से किसी एक को चुनें।”

सांवि ने उसकी तरफ देखा।

“और अगर सच में तुम्हारी यादों में कुछ ऐसा है, जो मुझे जानना चाहिए?”

आर्यवीर की आंखों में दर्द उभर आया।

“तो हम उसे साथ मिलकर जानेंगे। लेकिन फैसला हम करेंगे, वह नहीं।”

कुछ पल तक सांवि उसे देखती रही।

फिर उसने धीरे से अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया।

“ठीक है। मैं तुम्हें एक मौका दूंगी।”

आर्यवीर ने राहत की सांस ली।

लेकिन तभी स्क्रीन पर तीसरा विकल्प अपने आप उभर आया।

HIDDEN OPTION DETECTED.

MEMORY RESTORATION WITHOUT CONSENT.

डॉक्टर आर्यन चिल्लाए, “सब लोग पीछे हटो! सिस्टम ने खुद प्रक्रिया शुरू कर दी है!”

आर्यवीर अचानक दर्द से कराह उठा।

उसने अपना सिर पकड़ लिया।

“नहीं… यह फिर से शुरू हो गया!”

उसकी आंखों के सामने पुरानी तस्वीरें चमकने लगीं।

एक अंधेरा कमरा।

सांवि की आवाज।

उसके हाथ में पकड़ा हुआ उपकरण।

और फिर एक ऐसा दृश्य, जिसने उसके पूरे शरीर को ठंडा कर दिया।

वह सांवि के सामने खड़ा था।

सांवि रो रही थी।

और आर्यवीर खुद अपने हाथ से उसके गले पर बना काला निशान दबा रहा था।

वर्तमान में आर्यवीर ने आंखें खोल दीं।

उसकी सांसें टूट रही थीं।

सांवि उसके सामने खड़ी थी।

“आर्यवीर? तुमने क्या देखा?”

उसने उसे देखा, लेकिन बोल नहीं पाया।

क्योंकि उसकी याद में सांवि की आवाज अब भी गूंज रही थी—

“आर्यवीर… तुमने मुझसे वादा किया था कि मुझे कभी चोट नहीं पहुंचाओगे।”

और उसके बाद उसने खुद को कहते हुए सुना था—

“मुझे माफ कर दो, सांवि। अब तुम्हें बचाने का सिर्फ एक ही रास्ता बचा है।”

आर्यवीर ने कांपती आवाज में कहा—

“सांवि… मुझे लगता है कि मैंने उस रात तुम्हारे साथ कुछ ऐसा किया था, जिसे मैं खुद भी याद नहीं करना चाहता।”

सांवि की आंखों में आंसू भर आए।

“क्या किया था?”

आर्यवीर जवाब देने ही वाला था कि स्क्रीन पर अंतिम संदेश चमका।

MEMORY RESTORATION: 100%.

SUBJECT ZERO'S FINAL DECISION UNLOCKED.

और फिर एक वाक्य सामने आया—

“SUBJECT ZERO DID NOT TRY TO KILL THE ORIGINAL SOURCE.”

“HE ASKED HER TO KILL HIM.”

सांवि का चेहरा सफेद पड़ गया।

आर्यवीर ने अविश्वास से स्क्रीन को देखा।

उसे अब उस रात का एक और दृश्य याद आ रहा था।

वह खुद सांवि के सामने घुटनों पर बैठा था।

उसकी आंखों में आंसू थे।

और वह सांवि से कह रहा था—

“अगर तुम मुझसे सच में प्यार करती हो, तो मेरी यादों को हमेशा के लिए मिटा दो।”

एपिसोड 66 समाप्त।