ध्रुव की तारा - भाग 31 Anamika द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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ध्रुव की तारा - भाग 31

​ध्रुव की तारा
भाग - ३१
लेखिका "अनामिका"
​कमरे में बजती शहनाई और बाहर मेहमानों की चहल-पहल के बीच आखिरकार वो दिन आ ही गया। इतने महीनों की भागदौड़, थका देने वाली शॉपिंग और रिश्तेदारों की किचकिच के बाद आज ध्रुव और तारा की शादी का दिन था।
​एक तरफ ध्रुव शीशे के सामने खड़ा अपनी शेरवानी की कॉलर ठीक कर रहा था। सिर पर बंधी पगड़ी और इस लिबास में वह सच में किसी रियासत के राजकुमार जैसा लग रहा था। दोस्तों की तंजभरी बातें और गले में चुभती एम्ब्रॉयडरी के बीच उसका ध्यान बार-बार घड़ी पर जा रहा था। हफ्तों की थकान के बावजूद उसके चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी—कि आज आखिरकार वह अपनी तारा को हमेशा के लिए अपना बनाने जा रहा था।
​दूसरी तरफ तारा भारी-भरकम लहंगे और पेट में उठती घबराहट दोनों को संभालने की कोशिश कर रही थी। हाथों की महँदी देखते ही उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगता। आँखों में नई ज़िंदगी की झिझक थी, पर उससे कहीं ज़्यादा सुकून था।
​जब सहेलियां तारा को मंडप की तरफ ले जाने लगीं, तो उसकी नज़र सीधी ध्रुव पर पड़ी। शेरवानी में सजे ध्रुव को देखकर तारा का दिल भर आया। यह वही इंसान था जिसने बचपन से हर मुश्किल में ढाल बनकर उसकी रक्षा की थी—वही राजकुमार जिसका सपना उसने सालों से देखा था। वहीं ध्रुव जब लाल जोड़े में सजी तारा को अपनी ओर आते देख रहा था, तो उसे महसूस हुआ कि यह वही लड़की है जिसने उसकी बिखरी हुई ज़िंदगी को सँवारा था।
​मंडप के एक कोने में खड़े आनंद जी और सुधा जी अपनी बेटी को दुल्हन के रूप में देखकर अपने आँसू नहीं रोक पा रहे थे। दुनिया के हर माता-पिता की तरह उनके दिल में भी वही कसक थी कि कल तक जो बेटी घर की रौनक़ हुआ करती थी, अब वह पराए घर चली जाएगी। उनकी आँखें देख सुमन जी और विजय जी धीरे से उनके पास आए। बरसों पुराने इस साथ और रिश्ते को महसूस करते हुए विजय जी ने आनंद जी का हाथ थाम लिया, वहीं सुमन जी ने सुधा जी के कंधे पर हाथ रखते हुए बेहद प्यार से कहा, "फिक्र मत कीजिए, तारा सिर्फ आपकी बेटी नहीं, हमारे घर की भी रोशनी है। ध्रुव और हम सब मिलकर इसे हमेशा पलकों पर रखेंगे।" इस आश्वासन ने उनके तड़पते दिल को एक बहुत बड़ा सहारा दे दिया।
​पंडित जी के मंत्रों और धुएँ के बीच फेरों की रस्म पूरी हुई। जब ध्रुव ने उसकी मांग में सिंदूर भरा, तो बिना किसी बड़े फ़िल्मी ड्रामे के, दोनों ने बस एक-दूसरे का हाथ कसकर थाम लिया। आँखों ही आँखों में सालों के इस साथ और भरोसे का शुक्रिया अदा करते हुए, दोनों के होठों पर एक ही सुकून भरा अहसास मुस्कुरा उठा—कि आज आखिरकार, तारा हमेशा-हमेशा के लिए ध्रुव की हो गई।
शादी के कुछ सालों बाद....
​ध्रुव के अपार्टमेंट में सुबह-सुबह की वही जानी-पहचानी हड़बड़ी थी। ध्रुव अलमारी के कपड़े अस्त-व्यस्त करते हुए हॉल की तरफ चिल्लाया, "तारा! मेरी वो लाल वाली फाइल कहाँ है? मुझे ऑफिस के लिए पहले ही देर हो रही है, प्लीज जल्दी ढूंढ कर दो!"
​तारा किचन से हाथ पोंछते हुए बाहर आई और मुस्कुराते हुए अपनी कमर पर हाथ रखकर बोली, "ध्रुव, अगर आँखों का इस्तेमाल सिर्फ गुस्सा दिखाने के लिए न करके ढूंढने में करोगे, तो मिल जाएगी। वहीं सेंटर टेबल पर रखी है, ध्यान से देखो!"
​ध्रुव ने मेज़ की तरफ देखा तो फाइल वहीं सामने रखी थी। उसने झेंपते हुए अपना सिर खुजलाया और फाइल उठाते हुए कहा, "तो तुम इसे थोड़ा और ऊपर रख देतीं ना, मुझे दिखती कैसे?"
​"हाँ, अब मेरी गलती निकाल लो!" तारा ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए आँखें मटकाईं।
​अभी दोनों की यह मीठी नोक-झोंक चल ही रही थी कि तभी घर के मुख्य दरवाजे पर स्कूल की यूनिफॉर्म पहने, पीठ पर बैग लादे ४-५ साल का एक क्यूट सा बच्चा आकर खड़ा हो गया। उसने अपने नन्हे-नन्हे हाथ कमर पर रखे और रोबीले अंदाज़ में चिल्लाया, "अरे पापा! जल्दी करो ना, आज फिर आपकी वजह से मुझे स्कूल जाने में देर हो जाएगी! मैम रोज मुझे ही डांटती हैं।"
​अपने छोटे से बेटे 'अंश' की यह बात सुनते ही ध्रुव और तारा का सारा झगड़ा पल भर में हवा हो गया। दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और खिलखिलाकर हँस पड़े। ध्रुव घुटनों के बल बैठकर अपने बेटे को गले से लगाता है, वहीं तारा दोनों को प्यार से देखती रहती है।
​बचपन की दोस्ती, ढाल बनकर रक्षा करने का दौर और फिर शादी का अटूट बंधन—आज ध्रुव और तारा का जीवन इस नन्हीं सी खुशी के साथ पूरी तरह मुकम्मल हो चुका था। तारा सचमुच ध्रुव के जीवन की वो रोशनी बन गई थी, जो अब उनके इस छोटे से आशियाने को हमेशा-हमेशा के लिए जगमगा रही थी।

 ❀ ---- ❥ समाप्त ❥ ---- ❀       

 लेखिका की ओर से…
अगर आपका प्यार सच्चा और साफ़ है, तो देर से ही सही, किस्मत आपको आपकी मंज़िल तक पहुँचा ही देती है। और शायद इसी वजह से कुछ कहानियों का अंत थोड़ा देर से, मगर खूबसूरत होता है।
लेकिन अगर सब कुछ करने के बाद भी वो आपको न मिले, तो खुद को दोष मत दीजिएगा। शायद ज़िंदगी ने आपके लिए कोई और रास्ता चुना हो… कोई ऐसा, जो इस वक़्त आपको दिखाई नहीं दे रहा।
बस इतना याद रखिएगा—हर चीज़ अपने सही वक़्त पर मिलती है। इसलिए भरोसा रखिए… जो सच में आपके लिए होगा, वो किसी न किसी मोड़ पर आपको ज़रूर मिल जाएगा। ❤️

विशेष आभार…
आप सभी प्यारे पाठकों का दिल से धन्यवाद ❤️
जिन्होंने अपना कीमती समय निकालकर “ध्रुव की तारा” को पढ़ा और अपनी प्यारी-प्यारी प्रतिक्रियाओं और रिव्यूज़ से मेरा हौसला बढ़ाया।
आपका प्यार, भरोसा और हर एक प्रतिक्रिया मेरे लिए बेहद मायने रखती है। आपके रिव्यूज़ पढ़कर जो खुशी मिलती है, उसे शब्दों में बयां करना शायद मुश्किल है। 💖
आपका यही प्यार और साथ मुझे आगे भी नई कहानियाँ लिखने और उन्हें आप तक पहुँचाने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
दिल से शुक्रिया, हर एक पाठक का। ❤️