ध्रुव की तारा - भाग 22 Anamika द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

ध्रुव की तारा - भाग 22

ध्रुव की तारा
भाग - २२
लेखिका "अनामिका" 
​ध्रुव लगातार बोले जा रहा था, "तारा, प्लीज शांत हो जाओ... अगर तुम्हें मेरी बात बुरी लगी तो मुझे माफ कर दो, हम पहले की तरह ही अच्छे दोस्त रहेंगे।" उसकी आँखों में अपनी सबसे प्यारी दोस्ती खोने का डर साफ़ झलक रहा था।
​तारा उसे घबराहट में सफाई देते देखती रही, फिर आंसुओं के बीच उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ गई। जब ध्रुव का बोलना बंद ही नहीं हो रहा था, तो तारा ने बिना कुछ सोचे हिम्मत जुटाई, आगे बढ़ी और ध्रुव के गाल पर अपने होंठ रख दिए।
​पार्क का सन्नाटा जैसे पल भर के लिए थम गया। ध्रुव जहाँ का तहाँ सुन्न पड़ गया, उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं और उसकी जुबां पर ताला लग गया।
​तारा पीछे हटी, अपनी पलकें झुकाईं और भीगी हुई आवाज़ में मुस्कुराते हुए बोली, "तुम्हे यह समझने और कहने में बहुत देर हो गई, बुद्धू... मैं तो कब से सिर्फ तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी।"
तारा की बात सुनते ही ध्रुव ने बिना एक पल गंवाए उसे कसकर अपने गले से लगा लिया, जैसे वह अपनी सबसे बड़ी खुशी को खुद से दूर नहीं होने देना चाहता हो। उसने तारा के बालों में अपना चेहरा छिपाते हुए राहत की एक गहरी सांस ली और धीमी आवाज़ में कहा, "कुछ देर नहीं हुई है तारा... मैं तो डर ही गया था, मुझे लगा मैंने सब बिगाड़ दिया और मैं तुम्हें हमेशा के लिए खो दूंगा।" तारा ने भी मुस्कुराते हुए अपने हाथ उसकी पीठ पर लपेट दिए, और उस ठंडी रात में दोनों के दिलों की धड़कनें एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़ गईं।
​दोनों अभी उस खूबसूरत पल में खोये ही थे कि तभी घर के अंदर से आवाज़ गूँजी, "ध्रुव! तारा! कहाँ हो तुम दोनों?"
​आवाज़ सुनते ही दोनों हड़बड़ाहट में एक-दूसरे से अलग हुए। तारा ने जल्दी से अपने चेहरे को ठीक किया और दोनों भागते हुए घर की तरफ निकल पड़े।
​जब वे तारा के घर पहुँचे, तो देखा कि लगभग सारे मेहमान जा चुके थे। हॉल में बस तारा की मम्मी 'सुधा' और ध्रुव की मम्मी 'सुमन' बिखरा हुआ सामान समेटने और सफाई करने में लगी हुई थीं। यह देखकर तारा बिना एक पल गँवाए उनकी मदद करने आगे बढ़ी। उसे काम करता देख ध्रुव भी झिझकते हुए सफाई में हाथ बटाने लगा।
​प्लेटें उठाते वक्त जब भी दोनों की आँखें एक-दूसरे से टकरातीं, तारा तुरंत अपनी नजरें झुका लेती और ध्रुव के चेहरे पर भी एक हल्की सी मुस्कान तैर जाती। दोनों का इस तरह बार-बार शर्माना और एक-दूसरे को चोरी-छिपे देखना दोनों माताओं की तेज नजरों से छुप न सका।
​ध्रुव की माँ सुमन ने मुस्कुराते हुए तारा की माँ सुधा की तरफ कोहनी मारी और धीमी आवाज़ में फुसफुसाईं, "सुधा, ज़रा इन दोनों को देखो तो... तुम्हें कुछ बदला-बदला सा नहीं लग रहा? ये दोनों एक-दूसरे को देखकर इतना शर्मा क्यों रहे हैं?"
​तारा की मम्मी सुधा ने भी दोनों को ध्यान से देखा और दबी सी हँसी के साथ बोलीं, "हाँ, बात तो सही कह रही हो... चेहरे की रंगत ही बदली हुई लग रही है दोनों की। ज़रूर दाल में कुछ काला है, या फिर पूरी दाल ही काली है!"
​दोनों माताओं ने एक-दूसरे को अर्थपूर्ण नजरों से देखा। फिर ध्रुव की माँ सुमन ने थोड़ा गंभीर होने का नाटक करते हुए ऊँची आवाज़ में पूछा, "वैसे mister और miss... कहाँ गायब थे तुम दोनों पूरी पार्टी के बीच में?"
​सुमन आंटी का सवाल सुनते ही ध्रुव और तारा दोनों के चेहरे का रंग उड़ गया। हड़बड़ाहट में दोनों एक-दूसरे की तरफ उंगली उठाकर एक साथ बोलने लगे—
​"मम्मी, यह बोर हो रही थी पार्टी में! इसी ने कहा कि चलो बाहर टहलकर आते हैं," ध्रुव ने जल्दी से सफाई दी।
​"झूठ! बिल्कुल झूठ! तुम बोर हो रहे थे ध्रुव, तुमने ही तो कहा था कि अंदर बहुत भीड़ है," तारा ने तुरंत ध्रुव को घूरते हुए पलटवार किया।
​दोनों को इस तरह एक-दूसरे पर इल्जाम लगाते और घबराते देख सुमन और सुधा एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा दीं। दोनों माताओं को पहले से ही शक था कि इनके दिलों में एक-दूसरे के लिए दोस्ती से बढ़कर कुछ है, और आज उनका यह यकीन में बदल गया। दोनों के चेहरे की घबराहट साफ बता रही थी कि आज उनकी चोरी पकड़ी जा चुकी है।
​लेकिन माताओं ने समझदारी दिखाते हुए ऐसा जताया जैसे वे कुछ समझ ही न पाई हों। सुधा मुस्कुराते हुए बोलीं, "अच्छा-अच्छा, ठीक है! अब बहस मत करो। यहाँ का लगभग सारा काम निपट गया है, तुम दोनों जाकर आराम करो।"
​फिर सुमन ने ध्रुव के सिर पर हल्की सी चपत लगाते हुए कहा, "और ध्रुव, तुम्हारे पापा तो कब के घर पहुँच चुके हैं, तुम भी अब घर चलो। मैं बस सुधा की थोड़ी और मदद करके पीछे-पीछे आती हूँ।"
​ध्रुव ने राहत की सांस ली और तारा को एक आखिरी बार मुड़कर देखते हुए अपने घर की तरफ निकल गया। वहीं 
तारा भी अपने कमरे में जाकर बेड पर गिर पड़ी, उसका दिल खुशी से ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था और चेहरे पर एक शर्मीली मुस्कान थी—अब उसे बस इंतज़ार था तो कल की उस सुबह का, जब वह ध्रुव से दोबारा मिलेगी...
बाईसवाँ भाग समाप्त, कहानी जारी है....