Mr. Ms. Fake - एपिसोड 44 kajal jha द्वारा हास्य कथाएं में हिंदी पीडीएफ

Featured Books
श्रेणी
शेयर करे

Mr. Ms. Fake - एपिसोड 44

Mr. & Ms. Fake
Episode 44 – The Name Behind the Mystery
कमरे की दीवार पर लिखा था—
RAGHAV
उस नाम को देखते ही राजवीर के चेहरे का रंग उड़ चुका था।
सान्वी ने उसे गौर से देखा।
“पापा… आप राघव से इतना डर क्यों रहे हैं?”
राजवीर ने कोई जवाब नहीं दिया।
“राघव कौन है?”
इस बार सान्वी की आवाज़ में बेचैनी थी।
“आपने कहा था कि वो आपका भाई है।”
राजवीर ने धीरे से सिर हिलाया।
“हाँ।”
“तो फिर वो कहाँ है?”
राजवीर की नजर दीवार पर लिखे नाम पर टिक गई।
“पच्चीस साल पहले…”
वह रुका।
“हमें लगा था कि वो मर गया।”
रुद्र ने तुरंत कहा—
“नहीं।”
राजवीर ने उसकी तरफ देखा।
“तुम्हें क्या पता?”
रुद्र ने गंभीर आवाज़ में कहा—
“मुझे पता है कि राघव जिंदा है।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
सान्वी ने पूछा—
“तो आपने हमें इतने सालों तक क्यों नहीं बताया?”
राजवीर ने कहा—
“क्योंकि मुझे डर था कि अगर तुमने उसका नाम भी जान लिया…”
“तो वो तुम्हें ढूँढ लेगा।”
आरोही ने गुस्से से कहा—
“वो पहले ही हमें ढूँढ रहा है!”
नैना अब भी चुप थी।
उसकी नजर अपनी उंगली में मौजूद नागमुद्रा वाली अंगूठी पर थी।
सान्वी ने उसका हाथ पकड़ा।
“नैना?”
नैना ने धीरे से कहा—
“ये अंगूठी मुझे राघव ने दी थी।”
सबकी नजर उसकी तरफ गई।
“क्या?”
नैना ने कहा—
“अब मुझे याद आ रहा है।”
“जब मैं बहुत छोटी थी, मैं एक कमरे में थी।”
“मेरे सामने एक आदमी बैठा था।”
“उसने मुझे ये अंगूठी पहनाई थी।”
“और उसने कहा था…”
नैना की आवाज धीमी हो गई।
“‘जब तुम बड़ी हो जाओगी, तब तुम्हारी बहन तुम्हें लेने आएगी।’”
सान्वी ने पूछा—
“तुम्हें कैसे पता कि वो राघव था?”
नैना ने आँखें बंद कीं।
“क्योंकि…”
“उसने जाते वक्त अपना नाम बताया था।”
वह काँपती आवाज में बोली—
“राघव।”
राजवीर ने अपना सिर पकड़ लिया।
“हे भगवान…”
Aryveer ने पूछा—
“आप जानते थे कि राघव ने नैना को अपने पास रखा था?”
राजवीर ने कहा—
“नहीं।”
“अगर मुझे पता होता…”
“तो मैं उसे कभी वहाँ नहीं रहने देता।”
रुद्र ने राजवीर को देखा।
“तुम हमेशा यही कहते हो।”
राजवीर ने उसकी तरफ देखा।
“तो तुम बताओ।”
“तुम्हें कब से पता है कि राघव जिंदा है?”
रुद्र चुप रहा।
सान्वी ने तुरंत उसकी तरफ देखा।
“रुद्र अंकल?”
रुद्र ने लंबी साँस ली।
“पाँच साल।”
“क्या?”
“पाँच साल से मुझे पता है।”
सान्वी की आँखों में अविश्वास था।
“और आपने मुझे नहीं बताया?”
“क्योंकि मैं तुम्हें बचाना चाहता था।”
“सब यही कहते हैं!”
सान्वी की आवाज़ टूट गई।
“हर कोई कहता है कि वो मुझे बचा रहा था।”
“लेकिन कोई ये नहीं सोचता कि सच जानने का मेरा भी हक है!”
वह कमरे से बाहर निकल गई।
Aryveer उसके पीछे चला गया।
---
Fake Boyfriend की असली चिंता
सान्वी हवेली के बाहर सीढ़ियों पर जाकर बैठ गई।
उसकी आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे।
आर्यवीर उसके पास आया।
कुछ पल चुपचाप खड़ा रहा।
फिर उसके बगल में बैठ गया।
सान्वी ने उसकी तरफ देखा।
“तुम भी मुझे कुछ नहीं बताओगे?”
आर्यवीर ने सिर हिलाया।
“नहीं।”
“क्यों?”
“क्योंकि मेरे पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है।”
सान्वी हल्का-सा मुस्कुराई।
“सच?”
“हाँ।”
“तुम्हें भी कुछ नहीं पता?”
“बहुत कुछ पता है।”
सान्वी ने उसे घूरा।
“तो?”
Aryveer ने कहा—
“लेकिन जितना तुम जानोगी, उतना ही मैं बताऊँगा।”
“क्यों?”
“क्योंकि मैं तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ।”
सान्वी कुछ पल उसे देखती रही।
“हमारा रिश्ता तो fake है।”
Aryveer चुप हो गया।
सान्वी ने धीरे से कहा—
“याद है?”
“हाँ।”
“तो फिर तुम इतना क्यों परेशान होते हो?”
Aryveer ने उसकी आँखों में देखा।
“क्योंकि…”
वह रुक गया।
“क्योंकि?”
“शायद अब मुझे खुद नहीं पता कि क्या fake है और क्या real।”
सान्वी की धड़कन तेज हो गई।
“आर्यवीर…”
“मत पूछो।”
“क्यों?”
“क्योंकि अगर तुमने पूछा…”
उसने धीमे से कहा—
“तो शायद मैं झूठ नहीं बोल पाऊँगा।”
दोनों कुछ पल एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर सान्वी ने अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया।
Aryveer बिल्कुल स्थिर हो गया।
“तुम्हें पता है…”
सान्वी ने धीमे से कहा—
“जब मैं तुम्हारे साथ होती हूँ तो मुझे डर थोड़ा कम लगता है।”
Aryveer ने उसकी तरफ देखा।
“और मुझे…”
वह मुस्कुराया।
“तुम्हारे साथ होने पर बाकी दुनिया थोड़ी कम परेशान करती है।”
सान्वी हल्का-सा हँसी।
“तुम बहुत अजीब हो।”
“तुम्हारी वजह से।”
“मेरी वजह से?”
“हाँ।”
“कैसे?”
“पहले मुझे लड़कियों से परेशानी होती थी।”
सान्वी ने भौंह उठाई।
“और अब?”
Aryveer ने कहा—
“अब सिर्फ एक लड़की से परेशानी होती है।”
सान्वी का चेहरा उतर गया।
“कौन?”
Aryveer मुस्कुराया।
“तुम।”
सान्वी ने उसे धक्का दिया।
“बदतमीज!”
Aryveer हँस पड़ा।
“देखा? यही तो।”
“क्या?”
“तुम्हारा गुस्सा।”
सान्वी भी मुस्कुराने लगी।
कुछ पल के लिए दोनों भूल गए कि उनके आसपास खतरा है।
लेकिन तभी हवेली के अंदर से चीख सुनाई दी।
“सान्वी!”
दोनों तुरंत खड़े हो गए।
---
नैना गायब
सान्वी और आर्यवीर दौड़ते हुए अंदर पहुँचे।
आरोही हॉल में खड़ी थी।
उसका चेहरा घबराया हुआ था।
“नैना कहाँ है?”
सान्वी ने पूछा।
आरोही ने सिर हिलाया।
“मुझे नहीं पता।”
“अभी वो यहीं थी।”
“फिर?”
“अचानक लाइट चली गई।”
“और जब वापस आई…”
आरोही की आवाज काँप गई।
“नैना गायब थी।”
सान्वी के हाथ-पाँव ठंडे पड़ गए।
“क्या?”
आर्यवीर ने तुरंत कमरे को देखा।
दरवाजा बंद था।
खिड़की भी अंदर से बंद थी।
रुद्र ने कहा—
“उसे बाहर से कोई नहीं ले जा सकता।”
सान्वी ने पूछा—
“तो फिर वो गई कहाँ?”
तभी आर्यवीर की नजर जमीन पर पड़ी।
वहाँ एक कागज पड़ा था।
उस पर लिखा था—
“ONE SISTER TAKEN.”
“नहीं…”
सान्वी ने कागज उठा लिया।
नीचे एक पता लिखा था।
पुरानी मिल — रात 12 बजे।
और उसके नीचे—
“अकेली आना।”
आरोही ने कहा—
“हम वहाँ नहीं जाएंगे।”
सान्वी ने तुरंत कहा—
“मैं जाऊँगी।”
आर्यवीर ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“अकेली नहीं।”
“उन्होंने साफ लिखा है…”
“मुझे फर्क नहीं पड़ता।”
“लेकिन नैना…”
“मैं उसे वापस लाऊँगा।”
सान्वी ने उसकी तरफ देखा।
“हम दोनों जाएंगे।”
Aryveer ने सिर हिलाया।
“ठीक है।”
आरोही ने कहा—
“और मैं?”
सान्वी ने कहा—
“तुम यहीं रहोगी।”
आरोही ने विरोध किया।
“लेकिन…”
“नहीं।”
सान्वी ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—
“अगर हमारे साथ कुछ हुआ तो तुम्हें बाकी सबको बचाना होगा।”
आरोही चुप हो गई।
---
राघव की एंट्री
रात के बारह बजने में कुछ मिनट बाकी थे।
सान्वी और आर्यवीर पुरानी मिल के सामने खड़े थे।
चारों तरफ अंधेरा था।
टूटी हुई दीवारें।
जंग लगी मशीनें।
और हवा में अजीब-सी खामोशी।
सान्वी ने धीरे से कहा—
“तुम्हें डर लग रहा है?”
Aryveer ने कहा—
“बहुत।”
“फिर भी आए?”
“तुम्हारे साथ जाना था।”
सान्वी ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“धन्यवाद।”
Aryveer ने उसकी तरफ देखा।
“एक बात पूछूँ?”
“हम्म?”
“अगर आज हम वापस आ गए…”
“तो?”
“क्या तुम मेरे साथ एक सच बोलोगी?”
सान्वी ने पूछा—
“कौन-सा?”
Aryveer ने कहा—
“ये कि हमारे बीच जो है…”
वह रुक गया।
“वो अभी भी fake है?”
सान्वी के पास कोई जवाब नहीं था।
उसने बस उसकी तरफ देखा।
और उसी पल…
मिल के अंदर से ताली बजने की आवाज आई।
क्लैप… क्लैप… क्लैप…
दोनों पलट गए।
अंधेरे से एक आदमी बाहर आया।
काला कोट।
सफेद बाल।
और हाथ में वही नागमुद्रा वाली अंगूठी।
सान्वी की साँस रुक गई।
“राघव…”
आदमी मुस्कुराया।
“आखिर तुमने मुझे पहचान ही लिया।”
Aryveer आगे बढ़ा।
“नैना कहाँ है?”
राघव ने कहा—
“वो सुरक्षित है।”
“उसे कुछ हुआ तो…”
“तो क्या करोगे?”
Aryveer ने कठोर नजरों से उसे देखा।
“जो करना पड़ेगा।”
राघव मुस्कुराया।
“तुम बिल्कुल अपने पिता जैसे हो।”
Aryveer चौंक गया।
“तुम मेरे पिता को जानते हो?”
राघव ने कहा—
“तुम्हारे पिता ही तो मुझे जानते थे।”
सान्वी ने पूछा—
“नैना को क्यों उठाया?”
राघव ने कहा—
“क्योंकि अब समय आ गया है कि तुम तीनों अपना असली सच जानो।”
“कौन-सा सच?”
राघव ने अपनी जेब से एक पुरानी तस्वीर निकाली।
उसमें तीन नवजात बच्चियाँ थीं।
उनके पास चार लोग खड़े थे।
सान्वी की माँ।
राजवीर।
राघव।
और…
एक चौथी महिला।
सान्वी ने तस्वीर देखते ही कहा—
“ये कौन है?”
राघव की मुस्कान गायब हो गई।
“यही वो औरत है…”
“जिसकी वजह से तुम तीनों इस दुनिया में आईं।”
सान्वी ने हैरानी से पूछा—
“क्या मतलब?”
राघव ने तस्वीर उसकी तरफ बढ़ाई।
“तुम्हारी माँ ने तुमसे बहुत बड़ा सच छुपाया था।”
“तुम तीनों…”
वह रुक गया।
फिर धीमे से बोला—
“एक ही माँ की बेटियाँ नहीं हो।”
सान्वी के हाथ से तस्वीर गिर गई।
आर्यवीर भी स्तब्ध रह गया।
“क्या?”
राघव ने कहा—
“अब अगर सच चाहिए…”
उसने मिल के अंदर की तरफ इशारा किया।
“तो अंदर आओ।”
“लेकिन याद रखना…”
उसकी आँखें सान्वी पर टिक गईं।
“अंदर जाने के बाद तुम अपनी माँ को कभी उसी नजर से नहीं देख पाओगी।”
सान्वी ने आर्यवीर की तरफ देखा।
आर्यवीर ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया।
दोनों धीरे-धीरे उस अंधेरी मिल के अंदर बढ़ गए।
और उनके पीछे…
राघव ने दरवाजा बंद कर दिया।
धड़ाम!
क्रमशः…