अधूरापन - 22 Falguni Dost द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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अधूरापन - 22

अध्याय-२२

अपूर्व की बात सुनकर विनय सोच में पड़ गया कि अपने भाई को दिए गए वचन को मुझे निभाना है, तो मैं अपूर्व को हाँ कैसे कहूँ? और फिर भाई-भाभी के गुज़र जाने के बाद हनी का हमारे अलावा यहाँ अपना कहने वाला कोई नहीं है। मैं बहुत सोच-समझकर ही जवाब दूँगा।

अपूर्व को विनय की परेशानी समझ आ गई, इसलिए वह बोला, "देखो विनय, तुम बिना किसी जल्दबाज़ी के शांति से सोच-विचार कर और नीला भाभी तथा हनी के मामा व मौसी, सभी से पूछकर जवाब देना। और मैंने भी अभी तुम दोनों के अलावा किसी और से कहाँ कुछ पूछा है? विनय, तुम्हारा जवाब मिलने के बाद ही मैं अमृता भाभी से बात करूँगा, क्योंकि भाभी को अब मैं अच्छी तरह समझ सकता हूँ, इसलिए उन्हें किसी भी बात से चिंतित नहीं रखना चाहता। शायद किसी को यह प्रस्ताव सही न लगे, तो भाभी के मन में जगाई गई उम्मीद से उन्हें दुःख पहुँचेगा।" विनय के हाथ पर अपूर्व ने अपना हाथ रखा और कहा, "तुम्हारा जो भी जवाब होगा, वह मुझे मंज़ूर होगा, और इससे हमारी दोस्ती में भी कोई फ़र्क नहीं आएगा।"

विनय अपूर्व की बात सुनकर उससे गले लग गया और साथ ही बोला, "इतना समझदार तू कब से हो गया?"

अपूर्व ने तुरंत जवाब दिया, "जिस दिन से भार्गवी की हर बात को समझने की कोशिश की है, तब से सब आसान हो गया है। सचमुच, ऐसे ही महिलाओं को गृहलक्ष्मी थोड़ा ही कहा जाता है? स्त्री चाहे तो घर को वाकई मंदिर बना सकती है, लेकिन दूसरी तरफ पुरुषों का उन पर पूरा विश्वास होना चाहिए।"

राजेश आज बड़ा होने के बावजूद अपूर्व की समझदारी के आगे खुद को छोटा महसूस कर रहा था। क्योंकि राजेश ने खुद अमृता के साथ जो अत्याचार किए थे, वे आज भी किसी कोने में उसे डंस रहे थे कि उसने अमृता को समझने में ज़िंदगी का कितना समय बर्बाद कर दिया।

अपूर्व और विनय की बात अभी खत्म ही हुई थी कि नीला भाभी विनय को बुलाने आईं, "विनय! तुम लोगों की बातें तो खत्म नहीं होंगी, लेकिन अब समय बहुत हो गया है, तो घर चलें?" हँसते हुए स्वर में नीला की पुकार ने सबको हँसा दिया।

विनय और नीला सबसे विदा लेकर अपने घर चले गए। अपूर्व ने कमरे में जाकर भार्गवी को सारी बात बताई और कहा कि अभी यह बात किसी से न कहे। भार्गवी तो बात सुनकर इतनी खुश हुई कि अपूर्व से लिपट गई और बोली, "आपने मुझे जो वचन दिया था, वह आज निभा दिया। थैंक यू वेरी मच अपूर्व।"

राजेश इसी बात पर पूरी रात करवटें बदलता रहा कि विनय क्या जवाब देगा? अगर वह हाँ कहता है तो मुझे क्या फ़ैसला लेना चाहिए? और इन सब बातों से अनजान, हनी और अमृता दोनों अपने जीवन में आने वाले बदलाव से बेफ़िक्र अपनी दुनिया में मग्न शांति से सो रही थीं।

देखो न, आज कैसी गज़ब की कश्मकश हो रही है!
क्या अधूरापन पूरा होगा? इसी सोच में प्रीत तड़प रही है!

विनय ने घर पहुँचते ही जैसे ही बच्चे अपने-अपने कमरों में गए, तुरंत नीला को अपूर्व की बात बताई और पूछा, "तुम क्या चाहती हो, क्या राजेशभाई और अमृता भाभी को हमें हनी की सारी ज़िम्मेदारी कानूनी तौर पर सौंप देनी चाहिए?"

नीला ने कुछ पल सोचा और कहा, "विनय, मैं नौकरी करती हूँ, हमारे बच्चे भी बड़े हैं, इसलिए हम आया के भरोसे हनी को रखकर उसका पालन-पोषण कर रहे हैं। तो वह परवरिश शायद एक माँ के रूप में अमृता ज़्यादा बेहतर तरीके से कर सकेगी। मैं हनी की ज़िम्मेदारी किसी अनजान औरत के भरोसे छोड़ रही हूँ, जबकि अमृता और हनी के जीवन का ख़ालीपन दूर होने के साथ-साथ एक विश्वसनीय इंसान भी होगा जो हनी को पालेगा। मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ; क्योंकि हनी का पालन-पोषण पूरे परिवार के बीच होगा जिससे उसे सबका प्यार मिलेगा। लेकिन हनी के लिए इस बात को अपनाना उतना आसान नहीं होगा जितना हम सोच रहे हैं। इसलिए हनी से हम कहते हैं कि हम दोनों ऑफिस के काम से बाहर जा रहे हैं और उसे ४ दिनों के लिए वहाँ छोड़ कर देखते हैं। इससे हनी की भावनाओं को भी कोई ठेस नहीं पहुँचेगी और हमें भी फ़ैसला लेने में आसानी होगी।"

विनय ने जैसा सोचा था, नीला ने उससे भी ज़्यादा संतोषजनक जवाब दिया, इसलिए वह बहुत खुश हुआ और बोला, "आई एम प्राउड ऑफ यू डार्लिंग... लेकिन हम हनी के ननिहाल वालों को कैसे समझाएँगे? कहीं वे लोग हमें गलत तो नहीं समझेंगे?"

नीला ने कहा, "उसकी चिंता मत करो, जो हनी को पसंद होगा और उसके लिए सही होगा, वही होगा... उनकी तरफ से हाँ ही समझो।" आज दोनों के मन में जो एक बोझ था, वह जैसे हलका हो गया हो, वैसी राहत वे महसूस कर रहे थे।

विनय ने अगले दिन योजना के अनुसार हनी से पूछा, "बेटा, क्या तुम ४ दिनों के लिए अमृता आंटी के घर रहने जाओगी? क्योंकि मुझे और नीला दोनों को ऑफिस के काम से बाहर जाना है।"

हनी तो बहुत खुश हो गई और अपने कमरे की तरफ दौड़ते हुए बोली, "मैं अपने खिलौने ले आती हूँ, मैं और आंटी दोनों खेलेंगे..."

विनय और नीला को आधा जवाब तो वहीं मिल गया। इसलिए उन्होंने अपनी पूरी योजना अपूर्व को बताई और कहा कि तुम भी अभी अमृता भाभी को कुछ मत बताना ताकि हनी और अमृता भाभी दोनों की भावनाएँ आहत न हों... ४ दिनों के बाद हम सारी सच्चाई बता देंगे। इतना कहकर फोन रखा, तब तक हनी जाने के लिए तैयार थी।

विनय और नीला हनी को एक उम्मीद के साथ अमृता के पास छोड़कर, अपने बाहर जाने की बात कहकर हनी की ज़िम्मेदारी अमृता भाभी को सौंपकर चले जाते हैं। और अमृता भी बिना किसी संकोच या चिंता के उस ज़िम्मेदारी को संभालने के लिए हाँ कर देती है।

कहाँ किसे खबर है कि कैसे प्रीत बंध रही है,
दोस्त! सब कुछ बरकरार है, फिर भी उम्मीद झाँक रही है।