एपिसोड 45— सिटी हॉस्पिटल का जाल
सुबह के करीब दस बज रहे थे।
सिटी हॉस्पिटल हमेशा की तरह मरीजों और उनके रिश्तेदारों से भरा हुआ था। कहीं डॉक्टर तेज़ी से एक वार्ड से दूसरे वार्ड की तरफ जा रहे थे, तो कहीं नर्सें अपनी ड्यूटी में व्यस्त थीं।
हॉस्पिटल के तीसरे फ्लोर पर मेडिकल कॉलेज से आए दसों स्टूडेंट्स अपनी-अपनी ड्यूटी के लिए तैयार खड़े थे।
अर्जुन सबसे आगे खड़ा था।
उसके हाथ में मरीजों की लिस्ट थी और चेहरे पर हमेशा की तरह गंभीरता।
"सब लोग ध्यान से सुनो," उसने कहा, "आज से हमारी ड्यूटी अलग-अलग यूनिट में होगी। लेकिन कोई भी ऐसी चीज़ मत करना जो आपकी ट्रेनिंग से बाहर हो। किसी भी मरीज को लेकर कन्फ्यूजन हो तो तुरंत सीनियर डॉक्टर को बताना।"
रोहन ने दूर खड़े होकर उसकी बात सुनी।
उसके चेहरे पर हल्की-सी नाराज़गी थी।
उसे अब भी अच्छा नहीं लगता था कि इतने सारे छात्रों के बीच अर्जुन ही टीम लीडर था।
लेकिन इस बार उसने कुछ नहीं कहा।
क्योंकि उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था।
वह अर्जुन से लड़ने के बजाय उसकी कमजोरी ढूँढना चाहता था।
और उसे लगता था कि अर्जुन की सबसे बड़ी कमजोरी...
आयत है।
अर्जुन और आयत एक ही यूनिट में
सीनियर डॉक्टर ने सभी छात्रों की ड्यूटी लिस्ट पढ़नी शुरू की।
"अर्जुन वशिष्ठ और आयत खान—जनरल मेडिसिन यूनिट।"
आयत ने तुरंत अर्जुन की तरफ देखा।
अर्जुन ने बस हल्की-सी मुस्कान दी।
रोहन की आँखें सिकुड़ गईं।
"फिर दोनों साथ..."
उसके पास खड़ा समर बोला,
"क्या हुआ?"
"कुछ नहीं।"
"तुम्हारा चेहरा कुछ और कह रहा है।"
रोहन ने धीमे से कहा,
"बस देखता जा।"
अर्जुन और आयत वार्ड की तरफ बढ़े।
अंदर कई मरीज भर्ती थे।
आयत थोड़ी घबराई हुई थी।
अर्जुन ने महसूस कर लिया।
"नर्वस हो?"
"थोड़ा।"
"क्यों?"
"पता नहीं... इतने सारे मरीज पहली बार देख रही हूँ। किताबों में सब आसान लगता है, लेकिन यहाँ सामने किसी की हालत देखकर..."
अर्जुन ने कहा,
"यही वजह है कि डॉक्टर बनने से पहले इंसान बनना जरूरी है।"
आयत ने उसकी तरफ देखा।
"आप हमेशा इतनी अच्छी बातें कैसे कर लेते हैं?"
अर्जुन हँसा।
"मैंने कब अच्छी बात की?"
"अभी।"
"तो फिर याद रखना।"
दोनों आगे बढ़ गए।
पहला मरीज एक बुजुर्ग आदमी था।
आयत ने उनकी हिस्ट्री लेना शुरू किया।
"दादाजी, आपको कब से बुखार है?"
बुजुर्ग ने मुस्कुराकर कहा,
"तीन दिन से बेटी।"
आयत ने बड़ी ध्यान से उनकी सारी बातें लिखीं।
अर्जुन उसे देखता रहा।
उसकी आवाज में अपनापन था।
मरीज भी उससे बहुत आराम से बात कर रहे थे।
कुछ देर बाद अर्जुन ने कहा,
"बहुत अच्छा।"
आयत मुस्कुराई।
"सच?"
"हाँ।"
"मतलब मैं डॉक्टर बन सकती हूँ?"
"अगर ऐसे ही मेहनत करती रही तो शायद..."
आयत ने आँखें बड़ी कर लीं।
"शायद?"
अर्जुन मुस्कुराया।
"अभी बहुत लंबा सफर बाकी है।"
"तो आप साथ रहेंगे?"
अर्जुन अचानक चुप हो गया।
आयत भी अपनी बात समझकर चुप हो गई।
दोनों कुछ पल एक-दूसरे को देखते रहे।
तभी पीछे से नर्स की आवाज आई—
"मैडम, डॉक्टर आपको बुला रहे हैं।"
आयत झेंप गई।
"जी..."
वह आगे चली गई।
अर्जुन के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई।
दूसरी तरफ सनाया और करण
हॉस्पिटल के दूसरे हिस्से में सनाया एक मरीज की फाइल लेकर परेशान खड़ी थी।
"ये हॉस्पिटल है या भूलभुलैया?"
पीछे से करण की आवाज आई,
"अगर नक्शा चाहिए तो मेरे पास है।"
सनाया पलटी।
"मुझे आपकी मदद नहीं चाहिए।"
करण ने फाइल की तरफ देखा।
"तो फिर पाँच मिनट से एक ही जगह क्यों खड़ी हो?"
"मैं रास्ता ढूँढ रही हूँ।"
"और मिला?"
"नहीं।"
करण हँस पड़ा।
"चलो, मैं छोड़ देता हूँ।"
सनाया ने आँखें घुमाईं।
"मैं खुद जा सकती हूँ।"
वह आगे बढ़ी।
कुछ ही कदम बाद गलत रास्ते पर चली गई।
करण पीछे से बोला,
"हाँ, बिल्कुल। इसी रास्ते से सीधे पार्किंग में पहुँच जाओगी।"
सनाया रुक गई।
"आप मेरा पीछा क्यों कर रहे हैं?"
"क्योंकि मुझे डर है कि तुम हॉस्पिटल से बाहर निकलकर कहीं दूसरी सिटी में न पहुँच जाओ।"
सनाया ने उसे घूरा।
"बहुत मजाकिया हो।"
"धन्यवाद।"
"मैंने तारीफ नहीं की।"
"मुझे पता है।"
सनाया पहली बार हँस पड़ी।
करण उसे देखता रह गया।
कुछ सेकंड बाद सनाया ने पूछा,
"क्या देख रहे हो?"
करण ने तुरंत नजरें हटा लीं।
"कुछ नहीं।"
"तो फिर देख क्यों रहे थे?"
"बस ऐसे ही।"
सनाया ने कुछ नहीं कहा।
लेकिन उसके चेहरे पर भी हल्की मुस्कान थी।
रोहन की चाल
दोपहर के करीब एक बजे रोहन हॉस्पिटल के पीछे बने कॉरिडोर में अकेला खड़ा था।
उसके हाथ में फोन था।
उसने एक नंबर मिलाया।
"हाँ?"
दूसरी तरफ से आवाज आई,
"सब तैयार है।"
रोहन ने पूछा,
"यकीन है किसी को शक नहीं होगा?"
"बिल्कुल नहीं।"
"और फाइल?"
"तुम्हें आज शाम तक मिल जाएगी।"
रोहन ने धीमे स्वर में कहा,
"ठीक है। लेकिन ध्यान रखना... मुझे सिर्फ वही कागज चाहिए जिसमें आयत के पिता का नाम है। बाकी सब तुम्हारा।"
फोन कट गया।
रोहन ने फोन जेब में रखा।
लेकिन जैसे ही वह मुड़ा...
उसके सामने अर्जुन खड़ा था।
रोहन का चेहरा एक पल के लिए बदल गया।
"तुम यहाँ?"
अर्जुन ने शांत स्वर में पूछा,
"हाँ। और तुम?"
रोहन ने तुरंत जवाब दिया,
"बस ऐसे ही आया था।"
अर्जुन ने उसकी आँखों में देखा।
"हॉस्पिटल में पीछे के कॉरिडोर में ऐसे ही कौन आता है?"
रोहन हँसने की कोशिश करते हुए बोला,
"तुम्हें हर जगह शक क्यों होता है?"
अर्जुन ने कहा,
"क्योंकि तुम पर भरोसा करने की कोई वजह नहीं है।"
रोहन का चेहरा सख्त हो गया।
"तुम्हें लगता है मैं तुम्हारे खिलाफ कुछ कर रहा हूँ?"
"मुझे लगता है तुम आयत के खिलाफ कुछ कर सकते हो।"
रोहन ने आयत का नाम सुनते ही नजरें फेर लीं।
अर्जुन ने उसे गौर से देखा।
फिर बोला,
"अगर आयत को कुछ हुआ..."
वह उसके करीब आया।
"तो इस बार मैं चुप नहीं रहूँगा।"
रोहन ने मुस्कुराकर कहा,
"धमकी दे रहे हो?"
"नहीं। चेतावनी दे रहा हूँ।"
दोनों कुछ पल एक-दूसरे को देखते रहे।
फिर रोहन वहाँ से चला गया।
लेकिन जाते-जाते उसके चेहरे पर एक अजीब-सी मुस्कान आ गई।
क्योंकि अर्जुन को अभी पता नहीं था...
रोहन की असली चाल शुरू हो चुकी थी।
आयत के साथ अजीब घटना
शाम के समय आयत मरीजों की रिपोर्ट लेकर लैब की तरफ जा रही थी।
अचानक एक नर्स ने उसे आवाज दी।
"आयत मैडम!"
आयत रुक गई।
"जी?"
"ये रिपोर्ट डॉक्टर अर्जुन को दे दीजिए।"
"ठीक है।"
आयत ने रिपोर्ट ले ली।
वह कुछ कदम आगे बढ़ी ही थी कि उसकी नजर रिपोर्ट के ऊपर लिखे मरीज के नाम पर पड़ी।
मरीज: राघव मेहरा।
आयत अचानक रुक गई।
"मेहरा?"
उसका दिल तेज धड़कने लगा।
राघव मेहरा...
यही तो रोहन के पिता का नाम था।
उसने रिपोर्ट को फिर देखा।
उसे समझ नहीं आया कि रोहन के पिता यहाँ कब भर्ती हुए।
वह तुरंत अर्जुन को ढूँढने लगी।
लेकिन तभी किसी ने पीछे से उसकी आवाज लगाई।
"मैडम..."
आयत पलटी।
वही आदमी खड़ा था जिसे उसने सुबह रिसेप्शन के पास देखा था।
आयत ने पूछा,
"जी?"
आदमी ने कहा,
"आपसे एक बात करनी थी।"
"मुझसे?"
"हाँ।"
"क्या?"
आदमी ने चारों तरफ देखा।
फिर धीमे से कहा—
"आपके पिता की मौत कोई हादसा नहीं थी।"
आयत के हाथ से रिपोर्ट लगभग गिर गई।
"आप... मेरे पिता को कैसे जानते हैं?"
आदमी कुछ बोलता, उससे पहले पीछे से अर्जुन की आवाज आई—
"आयत!"
आयत तुरंत पलटी।
अर्जुन उसकी तरफ आ रहा था।
उस आदमी ने अर्जुन को देखा और बिना कुछ कहे दूसरी तरफ चला गया।
अर्जुन आयत के पास पहुँचा।
"कौन था वो?"
आयत ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आँखों में डर साफ दिखाई दे रहा था।
"अर्जुन... उसने कहा कि मेरे पापा की मौत हादसा नहीं थी।"
अर्जुन कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने पूछा,
"वो कहाँ गया?"
आयत ने पीछे देखा।
लेकिन वह आदमी गायब हो चुका था।
अर्जुन ने आयत का हाथ पकड़ लिया।
"तुम मेरे साथ चलो।"
"लेकिन रिपोर्ट..."
"पहले तुम।"
दोनों वहाँ से चले गए।
दूर खड़ा रोहन यह सब देख रहा था।
उसके हाथ में वही पुरानी फाइल थी।
उसने फाइल खोली और आखिरी पन्ने को देखा।
वहाँ एक फोटो लगी थी।
फोटो में आयत के पिता के साथ...
राघव मेहरा भी मौजूद था।
रोहन ने धीमे से कहा,
"अगर ये सच है..."
उसकी नजर अर्जुन और आयत पर गई।
"तो आयत सिर्फ मेरे पिता के अतीत का हिस्सा नहीं है..."
वह फाइल बंद करता है।
"वो शायद उस राज़ की सबसे बड़ी चाबी है।"
और उसी वक्त...
हॉस्पिटल की बेसमेंट में एक आदमी ने सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग बंद कर दी।
स्क्रीन पर आखिरी दृश्य दिखाई दे रहा था—
अर्जुन और आयत साथ-साथ कॉरिडोर से गुजर रहे थे।
आदमी ने फोन मिलाया।
"सर, दोनों हमारे निशाने पर हैं।"
दूसरी तरफ से आवाज आई—
"अच्छा। अब उन्हें अलग मत करना।"
"क्यों?"
कुछ पल खामोशी रही।
फिर जवाब आया—
"क्योंकि अर्जुन को तोड़ने का सबसे आसान रास्ता... आयत है।"
क्रमशः...