Mr. Ms. Fake - एपिसोड 32 kajal jha द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 32


Mr. & Ms. Fake
Episode 32 – Trust Me, Saanvi
सान्वी के कमरे का दरवाज़ा बंद हो चुका था।
उसके हाथ में फोन था और स्क्रीन पर सिर्फ़ तीन शब्द चमक रहे थे—
"रिया पर भरोसा मत करना।"
नीचे नाम था—
नैना।
सान्वी की धड़कन तेज़ हो गई।
उसने तुरंत कॉल बैक किया।
एक बार...
दो बार...
तीन बार...
लेकिन नैना का फोन बंद था।
सान्वी ने बेचैनी में फोन नीचे रखा।
"अगर नैना ने ये मैसेज किया है..."
"तो रिया के बारे में उसे क्या पता है?"
वह सोच ही रही थी कि अचानक उसके दरवाज़े पर दस्तक हुई।
ठक... ठक...
सान्वी चौंक गई।
"कौन?"
बाहर से आर्यवीर की आवाज़ आई—
"मैं हूँ।"
सान्वी ने तुरंत दरवाज़ा खोला।
आर्यवीर सामने खड़ा था।
उसके चेहरे पर चिंता थी।
"तुम अचानक कमरे से चली क्यों आईं?"
सान्वी ने नजरें चुरा लीं।
"बस... मेरा सिर दर्द कर रहा था।"
आर्यवीर ने उसे ध्यान से देखा।
"तुम झूठ बोल रही हो।"
सान्वी ने उसकी तरफ देखा।
"तुम्हें कैसे पता?"
"क्योंकि जब तुम झूठ बोलती हो..."
वह थोड़ा करीब आया।
"...तुम मेरी आँखों में नहीं देखती।"
सान्वी कुछ नहीं बोली।
आर्यवीर ने धीरे से पूछा—
"रिया ने तुमसे कुछ कहा?"
"नहीं।"
"फिर?"
सान्वी ने गहरी साँस ली।
"मुझे थोड़ा समय चाहिए।"
आर्यवीर के चेहरे पर दर्द की हल्की छाया आई।
"मुझसे?"
सान्वी ने तुरंत कहा—
"नहीं।"
"खुद से।"
आर्यवीर कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने सिर हिलाया।
"ठीक है।"
वह जाने के लिए मुड़ा।
सान्वी उसे रोकना चाहती थी।
लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।
दरवाज़ा बंद होते ही उसकी आँखों में आँसू आ गए।
"मैं तुमसे कुछ छुपाना नहीं चाहती, आर्य..."
"लेकिन अगर रिया सच में किसी बड़े खेल का हिस्सा है..."
"तो मैं तुम्हें खतरे में नहीं डाल सकती।"
उसी समय – आर्यवीर
आर्यवीर नीचे आकर सोफे पर बैठ गया।
कबीर ने उसे देखा।
"क्या हुआ भाई?"
"कुछ नहीं।"
कबीर उसके पास बैठ गया।
"जब कोई आदमी 'कुछ नहीं' इतनी गंभीर शक्ल बनाकर बोलता है, तब मामला बहुत बड़ा होता है।"
आर्यवीर ने उसे घूरा।
"तुम चुप रहोगे?"
कबीर मुस्कुराया।
"नहीं।"
फिर गंभीर होकर बोला—
"सान्वी से झगड़ा हुआ?"
"नहीं।"
"वो तुमसे नाराज़ है?"
"नहीं।"
"तुम उससे नाराज़ हो?"
"नहीं।"
कबीर ने हाथ खड़े कर दिए।
"तो फिर दोनों एक-दूसरे को परेशान क्यों कर रहे हो?"
आर्यवीर चुप हो गया।
कबीर ने मुस्कुराकर कहा—
"भाई, तुम दोनों की समस्या प्यार नहीं है।"
"समस्या ये है कि दोनों को लगता है कि सामने वाला उन्हें छोड़ देगा।"
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
कबीर ने कहा—
"उसे खोने से डरते हो?"
आर्यवीर ने धीमे से कहा—
"बहुत।"
"तो जाकर बोल दो।"
"इतना आसान नहीं है।"
"प्यार आसान कब था?"
आर्यवीर हल्का-सा मुस्कुराया।
दूसरी तरफ – सान्वी
सान्वी ने अपना फोन खोला।
उसने नैना का मैसेज फिर से पढ़ा।
फिर उसने रिया का नंबर खोला।
उसके मन में एक बात आई।
"अगर रिया सच में समर के साथ मिली हुई है, तो उसके फोन में जरूर कुछ होगा।"
लेकिन उसका फोन कैसे देखा जाए?
तभी उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान आई।
"एक काम कर सकती हूँ।"
कुछ देर बाद...
डाइनिंग हॉल में पूरा परिवार बैठा था।
रिया भी वहीं थी।
सान्वी जानबूझकर उसके पास जाकर बैठ गई।
रिया ने हैरानी से पूछा—
"तुम यहाँ?"
सान्वी मुस्कुराई।
"क्यों? ये सीट तुम्हारी है?"
रिया असहज हो गई।
"नहीं..."
सान्वी ने प्लेट उसकी तरफ बढ़ाई।
"तो फिर पराठा लो।"
रिया ने पराठा ले लिया।
तभी चिंटू बोला—
"आज सान्वी दीदी बहुत प्यारी लग रही हैं।"
सान्वी मुस्कुराई।
"धन्यवाद।"
चिंटू ने कहा—
"कुछ गड़बड़ जरूर है।"
सब हँस पड़े।
रिया भी हँसने की कोशिश करने लगी।
इसी बीच सान्वी ने जानबूझकर पानी का गिलास गिरा दिया।
"ओह! सॉरी!"
रिया उठकर नैपकिन लेने गई।
उसी वक्त...
सान्वी ने उसकी कुर्सी के पास रखा फोन उठा लिया।
लेकिन जैसे ही उसने फोन अपने दुपट्टे के नीचे छिपाया...
पीछे से आवाज़ आई—
"सान्वी!"
वह पलट गई।
आर्यवीर खड़ा था।
सान्वी का दिल जैसे रुक गया।
"हाँ?"
आर्यवीर ने पूछा—
"क्या कर रही हो?"
सान्वी ने तुरंत मुस्कुराकर कहा—
"पानी साफ कर रही हूँ।"
आर्यवीर ने नीचे देखा।
फर्श पर पानी था।
"हाथ में क्या है?"
सान्वी ने घबराकर कहा—
"कुछ नहीं।"
आर्यवीर ने भौंह उठाई।
"तुम फिर झूठ बोल रही हो।"
सान्वी ने दुपट्टे के नीचे फोन छुपा लिया।
"नहीं।"
आर्यवीर उसके करीब आया।
"दिखाओ।"
"नहीं।"
"सान्वी..."
"आर्यवीर!"
दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।
कबीर ने दूर से ये नज़ारा देखा और चुपचाप चिंटू से कहा—
"लगता है आज फिर टीवी सीरियल शुरू है।"
चिंटू बोला—
"पॉपकॉर्न लाऊँ?"
रिया वापस आई।
"मेरा फोन!"
सान्वी ने तुरंत फोन उसकी तरफ बढ़ा दिया।
"ये रहा।"
रिया ने शक से उसे देखा।
"तुमने मेरा फोन उठाया था?"
सान्वी ने मासूम चेहरा बनाया।
"नहीं।"
आर्यवीर ने उसे देखा।
सान्वी ने आँखें चुराईं।
रिया ने फोन चेक किया।
सब कुछ सामान्य था।
लेकिन उसे पता नहीं था कि सान्वी ने सिर्फ़ फोन नहीं उठाया था...
उसने उसके फोन का ब्लूटूथ नाम भी देख लिया था।
Riya's iPhone – Connected to Samer.
सान्वी की आँखें फैल गईं।
अब उसे शक नहीं रहा।
रिया और समर के बीच संपर्क था।
रात को...
सान्वी चुपचाप अपने कमरे में बैठी थी।
उसने आर्यवीर को मैसेज किया—
"मुझे तुमसे जरूरी बात करनी है।"
कुछ सेकंड बाद जवाब आया—
"अभी आऊँ?"
सान्वी ने लिखा—
"हाँ।"
कुछ ही देर में आर्यवीर उसके कमरे में आ गया।
"क्या हुआ?"
सान्वी ने दरवाज़ा बंद किया।
फिर उसने फोन उसकी तरफ बढ़ाया।
"ये देखो।"
आर्यवीर ने स्क्रीन देखी।
उस पर रिया के फोन का ब्लूटूथ कनेक्शन था।
Samer.
आर्यवीर का चेहरा कठोर हो गया।
"तुमने उसका फोन चेक किया?"
"नहीं।"
"फिर?"
सान्वी ने पूरी बात बता दी।
आर्यवीर कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने कहा—
"तुमने मुझसे ये सब पहले क्यों नहीं बताया?"
सान्वी ने नजरें झुका लीं।
"क्योंकि मैं डर गई थी।"
"किस बात से?"
"कि तुम मुझ पर भरोसा नहीं करोगे।"
आर्यवीर ने उसका चेहरा अपनी तरफ किया।
"तुम्हें सच में लगता है कि मैं तुम पर भरोसा नहीं करता?"
सान्वी की आँखें भर आईं।
"मुझे नहीं पता।"
आर्यवीर ने धीमे से कहा—
"सान्वी..."
"तुम मेरी जिंदगी में आईं तो सब कुछ उल्टा-पुल्टा हो गया।"
"लेकिन एक चीज़ कभी नहीं बदली।"
"क्या?"
"तुम पर मेरा भरोसा।"
सान्वी की आँखों से आँसू गिर पड़े।
आर्यवीर ने उन्हें पोंछ दिया।
"अगली बार डरना मत।"
"मुझसे सब कहना।"
सान्वी ने धीरे से सिर हिलाया।
"पक्का?"
"पक्का।"
आर्यवीर मुस्कुराया।
"और अब..."
वह थोड़ा करीब आया।
"एक और बात।"
"क्या?"
"तुम मुझसे नाराज़ थीं?"
सान्वी ने शर्माते हुए कहा—
"थोड़ी।"
"क्यों?"
"क्योंकि तुम मुझसे बात किए बिना चले गए थे।"
आर्यवीर मुस्कुराया।
"तो अब?"
सान्वी ने उसकी तरफ देखा।
"अब नहीं।"
"अच्छा?"
"हाँ।"
"तो मैं जा सकता हूँ?"
सान्वी ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।
"नहीं।"
आर्यवीर हँस पड़ा।
"क्यों?"
सान्वी ने धीमे से कहा—
"बस... ऐसे ही।"
आर्यवीर ने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया।
"ठीक है।"
कुछ पल दोनों चुप रहे।
फिर सान्वी ने धीरे से अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया।
लेकिन उसी वक्त...
रिया अपने कमरे में थी।
उसने अपना दूसरा फोन निकाला।
"उसने शक कर लिया है।"
दूसरी तरफ समर की आवाज़ आई—
"किसने?"
"सान्वी ने।"
समर कुछ पल चुप रहा।
फिर बोला—
"तो अब अगला कदम उठाओ।"
रिया ने पूछा—
"क्या?"
समर ने कहा—
"आर्यवीर को सान्वी से दूर करने के लिए उसके अतीत का नहीं..."
"...उसके वर्तमान का इस्तेमाल करो।"
रिया चौंक गई।
"मतलब?"
समर की आवाज़ ठंडी हो गई।
"उसे ये यकीन दिलाओ कि आर्यवीर तुम्हारे साथ मिलकर उससे कुछ छुपा रहा है।"
रिया के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
"और मेरे पास उसके लिए एक बहुत अच्छा सबूत है।"
अगली सुबह
आर्यवीर ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रहा था।
सान्वी नीचे उसका इंतज़ार कर रही थी।
तभी रिया उसके पास आई।
"सान्वी..."
सान्वी ने उसकी तरफ देखा।
"हाँ?"
रिया ने एक फोटो उसकी तरफ बढ़ाई।
सान्वी ने फोटो देखी।
उसमें आर्यवीर और रिया एक होटल के बाहर खड़े थे।
तस्वीर देखकर सान्वी के चेहरे का रंग बदल गया।
रिया ने धीमे से कहा—
"मैंने तुम्हें पहले ही चेतावनी दी थी।"
"लेकिन शायद अब तुम्हें सच जान लेना चाहिए।"
सान्वी ने तस्वीर को देखा।
उसकी उंगलियाँ काँपने लगीं।
"ये कब की है?"
रिया ने कहा—
"कल रात।"
सान्वी ने तुरंत आर्यवीर की तरफ देखा।
वह सीढ़ियों से नीचे आ रहा था।
सान्वी की आँखें उससे मिलीं।
आर्यवीर मुस्कुराया।
लेकिन सान्वी के चेहरे पर मुस्कान नहीं थी।
आर्यवीर रुक गया।
"क्या हुआ?"
सान्वी ने फोटो उसकी तरफ बढ़ा दी।
आर्यवीर ने फोटो देखी।
उसका चेहरा बदल गया।
"ये..."
सान्वी की आवाज़ काँप रही थी।
"आर्यवीर..."
"तुम कल रात रिया के साथ होटल में क्या कर रहे थे?"
रिया कुछ दूर खड़ी मुस्कुरा रही थी।
लेकिन उसे नहीं पता था...
फोटो के कोने में होटल की घड़ी दिखाई दे रही थी।
और समय था—
रात 11:47।
उस समय आर्यवीर...
सान्वी के कमरे में उसके साथ था।
इसका मतलब...
तस्वीर नकली थी।
और अब खेल बदल चुका था।
आर्यवीर ने फोटो को ध्यान से देखा।
फिर उसने रिया की तरफ नजर उठाई।
उसकी आँखों में पहली बार गुस्सा नहीं...
खतरनाक शांति थी।
"रिया..."
"अब तुम्हारी बारी है जवाब देने की।"
क्रमशः...