एपिसोड 40 — माँ की वापसी और दुश्मन का चेहरा
पुराना सेंट मेरीज़ हॉस्पिटल...
जहाँ कभी मरीजों की आवाज़ें और डॉक्टरों की भागदौड़ हुआ करती थी, आज वहाँ सिर्फ़ सन्नाटा था।
टूटी हुई खिड़कियों से आती हवा पुराने पर्दों को हिला रही थी।
आयत अभी भी अपनी माँ नूरजहाँ के सामने खड़ी थी।
पंद्रह साल...
पंद्रह साल से जिस चेहरे को उसने सिर्फ़ धुंधली यादों में देखा था, वह आज उसके सामने था।
आयत की आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे।
"माँ... आपने मुझे इतने सालों तक ढूँढा क्यों नहीं?"
नूरजहाँ ने उसकी तरफ देखा।
उनकी आँखों में दर्द था।
"मैंने तुम्हें हर दिन ढूँढा था, बेटा..."
"तो फिर मेरे पास क्यों नहीं आईं?"
"क्योंकि मैं आती... तो तुम्हारी जान खतरे में पड़ जाती।"
आयत कुछ समझ नहीं पाई।
"किससे?"
नूरजहाँ ने चारों तरफ देखा।
"यहाँ नहीं। हमें यहाँ से निकलना होगा।"
आयत ने उनका हाथ पकड़ लिया।
"नहीं माँ। आज आप मुझे सब कुछ बताएंगी।"
नूरजहाँ ने बेटी का चेहरा अपने हाथों में लिया।
"तुम्हें सच जानने का हक है। लेकिन इस वक्त नहीं।"
"क्यों?"
"क्योंकि वो लोग हमारे बहुत करीब हैं।"
तभी बाहर किसी के कदमों की आवाज सुनाई दी।
नूरजहाँ का चेहरा अचानक बदल गया।
"वो आ गए..."
आयत घबरा गई।
"कौन?"
"जिनसे मैं तुम्हें बचा रही थी।"
अर्जुन की एंट्री
उधर अर्जुन तेजी से हॉस्पिटल के अंदर आ चुका था।
"आयत!"
उसकी आवाज पूरे कॉरिडोर में गूँज गई।
आयत ने आवाज पहचान ली।
"अर्जुन!"
नूरजहाँ ने तुरंत आयत का हाथ पकड़ लिया।
"तुमने उसे यहाँ बुलाया?"
आयत ने घबराकर कहा,
"नहीं... उसे पता नहीं था कि मैं यहाँ हूँ।"
नूरजहाँ ने कुछ पल सोचा।
फिर बोलीं,
"तो इसका मतलब... वो खुद तुम्हें ढूँढते हुए यहाँ आया है।"
अर्जुन की आवाज फिर सुनाई दी।
"आयत!"
आयत बाहर जाने लगी।
नूरजहाँ ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"रुको!"
"माँ, वो अर्जुन है। वो मेरी मदद करेगा।"
नूरजहाँ ने गंभीर होकर कहा,
"मुझे पता है कि वो तुम्हारी मदद करेगा। लेकिन क्या तुम्हें पता है कि उसके परिवार ने तुम्हें इतने सालों तक क्यों छिपाकर रखा?"
आयत रुक गई।
कुछ सेकंड बाद अर्जुन कमरे के दरवाजे तक पहुँच गया।
उसकी नजर सबसे पहले आयत पर पड़ी।
"तुम यहाँ क्या कर रही हो?"
फिर उसकी नजर सामने खड़ी महिला पर गई।
अर्जुन जैसे जम गया।
उसने तस्वीर में इस महिला को देखा था।
"आप..."
नूरजहाँ ने उसकी तरफ देखा।
"तुम अर्जुन हो?"
अर्जुन ने सिर हिलाया।
"जी।"
नूरजहाँ की आँखों में नमी आ गई।
"तुम बिल्कुल अपने दादा जैसे लगते हो।"
अर्जुन के चेहरे पर कई सवाल एक साथ आ गए।
"आप मेरे दादा को जानती थीं?"
नूरजहाँ ने कहा,
"बहुत अच्छी तरह।"
आयत दोनों की तरफ देख रही थी।
उसे अब लगने लगा था कि उसकी जिंदगी में छिपा सच उसकी सोच से कहीं ज्यादा बड़ा है।
पंद्रह साल पुराना राज़
अर्जुन ने पूछा,
"आपको मेरे दादा कैसे जानते थे?"
नूरजहाँ ने गहरी साँस ली।
"क्योंकि पंद्रह साल पहले मैंने उनसे मदद माँगी थी।"
"किसलिए?"
"तुम्हारी माँ को बचाने के लिए नहीं..."
वह आयत की तरफ देखकर बोलीं,
"तुम्हें बचाने के लिए।"
आयत की आँखें भर आईं।
"मुझे किससे बचाना था?"
नूरजहाँ ने कहा,
"तुम्हारे पिता के पुराने दुश्मनों से।"
आयत चौंक गई।
"मेरे पापा के?"
"हाँ।"
"लेकिन मेरे पापा तो..."
आयत रुक गई।
उसे बचपन से बताया गया था कि उसके पिता की मौत एक दुर्घटना में हुई थी।
नूरजहाँ ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा,
"तुम्हारे पिता की मौत दुर्घटना नहीं थी।"
आयत के पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई।
"क्या?"
अर्जुन भी हैरान था।
नूरजहाँ ने कहा,
"उन्हें मारा गया था।"
कमरे में कुछ पल के लिए बिल्कुल खामोशी छा गई।
आयत की आँखों से आँसू गिरने लगे।
"किसने?"
नूरजहाँ ने जवाब देने से पहले अर्जुन की तरफ देखा।
"उसका नाम..."
वह रुक गईं।
तभी बाहर जोरदार आवाज हुई।
धड़ाम!
दरवाजा बंद हो गया।
तीनों चौंक गए।
अर्जुन तुरंत दरवाजे की तरफ बढ़ा।
"कौन है?"
कोई जवाब नहीं आया।
अर्जुन ने दरवाजा खोलने की कोशिश की।
दरवाजा बाहर से लॉक था।
"आयत, पीछे हटो!"
अर्जुन ने जोर से दरवाजा खींचा।
लेकिन वह नहीं खुला।
जाल
अर्जुन ने तुरंत अपना फोन निकाला।
नेटवर्क नहीं था।
गौरव को कॉल करने की कोशिश की।
कॉल नहीं लगी।
नूरजहाँ का चेहरा सफेद पड़ गया।
"हमें यहाँ से निकलना होगा।"
अर्जुन ने पूछा,
"कोई दूसरा रास्ता है?"
"पीछे की तरफ एक पुराना कॉरिडोर है।"
"चलो।"
तीनों तेजी से पीछे की तरफ बढ़े।
लेकिन जैसे ही वे कॉरिडोर में पहुँचे...
सामने दो आदमी खड़े थे।
आयत डर गई।
अर्जुन तुरंत उसके सामने आ गया।
"पीछे रहो।"
एक आदमी ने कहा,
"अर्जुन वशिष्ठ... तुम्हें बीच में नहीं पड़ना चाहिए था।"
अर्जुन ने ठंडी आवाज में कहा,
"तुमने गलत लड़की को छुआ है।"
दूसरा आदमी आगे बढ़ा।
"हमें लड़की चाहिए। तुमसे कोई दुश्मनी नहीं है।"
अर्जुन की आँखें सख्त हो गईं।
"अब है।"
अगले ही पल दोनों तरफ से हमला हुआ।
अर्जुन ने पहले आदमी को रोक दिया।
कुछ सेकंड की धक्का-मुक्की के बाद दोनों पीछे हट गए।
लेकिन तभी पीछे से एक और आदमी आया।
उसने अर्जुन को पकड़ने की कोशिश की।
नूरजहाँ ने चिल्लाकर कहा,
"अर्जुन!"
अर्जुन ने खुद को छुड़ाया।
लेकिन इसी दौरान आयत का हाथ किसी ने पकड़ लिया।
"आयत!"
अर्जुन ने पलटकर देखा।
एक आदमी आयत को खींचकर ले जा रहा था।
अर्जुन पूरी ताकत से उसकी तरफ बढ़ा।
लेकिन अचानक पीछे से किसी ने लोहे की रॉड जमीन पर पटक दी।
आवाज सुनकर अर्जुन रुक गया।
उस आदमी ने कहा,
"एक कदम और... तो लड़की को लेकर हम गायब हो जाएंगे।"
अर्जुन की मुट्ठियाँ कस गईं।
उसने आयत की तरफ देखा।
आयत की आँखों में डर था।
लेकिन अगले ही पल उसने अर्जुन को देखकर सिर हिलाया।
जैसे कह रही हो—
"मुझे छोड़िए मत।"
अर्जुन की आँखों में गुस्सा भर गया।
"उसे जाने दो।"
"नहीं।"
तभी पीछे से एक और आवाज आई—
"इसे छोड़ दो।"
सबने पलटकर देखा।
दरवाजे पर एक आदमी खड़ा था।
वही रहस्यमयी आदमी।
जिससे अर्जुन पुराने हॉस्पिटल में मिल चुका था।
उसने धीरे-धीरे कमरे में कदम रखा।
"आज बहुत सवालों के जवाब मिलेंगे, अर्जुन।"
अर्जुन ने कहा,
"तुम कौन हो?"
वह मुस्कुराया।
"जिसे तुम इतने दिनों से ढूँढ रहे हो।"
नूरजहाँ का चेहरा अचानक डर से भर गया।
उन्होंने धीमे से कहा—
"रहमान..."
आयत की आँखें फैल गईं।
"रहमान?"
आदमी ने नूरजहाँ की तरफ देखा।
"बहुत साल हो गए, नूरजहाँ।"
अर्जुन ने आयत को अपनी तरफ खींचते हुए कहा,
"तुम रहमान हो?"
वह आदमी मुस्कुराया।
"हाँ।"
लेकिन अगले ही पल उसने कहा—
"लेकिन वो रहमान नहीं, जिसे तुम समझ रहे हो।"
अर्जुन उलझ गया।
"तो फिर कौन हो तुम?"
उस आदमी ने अपनी जेब से एक पुरानी तस्वीर निकाली।
तस्वीर में एक परिवार था।
एक आदमी...
एक महिला...
और एक छोटी बच्ची।
अर्जुन ने तस्वीर देखते ही पहचान लिया।
वह बच्ची आयत थी।
लेकिन उस आदमी का चेहरा देखकर अर्जुन के होश उड़ गए।
क्योंकि वह आदमी...
वशिष्ठ परिवार के एक सदस्य जैसा दिख रहा था।
अर्जुन ने तस्वीर को गौर से देखा।
"ये कौन है?"
नूरजहाँ ने काँपती आवाज़ में कहा—
"तुम्हारे दादा का छोटा भाई... रुद्र वशिष्ठ।"
अर्जुन स्तब्ध रह गया।
"लेकिन रुद्र चाचा तो..."
नूरजहाँ ने उसकी बात पूरी की—
"पंद्रह साल पहले मर चुके थे।"
रहस्यमयी आदमी मुस्कुराया।
"यही तो तुम्हारे परिवार का सबसे बड़ा झूठ है।"
अर्जुन की आँखों में गुस्सा और हैरानी दोनों थे।
क्या रुद्र वशिष्ठ सच में जिंदा था?
और अगर था...
तो उसने आयत की जिंदगी बर्बाद करने के पीछे इतनी बड़ी साजिश क्यों रची?
उधर आयत अपनी माँ का हाथ पकड़े खड़ी थी।
उसे पहली बार महसूस हुआ—
उसकी जिंदगी में सिर्फ एक राज़ नहीं था।
उसके पूरे अतीत में झूठ की एक पूरी दुनिया छिपी थी।
और उस दुनिया का दरवाजा आज खुल चुका था।
क्रमशः...