और जैसे ही दरवाजा खुलता है...
सब लोग अंदर प्रवेश कर जाते हैं और अंदर जो नजारा था उसे देखकर सभी लोग हैरान हो जाते है।
बेडशीट पर लगा खून !
बेड पर बिखरी टूटी चूड़ियां !
बिखरा कमरा !
लड़खड़ाता आकाश और डर से कांपती हुई भूमि !
सभी की आंखों में आश्चर्य था और जुंबा पे सवाल --क्या हुआ होगा और क्यों ???
आकाश की मम्मी और भाभी दौड़कर आकाश के पास पहुंचते हैं और कहते हैं -क्या हुआ आकाश?
यह क्या हाल बना रखा है अपना !!
बताओ क्या हुआ है??
आकाश अपनी मम्मी से लिपट जाता है उसकी आंखें नम हो जाती है।
भर-भरी सी आवाज़ में कहता है --मां
मेरे साथ धोखा हुआ है !!
वहां खड़े सभी लोगों ने सुना पर किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था।
उधर एक कोने में खड़ी भूमि अब भी कांप रही थी । उसके मम्मी पापा ने आकर उसे संभाला।
तब तक आकाश का भाई पानी के कुछ गिलास भर कर ले आता है।
आकाश की मम्मी आकाश को पानी पिलाती है और कहती है- पहले तुम आराम से बैठो मेरे पास।
आकाश पानी पीता है और अपनी मां के पास बैठ जता है।
मां बोलती है अब बताओ क्या हुआ है??
किस धोखे की बात कर रहे हो तुम??
क्या भूमि ने कुछ गलत कहा है तुमसे !!
आकाश बोला --नहीं मां !
बात तो यही गलत है की भूमि ने मुझसे कुछ नहीं कहां ?
मैंनै कितना प्यार किया उसे पर उसने मुझे धोखे में रखा ।
अपनी सच्चाई छुपाई मुझसे ,
किसी अनजान व्यक्ति ने आकर मुझे बताया कि...
मां बोली-- क्या बताया किसी ने??
आकाश बोला- उसने भूमि के बारे में ऐसी बात कही कि मुझसे तो कहां भी नहीं जा रहा है।
मां बोली --ऐसी क्या बात है जो तुमसे कहीं नहीं जा रही है ।
और अगर कहीं नहीं जा रही तो तुमने मान कैसे ली ?
और इस बात का क्या प्रमाण है कि वह जो भी कह रहा था वो सब सच है।
क्या तुमने भूमि से आकर पूछा ??
आकाश बोला --मैं इतना भी नादान नहीं हूं मां की सच और झूठ को पहचान ना सकूं ।
कोने में खड़ी सहमी सी भूमि अब भी कांप रही थी।
तभी आकाश खड़ा होता है और भूमि की ओर इशारा करते हुए कहता है--
ये जितनी सीधी और सच्ची दिखती है उतनी हैं नहीं मां यह बहुत शातिर लड़की है इसने मुझे धोखा दिया है ।
इसने मुझसे अपना काला सच छुपाया हैं।
ये अपवित्र है, उतरन है किसी की ;
मां बोली-- ऐसा क्या है बेटा जो तुम भूमि पर इस तरह का इल्जाम लगा रहे हो?
होश में तो हो तुम!!
भूमि अब भी चुपचाप सहमी सी खड़ी थी और साथ ही उसके मम्मी पापा भी चुपचाप खड़े थे।
आकाश फिर बोला --हां मां मैं पूरे होश में बात कर रहा हू।
ये झूठन है किसी और की जिसे बड़ी खूबसूरती से सजाकर मेरी थाली में परोस दिया गया है। इसके मम्मी पापा ने भी हमें अंधेरे में रखा हमसे अपनी बेटी का काला सच छुपाया है।
""चरित्रहीन"" है ये
चरित्रहीन शब्द सुनते ही भूमि के सब्र का बांध टूट गया और वह जोर से चिल्लाते हुए बोली--बस चुप हो जाओ अब, बहुत बोल दिया तुमने चरित्रहीन नहीं हूं मैं !!
भूमि आकाश की और बडकर कहती है --मिस्टर आकाश भूमि नाम है मेरा ।
सहन करना मेरी फितरत है परंतु उसकी भी एक सीमा होती हैं।
आपके किसी भी गलत शब्द को सहन नहीं करूंगी मैं
वैसे भी पिछले 13वर्षों से मैं एक ऐसी सजा भुगत रही हूं जिसमें मेरा कोई कसुर ही नहीं था?
हर रात एक डर के साए में बीतायी मैंने और हर सुबह उस डर को छुपाने में ।
क्या कसूर था मेरा जो मैं ऐसी जिंदगी की रही थी?
क्या कहा आपने धोखा दिया है मैंने ,सच्चाई छुपाई आपसे??
याद कीजिए मिस्टर आकाश , मैंने कितनी कितनी बार आपसे अपने अतीत के बारे में कहना चाह पर आपने हमेशा टाल दिया।
आप अक्सर यही कहते रहे कि मुझे ,तुम्हारे अतीत से कोई लेना-देना नहीं है।
फिर कैसे कह सकते हो कि मैंने तुमसे कुछ छुपाया है?
और क्या कहते हो आप -प्यार करते हो मुझसे??
अगर कोई प्यार ऐसा होता है कि अपने ही प्यार को सबके सामने रुसवा करता है तो --नहीं चाहिए ऐसा प्यार!!
प्यार विश्वास पर चलता है मिस्टर आकाश। और अगर आपको प्यार होता विश्वास होता तो मुझसे जाकर पूछते यु सबके सामने मेरा तमाशा नहीं बनाते।
फिर अपनी मम्मी पापा की तरफ मुड़कर भूमि कहती हैं --देखा मां क्या हाल हो गया है मेरा।
मैंने कहा था ना कि आप सच बता दीजिए।
झूठ की बुनियाद पर सपनों के महल नहीं बनते मां !!
पर आपने मेरा अतीत छुपा कर मेरा वर्तमान और भविष्य दोनों बिगाड़ दिया।
आप तो कहते थे हम हैं संभालने के लिए अब बताओ क्या करोगी मां!!
आप जिस राज को छुपाना चाहती थी वो और भी भयानक रूप लेकर मेरे सामने खड़ा है ।
मां पिछले 13 वर्षों से मैं एक ऐसे कसूर की सज़ा भुगत रही थीं जो मैंने किया ही नहीं ।
और अब.. ये आकाश के द्वारा लगाए जा रहे इल्जाम क्या किसी सजा से कम हे ये और वो भी बिना कसूर के
फिर अपने पिता की ओर बढ़कर बोली -बताओ ना पापा जी मेरा क्या कसूर था।
क्या अपने ही घर में, मेरा खेलना, कूदना ,उछलना, हंसना शरारतें करना कसूर था मेरा।
या अपने घर में बचपन से...