सजा.....बिना कसूर की - 9 Soni shakya द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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सजा.....बिना कसूर की - 9

  ....आकाश की फोन की घंटी बजती है पर आकाश ध्यान नहीं देता। वह अपने सुनहरे पलों को यु बर्बाद नही करना चाहता था।

पर .. मोबाइल की रिंग भी बहुत जिद्दी थी लगातार बजे जा रही थी । आकाश के रोमांस में दखल पड़ रहा था और भूमि को भी अच्छा नहीं लग रहा था।

आखिरकार भूमि बोली--देख लीजिए शायद किसी को जरूरी काम हो !

आकाश थोड़ा झुंझलाते हुए बोला-अरे यार यह कौन है जिसको  समझ नहीं आता कि आज मेरी गोल्डन नाइट है।

भाभी ने तो 'do not disturb 'की key chain भी लगा रखी थी दरवाजे पर ;;मैं हीं बेवकूफ हूं मोबाइल में भी लगा देना चाहिए था। "Do not disturb"'

भूमि बोली -नाराज मत होइए शायद किसी को जरूरी काम होगा देख लीजिए ।

भूमि भी नहीं जानती थी कि किसका कॉल है।  ‌उसने तो कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक कॉल किसी का जीवन तहस-नहस कर सकता है शायद भूमि का भी ??


आकाश  _बेड से उठकर मोबाइल उठाता है और देखता है कि  दस मिस कॉल !!!

वह भी एक अनजान नंबर से  !!

कौन है ये ??

क्यों किया होगा मुझे कॉल ?

क्या चाहता है मुझसे ?

मेरा नंबर कहां से मिला होगा ?

भूमि पूछती है किसका कॉल  है  ?

आकाश बोला- पता नहीं यार कोई अननोन नंबर है। और उसके 10 मिस कॉल पड़े हैं। 

जाने दो मुझे क्या करना है मैं तो जानता तक नहीं इस नंबर को 

तभी भूमि बोली --2 मिनट की तो बात है बात करके देख लीजिए शायद किसी को ज्यादा जरूरत हो??

आकाश बोला --यार भूमि मेरा तो बिल्कुल  भी मन‌ नहीं है 

भूमि दुबारा बोली --कर लीजिए बात 

भूमि के कहने पर आकाश जैसे ही रिप्लाई की कोशिश करता है उधर से दुबारा रिंग बज जाती है।

आकाश फोन उठाता है --Hello

उधर से आवाज आती है आप आकाश जी बोल रहे हैं।

आकाश बोला _जी मैं आकाश बोल रहा हूं।

उसके बाद 5 मिनट तक आकाश के कानों पर मोबाइल चिपका रहा आकाश सिर्फ सुन  रहा था उत्तर नहीं दे रहा था और वैसे ही कमरे से बाहर निकलने लगा तो,

भूमि ने आकाश से पुछा कहा जा हो आप  ??

आकाश बोला --बस अभी आया 5 मिनट और कमरे से बाहर निकल गया ।

आधा घंटा बीत चुका था आकाश को बाहर गए हुए,भूमि को कुछ समझ नहीं आ रहा था ..

किसका कॉल होगा??

आकाश यु बाहर क्यों चले गए, और इतनी देर हो गई अब तक क्यों नहीं आये ।

भूमि ने कॉल करना चाहा पर उसे  उचित नहीं लगा , उसने इंतजार करना उचित समझा और लेट गई। 

उसे पता ही नहीं चला कब नींद में उसे अपनी आगोस में ले लिया।

रात  करीब  3.30  बज रहे थे...

 तेज दरवाजे की आवाज से भूमि फिर अचानक से उठकर बैठ जाती है और आकाश को देखते ही आवाक रह जाती है!!

आकाश बेड की ओर बढ़ रहा था उसके कदम लड़खड़ा रहे थे।

आकाश को इस दशा में देखकर भूमि डर गई उसका कलेजा कांपने लगा था।

वो खौफ जो बरसों से अंदर दबा था आज सामने आकर खड़ा हो गया था--आकाश के रूप में !!

भूमि कुछ और समझ पाती उससे पहले आकाश बोल पड़ा --उतरन !!

उतरन हो तुम ??

तुम्हारे माता-पिता ने बिना बताए किसी और की झूटन को मेरी थाली में परोस दिया है !!

आकाश चिल्ला रहा था और भूमि पर तरह-तरह के  इल्जाम लगा रहा था ।

जाने कितने अपशब्द कह‌ दिए थे उसने भूमि को और भुमि..!!

जैसे उसके सुनने और समझने की शक्ति ने काम करना बंद कर दिया हो उसे कुछ सुनाई नहीं  पड़ रहा था।

बस- दिखाई दे रहा था... एक साया और वह सारा मंजर जिसे वह 13 सालो से भुलाने की कोशिश कर रही थी !!

13 साल पुराना  वो साया एक बार फिर भूमि के सामने था बस सूरत बदल गई थी ..

भूमि सहमी सी पलंग के कोने में  बैठी उसका पूरा बदन डर से कांप रहा था।

वह काली रात जिसने भूमि की हंसी खुशी चंचलता सब कुछ छीन लिया था फिर उसके सामने थी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें ?

और आकाश.. पलंग के पास खड़ा नशे की हालत में भूमि से जाने कितने  अपशब्द कहे जा रहा था।

और फिर....

अचानक से आकाश भूमि के ऊपर गिर जाता है और उसे जबरन परेशान करने लगता है।

भूमि के सामने  थी  फिर वही 13 साल वाली पुरानी काली रात जब..

किसी अपने ने ही अपनी इंसानियत छोड़कर;; भूमि को अपनी हवस का शिकार बनाया था।

तार तार कर दी थी उस मासूम भूमि की अस्मत को !!

आज फिर वही काली रात उसकी जिंदगी में  किस्मत के हाथों दोहराई जा रही थी  पर..