सजा.....बिना कसूर की - 4 Soni shakya द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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सजा.....बिना कसूर की - 4

वैसे तो आपको देखने  से ही और आपकी बातचीत से बहुत-कुछ समझ आता है आपके बारे में फिर भी आप कुछ बताइए ताकि हम बातचीत शुरू कर सके। 

भूमि एक सुलझी हुई और स्पष्ट वादी लड़की थी।

उसने कुछ बातें अपनी पसंद ना पसंद के बारे में बतायी। कुछ बातें करियर को लेकर हुई।

फिर आकाश ने प्रश्न किया क्या आप शादी के बाद भी अपनी जॉब कंटिन्यू करना चाहोगी ?

भूमि बोली हां चाहती तो हुं पर--सबकी सहमति से।

भूमि की यह बात आकाश के मन को छू गई।

फिर आकाश बोला --आप कुछ परेशान लगती हो? 

क्या आप इस रिश्ते से खुश नहीं हो।

भूमि ने कहां--नहीं ऐसी कोई बात नहीं है।

कुछ बात तो है आकाश बोला--

क्या आपको कोई और पसंद है.!!

नहीं ऐसा तो बिल्कुलूभ नहीं है भूमि ने कहा !

तो क्या मैं आपको पसंद नहीं आया !!

देखो'; अच्छा खासा दिखता हुं,

हाइट भी आपसे बड़ी ही  है,

रंग भी ठीक ही है ,

जाॅब भी है बैंक में  तो मुझे तो कोई कमी समझ नहीं आती आप ही बता दीजिए क्या कमी है मुझ में। 

आकाश की  बातें  सुनकर भूमि के चेहरे पर स्माइल आ जाती है।

भूमि को मुस्कुराते हुए देखकर आकाश बोला -बस यही चाहिए था ।

आकाश फिर बोला -तो मैं यह समझु कि मैं आपको पसंद हूं। 

भूमि ने‌ कहा--हां आप मुझे पसंद हो? 

आकाश बोला --फिर क्या  परेशानी  है?

आपका कोई बॉयफ़्रेंड भी नहीं है और मैं आपको पसंद भी हुं फिर ये चेहरे पर उदासी क्यों है ?

भूमि हिम्मत जुटा कर बोली --अतीत के साए और घटना मेरा पीछा नहीं छोड़ते।

आकाश मुस्कुराते भी बोला -बस इतनी-सी बात 

भूमि अतित की कोख में ही वर्तमान पलता है और वर्तमान की गोद में भविष्य  इसके लिए ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है  आपको ।

और दूसरा मैं वर्तमान में जीने वाला व्यक्ति हू।

मेरे लिए बस इतना जानना जरूरी था कि आपके जीवन में कोई और तो नहीं है । और आपके जीवन में कोई और नहीं है तो मुझे आपसे रिश्ता जोड़ने में कोई एतराज नहीं‌ है।

भूमि बोली --फिर भी आप सुन लेते तो अच्छा होता।

आकाश बोला --भूमि मुझे  जो कुछ जानना था समझना था मैंने समझ लिया अब और कुछ नहीं सुनना है मुझे।

फिर आकाश ने अपना हाथ बढ़ाया और कहा -बस एक प्रॉमिस चाहता हूं---जीवन भर साथ निभाने का  !!

भूमि ने मुस्कुराते हुए अपना हाथ आकाश की ओर बढ़ा दिया।

तभी मीरा छत पर आती है और छत का नजारा देखते हुए कहती है-- लो भाई यहां तो पहले ही रिश्तेदारी हो गई हमारी तो कोई जरूरत ही नहीं है।

आकाश और भूमि दोनों मुस्कुराते हैं ।

फिर आकाश बोला --अरे भाभी ऐसी कोई बात नहीं है मैं तो भूमि से बस अपनी जीवन संगिनी बनने का अनुरोध कर रहा था।

अच्छा तो क्या जवाब दिया मैडम ने ,मीरा ने शरारती अंदाज में‌ पुछा ।

आकाश भी शरारती अंदाज में  बोला -आपका प्रमोशन होने वाला है आप जल्द ही जेठानी बनकर राज करने वाली हो।

मीरा खुशी के मारे अछल कर बोली -अच्छा तो  बात पक्की समझु ।

भूमि ने  मुस्कुराते हुए चेहरा निचे की ओर झुका लिया और आकाश खुशी से बोला-जी भाभी जी 

मीरा ने  दुबारा से मुस्कुराते हुए कहा -पक्का ना !!

भुमि और आकाश दोनों ने 'हां 'कह दी 

मीरा बोली - तो मैं निचे  जाकर सब को खुश खबरी दे दु।

आकाश बोला -जी‌‌ भाभी नेक काम में देरी क्यों करना।

मीरा ‌दोनो को बधाई देती है और मुस्कुराते हुए नीचे उतर आती है।

आते ‌ही  खुशी से झुमते हुए कहती हैं --बधाई हो सभी को दोनो ने पसंद कर लिया है एक दूसरे को।‌

अब तो मिठाई खिलाईए आंटी जी !

सरला खुशी से बोली -क्यों नहीं बेटा अभी लेकर आती हूं।

तभी आकाश और भूमि भी नीचे आ जाते हैं।

सभी लोग बहुत खुश थे भूमि और आकाश भी।

सब लोग एक दूसरे को बधाई देते हैं मुंह मीठा करते हैं और फिर आकाश की मम्मी कहती है -अब हम चलते हैं‌

सरला कहती है -अरे बहन जी रूक जाइए खाना खाकर जाइएगा।

आकाश की मम्मी बोली- अब अगली बार आएंगे तो खाना खा कर ही जाएंगे  अभी तो चलते हैं घर जाकर मुहूर्त भी तो निकलवाना है।‌

सब लोग बाहर निकल जाते हैं ।

भूमि दरवाजे पर खड़ी थी आकाश ने एक बार पलट कर देखा स्माइल की और गाड़ी में बैठ गया।

दुसरे दिन....