भूमि के पिता (सरला ) भूमि की मां की ओर देखते हैं और कहते हैं--क्या हुआ सरला ?
क्या भूमि इस रिश्ते से खुश नहीं हैं !!
नहीं ऐसी बात नहीं है जी वो बस... अतीत के साए उसका पीछा नहीं छोड़ते ।
तो समझाओ उसे कब तक यु अतीत के अंधेरे गलीयरों में घूमती रहेगी।
ऐसी बात नहीं है जी वो भी इन सबसे बाहर निकलना चाहती है एक सुकून की जिंदगी चाहती है पर ..सच्चाई को झूठलाया तो नहीं जा सकता ना।
वो भी कदम बढ़ाकर आगे रोशनी में आना चाहती है पर डरती है कहीं अतीत के साए उसे फिर से अंधेरी गलियारों मे ना धकेल दे।
ऐसा कुछ नहीं होने वाला है तुम बस भूमि को तैयार होने के लिए कह दो।
तभी भूमि कमरे में आकर कहती है पापाजी--शादी से मुझे एतराज नहीं है पर मेरा मन झूठ के दम पर शादी करने के लिए राजी नहीं है।
हम क्या झूठ बोल रहे हैं भुमि,, उन लोगों ने जो -जो पूछा हमने सब सच -सच बता दिया है।
हां पापा जी आपने सब-कुछ सच-सच बता दिया है पर.. पूरा नहीं मेरे अतीत की वह काली सच्चाई ..!!
भूमि भूल भी जाओ बेटा अब -
मैं भी कहां याद रखना चाहती हूं पापा जी पर क्या करूं वह दिमाग से जाता ही नहीं।
बेटा वो सिर्फ एक हादसा था और उसे बीते कितने साल हो गए हैं तुम कब तक उसको याद रख कर आगे नहीं बढ़ोगी अपनी जिंदगी में ?
पापाजी मैं आगे तो बढ़ना चाहती हूं पर डरती हूं कि कहीं अतीत के साए मुझे फिर वही ना धकेल दें ।
ऐसा कुछ नहीं होगा भूमि हम है ना तुम्हारे साथ।
साथ तो आप उस वक्त भी थे ना पर क्या किया आपने पापा जी ।
अगर उस वक्त आप एक अपराधी का साथ ना देते तो शायद आज मेरी यह हालत न होती आज मेरे अंदर एक डर ना भर गया होता।
समझो बेटा -मैं मजबूर था उस वक्त घर की इज्जत और मां पिताजी की रिक्वेस्ट ने मुझे मजबूर कर दिया था।
मैं हार गया था अपने मां पिताजी के आगे इसलिए चाह कर भी मैं कुछ बोल नहीं पाया मुझे चुप रहना पड़ा ।
आप तो एक अच्छे भाई और एक अच्छे बेटे बन गए लेकिन मेरा क्या पापा जी ??
अपनी बेटी को क्या दिया अपने पापा जी ..
जिंदगी भर एक डर के साए में जीने की मजबूरी।
मैं चाह कर भी किसी पर विश्वास नहीं कर पाती।
जैसे रिश्तों पर से मेरा यकीन ही उठ गया हो ?
फिर ऐसे में नए रिश्तों पर कैसे यकीन कर पऊंगी पापा जी ?
क्या ईत्मीनान के साथ अपनी जिंदगी जी पाऊंगी मैं ?
जब अपने ही रिश्तो से धोखा मिला है तो...
माफ कर दो भूमि मुझे ,,मैं उस वक्त मम्मी पापा की बातों के आगे कमजोर पड़ गया था ।
मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था बेटा।
तुम्हारा गुनहगार हूं पर.. अब जाने भी दो बेटा
13 साल बीत गये उस बात को अब तो मम्मी पापा भी नहीं रहे और वो भी...
कोई नहीं है बेटा अब,,जो उस घटना को जानता हो।
मैं चाहता हूं तुम एक नई जिंदगी की शुरुआत करो भुमि
मानती हूं पापाजी कि अब कोई नहीं जो उस घटना के बारे में कहेगा पर हमारा मन.. उसका क्या ??
मन में तो हमेशा से वह बात घर बनाकर बैठी है और हमेशा रहेगी उसका क्या करेंगे पापा जी !!
वक्त हर ज़ख्म को भर देता है बेटा देखना जब तुम्हारी शादी हो जाएगी तो तुम भी सब कुछ भूल जाओगी।
इतने सालों में तो मैं कुछ नहीं भूल पाई पापाजी फिर आगे कैसे भुल पाऊंगी।
शादी के बाद जिंदगी बदल जाती है भुमि देखना तुम अपनी गृहस्ती में व्यस्त हो जाओगी और सब ठीक हो जाएगा।
ठीक है पापाजी अगर आप कहते तो मैं मान भी लेती हूं पर,,,
अब क्या हुआ बेटा !!
क्या झूठ की बुनियाद पर रिश्ता बनाना ठीक होगा ??
हम उन्हें सच भी तो बता कर बात कर सकते हैं ना पापाजी ..
नहीं बेटा --ऐसा नहीं हो सकता तुम समझती क्यों नहीं हो भूमि...