सजा.....बिना कसूर की - 10 Soni shakya द्वारा लघुकथा में हिंदी पीडीएफ

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सजा.....बिना कसूर की - 10

यह 13 साल पहले वाली भूमि नहीं थी।

13 साल पहले वह मासूम थी किसी हैवान से लडने की ताकत नहीं थी उसमें पर अब...

अब वह एक सशक्त  नारी है कोमल थी पर कमजोर नहीं थी।

आकाश को  यु अपनी और झपटते देख वह डरी नहीं  उसने अपनी पूरी ताकत से आकाश को जोर से धक्का देने की कोशिश की इसी झूमा झटकी  में भूमि के हाथ की कुछ चूड़ियां टूट कर बिखर गई कुछ उसके हाथों में चुभ गई कुछ आकाश के हाथों में चुभ गई ।

चुभी हुई चूड़ियों के कारण दोनों के हाथों से खून निकलने लगा और कुछ  बेडशीट पर भी लग गया।

पर भूमि ने हार नहीं मानी उसने  दुबारा से धक्का दिया चुंकि आकाश नशे में था तो पलंग  की साइट पर गिर गया ।

नशे की हालत में यु पड़ा देख भूमि की आवाज निकल गई!!

वहां आकाश की ओर गई और उसे उठाने की कोशिश करने लगी पर...

आकाश  चिल्लाते हुए बोला --मत छुओ मुझे तुम उतरन हो ! अपवित्र हो !!

तुमने मेरे साथ धोखा किया  है  क्यों??

क्यों किया तुमने मेरे साथ ऐसा ??

क्या बिगाड़ा था मैंने तुम्हारा!!

आकाश की आवाज बहुत तेज़ हो गई थी।

भूमि को समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहे वो  बस आकाश को उठाने की कोशिश कर रही थी।

आकाश लड़खड़ाते हुए उठता है और भूमि से  पुछता है--बताओ क्यों किया तुमने मेरे साथ ऐसा??

क्यों मुझे धोखे में रखा??

कितना प्यार किया मैंने तुमसे !!

और बदले में तुमने ये सिला दिया??

कितना सीधा और संस्कारी समझता था मैं तुम्हें पर तुम तो शातिर निकली  !!

आकाश की आवाज तेज हो  रही थी।

और कहते हैं ना कि दीवारों के भी कान होते हैं !

तो बस कुछ दीवारों के कानों ने भी सुन लिया और आवाज दूसरे कमरे तक पहुंच गई ‌, 

आवाज सुनकर भैया भाभी कमरे से बाहर निकल आये दूसरी ओर से मम्मी पापा भी कमरे से बाहर निकल आए। 

सब लोग आकाश के कमरे के बाहर खड़े हो गए और कुछ रिलेटिव भी। 

कमरे के अंदर से अभी वैसे ही आवाज आ रही थी,

आकाश बार-बार यही कह रहा था कि तुमने मेरे साथ  अच्छा नही किया।

तुमने मुझे अंधेरे में रखा है तुमने मुझे धोखा दिया है।

भूमि प्रति उत्तर में बस इतना ही कह रही थी कि मैंने ऐसा कुछ गलत नहीं किया है।

मैंने कोई धोखा नहीं दिया है!!

आवाजे कुछ तेज थी बाहर खड़े लोगों को समझ आ रहा था की अंदर कुछ तो भी गड़बड़ है पर किसी कि हिम्मत नहीं पड़ रही थी कि दरवाजे को दस्तक दे।

उन्हें लग रहा था कि हो सकता है कि यह हमारा बहम हो।

तभी आकाश की कजन सिस्टर आती है और कहती हैं  --कुछ तो गलत है आंटी जी मैंने कुछ समय पहले आकाश भाई को लड़खड़ाते हुए कमरे में प्रवेश करते हुए देखा है‌ ऐसा लग रहा था जैसे भाई नशे में हो। 

नशा !!

नहीं नहीं आकाश तो कोई नशा नहीं करता आकाश की मम्मी बोली -तुम्हें कुछ गलत फहमी हुई होगी ‌

मेरा आकाश तो कितना खुश है।

काश !  ऐसा ही हो ,मेरी गलतफहमी हो पर मैंने अपनी आंखों से देखा है आंटी जी ‌

अंदर की आवाज़ें भी तेज थी।

आखिरकार!  आकाश की मम्मी ने डोर बेल बजा दी।

आकाश गेट खोलने के लिए जाने लगता है पर भूमि उसे रोकती  है , वह नहीं चाहती थी कमरे के अंदर जो भी हो रहा है वह बाहर किसी को भी पता चले।

पर,,आकाश उसे झटका देता है और दरवाजे कीओर बढ़ जाता है।

भूमि हाथ जोड़कर उसे मिन्नत करती है पर आकाश नहीं मानता। 

इधर डोर बेल भी लगातार बज रही थी।

बाहर का शोर सुनकर कुछ और रिलेटिव एकत्रित हो जाते हैं।

अब  तो मामला गंभीर हो चला था। 

अंदर से दरवाजा खुल नहीं रहा था और बाहर से  डोर बेल लगातार बज रही थी ।

तभी रिलेटिव में से किसी  अपने ने भूमि की मम्मी को सूचना दे दी। 

सुनते ही कांप उठी सरला  हतप्रत  सी हो गई सरला।

पास ही खड़े भूमि के पिता ने पूछा- क्या हुआ सरला??

इतनी परेशान क्यों हो??

किसका कॉल था??

सुनते ही सरला की आंखों से आंशु बह निकले ।

सरला को ऐसे रोते देख भूमि के पिता भी परेशान हो गए और पूछने लगे क्या हुआ सरला बताओगी कुछ!!!

रोते हुए सरला बोली --जिस बात का डर था वही हुआ है शायद!!

हमारी भूमि...

क्या हुआ भूमि को तड़प कर बोले भूमि के पिता?

सरला अपने आप को संभालते हुए बोली -हमें अभी चलना होगा भूमि के पास !!

पर क्यों ? भुमि के पिता बोले 

सरला बोली-- बस आप तो चलिए 

दोनों कमरे से बाहर निकल कर रिजॉर्ट के दूसरे गेट की ओर बढ़ जाते हैं ।

दूर से ही दिख जाता है कि कुछ लोग इकट्ठा है एक कमरे के बाहर।

पास पहुंच कर पता चलता है कि यह भूमि और आकाश का कमरा है और अंदर से कुछ ऐसे शब्द सुनाई दे रहे हैं जो कम से कम आज तो नहीं सुनाई देने चाहिएं थे ।

सरला पहुंचते ही आकाश की मम्मी से बोली- क्या हुआ है बहन जी 

आकाश की मम्मी बोली _पता नहीं पर कुछ तो गलत हो रहा है हम भी यही जानने की कोशिश कर रहे हैं अब दरवाजा खुले तो पता चले की क्या माजरा है ??

तभी कमरे का दरवाजा खुल जाता है और जैसे ही दरवाजा खुलता है....