अधूरापन - 15 Falguni Dost द्वारा प्रेरक कथा में हिंदी पीडीएफ

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अधूरापन - 15

अध्याय - १५


भार्गवी को पलटकर जवाब देकर अपूर्व तो चला गया, लेकिन भार्गवी मन ही मन सोचती हुई खुद को कोसती रही कि, "एक औरत बच्चे को जन्म देती है, लेकिन वह बच्चा बेटा होगा या बेटी, यह सिर्फ और सिर्फ पुरुष पर ही निर्भर करता है; क्योंकि पुरुष के गुणसूत्रों (क्रोमोसोम) की संरचना पर ही बच्चे का लिंग निर्भर होता है। ईश्वर ने स्त्री को इस संसार को चलाने का दर्जा दिया है, पुरुष उसका सम्मान तो नहीं करता, बल्कि कभी-कभी अपनी कमियों का दोष भी स्त्री पर ही मढ़ देता है। जो इस २१वीं सदी के लोगों के लिए वाकई बहुत शर्मनाक बात है। हम कहते हैं कि जमाना बदल गया है, लेकिन आज भी स्त्रियों की स्थिति वैसी की वैसी ही है जैसी सालों पहले थी। शायद उससे भी ज्यादा बदतर हो चुकी है। यह नग्न सत्य है कि नारी एक जीवन को आकार जरूर देती है, लेकिन उसके शरीर में बीज रोपने वाला तो पुरुष ही होता है।"

ऐसे विचारों में मग्न भार्गवी बिस्तर पर पड़ी थी। और बिस्तर पर पड़े-पड़े उसे कब नींद आ गई, उसे खुद भी पता नहीं चला। उसे पता ही नहीं चला कि अपूर्व कब कमरे में आया। अपूर्व गुस्से में तो था ही। उसे लगा कि भार्गवी जाग रही है लेकिन मुंह फुलाकर पड़ी है। ऐसे गलत विचारों में अपूर्व को पूरी रात नींद नहीं आई।

दूसरे दिन सुबह भार्गवी रोज की तरह ही व्यवहार कर रही थी, लेकिन गलत विचारों के कारण अपूर्व को अभी भी उतना ही गुस्सा था। वह बिना कुछ बोले अपना नित्यकर्म निपटाकर ऑफिस चला गया। अपूर्व के मन की बेचैनी उसका सहकर्मी दोस्त विनय, जो उसके साथ ऑफिस में नौकरी करता था, बहुत अच्छी तरह समझ गया था। विनय और अपूर्व कॉलेज में भी साथ ही थे। वैसे भी अपूर्व को यहां बुलाने वाला भी विनय ही था। इस वजह से अपूर्व विनय का बहुत सम्मान करता था और हर बात में उसकी राय भी लेता था। दोनों बहुत पक्के दोस्त थे। थोड़ी देर तो विनय ने इंतजार किया कि अपूर्व खुद ही अपनी तकलीफ बताए, लेकिन पूरा दिन खत्म होने को आया फिर भी अपूर्व कुछ नहीं बोला। वह अभी भी चुपचाप ही था, इसलिए विनय ने खुद ही ऑफिस से निकलते वक्त उससे पूछा, "आज बहुत चिंता में लग रहे हो। अपूर्व! सच बताओ, क्या बात है? मैं सुबह से देख रहा हूं कि आज तुम बिल्कुल अकेले-अकेले गुमसुम बैठे हो। न तो तुमने मुझसे कोई बात की और न ही किसी और से बात की। चुपचाप सिर्फ अपना काम ही कर रहे थे। अब तक तुम्हारा ऐसा व्यवहार तो मैंने आज पहली बार ही देखा है। सब ठीक तो है ना? घर में सब ठीक है?"

अपूर्व को समझ नहीं आया कि क्या कहे। वह सिर्फ इतना ही बोला, "अरे नहीं! ऐसा कुछ खास नहीं है। सब ठीक है। यह तो बस ऐसे ही, मेरा सिर दर्द कर रहा है इसलिए तुम्हें ऐसा लग रहा होगा।"

विनय ने जवाब देते हुए कहा, "अगर झूठ नहीं बोल सकते तो मत बोलो। जल्दी बताओ कि क्या हुआ है?"

अपूर्व बोला, "क्या कहूं? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है।" उसने एक ठंडी सांस भरते हुए कहा।

विनय ने कहा, "तुझे मुझसे कहने के लिए सोचना पड़ेगा? कॉलेज से लेकर आज तक मैं ही हमेशा तेरे सुख-दुख का साथी रहा हूं। तेरे हर सुख और दुख के मौके पर मैं हमेशा मौजूद रहा हूं। बोल, क्या बात है?"

अपूर्व ने बड़ी मुश्किल से झिझकते हुए विनय को वह सब बताया जो कुछ भी हुआ था।

विनय ने बहुत शांति से जवाब देते हुए कहा, "भाभी ने बिल्कुल सही बात कही है। तू भाभी पर गुस्सा क्यों हुआ? आज के जमाने में दंपत्ति आसानी से सरोगेट मदर भी रखते हैं, तो बच्चा गोद लेने में क्या ऐतराज है? यार, शांति से सोच। क्या तू नहीं चाहता कि राजेश भाई को भी कोई पापा कहकर बुलाए?"

अपूर्व अधूरी बात सुनकर गुस्से में बोला, "इसीलिए तो मम्मी ने भाई की दूसरी शादी के लिए कहा..."

अब विनय ने बात काटते हुए आगे कहा, "लेकिन अगर राजेश भाई अमृता भाभी के साथ ही जीना चाहते हों तो?? और वैसे भी दूसरी शादी कोई सही रास्ता नहीं है। और इस बात की भी क्या गारंटी है कि जो दूसरी आएगी, वह बच्चे को जन्म दे ही पाएगी? हो सकता है कि उसमें भी कोई कमी हो। अपूर्व... कोई भी पति जब अपनी पत्नी से हमेशा के लिए दूर होने वाला होता है, तभी उसे अपने जीवन में उसकी असली कीमत समझ आती है... राजेश भाई भी आज तक, जैसा तुमने कहा, भाभी को गलत ही समझते रहे। अब वह दूसरी शादी के लिए मना ही करेंगे ना! भार्गवी भाभी ने बिल्कुल सही बात कही है, तुम्हें उनकी बात समझनी ही चाहिए... बल्कि उनकी बात तुम्हें ही अपने परिवार के सामने रखनी चाहिए और सबको मनाना चाहिए... अपूर्व, तुम किस्मत वाले हो कि तुम्हें इतनी अच्छी पत्नी मिली है जो घर को जोड़कर रखना चाहती है, तोड़ना नहीं... मेरी इस बात पर शांति से सोचना अपूर्व..."

"अच्छा चल, अब मैं घर जाता हूं। नीला मेरा इंतजार कर रही होगी।" इतना कहकर विनय वहां से चला गया।

और अपूर्व, विनय की कही बातों पर मन ही मन मंथन करने लगा।