Mr. & Ms. Fake
Episode 25 – The Man in the Photograph
सिंह हाउस के ड्रॉइंग रूम में उस वक्त जैसे समय रुक गया था।
दादी के हाथ में पुराना फोटो एलबम था और सामने वही तस्वीर रखी थी, जिसे देखकर आर्यवीर का चेहरा सफेद पड़ चुका था।
तस्वीर में दस साल का आर्यवीर था।
उसके बगल में नैना खड़ी थी।
और उनके पीछे एक आदमी।
आर्यवीर उस आदमी को पहचानता था।
समर मल्होत्रा।
उसके पिता का कभी बेहद करीबी बिजनेस पार्टनर।
लेकिन...
आर्यवीर की जिंदगी में उसका नाम सिर्फ एक वजह से जुड़ा था।
नैना।
आर्यवीर ने तस्वीर दादी के हाथ से ले ली।
"ये आदमी... आज कहाँ है?"
दादी ने नजरें झुका लीं।
"पता नहीं।"
"दादी, आप झूठ बोल रही हैं।"
दादी ने कोई जवाब नहीं दिया।
आर्यवीर की आवाज़ और कठोर हो गई।
"आपने कहा था कि नैना ने मुझे धोखा दिया था।"
"आपने कहा था कि उसकी वजह से हमारा परिवार बर्बाद हुआ।"
"तो फिर ये सब क्या है?"
दादी की आँखें भर आईं।
"क्योंकि उस समय मुझे भी पूरी सच्चाई नहीं पता थी।"
सान्वी चुपचाप दोनों को देख रही थी।
उसे महसूस हो रहा था कि आज आर्यवीर के अतीत का ऐसा दरवाज़ा खुल चुका है, जिसे उसके परिवार ने सालों से बंद रखा था।
वही रहस्यमयी आदमी आगे आया।
"मेरा नाम अभय है।"
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
"और तुम नैना को कैसे जानते हो?"
अभय ने कुछ पल चुप रहकर कहा—
"क्योंकि मैं उसका भाई हूँ।"
आर्यवीर के चेहरे पर अविश्वास छा गया।
"भाई?"
अभय ने सिर हिलाया।
"हाँ।"
"और मैं पिछले सात साल से ये साबित करने की कोशिश कर रहा हूँ कि नैना ने तुम्हें कभी धोखा नहीं दिया।"
सान्वी ने धीरे से पूछा,
"फिर वो गई कहाँ?"
अभय की आँखें नम हो गईं।
"हमें लगा था कि वह मर चुकी है।"
कमरे में सन्नाटा छा गया।
आर्यवीर जैसे पत्थर का हो गया।
"क्या?"
अभय ने धीमी आवाज़ में कहा—
"जिस रात तुम दोनों के बीच सब कुछ खत्म हुआ था..."
"उसी रात नैना गायब हो गई थी।"
"उसकी कार नदी के पास मिली थी।"
"लेकिन उसकी बॉडी कभी नहीं मिली।"
आर्यवीर की उंगलियाँ काँपने लगीं।
"तो तुम कहना चाहते हो..."
अभय ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—
"नैना शायद मरी ही नहीं थी।"
सान्वी ने तुरंत आर्यवीर का हाथ पकड़ लिया।
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आँखों में दर्द था।
"मैंने उसे बहुत कुछ कहा था..."
"मैंने उसे कहा था कि मैं उससे नफरत करता हूँ।"
सान्वी ने धीरे से कहा,
"तुम बच्चे थे।"
"लेकिन मैंने उसकी बात सुने बिना उसे दोषी मान लिया।"
उसकी आवाज़ टूट गई।
सान्वी ने उसका हाथ और कसकर पकड़ लिया।
"तुम्हें सच पता नहीं था।"
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
"अब पता लगाऊँगा।"
उसकी आँखों में पहली बार दृढ़ता लौट आई।
"जो भी हुआ था..."
"मैं सच सामने लाकर रहूँगा।"
उसी समय...
रिया के कमरे में।
अनन्या उसके सामने खड़ी थी।
"अब सच बताओ।"
रिया ने घबराहट छिपाने की कोशिश की।
"किस बारे में?"
अनन्या ने मोबाइल उसकी तरफ बढ़ाया।
"इस नंबर से तुम्हारी जो बातें हुई हैं..."
"मैंने सब सुन लिया है।"
रिया का चेहरा उतर गया।
"तुमने मेरा फोन चेक किया?"
"नहीं।"
अनन्या ने शांत स्वर में कहा,
"तुम फोन पर बात कर रही थीं और दरवाज़ा खुला था।"
"मैंने सिर्फ सुना।"
रिया चुप रही।
अनन्या ने पूछा—
"समर मल्होत्रा कौन है?"
रिया की आँखें फैल गईं।
"तुम उसका नाम कैसे जानती हो?"
"क्योंकि आज आर्यवीर के घर में उसी की तस्वीर मिली है।"
रिया ने तुरंत नजरें फेर लीं।
अनन्या समझ गई।
"तो तुम उसे जानती हो।"
रिया ने धीमे से कहा—
"हाँ।"
"और वो तुम्हारी मदद कर रहा है?"
रिया कुछ नहीं बोली।
अनन्या ने गंभीर आवाज़ में कहा—
"तुमने आर्यवीर और सान्वी को अलग करने की कोशिश की।"
"लेकिन ये अब सिर्फ तुम्हारी जलन नहीं रही।"
"तुम किसी बहुत बड़े राज़ में फँस चुकी हो।"
रिया ने अचानक उसकी तरफ देखा।
"तुम नहीं समझोगी।"
अनन्या बोली—
"तो समझाओ।"
रिया ने कुछ पल आँखें बंद कीं।
फिर बोली—
"समर के पास वो सबूत है जिससे आर्यवीर का परिवार बर्बाद हो सकता है।"
"और अगर वो सच बाहर आया..."
वह रुक गई।
अनन्या ने पूछा—
"तो?"
रिया ने धीमे से कहा—
"तो आर्यवीर सान्वी को नहीं..."
"...अपने पूरे परिवार को खो देगा।"
शाम...
आर्यवीर अपने कमरे में पुरानी तस्वीरें देख रहा था।
सान्वी दरवाज़े के पास खड़ी थी।
"अंदर आ जाऊँ?"
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
"हाँ।"
सान्वी अंदर आई।
उसने देखा कि आर्यवीर के सामने नैना की तस्वीरें रखी थीं।
वह कुछ पल चुप रही।
फिर बोली—
"तुम उसे बहुत याद करते थे?"
आर्यवीर ने तस्वीर उठाई।
"हाँ।"
"लेकिन मैं उसे प्यार नहीं करता था।"
सान्वी ने उसकी तरफ देखा।
"तो?"
"वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त थी।"
"जिसे मैंने अपनी जिंदगी से निकाल दिया।"
सान्वी उसके पास बैठ गई।
"तुम्हें अफसोस है?"
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
"बहुत।"
कुछ पल खामोशी रही।
फिर आर्यवीर ने धीरे से पूछा—
"तुम्हें जलन नहीं हो रही?"
सान्वी मुस्कुराई।
"थोड़ी।"
आर्यवीर हँस पड़ा।
"थोड़ी?"
"ठीक है, बहुत।"
"लेकिन वो तुम्हारा अतीत है।"
"और मैं..."
वह रुक गई।
आर्यवीर ने पूछा—
"तुम?"
सान्वी ने नज़रें झुका लीं।
"मैं तुम्हारा आज हूँ।"
आर्यवीर की मुस्कान गहरी हो गई।
"और शायद मेरा कल भी।"
सान्वी का चेहरा लाल हो गया।
"तुम बहुत बातें बनाने लगे हो।"
"तुम्हारी वजह से।"
दोनों हँस पड़े।
कुछ देर के लिए उनके बीच का तनाव गायब हो गया।
तभी...
आर्यवीर का फोन बजा।
स्क्रीन पर अनजान नंबर था।
उसने कॉल उठाया।
"हैलो?"
दूसरी तरफ कुछ सेकंड खामोशी रही।
फिर एक महिला की काँपती हुई आवाज़ आई—
"आर्य..."
आर्यवीर जम गया।
उस आवाज़ को वह हजारों आवाज़ों में पहचान सकता था।
उसकी साँसें रुक गईं।
"नैना?"
सान्वी ने हैरानी से उसकी तरफ देखा।
दूसरी तरफ से आवाज़ आई—
"मुझे तुम्हें बहुत कुछ बताना है।"
आर्यवीर की आँखों से आँसू निकल पड़े।
"तुम जिंदा हो?"
कुछ पल खामोशी रही।
फिर नैना ने कहा—
"हाँ..."
"लेकिन मैं तुमसे मिल नहीं सकती।"
"क्यों?"
"क्योंकि जिस आदमी से तुम अभी सच जानने की कोशिश कर रहे हो..."
"...वही आदमी आज भी मेरे पीछे है।"
आर्यवीर खड़ा हो गया।
"कौन?"
नैना ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा—
"समर मल्होत्रा।"
कॉल अचानक कट गया।
आर्यवीर फोन को घूरता रह गया।
सान्वी ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"क्या हुआ?"
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आँखों में डर था।
"नैना जिंदा है।"
सान्वी भी स्तब्ध रह गई।
लेकिन तभी...
आर्यवीर के फोन पर एक फोटो आई।
एक सुनसान जगह की तस्वीर।
और उसमें नैना खड़ी थी।
उसके पीछे एक काली कार थी।
नीचे सिर्फ एक लाइन लिखी थी—
"अगर नैना को बचाना है... तो अकेले आना।"
आर्यवीर ने फोन कसकर पकड़ लिया।
सान्वी ने तुरंत कहा—
"तुम अकेले नहीं जाओगे।"
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
"ये खतरनाक हो सकता है।"
सान्वी ने दृढ़ता से कहा—
"मुझे पता है।"
"लेकिन दादी ने कहा था कि ये रिश्ता भरोसे की परीक्षा है।"
"तो मैं तुम्हें अकेला छोड़कर उस परीक्षा में फेल नहीं होने वाली।"
आर्यवीर कुछ पल उसे देखता रहा।
फिर उसने उसका हाथ पकड़ लिया।
"ठीक है।"
"हम साथ जाएँगे।"
लेकिन दोनों को नहीं पता था...
जिस जगह उन्हें बुलाया गया था...
वहाँ सिर्फ नैना नहीं थी।
वहाँ कोई और भी उनका इंतज़ार कर रहा था।
और उस शख्स का रिश्ता...
सान्वी के अतीत से था।
क्रमशः...