Mr. & Ms. Fake
Episode 22 – The Fake Relationship
अगली सुबह...
सिंह हाउस में माहौल बिल्कुल सामान्य था।
दादी पूजा कर रही थीं, चिंटू टीवी पर कार्टून देख रहा था और कबीर नाश्ते की प्लेट लेकर आर्यवीर के पीछे पड़ा था।
"भाई, जल्दी खा।"
आर्यवीर लैपटॉप पर कुछ देख रहा था।
"मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है।"
कबीर ने आँखें घुमाईं।
"जब सान्वी के साथ टाइम बिताना होता है तब ऑफिस याद नहीं आता।"
आर्यवीर ने उसे घूरा।
"तुम्हें आज ऑफिस भेजना ही नहीं चाहिए था।"
तभी दादी ने मुस्कुराकर पूछा—
"वैसे सान्वी आज आ रही है ना?"
आर्यवीर ने अनजाने में मुस्कुरा दिया।
"शायद..."
कबीर ने तुरंत कहा—
"शायद नहीं, पक्का।"
आर्यवीर ने उसे कुशन मार दिया।
पूरा परिवार हँस पड़ा।
उसे नहीं पता था कि कुछ ही घंटों में यही घर हँसी की जगह सवालों से भरने वाला है।
दोपहर...
सान्वी सिंह हाउस पहुँची।
आज उसके चेहरे पर पहले जैसी झिझक नहीं थी।
वह सीधे दादी के पास गई और उनके पैर छुए।
दादी ने उसे गले लगा लिया।
"आ गई मेरी बेटी?"
"जी दादी।"
चिंटू पीछे से चिल्लाया—
"भाभी!"
सान्वी हँस पड़ी।
"क्या हुआ?"
"आज आपके और भैया के लिए एक गेम है।"
आर्यवीर ने तुरंत कहा—
"नहीं।"
चिंटू ने भौंहें सिकोड़ लीं।
"आपको कैसे पता कि गेम क्या है?"
"क्योंकि तुम्हारे गेम का मतलब हमेशा मुसीबत होता है।"
सब हँस पड़े।
कुछ देर बाद...
डोरबेल बजी।
नौकर ने दरवाज़ा खोला।
बाहर रिया खड़ी थी।
उसके हाथ में एक बड़ा-सा गिफ्ट बॉक्स था।
दादी ने मुस्कुराकर पूछा—
"रिया, तुम?"
"जी दादी।"
रिया अंदर आई।
उसने सबको देखा।
फिर उसकी नज़र आर्यवीर और सान्वी पर गई।
दोनों साथ बैठे थे।
उसके चेहरे पर एक पल के लिए संतोष की मुस्कान आई।
आज वह कुछ लेकर आई थी।
ऐसा सबूत...
जिसके सामने आर्यवीर के पास कोई जवाब नहीं होगा।
रिया ने गिफ्ट बॉक्स टेबल पर रखा।
"दादी, ये आपके लिए है।"
दादी ने मुस्कुराकर कहा—
"क्या जरूरत थी बेटा?"
"बस ऐसे ही।"
चिंटू तुरंत बॉक्स खोलने लगा।
"अरे रुको!"
लेकिन जैसे ही उसने ढक्कन उठाया...
अंदर एक छोटा प्रोजेक्टर था।
रिया मुस्कुराई।
"सोचा आज पुरानी तस्वीरें देखते हैं।"
कबीर ने कहा,
"वाह! अच्छा आइडिया है।"
आर्यवीर ने कुछ नहीं सोचा।
लेकिन रिया की नज़र में छिपी चाल सान्वी ने देख ली।
लाइटें बंद हुईं।
दीवार पर तस्वीरें चलने लगीं।
पहली तस्वीर—
दादी और परिवार की।
फिर आर्यवीर के बचपन की।
फिर कॉलेज की।
सब हँस रहे थे।
तभी...
स्क्रीन काली हुई।
और अगली तस्वीर सामने आई।
आर्यवीर और सान्वी की।
दोनों की एक पुरानी तस्वीर...
जिसे इस तरह एडिट किया गया था कि वे किसी रोमांटिक कपल की तरह दिखाई दे रहे थे।
सान्वी का चेहरा सफेद पड़ गया।
आर्यवीर तुरंत उठ खड़ा हुआ।
"इसे बंद करो।"
लेकिन रिया ने रिमोट नहीं छोड़ा।
अगली तस्वीर आई।
फिर एक और।
फिर...
एक डॉक्यूमेंट की तस्वीर।
ऊपर साफ़ लिखा था—
"Relationship Agreement."
दादी की मुस्कान गायब हो गई।
पूरा कमरा शांत हो गया।
कबीर ने स्क्रीन को घूरते हुए कहा—
"ये क्या है?"
आर्यवीर ने कुछ नहीं कहा।
सान्वी की आँखों में आँसू आ गए।
दादी ने धीरे से पूछा—
"आर्य..."
आर्यवीर ने उनकी तरफ देखा।
"दादी..."
रिया ने उसी वक्त कहा—
"मैंने सोचा था ये बात आपको किसी और से पता चले, उससे पहले मैं खुद बता दूँ।"
दादी की आवाज़ भारी हो गई।
"क्या बात?"
रिया ने सान्वी की तरफ देखा।
"इन दोनों का रिश्ता असली नहीं है।"
पूरा कमरा जैसे जम गया।
दादी ने आर्यवीर की तरफ देखा।
"क्या ये सच है?"
आर्यवीर ने आँखें बंद कर लीं।
उसके पास झूठ बोलने का कोई रास्ता नहीं था।
"हाँ..."
दादी की आँखों में चोट साफ़ दिखाई दी।
"तो सान्वी हमारी बहू नहीं..."
"...सिर्फ़ एक समझौते के तहत यहाँ थी?"
सान्वी रोते हुए बोली—
"दादी, मेरा इरादा आपको दुख पहुँचाने का कभी नहीं था।"
"मैं..."
उसकी आवाज़ टूट गई।
आर्यवीर तुरंत उसके पास आया।
"दादी, गलती मेरी थी।"
"सान्वी को दोष मत दीजिए।"
रिया ने तुरंत कहा—
"लेकिन आर्यवीर, सच तो यही है ना?"
"तुमने उसे पैसे दिए थे..."
"उसने तुम्हारी गर्लफ्रेंड बनने का नाटक किया..."
आर्यवीर ने गुस्से में उसकी तरफ देखा।
"बस!"
कमरे में उसकी आवाज़ गूँज गई।
"हमने जो किया था, उसकी वजह थी।"
रिया मुस्कुराई।
"तो मानते हो कि ये सब झूठ था?"
आर्यवीर कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने सान्वी की तरफ देखा।
उसकी आँखों में आँसू थे।
आर्यवीर ने धीरे से कहा—
"हाँ..."
"शुरुआत झूठ थी।"
सान्वी ने आँखें बंद कर लीं।
लेकिन अगली ही बात ने सबको चौंका दिया।
आर्यवीर ने कहा—
"लेकिन अब नहीं।"
रिया के चेहरे की मुस्कान गायब हो गई।
दादी ने उसकी तरफ देखा।
आर्यवीर आगे बोला—
"जो रिश्ता हमने एक झूठ से शुरू किया था..."
"...वो आज मेरी जिंदगी की सबसे सच्ची चीज़ बन चुका है।"
सान्वी ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आँखों से आँसू बह निकले।
रिया ने तुरंत कहा—
"तो फिर बताओ..."
"क्या तुम सान्वी से प्यार करते हो?"
पूरा कमरा शांत हो गया।
आर्यवीर की नज़र सान्वी पर टिक गई।
सान्वी की धड़कनें तेज़ हो गईं।
आर्यवीर ने कुछ पल आँखें बंद कीं।
फिर उसने कहा—
"हाँ।"
सान्वी के हाथ काँपने लगे।
दादी भी स्तब्ध रह गईं।
आर्यवीर ने पहली बार पूरे परिवार के सामने अपने दिल की बात कही—
"मैं नहीं जानता ये कब हुआ..."
"लेकिन अब सान्वी के बिना अपनी जिंदगी की कल्पना नहीं कर सकता।"
सान्वी की आँखों से आँसू बहते रहे।
रिया को जैसे विश्वास ही नहीं हुआ।
उसकी सारी योजना...
उल्टी पड़ चुकी थी।
लेकिन तभी...
दादी ने गंभीर आवाज़ में कहा—
"प्यार अपनी जगह है, आर्य..."
"लेकिन तुमने हम सबसे सच छुपाया।"
आर्यवीर का चेहरा उतर गया।
दादी ने सान्वी की तरफ देखा।
"और तुम भी..."
सान्वी ने सिर झुका लिया।
दादी ने कहा—
"आज कोई फैसला नहीं होगा।"
"मुझे समय चाहिए।"
इतना कहकर दादी वहाँ से चली गईं।
पूरा परिवार भी धीरे-धीरे उनके पीछे चला गया।
हॉल में अब सिर्फ़ आर्यवीर, सान्वी और रिया रह गए।
रिया ने सोचा था कि वह जीत गई है।
लेकिन आर्यवीर उसकी तरफ बढ़ा।
"तुमने सबको सच बताया..."
"ठीक किया।"
रिया हैरान रह गई।
आर्यवीर ने आगे कहा—
"लेकिन अब मेरी एक बारी है।"
"तुमने जो वीडियो और तस्वीरें भेजीं..."
"उनके बारे में मुझे सब पता चल चुका है।"
रिया का चेहरा बदल गया।
आर्यवीर ने फोन निकाला।
स्क्रीन पर एक रिकॉर्डिंग थी।
मीरा की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी—
"रिया ने मुझे आर्यवीर और सान्वी को अलग करने के लिए इस्तेमाल करना चाहा था।"
रिया के चेहरे से रंग उड़ गया।
आर्यवीर ने शांत स्वर में कहा—
"खेल शुरू तुमने किया था..."
"...लेकिन खत्म मैं करूँगा।"
सान्वी ने आर्यवीर का हाथ पकड़ लिया।
इस बार...
वह उसके पीछे नहीं छिपी।
बल्कि उसके साथ खड़ी रही।
और ऊपर सीढ़ियों पर खड़ी दादी ने दोनों को हाथ पकड़े हुए देख लिया।
उनके चेहरे पर गुस्सा अभी भी था...
लेकिन आँखों में एक सवाल भी था—
क्या सचमुच ये नकली रिश्ता अब असली प्यार बन चुका है?
क्रमशः...