Sirf Tumhara - 8 InkImagination द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Sirf Tumhara - 8

Sirf Tumhara
Part 8

अंश का फोन अभी भी हाथ में था। अनजान नंबर से आए मैसेज ने उसके पूरे शरीर में ठंडक फैला दी थी। रुद्र कुछ ही मिनटों में पहुँच गया। उसका चेहरा लाल था, आँखों में गुस्सा और चिंता का मिश्रण। उसने अंश को सीने से लगा लिया, जैसे कोई छीन लेगा।
"मैसेज दिखाओ," रुद्र ने कहा। अंश ने फोन थमा दिया। रुद्र ने पढ़ा और उसकी मुट्ठी भींच गई। "ये सिंहानिया वाले ही हैं। मैं इनका पीछा करवाता हूँ।"
"रुद्र, प्लीज खतरनाक कुछ मत करना," अंश ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा। उसकी आवाज़ काँप रही थी। "मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता।"
रुद्र ने अंश का चेहरा अपने हाथों में लिया। "मैं तुम्हें कभी नहीं खोने दूँगा। तुम मेरी जान हो, अंश।" उसने अंश के माथे, गालों और फिर होंठों पर किस किए। किस गहरा और प्यार भरा था। अंश ने आँखें बंद कर लीं और रुद्र की शर्ट पकड़ ली। कुछ पल के लिए सारी दुनिया भूल गए दोनों।
रुद्र ने अंश को अंदर ले जाकर बेड पर बिठाया। "आज रात मैं यहीं रहूँगा। विहान को भी बता दो।"
विहान कमरे में आया तो दोनों को देखकर मुस्कुराया। "जीजू, अब तो आप घर-घर करने लगे हो।"
"चुप कर विहान," अंश ने शर्माते हुए कहा।
रुद्र ने विहान को गंभीरता से देखा। "तुम भी सावधान रहना। अंश का कज़िन हो, तुम पर भी नज़र हो सकती है।"
रात भर रुद्र अंश को अपनी बाहों में लिए सोया। अंश उसकी छाती पर सिर रखे सो गया, लेकिन रुद्र की आँखों में नींद नहीं थी। वो बार-बार उन मैसेज और देव के शब्दों के बारे में सोच रहा था।
अगली सुबह दोनों कॉलेज गए। पूरा ग्रुप गेट पर इंतज़ार कर रहा था। कबीर ने रुद्र को देखते ही पूछा, "क्या हुआ? रात को अंश का मैसेज आया था?"
रुद्र ने सबको बताया। विहान गुस्से में आ गया। "ये लोग बहुत हद पार कर रहे हैं।"
कबीर ने विहान के कंधे पर हाथ रखा। "शांत हो जाओ। हम सब मिलकर लड़ेंगे।"
"तुम मुझे शांत कर रहे हो?" विहान ने कबीर को घूरा, लेकिन उसकी आँखों में एक अनोखा आकर्षण था।
अयान और रेयांश चुपचाप सब सुन रहे थे। रेयांश ने अयान का हाथ थामा। "हम लोग भी साथ हैं।"
क्लास के दौरान देव और अरमान फिर दिखे। देव ने रुद्र के पास आकर कहा, "मैसेज की खबर मिल गई। अगर चाहो तो मैं मदद कर सकता हूँ। मेरे पास कुछ कनेक्शन हैं जो सिंहानिया ग्रुप को जानते हैं।"
रुद्र ने संदेह से पूछा, "तुम इतनी मदद क्यों कर रहे हो?"
देव ने अरमान की तरफ़ देखा। अरमान ने हल्का सा सिर हिलाया। देव बोला, "क्योंकि मैं जानता हूँ प्यार की कमज़ोरी क्या होती है।" उसकी नज़र अरमान पर थी। दोनों के बीच की केमिस्ट्री अब साफ़ दिख रही थी — खतरनाक, गहरी और मजबूत।
अरमान ने कम आवाज़ में कहा, "देव सही कह रहा है। हम दुश्मन नहीं हैं।"
ग्रुप ने फैसला किया कि देव की मदद लेनी चाहिए। दोपहर को सब एक कैफे में मिले। देव ने अपनी स्टोरी शेयर की — वो शहर के अंडरग्राउंड बिजनेस में था, लेकिन अब बदलना चाहता था। अरमान उसके साथ था, उसका सबसे करीबी।
कबीर ने विहान से फुसफुसाकर कहा, "ये दोनों भी हमारी तरह हैं।"
"हमारी तरह मतलब?" विहान ने पूछा।
"दुश्मनी से शुरू होकर कुछ और," कबीर ने मुस्कुराते हुए कहा।
विहान ने उसकी तरफ़ देखा, लेकिन कुछ नहीं बोला।
कैफे से निकलते वक्त रुद्र ने अंश को अलग ले जाकर कहा, "मुझे तुम पर बहुत भरोसा है। लेकिन सावधानी बरतना।"
"तुम भी," अंश ने कहा और रुद्र को हग किया।
शाम को रुद्र के घर पर फैमिली मीटिंग थी। रुद्र के पिता ने सबको चेतावनी दी। "ये डील बहुत महत्वपूर्ण है। अगर हार गए तो बहुत नुकसान होगा।"
रुद्र ने अंश का हाथ थामा। "पापा, अंश मेरे साथ है। वो मेरी ताकत है।"
श्री सिंह ने अंश को देखा और सिर हिलाया। "ठीक है। लेकिन सावधानी रखना।"
रात को रुद्र ने अंश को अपने कमरे में ले जाकर डिनर करवाया। दोनों बेड पर बैठे थे। रुद्र ने अंश को गोद में बिठाया और उसके बालों में उँगलियाँ फिराईं। "तुम कितने क्यूट हो।"
अंश हँसा। "और तुम कितने पॉसेसिव।"
"क्योंकि तुम मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी हो," रुद्र ने कहा और फिर से किस किया। किस लंबा और passionate था। अंश की साँसें तेज़ हो गईं। रुद्र ने उसे और पास खींच लिया।
"सिर्फ तुम्हारा हूँ मैं," अंश ने कहा।
"और मैं सिर्फ तुम्हारा," रुद्र ने जवाब दिया।
दोनों देर तक बातें करते रहे। रुद्र ने अपनी बचपन की कहानियाँ सुनाईं, अंश ने अपनी। बीच-बीच में किस और हग चलते रहे।
अचानक रुद्र का फोन बजा। सिंहानिया ग्रुप से संबंधित खबर थी। एक नया खतरा। रुद्र का चेहरा गंभीर हो गया।
"क्या हुआ?" अंश ने पूछा।
"कल एक मीटिंग है। मुझे जाना पड़ेगा। तुम घर पर रहना," रुद्र ने कहा।
"मैं तुम्हारे साथ चलूँगा," अंश ने ज़िद की।
"नहीं। तुम सुरक्षित रहोगे," रुद्र ने दृढ़ता से कहा।
अंश ने रुद्र को कसकर गले लगाया। "हम साथ लड़ेंगे।"
रुद्र ने सिर हिलाया। "ठीक है। लेकिन सावधानी से।"
दूसरे दिन कॉलेज में देव ने ग्रुप को और जानकारी दी। "सिंहानिया वाले कल मीटिंग में कुछ गड़बड़ कर सकते हैं। मैं कवर करूँगा।"
अरमान ने देव का हाथ पकड़ा। "हम दोनों साथ हैं।"
ग्रुप अब एक टीम बन चुका था। लेकिन खतरा बढ़ता जा रहा था।
रुद्र ने अंश को देखा। "हम इस तूफान से निकलेंगे।"

To Be Continued...

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