Part 3
रुद्र की गाड़ी शहर की व्यस्त सड़कों पर तेज़ी से दौड़ रही थी। अंश खिड़की से बाहर देख रहा था, लेकिन उसका ध्यान बार-बार रुद्र के हाथ पर था जो उसकी जाँघ पर रखा हुआ था। रुद्र की उँगलियाँ हल्के-हल्के थपकियाँ दे रही थीं, जैसे ये स्पर्श उसे याद दिला रहा हो कि अंश सिर्फ़ उसका है।
"सरप्राइज क्या है, बताओ ना?" अंश ने आखिरकार पूछ ही लिया, अपनी ज़िद भरी नज़रों से रुद्र को देखते हुए।
रुद्र मुस्कुराया, लेकिन आँखें सड़क पर थीं। "अगर बता दिया तो सरप्राइज क्या रहा? बस इतना जान लो कि आज तुम्हारा पूरा दिन सिर्फ़ मेरा है।"
अंश ने हँसते हुए सिर हिलाया। "तुम्हें पता है ना, विहान और बाकी सब इंतज़ार कर रहे होंगे ग्रुप चैट पर। कल का प्रोजेक्ट भी पूरा करना है।"
"प्रोजेक्ट?" रुद्र की भवें सिकुड़ गईं। "अबीर वाला?"
अंश ने आँखें घुमाईं। "हाँ, अबीर वाला। लेकिन वो सिर्फ़ ग्रुप प्रोजेक्ट है रुद्र। तुम हर बार ऐसे क्यों रिएक्ट करते हो?"
रुद्र ने गाड़ी को एक साइड पर लगाया और अंश की तरफ़ मुड़ा। उसकी आँखें गहरी और गंभीर थीं। एक हाथ से उसने अंश का चेहरा उठाया।
"क्योंकि तुम मेरी कमज़ोरी हो अंश। तुम्हें हँसते देखकर मुझे अच्छा लगता है, लेकिन जब वो हँसी किसी और के लिए होती है तो..." उसने साँस ली। "मुझे कंट्रोल नहीं रहता। तुम समझते हो ना?"
अंश का दिल पिघल गया। उसने रुद्र का हाथ अपने हाथ में लिया और उँगलियों को आपस में गूँथ दिया। "समझता हूँ। लेकिन तुम्हें भी समझना होगा कि मैं सिर्फ़ तुम्हारा हूँ। तीन साल से यही साबित कर रहा हूँ ना?"
रुद्र ने आगे झुककर अंश के माथे पर प्यार भरा किस किया। फिर उसके होंठ अंश के होंठों पर आए — नरम, गहरा और पॉसेसिव। अंश की साँसें थोड़ी तेज़ हो गईं। रुद्र ने उसे और पास खींचा, जैसे दुनिया रुक गई हो।
कुछ पलों बाद रुद्र पीछे हटा और मुस्कुराया। "चलो, वरना सरप्राइज देर हो जाएगा।"
गाड़ी फिर चल पड़ी। कुछ देर बाद वो शहर से थोड़ा बाहर एक खूबसूरत लोकेशन पर पहुँच गए — एक छोटा सा प्राइवेट रिसॉर्ट, जहाँ झील किनारे कैंडल लाइट डिनर सजाया गया था। सिर्फ़ उनके लिए।
अंश की आँखें चौड़ी हो गईं। "ये... तुमने ये सब किया?"
"तुम्हारे लिए कुछ भी," रुद्र ने कहा और उसका हाथ थामकर अंदर ले गया।
टेबल पर अंश के पसंदीदा डिशेस लगे थे — पास्ता, चॉकलेट केक, और फ्रेश जूस। बैकग्राउंड में सॉफ्ट म्यूजिक बज रहा था। रुद्र ने कुर्सी खींचकर अंश को बिठाया और खुद उसके सामने बैठ गया।
"आज तीन साल पूरे हो गए हमारी रिलेशनशिप को," रुद्र ने धीरे से कहा। "मुझे लगा कुछ स्पेशल करना चाहिए।"
अंश की आँखें नम हो गईं। "रुद्र... तुम इतना सब याद रखते हो?"
"तुम्हारी हर छोटी-बड़ी बात याद रखता हूँ।" रुद्र ने उसके हाथ को चूमा। "तुम मेरी जान हो अंश।"
दोनों ने डिनर किया। बीच-बीच में रुद्र अंश को खिलाता रहा, हँसी-मज़ाक चलता रहा। अंश ने बताया कि कॉलेज में आज प्रोफेसर ने कितना टास्क दिया है। रुद्र ने सुना और सलाह दी।
तभी रुद्र का फोन बजा। उसने स्क्रीन देखी और चेहरा थोड़ा सख्त हो गया।
"क्या हुआ?" अंश ने पूछा।
"पापा। फिर मीटिंग की याद दिला रहे हैं।" रुद्र ने फोन साइलेंट कर दिया। "आज नहीं जाऊँगा। आज सिर्फ़ तुम।"
अंश ने चिंता से कहा, "लेकिन फैमिली बिजनेस..."
"फैमिली बिजनेस बाद में।" रुद्र ने उसे अपनी गोद में खींच लिया। "अभी तो मेरी दुनिया में सिर्फ़ तुम हो।"
अंश ने रुद्र की छाती से सिर टिका दिया। दोनों कुछ देर चुपचाप झील की तरफ़ देखते रहे। हवा में ठंडक थी और उनके बीच गर्माहट।
इधर कॉलेज के बाद फ्रेंड ग्रुप चैट में धमाल मचा हुआ था।
ग्रुप चैट:
कबीर: अरे विहान, तेरा कज़िन और जीजू कहाँ गायब हैं?
विहान: जीजू ने किडनैप कर लिया होगा 😂
अयान: तुम दोनों फिर शुरू हो गए? छोड़ो ना।
रेयांश: हाँ यार, अयान और मैं आज मूवी देखने जा रहे हैं। कोई आना है?
कबीर: मैं आ सकता हूँ... अगर विहान न आए तो 😉
विहान: मैं क्यों नहीं आऊँगा? तुझे देखकर मेरा मूड खराब होता है।
कबीर: अच्छा? फिर मत आ।
ग्रुप में हँसी के इमोजी उड़ रहे थे। कबीर और विहान की ये रोज़ की लड़ाई अब ग्रुप का हाइलाइट बन गई थी। लेकिन दोनों ही अंदर से जानते थे कि ये नफरत अब कुछ और रूप ले रही थी।
अयान और रेयांश सबसे शांत थे। अयान ने रेयांश को पहले ही मैसेज किया था — "आज थक गया होगा? मैं आ रहा हूँ, साथ में डिनर करेंगे।" रेयांश को यही पसंद था — बिना ड्रामा के प्यार।
रात होते-होते रुद्र अंश को घर छोड़ने पहुँचा। गाड़ी के बाहर विहान दरवाज़े पर खड़ा था, मुस्कुराते हुए।
"आ गए जीजू? अंश को वापस कर दो," विहान ने चिढ़ाते हुए कहा।
रुद्र ने गाड़ी से उतरकर अंश को एक लंबा हग किया। "कल कॉलेज में मिलते हैं। कोई भी लड़का पास न बैठना।"
अंश हँसा, "जी सर।"
रुद्र चला गया।
अंश अंदर आया तो विहान ने उसे घेर लिया। "क्या हुआ? कितना रोमांटिक डेट था?"
"बहुत अच्छा था," अंश ने शर्माते हुए बताया।
लेकिन रात को सोते वक्त अंश को वो दो लड़के याद आए जो कॉलेज के बाहर घूर रहे थे। उसने रुद्र को मैसेज किया।
अंश: आज बाहर जो दो लड़के थे... वो अजीब लग रहे थे।
रुद्र: चिंता मत करो। मैं देख लूँगा। अब सो जाओ baby. ❤️
अंश मुस्कुराया और सो गया।
लेकिन दूसरे दिन सुबह सब कुछ बदल गया।
कॉलेज पहुँचते ही फ्रेंड ग्रुप में अफरा-तफरी मची हुई थी। कबीर का चेहरा तनाव भरा था। अयान और रेयांश भी चुप थे।
"क्या हुआ?" अंश ने पूछा।
कबीर ने फोन दिखाया। "रुद्र का पापा... बड़े प्रोजेक्ट में कोई समस्या आ गई है। और... कुछ पुरानी दुश्मनी भी सामने आ रही है।"
रुद्र उस वक्त कॉलेज नहीं आया था।
अंश का दिल बैठ गया। उसे अहसास हो गया कि अब सिर्फ़ जलन और छोटे-मोटे ड्रामा नहीं... कुछ बड़ा होने वाला है।
To Be Continued...
Thank you 😊 🙏