**Sirf Tumhara**
**Part 4**
अंश का दिल बैठा जा रहा था। कबीर के फोन पर जो मैसेज था, उसने पूरे ग्रुप का मूड खराब कर दिया था।
"रुद्र के पापा का ऑफिस में कुछ बड़ा इश्यू है। पुरानी बिजनेस राइवल्री फिर से सर उठा रही है," कबीर ने गंभीर स्वर में कहा। "रुद्र ने मुझे सुबह फोन किया था। वो घर पर ही है, मीटिंग में।"
अंश ने तुरंत रुद्र को मैसेज किया।
**अंश:** क्या हुआ? तुम ठीक हो ना?
दो मिनट बाद रिप्लाई आया।
**रुद्र:** Baby, चिंता मत करो। कुछ काम का इश्यू है। शाम को मिलते हैं।
लेकिन अंश जानता था कि रुद्र "कुछ" कहकर बहुत कुछ छुपा रहा होता है। उसकी आँखें नम हो गईं। क्लास के बीच में भी उसका ध्यान कहीं और था।
विहान ने उसकी पीठ पर हाथ रखा, "अरे चुपचाप क्यों हो गया? जीजू संभाल लेंगे। वो इतना आसानी से नहीं हारता।"
"मुझे पता है," अंश ने धीरे से कहा। "लेकिन जब भी उसके परिवार की बात आती है... वो अकेला पड़ जाता है।"
अयान और रेयांश भी पास आ गए। रेयांश ने कहा, "हम सब हैं ना। अगर ज़रूरत पड़ी तो हम लोग भी मदद करेंगे।"
कबीर ने सिर हिलाया, "हाँ, मैं शाम को रुद्र से मिलने जा रहा हूँ। तू भी चलना चाहे तो चल।"
दिन भर अंश का मन अशांत रहा। क्लास के बाद जब वो कैंटीन में बैठा था, तभी अबीर आया।
"अंश, प्रोजेक्ट के कुछ पॉइंट्स डिस्कस करने थे।" अबीर ने मुस्कुराते हुए कहा।
अंश ने हल्का सा स्माइल किया, "हाँ, बोल ना।"
दोनों बात कर ही रहे थे कि अंश का फोन बज उठा। रुद्र का कॉल था।
"हैलो..."
"कहाँ हो तुम?" रुद्र की आवाज़ में वही पुरानी पॉसेसिव टोन थी, लेकिन थकान भी झलक रही थी।
"कैंटीन में। अबीर के साथ प्रोजेक्ट डिस्कस कर रहा हूँ।"
लाइन के दूसरी तरफ़ कुछ पल खामोशी रही। फिर रुद्र ने कहा, "मैं आ रहा हूँ।"
पंद्रह मिनट बाद रुद्र कॉलेज पहुँच गया। उसका चेहरा थका हुआ था, आँखों में तनाव साफ़ दिख रहा था। वो सीधा कैंटीन में आया, अबीर को देखा और उसकी भवें सिकुड़ गईं।
अबीर ने तुरंत महसूस किया और उठ खड़ा हुआ, "मैं बाद में बात कर लूँगा अंश।"
रुद्र ने बिना कुछ बोले अंश के पास बैठकर उसे अपनी तरफ़ खींच लिया। "कैसा है?"
"मैं ठीक हूँ। तुम बताओ, घर पर क्या हुआ?" अंश ने चिंता से पूछा।
रुद्र ने साँस छोड़ी। "पापा का एक बड़ा डील अचानक रुक गया है। पुराने दुश्मन ने कुछ पुरानी फाइलें निकाल ली हैं। लीगल इश्यूज हैं। मैंने आज पूरा दिन मीटिंग में बिताया।"
अंश ने रुद्र का हाथ थामा, "मैं हूँ ना तुम्हारे साथ। अगर कुछ मदद चाहिए तो बताना।"
रुद्र ने अंश को देखा और उसकी आँखों में प्यार उभर आया। "बस तुम मेरे पास रहो, बाकी मैं संभाल लूँगा।"
उसी वक्त कबीर, विहान और बाकी भी आ गए। पूरा ग्रुप फिर से एक जगह जमा हो गया।
कबीर ने रुद्र की पीठ थपथपाई, "क्या बात है भाई? हम सब हैं ना।"
रुद्र ने सिर हिलाया, "अभी तो सिर्फ़ मीटिंग चल रही है। लेकिन अगर ज़रूरत पड़ी तो बताऊँगा।"
विहान ने माहौल हल्का करने की कोशिश की, "अरे जीजू, आज तो आपका मूड खराब लग रहा है। अंश को थोड़ा और प्यार से देखो, वो उदास हो रहा है।"
रुद्र ने विहान को घूरा लेकिन मुस्कुरा भी दिया। "तुम्हारी वजह से मेरा मूड कभी ठीक नहीं रहता।"
"अरे वाह! मैंने क्या किया?" विहान ने नाटक किया।
कबीर हँसा, "तुम दोनों की लड़ाई देखकर मेरा मूड तो ठीक हो जाता है।"
अयान और रेयांश चुपचाप बैठे सब देख रहे थे। रेयांश ने अयान के कान में कुछ कहा और दोनों मुस्कुरा दिए। उनकी शांत केमिस्ट्री पूरे ग्रुप के लिए रिलीफ थी।
शाम को रुद्र अंश को घर छोड़ने के बजाय अपने फार्महाउस ले गया। वहाँ शांति थी। दोनों छत पर बैठे थे। रुद्र ने अंश को अपनी गोद में बिठा रखा था।
"डर लग रहा है?" अंश ने पूछा।
"डर नहीं लगता। लेकिन पापा का प्रेशर... कभी-कभी बहुत ज़्यादा हो जाता है।" रुद्र ने स्वीकार किया। "मैं चाहता हूँ कि तुम इससे दूर रहो।"
"मैं दूर नहीं रह सकता," अंश ने उसके सीने से चिपकते हुए कहा। "हम साथ हैं ना?"
रुद्र ने अंश को और कसकर पकड़ लिया। "हाँ। हमेशा साथ।"
रात गहराती गई। दोनों बातें करते रहे — पुरानी यादें, भविष्य के सपने। रुद्र ने अंश के बालों में उँगलियाँ फिराईं, उसके गाल चूमे। अंश की आँखें बंद हो गईं।
लेकिन रुद्र के मन में एक बात घूम रही थी — वो दो लड़के जो कॉलेज के बाहर दिखे थे। और अब पापा की दुश्मनी। लग रहा था जैसे कोई बड़ा तूफान आने वाला है।
दूसरे दिन सुबह अंश उठा तो रुद्र का मैसेज था:
**रुद्र:** Good morning meri jaan ❤️ आज कॉलेज मत आना। घर पर रहो। मैं शाम को आऊँगा।
अंश ने भवें चढ़ाईं। रुद्र फिर से ओवर-प्रोटेक्टिव मोड में आ गया था।
लेकिन वो नहीं जानता था कि कॉलेज में आज कुछ और ही होने वाला था।
विहान का फोन आया, "अंश जल्दी कॉलेज आ। यहाँ कुछ लड़के पूछ रहे हैं तुम्हारे बारे में।"
अंश का दिल धड़क उठा।
**To Be Continued...**
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Thankyou 🥰 🙏