Sirf Tumhara - 5 InkImagination द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Sirf Tumhara - 5

**Sirf Tumhara**  
**Part 5**

अंश का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। विहान का फोन कॉल सुनकर उसकी नींद पूरी तरह उड़ गई। उसने तुरंत तैयार होना शुरू किया।

"क्या हुआ विहान? कौन पूछ रहा है मेरे बारे में?" अंश ने फोन पर ही पूछा, आवाज़ में चिंता साफ़ झलक रही थी।

"पता नहीं यार। दो-तीन लड़के हैं, बड़े शार्प लग रहे हैं। कबीर भी यहाँ है। वो उन्हें रोक रहा है। तू जल्दी आ," विहान ने कहा और कॉल काट दिया।

अंश ने रुद्र को तुरंत मैसेज किया — "कॉलेज में कुछ लड़के मेरे बारे में पूछ रहे हैं। मैं जा रहा हूँ।" लेकिन रुद्र का रिप्लाई नहीं आया। शायद वो अभी भी मीटिंग में व्यस्त था। अंश ने जल्दी-जल्दी कपड़े बदले, बाल ठीक किए और विहान की कार में बैठकर कॉलेज के लिए निकल पड़ा।

रास्ते भर उसके मन में सवालों का तूफान चल रहा था। कल वाले वो दो लड़के? या रुद्र के पिता की दुश्मनी से कोई लिंक? तीन साल से वो रुद्र के साथ था, लेकिन कभी भी इतना डर महसूस नहीं हुआ था। रुद्र हमेशा उसे बचाकर रखता था। आज पहली बार लग रहा था कि तूफान बहुत करीब आ गया है।

कॉलेज पहुँचते ही विहान गेट पर खड़ा मिला। "चल, कैंटीन की तरफ। कबीर और अयान वहाँ हैं।"

जब दोनों कैंटीन पहुँचे तो माहौल तनावपूर्ण था। कबीर एक लड़के के सामने खड़ा था, उसकी बॉडी लैंग्वेज में गुस्सा साफ़ दिख रहा था। अयान और रेयांश थोड़ी दूर खड़े सब देख रहे थे।

"अंश मालhotra?" एक लड़का, जो काला शर्ट पहने था, बोला। "हम सिर्फ़ बात करना चाहते हैं।"

"किस बारे में?" अंश ने आगे बढ़कर पूछा। उसकी आवाज़ स्थिर रखने की कोशिश कर रहा था।

दूसरा लड़का, जो थोड़ा मोटा था, मुस्कुराया। "तुम्हारे और रुद्र प्रताप सिंह के बारे में। शहर में खबरें चल रही हैं कि तुम दोनों बहुत क्लोज़ हो। रुद्र के पिता की बिजनेस डील में कुछ प्रॉब्लम आ रही है। शायद तुम हमें कुछ बता सको।"

अंश का चेहरा सफ़ेद पड़ गया। "मैं कुछ नहीं जानता। और तुम लोग कौन हो?"

कबीर ने बीच में आकर कहा, "अब बस भी करो। अंश से दूर रहो। वरना रुद्र को बुला लूँगा।"

नाम सुनते ही दोनों लड़के हँसे। "रुद्र सिंह... वो तो खुद परेशान है।" कहकर दोनों वहाँ से चले गए।

पूरी घटना के बाद ग्रुप एक कोने में बैठ गया। विहान ने पानी का ग्लास अंश की तरफ़ बढ़ाया। "पी ले। घबरा मत।"

अंश ने सिर हिलाया। "ये लोग रुद्र की फैमिली बिजनेस में घुस रहे हैं। मुझे डर लग रहा है विहान।"

कबीर ने फोन निकाला। "मैं रुद्र को कॉल करता हूँ।"

रुद्र ने तुरंत कॉल उठाया। उसकी आवाज़ सुनकर अंश को थोड़ी राहत मिली, लेकिन रुद्र गुस्से में था। "मैं आ रहा हूँ। अंश को कहीं मत जाने देना।"

पच्चीस मिनट बाद रुद्र कॉलेज पहुँचा। उसका चेहरा लाल था, आँखों में गुस्सा और चिंता दोनों थे। वो सीधा अंश के पास आया और उसे कसकर गले लगा लिया। पूरा ग्रुप चुपचाप देख रहा था।

"तुम ठीक हो?" रुद्र ने अंश के बालों में हाथ फेरते हुए पूछा।

"हाँ... लेकिन वो लोग..."

"मैं जानता हूँ," रुद्र ने बीच में ही टोका। "मेरे पापा की पुरानी राइवल कंपनी के लोग हैं। उन्होंने सुना है कि तुम मेरी कमज़ोरी हो। इसलिए तुम्हें टारगेट कर रहे हैं।"

अंश ने रुद्र की आँखों में देखा। "तो अब क्या होगा?"

"कुछ नहीं होगा।" रुद्र की आवाज़ दृढ़ थी। "मैं तुम्हें प्रोटेक्ट करूँगा। आज से तुम मेरे साथ रहोगे। कॉलेज आओगे तो मेरे साथ, जाओगे तो मेरे साथ।"

"रुद्र... ये ओवर हो रहा है," अंश ने हल्के से विरोध किया।

"ओवर नहीं है। तुम मेरी जान हो अंश। अगर कुछ हुआ तो मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाऊँगा," रुद्र ने कहा और अंश के माथे पर किस किया।

ग्रुप में माहौल थोड़ा हल्का करने के लिए विहान बोला, "जीजू, आप तो पूरा बॉडीगार्ड बन गए हो।"

कबीर हँसा, "रुद्र का स्टाइल ही ऐसा है।"

अयान ने रेयांश की तरफ़ देखा। "हम लोग भी मदद करेंगे। अगर ज़रूरत पड़ी तो।"

रेयांश ने सहमति में सिर हिलाया। दोनों का रिश्ता इतना समझदार था कि बिना बोले भी सब समझ जाते थे।

दोपहर की क्लासेस के बाद पूरा ग्रुप कैंटीन में लंच करने बैठा। रुद्र ने अंश के लिए स्पेशल प्लेट बनवाई — उसकी पसंदीदा चीज़ें। अंश उसे देखकर मुस्कुरा रहा था, लेकिन अंदर से अभी भी घबराहट थी।

"रुद्र, तुम्हें भी तो बहुत स्ट्रेस हो रहा होगा," अंश ने धीरे से कहा। "फैमिली प्रेशर, बिजनेस, और अब ये।"

रुद्र ने उसका हाथ मेज़ के नीचे पकड़ लिया। "तुम हो तो मैं सब संभाल लूँगा। तुम मेरी ताकत हो अंश। मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी भी और सबसे बड़ी स्ट्रेंथ भी।"

अंश की आँखें नम हो गईं। वो रुद्र की छाती पर सिर रखना चाहता था, लेकिन सबके सामने शर्म आ रही थी। रुद्र ने समझ लिया और उसे अपने करीब खींच लिया।

कबीर ने विहान को कोहनी मारी, "देख, कितना प्यार है। हमें भी सीखना चाहिए।"

विहान ने तुरंत जवाब दिया, "तुमसे सीखने की ज़रूरत नहीं। तुम पहले खुद सीख लो कि दूसरे को इरिटेट कैसे न किया जाए।"

"मैं इरिटेट करता हूँ?" कबीर ने नाटक किया। "तुम तो रोज़ मेरे पीछे पड़े रहते हो।"

"क्योंकि तुम्हारी शक्ल देखकर मेरा मूड खराब होता है," विहान ने कहा, लेकिन उसकी आँखों में एक अलग चमक थी।

अयान और रेयांश हँस रहे थे। रेयांश ने कहा, "तुम दोनों की ये दुश्मनी एक दिन प्यार में बदल जाएगी, देखना।"

"कभी नहीं!" दोनों ने एक साथ कहा और फिर खुद ही हँस पड़े।

शाम को रुद्र अंश को अपने घर ले गया। रुद्र का घर शहर के सबसे पॉश इलाके में था — बड़ा बंगला, गार्डन, स्विमिंग पूल। लेकिन अंदर का माहौल तनावपूर्ण था। रुद्र के पिता ऑफिस से अभी लौटे थे।

"रुद्र, ये क्या हो रहा है?" अंश ने फुसफुसाकर पूछा।

"पापा से मिलवाता हूँ," रुद्र ने कहा।

रुद्र के पिता — श्री प्रताप सिंह — बड़े बिजनेसमैन थे। सख्त चेहरा, तीखी नज़रें। उन्होंने अंश को ऊपर से नीचे तक देखा।

"तो ये है वो लड़का?" उन्होंने पूछा।

"हाँ पापा। अंश," रुद्र ने गर्व से कहा।

श्री सिंह ने साँस ली। "देखो बेटा, मैं तुम्हारे रिश्ते में दखल नहीं देना चाहता। लेकिन अभी सिचुएशन बहुत डेलिकेट है। हमारे दुश्मन तुम्हें टारगेट कर सकते हैं। इसलिए सावधानी बरतना।"

अंश ने सिर झुकाकर कहा, "जी अंकल।"

रात को रुद्र के कमरे में दोनों अकेले थे। रुद्र ने अंश को बेड पर लिटाया और उसके पास लेट गया। उसने अंश को अपनी बाहों में भर लिया।

"डर मत। मैं हूँ ना," रुद्र ने उसके कान में फुसफुसाया।

अंश ने रुद्र की छाती पर सिर रखा। "तुम थक गए होगे। आराम करो।"

"तुम्हारे पास होने से थकान उतर जाती है," रुद्र ने कहा और अंश के होंठों को चूम लिया। किस गहरा होता गया। अंश ने रुद्र की शर्ट पकड़ ली। दोनों के बीच का प्यार, डर और सपोर्ट एक साथ महसूस हो रहा था।

रुद्र ने अंश को और करीब खींचा। "सिर्फ तुम्हारा हूँ मैं। हमेशा।"

अंश की आँखों से आँसू निकल आए। "और मैं सिर्फ़ तुम्हारा।"

रात काफी हो चुकी थी। बाहर चाँदनी फैली हुई थी। लेकिन दोनों को नहीं पता था कि आने वाले दिनों में उनका ये प्यार कई टेस्ट से गुज़रने वाला था — दोस्ती, परिवार, दुश्मनी और बड़े-बड़े राज़।

दूसरे दिन सुबह रुद्र अंश को कॉलेज छोड़ने गया। लेकिन गेट पर फिर वही दो लड़के दिखे। इस बार वो मुस्कुरा रहे थे।

रुद्र की मुट्ठियाँ भींच गईं।

**To Be Continued...**

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💙 Aaj ka part yahin khatam hota hai...

Agar aap yahan tak padh chuke hain, to dil se thank you.
❤️ Ab aap batayiye, aaj ka part aapko kaisa laga? Kis character ne sabse zyada impress kiya? Rudra, Ansh ya kisi aur ki entry ne aapka dhyan khincha? Apni har feeling comment me zarur share kariye, kyunki aapke comments hi mujhe aur achha likhne ki motivation dete hain.
Agar aap chahte hain ki "Sirf Tumhara" ke naye parts sabse pehle aap tak pahunchte rahein, to is novel ko Follow zarur karein aur apni Library me add karna na bhulein. Agar story pasand aa rahi ho, to ise apne doston ke saath bhi share kariye. Ho sakta hai unhe bhi ye journey utni hi pasand aaye jitni aapko aa rahi hai.
Milte hain agle part me... jahan emotions aur drama dono pehle se bhi zyada badhne wale hain. ❤️✨
– Inkimagination