स्वागत है दोस्तों एपिसोड 8 में! पिछले एपिसोड में हमने देखा कि आधी रात को सुनसान सड़क पर आन्या की गाड़ी पर एक डरावने और रहस्यमयी साये ने हमला कर दिया था। लेकिन ऐन मौके पर विक्रांत वहाँ पहुँच जाता है और आन्या को बचा लेता है। अब देखते हैं कि इस डरावनी रात के बाद आन्या और विक्रांत के बीच क्या होने वाला है... दिल थाम कर बैठिए!
एपिसोड 8: सीने की तपन और उठते नए सवाल
विक्रांत की मज़बूत बाहों में घिरी आन्या का शरीर अभी भी डर से थर-थर काँप रहा था। लेकिन विक्रांत के सीने से सटते ही उसे एक अजीब सी राहत और गर्माहट का अहसास हुआ। विक्रांत का शरीर किसी तपती हुई भट्टी की तरह गरम था, और उसकी साँसें बेहद तेज़ चल रही थीं। वह आन्या को इस कदर कसकर पकड़े हुए था, मानो ज़रा सी ढील दी तो आन्या उसकी नज़रों के सामने से हमेशा के लिए गायब हो जाएगी।
"वि-विक्रांत... आप यहाँ?" आन्या की आवाज़ हलक में ही अटक रही थी।
विक्रांत ने आन्या के चेहरे को अपने दोनों हाथों के कप (Cup) में लिया। उसकी भूरी आँखों में इस वक्त आन्या को खो देने का एक खूँखार डर साफ़ दिखाई दे रहा था। "अगर तुम्हें ज़रा सी भी खरोंच आ जाती आन्या, तो मैं इस पूरी दुनिया को आग लगा देता," विक्रांत की आवाज़ में एक अजीब सा पागलपन और दीवानगी थी।
विक्रांत ने बिना एक पल गँवाए आन्या को अपनी बाहों में उठाया—बिल्कुल ब्राइडल स्टाइल (Bridal Style) में। आन्या ने घबराकर अपने हाथ विक्रांत के गले में डाल दिए। विक्रांत उसे सीधे अपनी कार (Car) की फ्रंट सीट (Front Seat) पर ले जाकर बैठाया और खुद ड्राइवर सीट (Driver Seat) पर आ गया।
पूरी ड्राइविंग (Driving) के दौरान विक्रांत ने एक हाथ से स्टेयरिंग (Steering) संभाला हुआ था और दूसरे हाथ से आन्या की उंगलियों को कसकर भींच रखा था। उसकी पकड़ में इतना जुनून था कि आन्या चाहकर भी अपना हाथ छुड़ा नहीं सकती थी।
आन्या खिड़की से बाहर देखते हुए गहरी सोच में डूबी थी।
'विक्रांत को कैसे पता चला कि मैं मुसीबत में हूँ? वह इतनी जल्दी वहाँ कैसे पहुँच गया? और वह डरावना जीव कौन था?' आन्या के दिमाग (Mind) में सवालों का बवंडर चल रहा था, लेकिन विक्रांत के चेहरे का कड़क गुस्सा देखकर उसकी हिम्मत कुछ भी पूछने की नहीं हो रही थी।
कुछ ही देर में गाड़ी आन्या के अपार्टमेंट (Apartment) के बाहर जाकर रुकी।
जैसे ही आन्या ने कार का दरवाज़ा खोलने की कोशिश की, विक्रांत ने उसका हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ़ खींच लिया। दोनों के चेहरे के बीच सिर्फ कुछ इंच की दूरी बची थी। विक्रांत की साँसें आन्या के होठों से टकरा रही थीं।
"आज रात तुम अपने घर में अकेली नहीं रहोगी," विक्रांत ने एक भारी और कड़क आवाज़ में कहा।
"क्या? लेकिन सर... मैं ठीक हूँ," आन्या ने हकलाते हुए कहा, उसका दिल फिर से बेकाबू होकर धड़कने लगा था।
"मैंने कहा न, तुम अकेली नहीं रहोगी! या तो मैं तुम्हारे फ्लैट (Flat) में ऊपर चल रहा हूँ, या फिर तुम अभी मेरे मेंशन (Mansion) चल रही हो। चॉइस (Choice) तुम्हारी है," विक्रांत की आँखों में फैसला अटल था। वह अपनी जान से प्यारी आन्या को आज की रात किसी भी कीमत पर अपनी नज़रों से दूर करने के रिस्क (Risk) नहीं ले सकता था।
Ending Note:
दोस्तों, विक्रांत का आन्या की सुरक्षा को लेकर यह पज़ेसिव (Possessive) और जुनूनी रूप आन्या को अंदर तक हिला चुका है! क्या आन्या विक्रांत को अपने घर में रुकने की इजाज़त देगी? और उस जंगल में भागने वाला भेड़िये जैसा साया आखिर कौन था जो आन्या की जान लेना चाहता है?
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