"रात का गहरा सन्नाटा था, जिसे सिर्फ तेज़ बारिश और बिजली की कड़क तोड़ रही थी। 8 साल की छोटी आन्या अपने रास्ते से भटक कर घने जंगल के बीचों-बीच खड़ी थी। उसके नन्हे पाँव कीचड़ में फँस रहे थे और डर के मारे उसकी हिचकियाँ बंध गई थीं। वह बार-बार अपनी माँ को पुकार रही थी, पर सिर्फ हवाओं की सरसराहट सुनाई देती।
तभी, एक झाड़ी के पीछे से किसी के ज़ोर-ज़ोर से साँस लेने की भारी आवाज़ आई। आन्या का कलेजा मुँह को आ गया। उसने डरते हाथों से झाड़ियों को हटाया और जो देखा वह उसकी सोच से परे था।
वहाँ एक विशाल काले रंग का भेड़िया पड़ा था। उसका शरीर किसी पहाड़ जैसा बड़ा था, लेकिन वह बेबस था। उसके पेट पर एक गहरा ज़ख्म था जिससे लगातार खून बह रहा था। भेड़िये ने अपना सर उठाया और अपनी सुनहरी आँखों से आन्या की तरफ देखा। उन आँखों में कोई दरिंदगी नहीं थी, बल्कि एक अजीब सा दर्द था। आन्या को लगा जैसे वह भेड़िया उससे मदद माँग रहा हो।
आन्या ने अपना सबसे प्यारा लाल रुमाल निकाला। उसने काँपते हाथों से भेड़िये के ज़ख्म पर वह रुमाल बाँध दिया। भेड़िये ने धीरे से आन्या की हथेली को सूंघा। उस पल, जंगल की ठंडी हवा रुक गई। भेड़िये की सुनहरी आँखें आन्या की मासूमियत को अपने दिमाग में कैद कर रही थीं। तभी दूर से मशालों की रोशनी और लोगों के शोर की आवाज़ आई। आन्या डर गई और बिना मुड़ कर देखे वहाँ से भाग निकली। उसे नहीं पता था कि उसने एक जानवर की नहीं, बल्कि एक आने वाले तूफान की जान बचाई है।
"नहीं!" आन्या अचानक नींद से जाग गई। उसका पूरा बदन पसीने से तर था। दस साल बीत गए थे, पर वह सपना उसका पीछा नहीं छोड़ता था। वे सुनहरी आँखें आज भी उसे अंधेरे में दिखायी देती थीं।
आन्या की ज़िंदगी फिलहाल काफी तकलीफों में थी। उसके पास न कोई नौकरी थी और न ही घर का किराया देने के पैसे। वह शहर के एक पुराने इलाके में एक छोटे से कमरे में रहती थी। उसकी किस्मत जैसे उससे रूठ गई थी। उसने अपना पुराना लैपटॉप खोला ताकि कोई काम ढूँढ सके, पर एक ईमेल देख कर उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं।
यह शहर की सबसे बड़ी कंपनी थी। इसका मालिक, विक्रांत सहगल, एक ऐसा बिलियनयर था जिसकी ताकत और दौलत के किस्से पूरे देश में मशहूर थे। आन्या ने कभी वहाँ अप्लाई तक नहीं किया था, फिर यह ऑफर कैसे? सैलरी इतनी ज़्यादा थी कि वह अपनी सारी परेशानियाँ एक झटके में खत्म कर सकती थी। उसने सोचा शायद यह खुदा का कोई इशारा है, और उसने बिना सोचे नौकरी हाँ कर दी।
अगली सुबह, आन्या ऑफिस पहुँची। बिल्डिंग इतनी ऊँची थी कि आसमान को छू रही हो। गार्ड ने उसका नाम पूछा और उसे सम्मान के साथ सबसे ऊपर वाले फ्लोर पर भेज दिया।
जैसे ही लिफ्ट का दरवाज़ा खुला, आन्या को एक अजीब सा झटका लगा। वहाँ पूरा सन्नाटा था, पर हवा में वही जंगल वाली मिट्टी और बारिश की खुशबू थी। सामने एक विशाल काला दरवाज़ा था जिस पर सोने के अक्षरों में लिखा था— विक्रांत सहगल।
आन्या का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था। उसने डरते हाथों से दरवाज़ा खटखटाया। तभी अंदर से एक भारी, मर्दाना और थोड़ी खुंखार आवाज़ आई...
"अंदर आओ, आन्या।"
आन्या के कदम वहीं जम गए। उसने तो अभी तक अपना नाम बताया ही नहीं था, न ही किसी ने अंदर खबर दी थी। फिर इस मिस्टीरियस बिलियनयर को उसका नाम कैसे पता? उसे ऐसा महसूस होने लगा जैसे वह किसी ऑफिस में नहीं, बल्कि एक भूखे शिकारी के इलाके में दाखिल हो रही है, जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं है।
आगे क्या होगा......? जानने के लिए पढ़ते रहिये: "The Billionaire Werewolf's Obsession"