The Billionaire Werewolf's Obsession - 5 Sipra Mohanty द्वारा फिक्शन कहानी में हिंदी पीडीएफ

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The Billionaire Werewolf's Obsession - 5

स्वागत है दोस्तों एपिसोड 5 में! पिछले एपिसोड में हमने देखा कि आन्या कल रात की डरावनी घटना को एक बुरा सपना मानकर काम पर आ जाती है। लेकिन जैसे ही वह मुड़ती है, विक्रांत की आँखों में फिर से वही रहस्यमयी चमक लौट आती है। अब देखते हैं कि ऑफिस के इस दूसरे दिन आन्या के साथ क्या होने वाला है... दिल थाम कर बैठिए!

​एपिसोड 5: बॉस (Boss)का बहाना और आधी रात का रोमांस(Romance) 

आन्या केबिन से बाहर आई और अपनी डेस्क (Desk) पर बैठ गई। कल इंटरव्यू वाले दिन काम करने के बाद, आज ऑफिस में उसका दूसरा दिन (Second Day) था। उसने एक गहरी साँस ली और खुद को समझाया कि सब कुछ ठीक है। लेकिन तभी उसके पास ऑफिस की एक दूसरी एम्प्लॉई (Employee), रिया आकर खड़ी हो गई। रिया का चेहरा देखकर ही लग रहा था कि वह आन्या से काफी जलती है।

रिया ने आन्या की महँगी फाइल को देखा और मुँह बनाकर बोली, "अरे वाह! कल इंटरव्यू के तुरंत बाद काम और  सीधे बॉस (Boss) के पर्सनल केबिन के बाहर सीट मिल गई? वैसे ज़्यादा खुश मत हो, विक्रांत सर जितने हैंडसम हैं, उतने ही कड़क और बेरहम भी हैं। यहाँ टिकना आसान नहीं है।"

​आन्या ने शालीनता से मुस्कुराकर कहा, "मैं यहाँ सिर्फ अपना काम करने आई हूँ।"

रिया के जाते ही वहाँ अमित नाम का एक अच्छा और सीधा-साधा एम्प्लॉई (Employee) आया। उसने आन्या को धीरे से सचेत करते हुए कहा, "रिया की बातों का बुरा मत मानना आन्या। वह बस जलती है। लेकिन हाँ, एक बात सच है... बॉस के बारे में ऑफिस में कई अजीब अफवाहें हैं। कोई नहीं जानता कि वह कब आते हैं, कब जाते हैं और उनकी पर्सनल लाइफ क्या है। उनसे थोड़ा संभलकर रहना।"

​अमित की बात सुनकर आन्या के मन में फिर से सस्पेंस जाग उठा।

​देखते ही देखते शाम के पाँच बज गए। ऑफिस की छुट्टी का वक्त हो गया था। सभी एम्प्लॉइज़ (Employees) अपना सामान समेटकर घर जाने की तैयारी करने लगे। आन्या ने भी राहत की साँस ली और अपना बैग (Bag) उठाने ही वाली थी कि तभी उसके टेबल का इंटरकॉम फोन (Intercom Phone) बज उठा।

"आन्या, तुरंत अंदर आओ," विक्रांत की भारी आवाज़ गूँजी।


आन्या केबिन के अंदर गई। विक्रांत अपनी चेयर (Chair) पर बैठा हुआ था। उसकी सफेद शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले थे, जिससे वह बेहद हॉट(Hot) और हैंडसम( Handsome)लग रहा था।


"जी सर?" आन्या ने पूछा।

विक्रांत ने एक बहुत बड़ी फाइल उसकी तरफ बढ़ाई और कहा, "इस प्रोजेक्ट (Project) के सारे डाटा (Data) को री-चेक करो। आज रात मुझे यह हर हाल में चाहिए।"


​आन्या ने घबराकर घड़ी देखी, "लेकिन सर, पाँच बज चुके हैं और ऑफिस का टाइम..."


"शाम के पाँच बजने से काम खत्म नहीं होता, आन्या," विक्रांत ने कड़क आवाज़ में उसकी बात बीच में ही काट दी। उसने अपनी गहरी, नशीली आँखें सीधे आन्या के चेहरे पर टिका दीं। असल में सच तो यह था कि विक्रांत के पास कोई ज़रूरी काम नहीं था, वह बस कल रात की उस अधूरी मुलाकात के बाद आन्या को पल भर के लिए भी अपनी नज़रों से दूर नहीं करना चाहता था। उसकी दीवानगी साफ़ झलक रही थी, "तुम्हारे कॉन्ट्रैक्ट (Contract) में साफ लिखा है कि काम के सिलसिले में तुम्हें रुकना पड़ेगा। क्या तुम दूसरे ही दिन मना कर रही हो?"


आन्या के पास कोई रास्ता नहीं था। उसने भारी मन से सिर हिलाया, "ठीक है सर।"


रात के आठ बज चुके थे। पूरा ऑफिस खाली हो चुका था। हर तरफ सन्नाटा था और सिर्फ आन्या की डेस्क की लाइट जल रही थी। आन्या लगातार कंप्यूटर पर काम कर रही थी कि अचानक पूरे ऑफिस की लाइट चली गई!


हर तरफ घना अंधेरा छा गया। कल रात का डर आन्या के दिल में वापस लौट आया। वह घबराकर अपनी सीट से खड़ी हुई, "हैलो... कोई है? गार्ड?"


तभी अंधेरे में उसे किसी के कदमों की आवाज़ सुनाई दी। कोई बहुत धीरे-धीरे उसके करीब आ रहा था। आन्या डर के मारे पीछे हटने लगी और उसका पैर टेबल से टकरा गया। वह गिरने ही वाली थी कि तभी अंधेरे में दो मज़बूत और गर्म हाथों ने उसकी कमर को कसकर पकड़ लिया।

​आन्या की आँखें डर और हैरानी से फैल गईं। वह कोई और नहीं, बल्कि विक्रांत सहगल था।

अंधेरे में दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब थे। आन्या की छाती तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी और उसकी साँसें सीधे विक्रांत के गले से टकरा रही थीं। विक्रांत का शरीर इस वक्त बहुत गर्म था, बिल्कुल कल रात की तरह। उसकी मर्दानी और तीखी खुशबू आन्या के दिमाग को सुन्न कर रही थी।

​"डरने की ज़रूरत नहीं है, आन्या। जब तक मैं यहाँ हूँ, तुम्हें कोई छू भी नहीं सकता," विक्रांत ने लगभग फुसफुसाते हुए कहा। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी दीवानगी (Obsession) थी।


​आन्या का दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि उसे लगा विक्रांत उसकी धड़कनें साफ सुन रहा है। अंधेरे के उस सन्नाटे में विक्रांत की वो मज़बूत पकड़ और उसके करीब होने का अहसास आन्या को अंदर तक बेचैन कर रहा था। आन्या को कुछ समझ नहीं आ रहा था; वह चाहकर भी खुद को रोक नहीं पा रही थी और धीरे-धीरे विक्रांत की तरफ खिंची चली जा रही थी। वह बस इसी सोच में डूबी थी कि उसके दिल में बॉस के लिए ये कैसा खिंचाव है और विक्रांत की आँखों में उसके लिए ये कैसी गहरी दीवानगी है।

​तभी, अचानक ऑफिस की लाइट्स वापस आ गईं।

​चकाचौंध रोशनी होते ही विक्रांत ने तुरंत आन्या को छोड़ दिया और दो कदम पीछे हट गया। उसका चेहरा फिर से पहले की तरह कड़क और प्रोफेशनल (Professional) हो चुका था, मानो अभी कुछ हुआ ही न हो।


"लाइट आ गई है। अपना काम जल्दी खत्म करो, गाड़ी नीचे खड़ी है, वह तुम्हें घर छोड़ देगी," विक्रांत ने ठंडे लहजे में कहा और मुड़कर अपने केबिन में चला गया।


​आन्या वहीं खड़ी रह गई। उसकी उंगलियाँ अभी भी काँप रही थीं। वह अपनी कमर पर विक्रांत के हाथों के अहसास को भूल नहीं पा रही थी।


दोस्तों, विक्रांत ने आन्या को बहाने से रात को ऑफिस में रोक तो लिया, और अंधेरे में दोनों के बीच का यह तीखा खिंचाव उनके दिलों में आग लगा रहा है! आन्या चाहकर भी विक्रांत की तरफ बढ़ने वाले अपने कदमों को रोक नहीं पा रही है।लेकिन विक्रांत के दिल में आखिर क्या चल रहा है? क्या आन्या इस खिंचाव को संभाल पाएगी?

​जानने के लिए पढ़ते रहिये: "द बिलियनयर वेयरवोल्फ्स ऑब्सेशन" (The Billionaire Werewolf's Obsession)